"हमारी
अमरनाथ यात्रा -2018"
श्री
अमरनाथ यात्रा का विचार अप्रैल 2018 मे सेवानिव्रति पश्चात हमने हमारे मित्र श्री यशवीर सिंह के साथ सांझा किया, जिसे उन्होने सहर्ष स्वीकार करने पर हमलोगो ने अमरनाथ यात्रा की तैयारी
मई मे ही शुरू कर दी। मेडिकल सर्टिफिकेट पर्मिट, टिकिट, होटल आदि की बूकिंग के साथ 29 जून को नई दिल्ली से श्रीनगर की यात्रा
शुरू हुई। दोनों परिवारों के मन मे एक उत्साह व उमंग था। ग्वालियर की तेज गर्मी से छुटकारा मिला और श्रीनगर मे
वर्षात की ठंडी फुहारो के साथ एक सुखद
शुरुआत हुई। ऐसा मानना है की अमरनाथ यात्रा के पूर्व श्रीनगर मे शंकराचार्य मंदिर के दर्शन आवश्यक
है, हम लोगो ने वर्षात मे मंदिर की कठिन सीढ़ियों चढ़ते हुए मंदिर मे दर्शन किए। डलझील, चश्मे शाही और परीमहल देखने के पश्चात 30 जून को हमलोगे ने श्रीनगर से लगभग
90 किलोमीटर दूर पहलगाम की ओर प्रस्थान किया । प्रात: 6 बजे 20-25 किमी. चलने के बाद भी रास्ते मे जब एक भी सुरक्षा बल का जवान नहीं मिला तो मन मे कुछ अनिष्ट की आशंका हुई और हमने ड्राईवर से कहा की टीवी समाचरों मे तो हर कदम पर कहा जा रहा था की सुरक्षा के कड़े इंतजाम है पर यहाँ तो एक भी सुरक्षा बल का जवान या अन्य वाहन आदि आते या जाते नहीं दिख रहे है? शायद आप गलत रास्ते पर है? उसका मोबाइल पर जो गूगल मेप सेट था उसको लगभग मैंने ले कर देखा तो बह सोनमर्ग पर सेट था। तब गुस्सा आना लाज़मी था । ड्राईवर ने बताया कि टूर ऑपरेटर ने आपलोगो को सोनमार्ग के रास्ते अमरनाथ जाने के लिया बताया। पुनः पहलगाम के लिये रास्ते पूंछते हुए हम लोग बापस श्रीनगर होते हुए पहलगाम के रास्ते पर आये। एकवारगी हमे पिछले साल गुजरात की बस पर हुए आतंकवादी हमले की याद कर सिहर गए जो रास्ते भटकने की बजह से हमले का शिकार हुई थी। भगवान शिव की कृपा थी की हम लोग सही रास्ते पर आ गये। श्रीनगर से पहलगाम के रास्ते मे सुरक्षा के प्रबंध बहुत ही कड़े थे। हाइवे पर हर 40-50 मीटर पर CRPF केई जवान राइफल्स से सुसज्जित थे। तेज वर्षात मे भी अपनी ड्यूटि मे मुस्तैद हर यात्री को सुरक्षा का अहसास दिला रहे थे। लगभग 40 किमी. के बाद हमे मेन हाइवे छोड़ अनंतनाग की ओर बढ़ना था जो कि आतंकबाद प्रभावित जिला है। उस रास्ते मे भी CRPF के जवान हर 20-30 मीटर की दूरी पर पहरा दे रहे थे। हमे वास्तव मे लगा की हम श्रीअमरनाथ जी की तीर्थयात्रा तो कर ही रहे थे पर ये यात्रा फौज के जवानों की कर्मठता, उनकी बहदुरी और उनके त्याग की कहानी वयां कर रही थी। जवानो के प्रति सम्मान से हमारा सर नतमस्तक था। एक ओर जहाँ सेना और CRPF के जवानों की सुरक्षा के बिना यात्रा वर्तमान मे संभव नहीं हो सकती थी वही दूसरी ओर हमे जवानों के साथ अपने आप पर भी फ़क्र