"चाँदी बागड़ी"
14.01.2020 दोपहर मे जब मै अपने घर से मेघदूतम पार्क मे
भ्रमण के लिये निकला तो कानों मे ईयर फोन लगा कर विविध भारती से "एसएमएस के
बहाने वीवीएस के तराने" सुनते हुए मस्ती मे पार्क की ओर बढ़ रहा था। मै प्रायः
घूमते हुए विविध भारती या एफ़एम गोल्ड रेडियो स्टेशन सुनने का आदि हूँ। रेडियो पर
निसफिकरी से पुराने फिल्मी गाने सुनते हुए
घूमने का जो आनंद है उसे शब्दों मे ब्याँ करना नामुमकिन है इसे तो सिर्फ और सिर्फ महशूस
किया जा सकता है। पार्क तक पहुँचने बाली ये लगभग 200 मीटर लंबी सड़क मुख्य सड़क न
होने के कारण प्रायः शांत रहती है और इस पर वाहनों का यातायात न के बराबर है। इसी
सड़क पर एक नवीन हाउसिंग सोसाइटी निर्माणाधीन है जिसका पिछला भाग इस सड़क पर होने के
कारण मजदूरों, इंजिनियरों और अन्य तकनीकी कारीगरों का आना जाना लगा रहता है जो इस
सोसाईटी के निर्माण कार्यों मे संलग्न है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा निर्देशों के कारण सड़क पर साफ सफाई और पानी के
छिड़काव भी लगातार होता रहता है ताकि धूल आदि कम
से कम उड़े। पिछले दिनों जब मै घूमने जा रहा था तो एक नौजवान को उस सड़क पर
झाड़ूँ लगाते देखा। पहले भी वह झाड़ू लगाता रहा
हो उस पर कभी ध्यान नहीं दिया। ये नित्य का क्रम कब से था पता नहीं। पर कुछ दिन
पहले जब मै पार्क मे जा रहा था तो महसूस किया कि उस नौजवान ने लगभग मेरे दस कदम पहले झाड़ू लगाना रोक कर और जब तक मै उसके पास से दस-बारह कदम आगे नहीं पहुंचा उसने झाड़ूँ लगाना रोके रखा।
मैंने थोड़ा बढ्ने के बाद इस व्यवहार को
महसूस किया लेकिन बहुत ज्यादा अहमियत उस सफाई करने बाले नौजवान के इस कृत
को हमने नहीं दी और न ही उसके इस व्यवहार को महसूस किया। पर आज जब मै फिर दोपहर की इस गुनगुनी धूप का
आनंद लेते हुए और विविध भारती के गानों को सुनते हुए अपनी धुन मे आगे बढ़ा जा रहा था।
हम सर्दीली हवाओं से जैकिट और मफ़लर पहन कर
खुद को बचाते हुए और गानों को सुनते हुए आज भी अपनी
मस्ती और धुन मे उस सफाई वाले के व्यवहार को नज़रअंदाज़ करते हुए आगे बढ़ गया। पर
अचानक मुझे उस लड़के द्वारा झाड़ू से सफाई
को तब तक रोके रखने का अहसास हुआ तब तक मै उसके पास से 15-20 कदम आगे बढ़ गया था।
मैंने पीछे मुड़ कर देखा वह सफाई कर्मचारी अनासक्त भाव से अपने काम मे लिप्त था।
मेरे कदम लगातार पार्क की ओर बढ़े चले पर न जाने क्यों मेरा मन अधीर हुआ और आतुरता
बस पुनः मै उसी सड़क पर बापस उस सफाई बाले नौजवान की तरफ चलने लगा ताकि सफाई कर्मचारी के उस सद् व्यवहार
को पुनः कसौटी पर कसा जा सके?? पर बापसी मे उस नौजवान का
व्यवहार बैसा ही था, जिसे मैंने अभी आते वक्त या एक दिन पहले
भी अनुभव किया था। उसने झाड़ू लगाना तब तक रोके रखा जब तक मै कुछ कदम दूर नहीं चला गया।
ऐसा नहीं कि उसने यह व्यवहार सिर्फ मेरे साथ
ही किया हो बल्कि उसने वहाँ से आ या जा रहे हर पैदल व्यक्ति के लिये उसका व्यवहार
समान था।
अब
तक मैंने उस नौ जवान सफाई बाले के पास पहुँच कर उससे से हाथ मिला कर अपने उद्विग्न मन को शांत किया और उस सफाई बाले लड़के से उसका नाम पूंछा। अचानक उस नवयुवक
से हाथ मिलाने और नाम पूंछने पर वह कुछ
चौंका उसे शायद अचानक से किसी अजनवी से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। मैंने
जब उसे लोगो के साथ उसके द्वारा किये जा रहे व्यवहार की तरफ ध्यानकर्षण कर उसकी
प्रशंसा की तो उसने उसे नम्रता और सहजता से लिया। उसने अपना नाम चाँदी बांगड़ी
बताया। मैंने बांगड़ी को गले लगा कर उसके लोगो के साथ इस सद्व्यवहार की तारीफ की और
उसे अपने इस मानवीय व्यवहार को बनाये रखने की अपील की और ईश्वर से चाँदी को
शुभाशीष प्रदान करने की प्रार्थना की।
चाँदी बागड़ी जैसे युवक अपने कार्य के जितनी
ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण से मानवीय
संवेदना को ध्यान रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते है जो उस संस्थान के लिये
एक प्रशंसनीय कार्य है। उसके इस कर्तव्य
कर्म की जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है। चाँदी बागड़ी के इस व्यवहार से इतना तो तय है किसी भी संस्थान की
सफलता मे उच्चासीन पदों पर बैठे लोगो की तो बड़ी ज़िम्मेदारी बनती ही है पर छोटे कर्मचारी भी अपने मानवीय व्यवहार और चरित्र
से संस्थान की गरिमा को ऊँचे उठाने मे किसी से पीछे नहीं रहते इसे आज चाँदी बागड़ी जैसे
सफाई कर्मी ने पुनः सिद्ध किया।
विजय सहगल

1 टिप्पणी:
sahgal sahab anukarniya prashasniya
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