बुधवार, 29 मई 2019
SURYA NAMASKAR
शुक्रवार, 24 मई 2019
बसई
सोमवार, 20 मई 2019
खोया बचपन
गुरुवार, 16 मई 2019
जीवन की कश्ती
भंवर मे फ़सी कश्ती, भगवान तुम उबारो।
बुधवार, 8 मई 2019
KHADAGPUR, खड़गपुर
कभी कभी कुछ यात्राएं कुछ खास बन जाती हैं जिसे
भुलाया जाना कभी मुमकिन नहीं होता। 20 मई 1991 का दिन मुझे अच्छी तरह याद हैं।
शायद यात्रा की शुरुआत कुछ अच्छी नहीं रही थी। उस दिन हम अपनी पत्नी और बेटे के साथ जग्गनाथ पुरी की
तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे। उत्कल एक्स्प्रेस मे झाँसी से हमारा आरक्षण था। रात को 08-09 के बीच का समय था, इस ट्रेन
का झाँसी से चलने का। लगभग 40 घंटे की यात्रा थी तो हमने सोचा कुछ समय पास करने का
समान जैसे लूडो या साँप सीढ़ी ले ली जाये, ये सोच
कर मैं अपने 4 साल के बेटे के साथ प्लेटफॉर्म पर स्थित दुकान या ठेले की खोज करने
लगा इसी बीच कोई अन्य ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आ गई और बेटा का हाथ छूट
गया वह भीड़ मे कहीं आगे पीछे हो गया। मैं बापस पत्नी के पास पहुंचा कि शायद बेटा
वहाँ पहुँच गया होगा, पर जब वो वहाँ नहीं पहुंचा तो मैं घबड़ा कर चिंतित हो गया कि इस भीड़ मे उसे कैसे तलाश करें। गाड़ी भी जो
सामने खड़ी थी, 5-7 मिनिट मे छूट जायेगी, यदि बेटा गाड़ी पर कही चढ़ गया तो मामला गंभीर हो सकता था। जो
कुछ भी करना था तुरत-फुरत करना था। मैंने बगैर कुछ सोचे समझे बेटे का नाम
लेकर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए आगे से पीछे प्लेट फॉर्म पर भागना शुरू किया! अपने
गृह नगर मे होते हुए भी अपने आपको इतना असहाय, निसक्त
और कमजोर, अकेला कभी नहीं पाया था। भाग्य कुछ अच्छा था एक
फौजी सिपाही बेटे को लेकर हमे तलाश कर रहा था। मेरी आवाज सुन कर बेटे ने हमे देख
लिया था। वह फौजी सज्जन वास्तव मे भगवान के रूप मे सहायता करने साक्षात आ
गये थे। वे भी चिन्तित थे कि बच्चे के पेरेंट सामने खड़ी ट्रेन के अंदर हैं
या प्लेटफॉर्म पर हैं। मैं उनका पूरी तरह धन्यवाद भी नहीं दे पाया उनका नाम या
परिचय भी नहीं पूंछ सका कि सामने खड़ी गाड़ी चल दी और वह फौजी सज्जन जो उसी गाड़ी से
यात्रा कर रहे थे अपनी गाड़ी मे चढ़ गये। मैं आज भी उस अंजान-अनाम फौजी को याद करता
हूँ जिसे हम अच्छी तरह कृतज्ञता भी नहीं प्रकट कर सके थे?
कुछ देर बाद हमारी ट्रेन आयी हम लोग अपनी
सीट पर पहुँच कर बैठ गये परंतु सारी रात इस घटना को याद कर हम चैन से सो न सके।
अगले दिन सुबह हम बिलासपुर पर जब जागे तो चाय नाश्ता कर कुछ सहज़ और सामान्य हुए पर
घटना रह रह कर याद आती रही। यात्रा जारी रही। 21 मई की शाम को खाना खाकर, थक कर हम लोग सो गये बैसे भी यात्रा मे खाने और सोने के अलावा कोई
काम तो रहता नहीं। रात के ऐसा लगा कि गाड़ी बड़ी देर से कहीं खड़ी हैं। हमारा
रिज़र्वेशन सेकंड वातानुकूलित डिब्बे मे था, सोच कर
कि कुछ तकनीकि मामला होगा अपने आप चल पड़ेगी पुनः सो गये। बहुत सुबह 4-5 के
बीच जब एसी बंद हो गया तो मेरे सहित अन्य यात्री भी उठ गये कि क्या मामला हैं गाड़ी
क्यों कई घंटे से एक ही स्टेशन पर खड़ी हैं। डिब्बे के बाहर आए तो पता चला खड़गपुर
स्टेशन पर गाड़ी 5-6 घंटे से खड़ी हैं। जब कुछ यात्रियों ने आपस मे पूंछ-ताछ की तो
पता चला तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की हत्या तमिल उग्रवादियों द्वारा
चेन्नई के पास रात मे कर दी गई हैं। काँग्रेस द्वारा अखिल भारतीय बंद का आह्वान के
कारण ऐतिहातन सभी गाड़ियों को रोक दिया गया हैं। खड़गपुर काफी बड़ा जंक्शन है वहाँ भी
12-15 गाड़ियों को अलग अलग प्लेटफॉर्म पर रोक दिया गया था। अब तक सुबह 8 का समय हो रहा था। प्लेटफॉर्म पर चाय की तलाश की पर
कही भी चाय नहीं मिली। हजारों यात्री थे चाय की कमी हो गई। जो भी चाय वाला जैसे
