"कनॉट प्लेस"
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| फोटो -सीपी डायरी के सौजन्य से |
हर शहर
के किसी एक स्थान विशेष से उस शहर के
पहचान होती है या यूं कहे दोनों एक दूसरे के पूरक होते है। आगरा की पहचान
"ताज महल" से, कलकत्ता या हाबड़ा की पहचान गंगा नदी के उपर
कलकत्ता को हाबड़ा से जोड़ने बाले पुल "हाबड़ा ब्रिज" से, मुंबई की पहचान "गेट वे ऑफ इंडिया" से और ठीक उसी प्रकार नई
दिल्ली की पहचान "कनॉट प्लेस" से है
इसमे कुछ भी संशय नहीं है। "कनॉट प्लेस" को इसका नाम ब्रिटेन के शाही
परिवार के सदस्य ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था। इस मार्केट का डिजाइन डब्यू
एच निकोल और टॉर रसेल ने कनॉट प्लेस को लगभग
90 साल पहले बनाया
था"। (इसको पढ़ कर हमे सामान्य ज्ञान का पंडित मत समझ लेना ये तो गूगल
बाबा के सौजन्य से है) न केवल देश से बल्कि विदेशी सैलानी भी इन स्थानों पर कम से
कम एक बार सैर करने का अवसर नहीं छोड़ते। मै भी जब बचपन मे अपने पापा के साथ पहली बार
दिल्ली आया तो लाल किला, कुतुब मिनार के अलाबा कनॉट
प्लेस भी घूमने आया और आगे नौकरी मे आने के बाद विभागीय कार्य या प्रशिक्षण हेतु
दिल्ली आया तो हमेशा कोशिश रही कि कुछ समय निकाल कर कनॉट प्लेस घूमने का लोभ पूरा
कर सकूँ। जब जब भी दिल्ली आया तो कुछ समय कनॉट प्लेस मे अवश्य व्यतीत किया। जब
2015 मे हमे पता चला कि हमारी पदस्थपना दिल्ली हुई है वो भी कनॉट प्लेस मे तो जान
कर काफी प्रसन्नता हुई। इस प्रसन्नता को दिल्ली प्रवास मे हमने भरपूर जिया,
अनुभव किया और आनंद उठाया। दोपहर मे लंच के समय शुरू मे श्री विनय मल्होत्रा कनॉट
प्लेस भ्रमण मे हमारे सहचर हुआ करते थे। बाद मे बीच बीच मे हमारे कनॉट प्लेस भ्रमण
मे रमन कपूर, अतर सिंह तोमर,
विनोद जैन, समीर शरण,
आहुलवालिया जी, गोयल जी आनंद जी साथी भी कभी कभी जुड़ जया करते थे। हम लोग प्रायः आउटर सर्कल के ब्लॉक "एम"-"एन"
के बीच मूफली लेकर स्टटमेंट बिल्डिंग के सामने धूप सेंकते और लंच समय का भरपूर
आनंद उठाते। कनॉट प्लेस के इस आनंद को सेवानिव्रति तक हमने यादगार तरीके से जिया।
कनॉट
प्लेस के बारे मे मैंने कुछ रोचक जानकारी जो देखी सुनी जिसे मै आप सभी के साथ सांझा कर रहा हूँ। एक बार जब मै "ई"
ब्लॉक से "एच" ब्लॉक जाने के लिये रास्ता भटकने के कारण उल्टी दिशा मे
जाने की बजह से काफी देर से पहुंचा तभी हमने कनॉट प्लेस के ब्लॉक की रचना के बारे
मे गहराई से अध्यन एवं शोध किया। मैंने जाना कि कनॉट प्लेस दो वृत्ताकार आकृति के बीच बना है जिसे आउटर सर्कल और इन्नर सर्कल नाम से
जाना जाता है। इन्नर सर्कल मे छ: ब्लॉक बने है और इन के ठीक पीछे बाहरी सर्कल मे
भी छ: ब्लॉक अर्थात कुल 12 ब्लॉक कनॉट प्लेस मे बने है। दोनों वृत्तों के दोनों ओर सड़कों का निर्माण
किया गया है। बाहरी सड़क को आउटर सर्कल रोड या कनॉट सर्कस कहते है। हमे लगता है
कनॉट प्लेस के इस वृत्ताकार निर्माण जो कि
सर्कस के मुख्य रिंग या वृत्त के कारण इसे कनॉट सर्कस का भी नाम दिया गया हो।
दोनों वृत्त के बीच की सड़क को मिडिल सर्कल रोड और अंदर बाली सड़क को इन्नर
सर्कल रोड कहते है। अंदर के सर्कल मे रीगल टॉकीज के पास स्थित पंचकुइयां रोड के
सामने कनॉट प्लेस का "ए" ब्लॉक शुरू होता है। घड़ी की सुई की दिशा मे क्रमशः ब्लॉक "बी",
"सी", "डी",
"ई" और "एफ़", ब्लॉक पड़ते है। ठीक
इसी तरह बाहरी सर्कल मे क्रमश: ब्लॉक "जी",
"एच" है। "आई" और "जे"
ब्लॉक नहीं है,
इसके बाद घड़ी की सुइयों की दिशा मे अँग्रेजी शब्द माला के अनुसार "के",
"एल", "एम",
एवं "एन" ब्लॉक है। आम जन की सुविधा हेतु मिडिल सर्कल के हर ब्लॉक के
