काश यदि बादल बनकर मै,
आसमान मे उड़ पाता।
दूर गगन मे चंदा के संग,
उड़ता बन कर लघु भ्राता॥
तारे झिलमिल-झिलमिल करते,
"छेड़" उन्हे जताता मै।
अग्रज मेरा नभ का राजा,
प्रजा उन्हे बताता मै॥
मेघ खड़े सेवा मे रहते,
मेरी मर्जी जल बरसाते।
कभी उड़े शिखरों के उपर,
कभी दूर गगन खो जाते॥
रोक रास्ता धरती तक का,
सूर्य किरण से टकराता।
काश यदि बादल बनकर मै,
आसमान मे उड़ पाता॥
प्यासी धरती "कातर"मन से,
जब जब मुझे निहारा करती।
संगी साथी बादल मेरे,
नीर गिरा आंचल भर जाती॥
नदी सरोवर अठखेली कर,
लहर हिलोरें बनवाते।
कश्ती नीचे उपर नीचे,
नाविक का मन भरमाते॥
धमा चौकड़ी,मौज परस्ती
घनघोर घटा,घट मे घर लाता।
काश यदि बादल बनकर मै,
आसमान मे उड़ पाता।
उड़ा कभी मेघ ले जाते,
चुन्नु-मुन्नू के घर ऊपर।
और कभी "शाला" दिखलाते,
गाँव गली चौबारों पर॥
और कभी घने जंगलों,
मोर मनोहर नाच दिखाती।
मेढक टर्र-टर्र कर गाते,
कोयल मस्ती राग सुनाती॥
संगी साथी,पहन धवल वस्त्र,
रत्न सितारे जड़ लाता।
काश यदि बादल बनकर मै,
आसमान मे उड़ पाता॥
बीच गगन मे उड़े पतंग जो,
डोर तोड़ हवा हो जाती।
बच्चे भागे पतंग के पीछे,
पतंग घूम, गोते खाती॥
रंग विरंगे तारों जैसी,
उड़े पतंग आकशों मे।
हरी बैगनी लाल गुलाबी,
रंग वसे हर श्वासों में॥
पतंग दिखाती सपने ऊँचे,
बुलंद इरादे धरो मन मे।
धागा संदेश ये देता,
जुडों धरातल जीवन मे॥
विजय सहगल




2 टिप्पणियां:
बहुत सुन्दर
काश यदि बादल बनकर में, आसमान में उड़ पाता.... बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति, आपकी हिंदी तो उत्कृष्ट है ही। बधाई...By Sh. Kulbir ji on whatsap
Sehgal sir
Though my hindi is not perfect but I had read the poem
I would like you to write stories etc so that common Indian understand perfectly
Regards and best wishes
Anil Dhawan on whatsapp
सच में आप बहुत अच्छे कवि भी हो। सहज भाव व सरल शब्दों वाली बहुत अच्छी कविता कही है आपने।
अगर आपकी कविता अच्छी नहीं लगी होती तो मैं कहता कविराजा कविता के मत अब कान मरोड़ो धंधे की कोई बात करो कुछ पैसे जोड़ो।
By S L KHATTRI on whatsapp
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