तैसे चाय लेकर आता लेने बालों की लंबी लाइन लग जाती। हम टहलते हुए मुख्य कैंटीन पर
पहुंचे तो लाइन मे लगकर जैसे तैसे चाय मिली। बेटे के लिये दूध का तो इंतजाम किसी
भी कीमत पर नहीं हुआ। उसको भी चाय पिला कर तसल्ली दी। अबतक 9 बजे से उपर टाइम हो
गया था। नाश्ते का भी कोई इंतजाम नहीं दिखाई दे रहा था। इस समय तक पीने का पानी भी
समाप्त हो रहा था। ठंडे पानी के लिये लंबी लाइन देख कर एक स्टाल पर बिक रही बर्फ
खरीदी जिससे कुछ ठंडा पानी बनाया। हर जगह खाने की खोज कर रहे यात्री यहाँ
वहाँ परेशान नज़र आ रहे थे। ट्रेन के इंजिन के सामने काँग्रेस का झण्डा हर गाड़ी के
सामने लगा हुआ था। कुछ काँग्रेसी कार्यकर्ता नारे बाजी करते हुए, कुछ इंजिन के उपर और कुछ रेल लाइन पर इंजिन के सामने खड़े होकर समाचार
पत्रों के लिये फोटो खिचवा रहे थे, अपने
नेता के प्रति सम्मान करते हुए अपनी वफादारी प्रकट कर रहे थे पर परेशान हो रहे
हजारों बच्चों, स्त्री-पुरुष के प्रति उन की कोई सहानुभूति नज़र
नहीं आ रही थी। ये तो भारतीय सांस्कृति या सभ्यता की अच्छाई हैं कि अपने साथ कुछ
बना बनाया नाश्ता या सूखा खाना लेकर चलते हैं ऐसे समय बो नाश्ता बड़े कम आया।
सभी सहयात्रियों ने आपस मे एक दूसरे का सहयोग किया, किसी भी तरह नाश्ता का जुगाड़ तो हो गया।
अब कैंटीन मे खाने कि लंबी लंबी लाइन नज़र आ रही
थी। रेल तंत्र की आंखे भी धीरे खुल रही थी। लेकिन इसी बीच एक उम्मीद की एक किरण
आरएसएस के कार्यकर्ताओं एवं स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता के
रूप मे नज़र आई, शहर मे कुछ खबर पहुँच गई थी कि खड़गपुर स्टेशन पर
हजारों यात्री खाने-पीने के लिये परेशान हो रहे हैं। आरएसएस के इन स्वयं सेवकों और
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकरताओं ने निशुल्क चाय-विस्कुट, टोस्ट एवं पानी का वितरण शुरू कर दिया था। कुछ लोग बच्चों के लिये
दूध का इंतजाम भी कर रहे थे, फल का वितरण भी कुछ छोटे स्तर पर हो रहा था।
आरएसएस के कार्यकर्ताओं एवं स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता द्वारा चाय, नाश्ते के वितरण से स्थिति काफी कुछ सामान्य हो गई
थी। दोपहर मे पूड़ी सब्जी की आपूर्ति से खाने संबंधी समस्या तो दूर हो गई थी।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उन कार्यकर्ताओं और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के
प्रति हमारा परिवार सहित सभी यात्री अपनी कृतज्ञता प्रकट कर उन लोगो की
भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे थे। लगभग 24 घंटे के बाद हमारी गाड़ी आगे गंतव्य पुरी के
लिये प्रस्थान की। श्री राजीव गांधी की निर्मम हत्या पर हम सभी शोक मग्न थे, पर क्या खड़गपुर या देश के अन्य भागों मे काँग्रेस के स्थानीय नेताओं
या कार्यकर्ताओं के दिल मे अपने स्वर्गीय नेता के प्रति जो आदर सम्मान था उस के एकांश आदर-सम्मान
भी उस दिन हजारों हजार परेशान हो रहे बच्चे, बूढ़े महिला-पुरुषों के प्रति नहीं होना चाहिये था?? केरल मे आई बाढ़, अभी हाल
ही मे उड़ीशा मे आए चक्रवाती तूफान मे या 22 मई 1991 मे अखिल भारतीय बंद मे देश के
अन्य शहरों या खड़गपुर मे आरएसएस हमेशा आम जन की सहायता, बगैर जातीय या धार्मिक भेदभाव के करने
के लिये तत्पर रहा हैं। क्या कभी ऐसा संभव हो पाएगा जब काँग्रेस पार्टी के
कार्यकर्ता या इनके सेवा दल के कार्यकर्ता आम जनता के दुख: दर्द को अपना दुख:-दर्द समझ कर राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के सेवकों या स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ
इंडिया के कार्यकर्ता की तरह आम जनता की सेवा के लिये तन-मन से आगे आएंगे??????????
विजय सहगल
शनिवार, 4 मई 2019
रेल गाड़ी
छुक छुक करती रेल गाड़ी।






