मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024

जलेबी फैक्ट्री

 

"जलेबी फैक्ट्री - भारत के आर्थिक विकास का मील का पत्थर?"






1 अक्टूबर 2024 का दिन भारत के  इतिहास मे स्वर्ण अक्षरों से लिखा जायेगा जब भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस के युवा हृदय सम्राट राहुल बाबा ने हरियाणा के गोहाना से देश को एक नई राह दिखा कर भारत के औध्योगिक विकास मे जलेबी फैक्ट्री के माध्यम से जलेबी मिठाई को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला कर, पचास हज़ार से भी ज्यादा  रोजगार प्रदान करने के मार्ग प्रशस्त किया। स्वतन्त्रता के बाद भारत के नीतिनियंताओं, योजना निर्माण कर्ताओं, नौकर शाहों की वही पुरानी, घिसी पिटी सोच से हठ कर एक नए रोजगार मूलक आविष्कार का सृजन को अपनी बहन प्रियंका गांधी के माध्यम से देश को सांझा करते हुए उन्होने कहा कि उन्होने ऐसी जलेबी ज़िंदगी मे पहली बार खायी  और एक डिब्बा प्रियंका के लिए लेकर आने का वादा  किया क्योकि अन्य भारतियों की तरह उसे जलेबी बहुत प्रिय है। उन्होने गोहाना के मातूराम हलवाई के मेहनत और खून पसीने की तारीफ करते हुए उसकी एक सौ कारीगरों की हलवाई की  दुकान को पचास हजार कर्मचारियों की बड़ी जलेबी फैक्ट्री मे परिवर्तित करने के अमूल्य सुझाव दिये जो उनकी वैज्ञानिक, विकासोन्मुख सोच को दर्शाता है। काश! स्वतंत्रता के बाद हमारे राजनेताओं की ऐसी दूरदृष्टि और उन्नत सोच होती, तो हम अमेरिका, चीन से भी आगे निकल, आज विश्व मे  नंबर एक की अर्थव्यवस्था, वर्षों पहले हो चुके होते? वास्तव मे इन प्रतिभासम्पन्न, प्रतिभावान, गुणवान और बुद्धिमान भाई-बहिन की, भारत के विकास के लिये,  कितना सुंदर रोड मैप हैं, कितनी उन्नतशील  नीतियाँ और कितने विकाशील कार्यक्रम हैं, प्रशंसा करे बिना नहीं रहा जा सकता!, एक चाय बेचने और बनाने वाला तो कभी सोच भी नहीं सकता। बैसे विडियो मे जब राहुल गांधी मातूराम की जलेबी को गोहाना से होते हुए पूरे देश और फिर अमेरिका, जापान के बाद दुनियाँ के अन्य देशों मे निर्यात की बात कर रहे तो मंच पर बैठे सांसद, दीपेन्द्र हुड्डा एवं अन्य लोगों की शक्ल देखने लायक थी, राहुल गांधी का जलेबी फैक्ट्री वाला ब्यान, गले की हड्डी की तरह न उगलते बन रहा था न निगलते!!    

राहुल गांधी ने, एक साधारण स्थानीय  जलेबी को देश मे हीं नहीं अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो  ख्याति दिलायी, उसको  देश कभी भूल नहीं सकता।    सैकड़ों सालों से देश मे जलेबी बनाने वाले हलवाई जो नहीं सोच सके, राहुल गांधी जैसे  नौजवान युवा नेता ने मिनटों मे जलेबी फैक्ट्री की सोच को विकसित कर, उसे कार्य रूप मे  परणित कर दिया!! धन्य है ऐसा देश और धन्य है ऐसी  धरा जिसने राहुल गांधी जैसे नौनिहाल को अपने मिट्टी के आगोश मे पाला पोषा  और बड़ा किया!! ऐसा प्रतीत होता हैं कि राहुल गांधी की प्रतिभा, ज्ञान और कौशल को विपक्षी दलों ने कम करके आँका, अन्यथा जलेबी की फैक्ट्री वाली उनकी सोच, उनकी प्रतिभा और ज्ञान के अनुसार तो, "होनहार बिरवान के होत  चीकने पात" वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे थे।    

जब गोहना जैसे छोटे से कस्बे मे  मगतू राम जैसे हलवाई की दुकान से जलेबी की फैक्ट्री स्थापित कर पचास हजार लोगो को रोजगार दिया जा सकता है तब  सारे उत्तर भारत मे स्थित हजारों लाखों जलेबी की दुकान से कितने व्यक्तियों को रोजगार दिया जा सकता है, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है? भारत के औध्योगिक विकास मे जलेबी निर्माण फैक्ट्री  की परिकल्पना एक महान वैज्ञानिक आविष्कार ही था, कहा नहीं जा सकता जलेबी फैक्ट्री खोज, इस वर्ष के आर्थिक विषय मे, नोबल पुरुस्कार के लिये न चुन लिया जाय? 

