रविवार, 6 अक्टूबर 2024

हसन नसरल्ला की मौत-हिज्बुल्ला के अंत की शुरुआत?

हसन नसरल्ला की मौत-हिज्बुल्ला के अंत की शुरुआत?

 



जब शुक्रवार दिनांक 27 सितम्बर 2024 को इज़राइली  प्रधानमंत्री बेंजामिन  नेतनयाहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक को संबोधित करते हुए, ईरान को सख्त और साफ लहजे मे चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम हम पर हमला करोगे तो हम भी तुम पर हमला करेंगे, ईरान मे ऐसी कोई भी जगह नहीं हैं जो इज़राइली सेना की पहुँच से दूर हैं और ये बात  समस्त मध्य पूर्व का  भी सच है। मै एक और संदेश दे रहा हूँ कि हम (इज़राइल) निश्चित ही जीत रहे हैं!! यूएनओ के संबोधन के चंद घंटों के बाद ही इज़राइल ने एक सटीक  हवाई हमले मे अपने सबसे बड़े दुश्मनों मे से एक आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह को मार गिराया। न्ययार्क से ही अपनी सेना को हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह को मारने के, दिये आदेश की भनक अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन को भी नहीं लगी। इस हमले मे नसरल्लाह के  साथ उसके लगभग 100 अन्य साथी कम्मांडर भी इस अप्रत्याशित हमले मे बेमौत मारे गये। 64 वर्षीय लेबनानी नागरिक नसरल्लाह ने फरवरी 1992 से सितम्बर 2024 अर्थात अपनी हत्या तक शिया मुस्लिम राजनैतिक दल और आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह के महासचिव के रूप मे कार्य किया। 1982 मे जब इज़राइल ने लेबनान पर आक्रमण किया था तब ही हिज्बुल्लाह संगठन अस्तित्व मे आया। एक शिया मुस्लिम आतंकी गठन होने के कारण इसके प्रमुख  हसन नसरल्लाह पर अनेकों सुन्नी मुस्लिमों की हत्या के आरोप लगे हैं, यही कारण है कि सुन्नी बाहुल्य प्रमुख देश सऊदी अरब सहित अन्य सुन्नी शासक देशों ने नसरल्ला की मौत पर कोई प्रितिक्रिया नहीं दी।  इस घटना के  दो माह  पूर्व इज़राइल ने हमास आतंकी संगठन के प्रमुख इस्माइल हानिया को भी ठीक इसी तरह, ईरान स्थित उसके सुरक्षित ठिकाने पर एक मिसाइल हमले मे मार गिराया था। ईरान ने हर बार की तरह अपने पोषित आतंकी संगठन के मुखिया की हत्या पर इज़राइल से बदला लेने की कसमें तो  खाई पर कभी सीधे कार्यवाही नहीं की लेकिन इस बार उसने इज़राइल पर सीधा हमला करके मध्य पूर्व के क्षेत्र मे अशांति की शुरुआत तो कर ही दी है। भले ही इस विषय पर लोगों के वैचारिक मत भिन्नता हो सकती है लेकिन एक बात बिल्कुल स्पष्ट हैं कि दुनियाँ मे मात्र इज़राइल ही एक ऐसा देश हैं जिसने अपने दुश्मनों को दुनियाँ के किसी भी कोने से ढूंढ निकाल कर मौत के घाट उतार दिया। इज़राइली सेना का ईरान मे डर और दहशत का माहौल इस तरह हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई भी हिज्बुल्लाह प्रमुख नसरल्ला के हवाई हमले मे मारे जाने के बाद किसी अज्ञात और सुरक्षित ठिकाने पर चले गये, यूं भी ईरान के आंतरिक हालात इस समय अच्छे नहीं हैं और कभी भी ईरानी जनता मे अशांति और अंसन्तोष की चिनगारी भड़क सकती है।  यूं भी इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू पिछले दिनों ईरानी जनता को सीधे संभोधित करते हुए भड़काने की कोशिश की।  ईरानी सरकार की आलोचना करते हुए उन्होने कहा कि, ईरान को  अपनी जनता की बिल्कुल   भी चिंता नहीं, हम आपके साथ खड़े हैं, ईरान ने  बेवजह युद्ध मे पैसा खर्च कर अपने देश को आर्थिक संकट मे डाल दुनियाँ मे  अराजकता फैला रहा  है।   

मजबूत राजनैतिक इच्छा शक्ति के अभाव मे यमन, फिलिस्तीनी और लेबनान जैसे देश, दो पाटों के बीच घुन की तरह पिस रहे हैं।  इज़राइल मे अशांति फैलाने वाले देश, यमन मे हूति विद्रोहियों, लेबनान मे हिज्बुल्ला नामक दहशत गर्दों और फिलिस्तीन मे हमास जैसे आतंक वादियों को ईरान द्वारा पोषित और पराश्रय देने के कारण इन संगठनों ने अपने ही देश मे एक समानान्तर फौज खड़ी कर ली हैं। इन आतंकवादियों का एक मात्र मकसद इज़राइल के विरुद्ध सशस्त्र, हिंसक  संघर्ष कर उसके अस्तित्व को समाप्त करना हैं। इस हेतु शिया मुस्लिम बाहुल्य  ईरान सरकार, आर्थिक रूप से भरपूर सहायता दे रही हैं। हिज्बुल्लाह, हूति और हमास जैसे आतंकी संगठनों के कारण, कमजोर राजनैतिक इच्छा शक्ति के चलते यमन, लेबनान और फिलिस्तीन  देशों मे अशांति और अराजकता के चलते वहाँ के नागरिकों को आए दिन कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं और इज़राइली हमलों के कारण इन देशों के आम जनों को अपनी जान गवानी पड़ती हैं और अनेकों लोगो को अकारण घायल होने का संताप भुगतना पड़ता हैं।

एक बात तो तय है, शिया मुस्लिम बाहुल्य ईरान, इज़राइल से दुश्मनी की आड़ मे अपने हितों को साध रहा हैं और वह इज़राइल से स्वयं युद्ध न कर हिज्बुल्लाह, हमास और हूति जैसे आतंकियों को बलि का बकरा बना रहा है। इज़राइल के विरुद्ध संघर्ष मे न तो ईरान अपनी जमीन और न ही अपनी जनता को सीधे युद्ध मे धकेले बिना लेबनान, फिलिस्तीन और यमन के नौजवानों को शामिल करवा कर  सिर्फ अपने धन और संसाधनों का दुर्पयोग कर, दुनियाँ मे अशांति, अराजकता और उपद्रव करवाना चाहता हैं, इसका ही नतीजा हैं कि आतंकी संगठन हिज्बुल्ला के मुखिया नसरल्ला, हमास के प्रमुख  इस्माइल हानिया जैसे आतंकी और उनके सैकड़ों लड़ाके मारे जा चुके है। इसी क्रम मे इज़राइल का अब अगला लक्ष्य यमन के हूति विद्रोहियों को नेस्तनाबूद करना है और शीघ्र ही वह इस प्रयोजन को प्राप्त करने मे कामयाब भी हो सकता है।  

आज आवश्यकता इस बात की है कि संयुक्त राष्ट्र संघ को ईरान और इज़राइल के बीच इस विकराल होती, युद्ध रूपी समस्या मे तुरंत हस्तक्षेप कर शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने का प्रयास  चाहिये और अगले संभावित  विश्वयुद्ध को रोकने के सार्थक प्रयास करने चाहिये  अन्यथा दो भागों मे विभाजित हो रहे विश्व के लिये ये युद्ध, मानवता के विनाश का काला अध्याय साबित न हो।

 विजय सहगल         


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