था की हम उस अहसास को भी मजबूत कर रहे थे कि कन्याकुमारी से कश्मीर हमारा है। अमरनाथ यात्रा वास्तव मे तीर्थयात्रा के साथ देशयात्रा है जो ये अहसास कराती है की कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है । हम लोग 30 जून 2018 को प्रत: 10 बजे पहलगाम पहुंचे। मौसम की ख़राबी एवं हिमालयन हेलीकाप्टर सर्विस की कुव्यवस्था की बजह से हम 3 जुलाई 2018 को प्रत: 9 बजे पहलगाम से पंजतरणी पहुंचे। यहाँ भी भरी बारिश के बीच लगभग 5-6 किमी. की यात्रा घोड़े से शुरू की। यात्रा मार्ग ऊबड़ खाबड़ पत्थरों और कीचड़ से भरा हुआ था। यहाँ एक बार फिर यात्रा के रास्ते पर पहाड़ों के ऊपर फौज और सीआरपीएफ़ के जवानों की कड़ी निगरानी देखते ही बनती थी। ग्लेशियरो को पार करते हुए हम यात्रा मार्ग पर बढ़ रहे थे। यहाँ यात्रा मार्ग काफी शकरा है। घोड़ों, पालकी बालों की बजह से पैदल यात्रियों को इस मौसम मे काफी कठनाई है। प्रशासन को पैदल यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखना चाहिए। लगभग 2 घंटे की घोड़ा यात्रा के पश्चात हम लोग सारी कठिनाइयो को पार करते हुए अमरनाथ पहुंचे। बर्फानी बाबा अभी भी हम से 1 किमी. दूर थे। इन हालातो मे हमलोगो ने पालकी की सेवाए ली और अमरनाथ जी की गुफा की तरफ प्रस्थान किया। जांच आदि के बाद अब हम उस मुकाम से चंद क़दमो की दूरी पर थे जिसका हमे दो माह से इंतजार था। लंबी लाइन मे हम भोले नाथ जी के दर्शन हेतु लग गये। आखिर बो पल आ गया जब हम बर्फानी बाबा के सामने थे। अदभुद दृश्य था लगभग 12-13 फुट ऊंचा प्रकृतिक विशाल हिम शिव लिंग बहुत बड़ी गुफा मे विध्यमान था । पास मे ही अन्य शिव परिवार साक्षात गुफा मे विराजमान था। हर हर भोले के जयकारों के बीच हमे आगे बढ़ना था ताकि अन्य श्रद्धालूँ दर्शन के लिये आ सके। दर्शन के पश्चात जब श्रीमती जी ने पूंछा की आपने भोले नाथ से क्या मांगा? तब हमे याद आया की हम तो कुछ भी मांगने से चूक गये!! हम तो उस द्र्श्य को देखने मे ही लीन रहे!!!! शायद बाबा भोले नाथ हमे कुछ मांगने के लिये दुवारा बुलाना चाह रहे हो।
90 किलोमीटर दूर पहलगाम की ओर प्रस्थान किया । प्रात: 6 बजे 20-25 किमी. चलने के बाद भी रास्ते मे जब एक भी सुरक्षा बल का जवान नहीं मिला तो मन मे कुछ अनिष्ट की आशंका हुई और हमने ड्राईवर से कहा की टीवी समाचरों मे तो हर कदम पर कहा जा रहा था की सुरक्षा के कड़े इंतजाम है पर यहाँ तो एक भी सुरक्षा बल का जवान या अन्य वाहन आदि आते या जाते नहीं दिख रहे है? शायद आप गलत रास्ते पर है? उसका मोबाइल पर जो गूगल मेप सेट था उसको लगभग मैंने ले कर देखा तो बह सोनमर्ग पर सेट था। तब गुस्सा आना लाज़मी था । ड्राईवर ने बताया कि टूर ऑपरेटर ने आपलोगो को सोनमार्ग के रास्ते