सोमवार, 7 अक्टूबर 2019

सीनियर डी सी एम- रेखा शर्मा, रेल मण्डल कार्यालय मुरादाबाद की शिकायत।






श्रीमान रेल मंत्री,                                  06.10.2019
रेल मन्त्रालय
नई दिल्ली।

महोदय,
विषय :  सीनियर डी सी एम- रेखा शर्मा, मण्डल कार्यालय मुरादाबाद  की शिकायत। 
संदर्भ : 12583 आनंद विहार टर्मीनल एसी डबल डेकर एक्सप्रेस, का कटघर
        (मुरादाबाद), पर डिरेलमेंट दुर्घटना  दिनांक 6 अक्टोबर 2019.


उपर्युक्त विषय मे हम आपका ध्यान ट्रेन की दुर्घटना पर रेल विभाग के सीनियर डी सी एम एवं अन्य स्टाफ द्वारा यात्रियो के साथ अमानवीय, गैर जिम्मेदारान और अदयालू  व्यवहार की तरफ ध्यानाकर्षित कराना चाहते हैं जिसमे दुर्भाग्य से मै यात्रा कर रहा था। मेरे कोच का नंबर सी-5 तथा सीट नंबर 26-27 था। मेरा पीएनआर संख्या 2102135057 हैं। मुरादाबाद से 4-5 किमी पूर्व अचानक ट्रेन मे तेज आवाज आने लगी एवं ट्रेन के कोच के नीचे से तीव्र धूल के गुबार, पत्थर उछलने के साथ तेज डरावनी आवाज आने लगी, सारे यात्री तीखी आवाज से सहम कर दर गये। सौभाग्य से ट्रेन की गति धीमी थी क्योंकि रेल लाइन के किनारे मजदूर काम कर रहे थे। उक्त आवाज और धूल के गुबार को देख कर सारे मजदूर ट्रेन से डर कर  दूर भागे। हम सभी यात्री भी अति चिंतित हो ईश्वर का लाख लाख शुक्रिया अदा कर रहे थे कि आज उन सबकी जान बच गई। रेल की धीमी गति की बजह से बड़ी दुर्घटना होने से बच गई। ट्रेन की गति थमने पर बहुतेरे यात्री भगवान का धन्यवाद करते हुए ट्रेन से उतरे और देखा सी-5 डिब्बे के अगले दोनों पहिये रेल की पटरी से उतर कर कंक्रीट के स्लीपर चल रहे थे। चूंकि मुरादाबाद स्टेशन 2-3 किमी दूर था अतः रेल विभाग के कुछ अधिकारी समय रहते दुर्घटना स्थल पर पहुँच गये। लगभग 30-40 मिनिट मे राहत गाड़ी भी पहुँच गई। हम सभी ट्रेन के इस दुर्घटना के कारणो मे न जाकर अपने बचने के  सौभाग्य को सराहते रहे। पर रेल विभाग के उच्च अधिकारी सीनियर डी सी एम के कुप्रबंधन से काफी हताश एवं निराश हुए। उक्त अधिकारी मेडम के अनिर्णय पूर्ण व्यवहार से यात्रियों को काफी मानसिक एवं शारीरिक यातना झेलनी पड़ी। मै मानता हूँ की ट्रेन की उंक्त दुर्घटना मे तकनीकि राहत गाड़ी सही समय पर पहुँच कर अपना कार्य करना शुरू कर दिया था। पर यात्रियों का ध्यान सही ढंग से नहीं रखा गया। आधे से ज्यादा यात्री रेल लाइन के किनारे आवासीय घरों के साथ लगी सड़क के रास्ते पूंछताछ कर बस पकड़ने के लिए निकल गये क्योंकि 30-40 मिनिट तक यात्रियों के गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था के बारे मे कोई सूचना यात्रियों को नहीं दी गई। इसके बाद सी4 कोच के आगे के यात्रियों को कहा गया कि वे सभी कोच नंबर सी1 से सी4 कोच मे पहुँच जाये क्योंकि उक्त चार कोच ही  मुरादाबाद स्टेशन तक जाएंगे, जहां से आनंदविहर जाने का कोई प्रबंध किया जाएगा। हम अन्य यात्रियों के साथ डबल डेकर ट्रेन मे   सी5 डिब्बे से बार बार नीचे ऊपर चढ़ते-उतरते जैसे-तैसे सी1 डिब्बे मे पहुंचे। इसी बीच कुछ अधिकारियों ने कहा दुर्घटना स्थल के पास सड़क से बस आनंदविहर जायेगी हम अन्य यात्रियों के साथ अपने सी1 कोच से उतरकर जैसे ही बगल की रेल लाइन पार कर सड़क पार जाने के लिये बढ़े दुर्घटना ग्रस्त ट्रेन के इंजिन ने चार वोगीओ के साथ चलने का हॉर्न दिया तब हम तुरंत पुनः वापस  अपने डिब्बे की ओर भाग कर ट्रेन मे चढ़े ताकि आगे मुरादाबाद स्टेशन पहुँच सके। इस आपा धापी मे हम जैसे वरिष्ठ नागरिक का थक कर बुरा