शनिवार, 4 मई 2019

रेल गाड़ी


रेल गाड़ी




छुक छुक करती रेल गाड़ी।
शोर मचाती रेल गाड़ी॥
घर से जब स्टेशन आया।
लाइन लगा कर टिकिट कटाया॥
स्टेशन पर रेल खड़ी थी।
भीड़-भाड़, आवाज बड़ी थी॥
गर्म समोसे कोई बेंचे।  
बड़ा पाव संग मिर्ची खेंचे॥
पूड़ी-सब्जी, गर्म कढ़ाई।
मुसाफिरों ने जी भर खाई॥ 
गर्मा-गरम चाय चढ़ी थी।
रेल भी, जाने-तैयार खड़ी थी॥ 
नल को देख पानी को दौड़े।
लोटे ज्यादा, पानी थोड़े॥
सीटी देकर धुआँ उड़ाती, आगे बढ़ती रेल गाड़ी।
छुक छुक करती रेल गाड़ी, शोर मचाती रेल गाड़ी।।  

सफेद ड्रेस में गार्ड जी आते।
लाल-हरी झंडी दिखलाते॥
काली ड्रेस में टी.सी. आता।
टिकट चैक कर अकड़ दिखाता॥  
लाल ड्रेस के कुली बुलाते।
हम सब का सामान उठाते॥
इंजन आया डिब्बा आया।
डिब्बे में सामान चढ़ाया।।
झंडी हरी दिखा कर रेल, धीरे-धीरे बढ़ी अगाड़ी। 
छुक छुक करती रेल गाड़ी, शोर मचाती रेल गाड़ी॥   

बच्चों के संग नाना-नानी।
खिड़की पर इनकी मन-मानी॥
ताक-झांक कर देखे  इंजन।
खम्बे-खेत, पेड़ मनोरंजन॥
धरा घूमती, चक्कर खाती।
आँखे बंद, रेल उल्टी जाती॥
रेल किनारे बच्चे खेलें ।
हाथ हिला कर" टाटा" बोलें॥
सन्न से गुजरी  मेल गाड़ी।
छुक छुक करती रेल गाड़ी,
शोर मचाती रेल गाड़ी॥

पटरी कभी पास मे आती।
कभी दूर आवाज़ लगाती॥
हंसी ठिठोली खिल्लम-खिल्ली।
पहुँच गये थे अब हम दिल्ली॥ 
मामा-मामी दिये दिखाई। 
खिड़की से आवाज लगाई॥  
मामाजी का नौकर आया।
डिब्बे से सामान उठाया॥
खत्म हुई थी खेल गाड़ी।
छुक छुक करती रेल गाड़ी,
शोर मचाती रेल गाड़ी॥

विजय सहगल

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