"सूर्य
नमस्कार"
जो
हैं जगत का पालन हारा।
फैला
के जग को उजियारा॥
करते
तिमिर का शमन है।
ॐ
मित्राय को नमन हैं॥
भोर
की वो लालिमा।
प्रतीक
प्रातः अरुणिमा॥
कलरव
पक्षियों का गमन हैं।
ॐ
रवेय को नमन हैं॥
मेघ
का घर वेध कर।
किरण
फूटी तेज धर॥
घुप्प
अंधेरे मे छुपि,
उम्मीद की वो इक किरण है।
ॐ
सूर्याय
को नमन हैं॥
जगत
सोने सा सजा।
अक्षय
अलौकिक ऊर्जा॥
"गति"
जीव की अक्षय अमन हैं।
ॐ
भानवे को नमन हैं॥
चरम
पर जब तेज पुंज।
जगत
तब निस्तेज शुन्य॥
अति
ऊष्मा का परिवहन हैं।
ॐ
खगाय को नमन हैं॥
अस्तान्चल
का कदम पहला।
जीव
नभ मे "पर" फैला॥
चहुं
ओर करता भ्रमन हैं।
ॐ
पूष्णे को नमन है॥
सांझ
के पहले का नीरव।
फिर
परिंदों का कलरव॥
इंगित
घरौंदों को गमन हैं।
ॐ
हिर्णयगर्भाय नमन हैं॥
गायों
के अल्हड़ ये बछड़ें।
रंभा
कर फिर मिले- बिछुड़े॥
गौधूलि
वेला स्मरन हैं।
ॐ
मरीचये नमन है॥
नदी
का ये बहना निर्झर।
सप्त
रंगी धनुष बनकर॥
धनुष
बीच फिर, भूमि-रन हैं॥
ॐ
आदित्याय नमन है॥
हिम
से आच्छादित ये चोटी।
किरने
सुनहरी कोटि-कोटि॥
चोटी
पर भंडार स्वर्न है॥
ॐ
सवित्रे को नमन है॥
सागर
की अपार जलनिधि।
विखेर
आभा अनंत चहुदिशि॥
लहरों
पर बहता कांचन है।
ॐ
अर्काय को नमन है॥
नयी
ऊर्जा, आभा, तेज
से।
फिर
उदय कल, नये वेग से॥
गिर
कर उठना, पुनरागमन है।
ॐ
भास्कराय को नमन हैं॥
विजय
सहगल

1 टिप्पणी:
बहुत अच्छा।
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