हाल हो चुका था। जैसे तैसे रेंग-रेंग कर ट्रेन मुरादाबाद स्टेशन पहुंची तो प्लेटफॉर्म पार घोषणा की जा रही थी कि डबलडेकर ट्रेन के यात्रियो के लिये प्लेटफॉर्म नंबर 1 के बाहर से आनंदविहर के लिये बस उपलब्ध है वे सभी प्लेटफॉर्म नंबर 1 के बाहर पहुंचे। इसी बीच 15-20 कुली जो लाल वर्दी मे थे और राहत ट्रेन से यात्रियो की सहायता के लिये आये थे और दुर्घटना ग्रस्त ट्रेन के चार डिब्बों मे हम यात्रियो के साथ सवार थे। हमे बताया गया कि ये कुली यात्रियो का समान प्लेटफॉर्म नंबर 1 के बाहर खड़ी बस मे पहुंचाएंगे परन्तू उन्होने पैसे लेकर ही यात्रियो का सामान प्लेटफॉर्म नंबर 1 के बाहर तक पहुंचाया या बगैर यात्रियो की सहायता किये यूं ही खड़े रहे। रेल विभाग का कुप्रबंधन पुनः एकबार फिर देखने को मिला। प्लेटफॉर्म नंबर 1 के बाहर मात्र एक बस खड़ी थी जिसमे पहले से ही 50-60 यात्री बैठे थे और बस के बाहर इंतजार मे लगभग 140-150 यात्री इंतजार मे खड़े थे। बस भी साधारण क्लास की थी। कोई एसी नहीं था। लगभग आधा घंटे तक न तो खड़ी बस चली और न ही दूसरी बस आयी। तमाम यात्री जिसमे बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग प्लेटफॉर्म नंबर 1 के बाहर धूप मे बस के इंतजार मे 30-40 मिनिट यूं ही  खड़े रहे कि तभी पुनः बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन अपने चार डिब्बों के साथ ही आनंदविहर तक जायेगी। अब पुनः सभी यात्री प्लेटफॉर्म नंबर 1 के बाहर से प्लेटफॉर्म नंबर 5 की ओर  लपके। यहाँ भी विभाग द्वारा बुलाये कुली गायब थे। हम सभी यात्रियो के साथ दौड़ते हाफते पुनः प्लेटफॉर्म नं 5 की ओर भागते गये। किसी तरह कुछ नौजवानों की सहायता लेकर हम पुनः सी1 डिब्बे मे पहुंचे। इससे बीच दौड़-भाग मे रेल विभाग के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी ने एक बूंद पानी को भी नहीं पूंछा। हमने देखा सीनियर डी सी एम महोदया कोच नंबर 4 के सामने अपना दरबार लगाए खड़ी थी। इस दरबार मे लगभग 50 पुलिस के नौजवान उनके एक तरफ खड़े थे तथा दूसरी तरफ 40-50 सफ़ेद ड्रेस मे अधिकारी, कर्मचारी एवं कुली, अधीनस्थ स्टाफ खड़ा था। जब मैंने उन अधिकारी महोदया से उनके कुप्रबंधन के बारे मे कहा और उनके द्वारा यात्रियो के साथ किए जा रहा मज़ाक एवं अपमान जनक शारीरिक कष्ट की ओर दिलाया तो उनके चापलूस अधिकारी कर्मचारी बीच बचाव को आ गये। हमने उन अधिकारी महोदया से उनके पास खड़े 80-90 स्टाफ को खड़े औचित्य पार सवाल किये और इस स्टाफ को यात्रियों की सहायता न करने की शिकायत की और कुलियो द्वारा यात्रियो की  सामान न ढोकर कोई सहायता न करने की शिकायत की।  किन्तु दुर्भाग्य अन्य स्टाफ द्वारा "सोर्री" बोल कर अपने अधिकारियों की नज़रों मे अच्छा बनने और good book मे आने की चाह ज्यादा नज़र आयी। इस पूरे घटना क्रम मे रेल विभाग द्वारा चाय, स्वल्पाहार तो दूर पानी के लिये भी नहीं पूंछा गया।
मेरा आपसे अनुरोध है कि यध्यपि दुर्घटना बड़ी थी लेकिन धीमी गति एवं ईश्वर की कृपा से बड़ी दुर्घटना होने से बच गई पर सीनियर डीसीएम रेखा शर्मा एवं अन्य स्टाफ के छोटी सी  व्यवस्था के कुप्रबंधन के कारण हम यात्रियो को हुई शारीरिक एवं मानसिक कष्ट एवं उक्त अधिकारी महोदया एवं अन्य संबन्धित स्टाफ द्वारा व्यवस्था के कुप्रबंधन के लिये सख्त कार्यवाही करे ताकि उक्त चापलूस स्टाफ भविष्य मे आपात स्थिति मे ऐसा गैरजिम्मेदारान व्यवहार न करे।

भवदीय

विजय सहगल
ग्वालियर


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