अमरनाथ जाने के लिया बताया। पुनः पहलगाम के लिये रास्ते पूंछते हुए हम लोग बापस श्रीनगर होते हुए पहलगाम के रास्ते पर आये। एकवारगी हमे पिछले साल गुजरात की बस पर हुए आतंकवादी हमले की याद कर सिहर गए जो रास्ते भटकने की बजह से हमले का शिकार हुई थी। भगवान शिव की कृपा थी की हम लोग सही रास्ते पर आ गये। श्रीनगर से पहलगाम के रास्ते मे सुरक्षा के प्रबंध बहुत ही कड़े थे। हाइवे पर हर 40-50 मीटर पर CRPF केई जवान राइफल्स से सुसज्जित थे। तेज वर्षात मे भी अपनी ड्यूटि मे मुस्तैद हर यात्री को सुरक्षा का अहसास दिला रहे थे। लगभग 40 किमी. के बाद हमे मेन हाइवे छोड़ अनंतनाग की ओर बढ़ना था जो कि आतंकबाद प्रभावित जिला है। उस रास्ते मे भी CRPF के जवान हर 20-30 मीटर की दूरी पर पहरा दे रहे थे। हमे वास्तव मे लगा की हम श्रीअमरनाथ जी की तीर्थयात्रा तो कर ही रहे थे पर ये यात्रा फौज के जवानों की कर्मठता, उनकी बहदुरी और उनके त्याग की कहानी वयां कर रही थी। जवानो के प्रति सम्मान से हमारा सर नतमस्तक था। एक ओर जहाँ सेना और CRPF के जवानों की सुरक्षा के बिना यात्रा वर्तमान मे संभव नहीं हो सकती थी वही दूसरी ओर हमे जवानों के साथ अपने आप पर भी फ़क्र था की हम उस अहसास को भी मजबूत कर रहे थे कि कन्याकुमारी से कश्मीर हमारा है। अमरनाथ यात्रा वास्तव मे तीर्थयात्रा के साथ देशयात्रा है जो ये अहसास कराती है की कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है । हम लोग 30 जून 2018 को प्रत: 10 बजे पहलगाम पहुंचे। मौसम की ख़राबी एवं हिमालयन हेलीकाप्टर सर्विस की कुव्यवस्था की बजह से हम 3 जुलाई 2018 को प्रत: 9 बजे पहलगाम से पंजतरणी पहुंचे। यहाँ भी भरी बारिश के बीच लगभग 5-6 किमी. की यात्रा घोड़े से शुरू की। यात्रा मार्ग ऊबड़ खाबड़ पत्थरों और कीचड़ से भरा हुआ था। यहाँ एक बार फिर यात्रा के रास्ते पर पहाड़ों के ऊपर फौज और सीआरपीएफ़ के जवानों की कड़ी निगरानी देखते ही बनती थी। ग्लेशियरो को पार करते हुए हम यात्रा मार्ग पर बढ़ रहे थे। यहाँ यात्रा मार्ग काफी शकरा है। घोड़ों, पालकी बालों की बजह से पैदल यात्रियों को इस मौसम मे काफी कठनाई है। प्रशासन को पैदल यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखना चाहिए। लगभग 2 घंटे की घोड़ा यात्रा के पश्चात हम लोग सारी कठिनाइयो को पार करते हुए अमरनाथ पहुंचे। बर्फानी बाबा अभी भी हम से 1 किमी. दूर थे। इन हालातो मे हमलोगो ने पालकी की सेवाए ली और अमरनाथ जी की गुफा की तरफ प्रस्थान किया। जांच आदि के बाद अब हम उस मुकाम से चंद क़दमो की दूरी पर थे जिसका हमे दो माह से इंतजार था। लंबी लाइन मे हम भोले नाथ जी के दर्शन हेतु लग गये। आखिर बो पल आ गया जब हम बर्फानी बाबा के सामने थे। अदभुद