बुधवार, 29 मई 2019

SURYA NAMASKAR


"सूर्य नमस्कार"




जो हैं जगत का पालन हारा।
फैला के जग को उजियारा॥
करते तिमिर का शमन है।
ॐ मित्राय को नमन हैं॥

भोर की वो लालिमा।
प्रतीक प्रातः अरुणिमा॥
कलरव पक्षियों का गमन हैं।
ॐ रवेय को नमन हैं॥
    
मेघ का घर वेध कर।
किरण फूटी तेज धर॥
घुप्प अंधेरे मे छुपि,
उम्मीद  की वो इक किरण है। 
  सूर्याय  को   नमन  हैं॥

जगत सोने सा सजा।
अक्षय अलौकिक ऊर्जा॥
"गति" जीव की अक्षय अमन हैं।
 भानवे  को  नमन  हैं॥  

चरम पर जब तेज पुंज।
जगत तब निस्तेज शुन्य॥   
अति ऊष्मा का परिवहन हैं।
ॐ खगाय को नमन हैं॥

अस्तान्चल का कदम पहला।
जीव नभ मे "पर" फैला॥
चहुं ओर करता भ्रमन हैं।
ॐ पूष्णे को नमन है॥

सांझ के पहले का नीरव।  
फिर परिंदों का कलरव॥
इंगित घरौंदों को  गमन हैं।  
ॐ हिर्णयगर्भाय नमन हैं॥

गायों के अल्हड़ ये बछड़ें।
रंभा कर फिर मिले- बिछुड़े॥
गौधूलि वेला स्मरन हैं।
ॐ मरीचये नमन है॥

नदी का ये बहना निर्झर।
सप्त रंगी धनुष बनकर॥
धनुष बीच फिर, भूमि-रन हैं॥
ॐ आदित्याय नमन है॥

हिम से आच्छादित ये चोटी।
किरने  सुनहरी  कोटि-कोटि॥
चोटी पर  भंडार  स्वर्न है॥ 
ॐ सवित्रे को नमन है॥

सागर की अपार  जलनिधि।
विखेर आभा अनंत चहुदिशि॥
लहरों पर बहता कांचन है।
ॐ अर्काय को नमन है॥
   
नयी ऊर्जा, आभा,  तेज से।
फिर उदय कल, नये वेग से॥
गिर कर उठना, पुनरागमन है।
ॐ भास्कराय  को नमन हैं॥

विजय सहगल
    







1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

बहुत अच्छा।