शुरू और अंत मे लेडिज और जैंट्स टॉइलेट दिल्ली प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराये गए है।
हर ब्लॉक के आउटर और इन्नर सर्कल मे एक
समान दो मंज़िला भवन बने है,
सफ़ेद ऊंचे गोल स्तंभों से व्यापारिक प्रतिष्ठान के बीच पूरे कनॉट प्लेस मे आम जन के आवागमन हेतु छत्त से ढके बराण्डे बने
है जो अपने विशेष स्थापत्य के कारण अनूठे और सुंदर प्रतीत लगते है। पूरे कनॉट
प्लेस के ये सफ़ेद ऊंचे स्तम्भ कनॉट प्लेस की अपनी एक विशिष्ट पहचान देते है। सर्कस जैसे अर्ध
वृत्त मे छूटी हुई जगह अर्थात ब्लॉक "ए"
और "एफ़" के बीच की जगह मे पालिका बाज़ार है। इस तरह समझने की दृष्टी से
हम कह सकते है कि "ए" ब्लॉक के पीछे "जी" ब्लॉक और इसी तरह "बी"
के पीछे "एच", "सी"
के पीछे "के", "डी"
के पीछे "एल" और "ई" के पीछे "एम" और "एफ़"
के पीछे "एन" ब्लॉक है तत्पश्चात पालिका बाज़ार का एरिया आता है। कनॉट
प्लेस वृत्ताकार मे बने होने के कारण ब्लॉक "ए" या "जी" से आप
सीधे ब्लॉक "एफ़" या "एन" ब्लॉक पहुँच सकते है। इन्नर सर्कल के
बीच मे बहुत बड़ा वृत्ताकार गोल ढलान बाला हरी घास का मैदान है जिसे सेंट्रल पार्क
कहते है जिसमे बैठ कर हमने कई बार श्री विनय मल्होत्रा जी के साथ कार्यालय समय के
बाद बैठ कर मूफली खाई और चाय पी और गपशप मे घंटों समय व्यतीत किया है। सेंट्रल
पार्क मे कहीं भी बैठ कर आपको पूरे कनॉट
प्लेस का बड़ा सुंदर और मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। अपने स्थापना के समय देश के
सबसे ऊंचे 207 फीट के तिरेंगे की एक अलग ही शान सेंट्रल पार्क,
कनॉट प्लेस नई दिल्ली दिखाई देती है।
एक
तथ्य ये भी है कि यातायात कनॉट प्लेस की
हर सर्कल की सड़क मे सिर्फ एक दिशा मे चलता है। जिसे समझना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा
आपका चालान दिल्ली पुलिस द्वारा किया जा
सकता है। दिशा और स्पीड के कारण मेरा भी एक बार चालन दिल्ली पुलिस द्वारा काटा जा चुका
है जिसके कारण 400/- का जुर्माना और
ड्राइविंग लाईसेंसे 2 महीने सस्पैंड की पेनल्टी हमारे उपर लग चुकी है। बाहरी सर्कल
की सड़क एवं इन्नर सर्कल का सड़क का यातायात क्लॉकवाइज़ दिशा (घड़ी
की सुइयों की दिशा मे) मे चलता है जबकि मिडिल सर्कल का यातायात घड़ी की सुइयों के
विपरीत अर्थात एंटि क्लॉक दिशा मे चलता है। हर दो ब्लॉक के बीच मे सड़क इन्नर सर्कल
को बाहरी सर्कल से जोड़ती है। हर दो ब्लॉक के बीच मे स्थित एक सड़क से आप इन्नर
सर्कल के अंदर की दिशा मे प्रवेश कर सकते है और उसके ठीक अगली सड़क से आप इन्नर सर्कल से बाहर निकल सकते
है। कनॉट प्लेस मे वाहन चालक को हर ज़ेब्रा
क्रोस्सिंग पर पैदल सड़क पार करने बालों को आवश्यक रूप से प्राथमिकता देना ही है
साथ ही साथ गाड़ी निर्धारित स्थान पर ही
पार्क करना है अन्यथा आप यातायात पुलिस
दिल्ली के निशाने पर हो सकते है। एक बात और
आउटर सर्कल के हर ब्लॉक के बीच से
पैदल यात्री मिडिल सर्कल रोड मे आ जा सकते है या इन्नर सर्कल के लिये शॉर्ट
कट के रास्ते आ जा सकते है। कनॉट प्लेस के
इन्नर सर्कल सबसे आकर्षक और भीड़ भाड़ बाला इलाका है जिसमे मे देश की नामी कम्पनियों के शो रूम होना
प्रतिष्ठा की बात है। जगह जगह पर्यटकों और
खरीद करने बाले ग्रहाकों को बैठने हेतु सीमेंट की बेंच पड़ी है जिन पर बैठ कर भी
लोग कनॉट प्लेस मे घूमने का आनंद उठाते है। कनॉट प्लेस मे इन्नर सर्कल के किसी भी ब्लॉक के चंद कदमों की दूरी पर मेट्रो
रेल के राजीव चौक स्टेशन पर आसानी से आया या जाया जा सकता है।
कनॉट
प्लेस की इन सुनहरी एवं यादगार पलों को हमने लगभग तीन साल संजीदगी से जिया है जो
आज भी हमारे मानस पटल पर अमित छाप की तरह जीवित है।
विजय
सहगल




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