बहुत से गुणिजनों का कहना हैं और अन्य बहुत से श्रेष्ठी वर्ग का मानना है कि, राहुल जी को भारतीयता और जलेबी के बनाये जाने का  बुनियादी ज्ञान ही नहीं हैं? जलेबी तो हलवाई की दुकान पर गर्म-गर्म खाई जाती हैं, कभी फैक्ट्री मे नहीं बनाई जाती?  फिर उसको देश के कोने कोने या विदेशों मे कैसे निर्यात किया जा सकता हैं? उन माननीयों का कहना तो ठीक हैं पर ये साधारण सोच हैं,  राहुल गांधी  की सोच अत्यंत उच्च और आध्यात्मिक हैं। वे श्रीमद्भगवत गीता के जानकार हैं। तभी तो गीता के अध्याय 12 के श्लोक 18 को उद्धृत करते हुए उनका मानना हैं कि जिस तरह, शत्रु-मित्र, मान-अपमान, सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख मे हमे आसक्ति रहित और सम होना चाहिये, उसी तरह जलेबी को गर्म या ठंडा खाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता!!, फिर भले ही ठंडी जलेबी एक दिन, एक हफ्ते या एक माह बाद भी क्यों न खायी जाय?

इसी भाषण मे उन्होने मातूराम हलवाई की फैक्ट्री मे 50 हजार लोगो के रोजगार सृजन के पश्चात मोदी जी पर आरोप लगाया कि मोदी जी उसे लोन नहीं देंगे वे सारा लोन अंबानी और अडानी को देंगे। जैसे महाभारत मे अभिमन्यु को चक्रव्यूह मे फंसाया था बैसे मातूराम को नोटबंदी और जीएसटी के चक्रव्यूह मे फंसाया!! लेकिन लगता है गोहाना का मातूरम हलवाई, राहुल गांधी के जलेबी फैक्ट्री के झांसे मे नहीं फंसा अन्यथा उसकी गोहाना मे जो थोड़ी बहुत चल रही हलबाई की दुकान को जलेबी फैक्ट्री मे बदलने  मे बो हाल हो जाता जैसे, "धोबी का कुत्ता घर का न घाट का" ।       

राहुल गांधी के दिल मे देश के विकास के लिए नित नए नए आइडिया आते रहते हैं।  लोग उनके मसखरे पन  जैसे,  कभी आलू से सोना बनाने की यौजना, कभी राजस्थान की कुम्भ राम लिफ्ट इरीगेशन योजना को, कुंभकरण लिफ्ट इरीगेशन योजना बोलना, आटे को लीटर मे मापना,  कोका कोला कंपनी वाले को एक शिकंजी बेचने वाला बतलाना, मैकडॉनल्डस को ढाबा चलाने वाला, प्रधानमंत्री के बाहर जाने  को, प्रधानमंत्री बार मे जाते है बतलाना, उनकी प्रतिभा, ज्ञान, कौशल और शिक्षा के पराक्रम को दर्शाता है पर साधारण सोच के व्यक्ति को उनकी प्रतिभा, योग्यता को  समझ पाना कठिन ही नहीं असंभव है? बैसे जलेबी फैक्ट्री के बारे मे राहुल गांधी कितने गंभीर थे उनके उस आँख मारने के एक्शन से समझा जा सकता हैं जो  उन्होने संसद मे किया था, कुछ बैसा ही एक्शन उन्होने गोहाना की सभा मे भी, जलेबी की फैक्ट्री को उद्धृत करते हुए भी  किया। बड़ी कठिनाई के बाद उन दोनों फोटो को संलग्न कर रहे है।  लेकिन कॉंग्रेस मे हो रहे  चमत्कार को इस बात के लिये तो नमस्कार करना  ही पड़ेगा कि उसने  दुनियाँ की इस कहावत को झूठा सिद्ध कर दिया कि,  "काठ  की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती"।

विजय सहगल      

4 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

कांग्रेस का वर्णशंकर गधा ,कांग्रेस को डुबाकर ही मानेगा,,,

बेनामी ने कहा…

जलेबी की खेती में खाद डालना भूल गए
कीचड़ में चाशनी ज्यादा डाल दी तो कमल खिल गया

बेनामी ने कहा…

He is Oxford educated may be possible to produce Jalebi in factory. He thought Imarati as jalebi. Imarati is beings produced only it is needed to dip in chasni before eating.

बेनामी ने कहा…

यह वेवकूफ आदमी हरियाणा वालों को चूतिया बनाने निकला था । कभी किसानों के मुद्दों पर कभी अग्निवीर के मुद्दे पर कभी बेरोज़गारी के नाम पर । इसके गुरू सैम पित्रोदा वढ़ई ने इसे जलेबी वाली कहानी लिखकर भेज दी ।कांग्रेस हरियाणा में बहुत मेहनत कर रही थी पर इस नाशुक्र् की वेवकूफी भरी बातों ने हरियाणा के कांग्रेसियों का भी खून उबाल दिया । अब कांग्रेसी ही इसे हरियाणा में न घुसने देंगे ।