दृश्य था लगभग 12-13 फुट ऊंचा प्रकृतिक विशाल हिम शिव लिंग बहुत बड़ी गुफा मे विध्यमान था । पास मे ही अन्य शिव परिवार साक्षात गुफा मे विराजमान था। हर हर भोले के जयकारों के बीच हमे आगे बढ़ना था ताकि अन्य श्रद्धालूँ दर्शन के लिये आ सके। दर्शन के पश्चात जब श्रीमती जी ने पूंछा की आपने भोले नाथ से क्या मांगा? तब हमे याद आया की हम तो कुछ भी मांगने से चूक गये!! हम तो उस द्र्श्य को देखने मे ही लीन रहे!!!! शायद बाबा भोले नाथ हमे कुछ मांगने के लिये दुवारा बुलाना चाह रहे हो।
बाबाबर्फानी के दर्शन के बाद हम लोग गुफा के
नीचे आ गए। नीचे जगह जगह देश के दूर दराज से आये भंडारो मे से एक मे हमने प्रसाद
ग्रहण किया । हमारी इक्छा थी की एक रात अमरनाथ मे रुकूँ पर लोगो ने सलाह दी की ऑक्सिजन
की कमी एवं मौसम की खराबी की बजह से रुकना
उचित नहीं होगा। शायद ठीक ही सलाह थी जैसे ही हम लोग घोड़े से आगे बड़े बरसात शुरू
हो गई थी। जैसे जैसे हम आगे बढ़ते गये मौसम ख़राब होता गया, वारिस तेज होती गई, तापमान अचानक काफी नीचे आ गया। लगातार भीगते हुए हम लोग 6 बजे लगभग बापस पंजतरणी पहुंचे। यशवीर जी की पत्नी सर्दी
से बेहाल थी। NDRF के लोगो ने तुरंत कंबल से उनको ढका एवं
गरम पानी एवं चाय दी लगभग आधा घंटे अपने टेंट मे बैठा के रखा। मेडिकल कैंप मे
डॉक्टर को दिखाया सबकुछ समान्य था जानकार हम चिन्तामुक्त हुए। रात मे पंचतरणी बेस
कैंप मे टेंट लिया चार कंबल एवं एक रज़ाई ओड़ने
के बबजूद हम सर्दी की बजह से एक मिनिट सो
नहीं सके। बेस कैंप मे रात मे सूचना प्रसारित की जा रही थी की यात्रा के मार्ग मे
भूस्खलन की बजह से रास्ता बंद कर दिया गया
है, ज्ञात हुआ की बाल्टाल मे हुई इस घटना मे 4-5 लोग हताहत
हो गये। यात्रा 4-5 जुलाई 2018 को पंजतरणी के आगे अमरनाथ जी के लिया बंद करदी गई।
हम लोग 4 जुलाई को पंजतरणी से पहलगाम होते हुए जम्मू के लिये प्रस्थान किया। रास्ते
मे चेनानी - नाशरी सुरंग जो लगभग 9 किमी. लंबी है हिंदुस्तान के विकास की एक मील
का पत्थर है। 10 घंटे की जम्मू यात्रा मे पूरे मार्ग मे विभिन्न संस्थाओं द्वारा
भंडारो के माध्यम से यात्रियों को तरह तरह के व्यंजन वितरित किए जा रहे थे, उनका सेवा भाव और प्रेम देखते ही बनता था। अंत मे ये उल्लेख करना आवश्यक
है कि अमरनाथ यात्रा आपकी द्रढ़निश्चय एवं उच्च ईक्षाशक्ति से ही पूरी हो सकती है
परंतु सेना/सीआरपीएफ़ के जवानों की बहादुरी
उनकी देश के प्रति सच्ची सेवा, लगन एवं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, लखनऊ, बदायूं और देश
के अन्य सैकड़ो धार्मिक भंडारो की सेवा भावनाओ के विना संभव नहीं हो सकती।
विजय सहगल,








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें