रविवार, 18 सितंबर 2022

जाखू के हनुमान"-"शिमला

 

"जाखू के हनुमान"-"शिमला"








प्रायः जानकारी के अभाव मे पर्यटक ठगी और धोखाधड़ी के शिकार हो जाते है ऐसे ही कुछ हमारे साथ भी हुआ। 1 जून 2022 को शिमला के  रिज मैदान मे पीले गिरजाघर तक तो सब ठीक ठाक था। वहाँ से रिज मैदान से दिखाई देने वाली भगवान श्री हनुमान की विशाल नयनभिराम प्रतिमा के दर्शन करने का कार्यक्रम बना। हम परिवार सहित चर्च के बगल से जाखू मंदिर जाने वाले रास्ते के तरफ बड़े ही थे कि रास्ते मे टैक्सी गिरोह के झांसे मे आ गये। इन लोगो ने मारुति वेन से लगभग 2.0 किमी॰ दूर  जाखू मंदिर के दर्शन कराने हेतु 450/- रूपये मे प्रस्ताव दिया। यध्यपि जाखू मंदिर तक सरकार द्वारा नियंत्रित और संचालित "रोप वे" से भी जाने की सुविधा उपलब्ध थी। रोप वे चर्च से बहुत ज्यादा दूर नहीं था पर रोप वे और टैक्सी के किराये मे थोड़ा अंतर होने के कारण हम टैक्सी गिरोह के बहकावे मे आ गये। शिमला जैसे पहाड़ी क्षेत्र मे सड़कों की चढ़ाई, ऊंचाई ने उस स्थान  तक पहुँचने मे हमारी हालत खराब कर दी जहां पर टैक्सी खड़ी थी, तब रोप वे और टैक्सी के किराये का अंतर हमे समझ आया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। यही नहीं टैक्सी ने ऊपर जहां छोड़ा वहाँ से मंदिर तक तक पहुँचने वाली चढ़ाई ने एक बार फिर से हमारे हालत पस्त कर दिये! हमे एक बार फिर वो कहावत याद हो आयी, महँगा रोये एक बार, सस्ता रोये बार-बार!!

चलिये, इस घटना से मिले  सबक ले कर इस विषय को यहीं छोड़ आगे बढ़ते है। जाखू पर्वत मालाओं से घिरे शिमला मे स्थित जाखू मंदिर समुद्र तल से 2455 मीटर ऊंची शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित एक शानदार और रमणीक स्थान है। इसी पहाड़ी पर 108 फुट ऊंची भगवान श्री हनुमान की विशाल प्रतिमा आसमान को छूती नज़र आती है। ऐसी किवदंती है कि श्री लक्ष्मण जी को मूर्छित होने पर श्री हनुमान, हिमालय से  संजीवनी बूटी को लेने जाने के पूर्व  एक ऋषि से बूटी की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने हेतु बापसी मे पुनः रुकने के वचन के साथ  यहाँ शिमला की इस जाखू  पहाड़ी पर रुके थे। बापसी मे "कालनेमि राक्षस" के माया जाल मे उलझने के चलते देर होने के कारण हनुमान जी अपने वचन को कायम न रख सके, तब व्याकुल साधू को स्वयंभू प्रकट प्रतिमा के माध्यम से दर्शन दे उन्हे सांत्वना दी। वही स्वयंभू प्रकट प्रतिमा पर निर्मित अति आकर्षक भव्य प्राचीन जाखू मंदिर आज भी यहाँ स्थित है।    जाखू पहाड़ी की चोटी पर 108 फुट ऊंची भव्य  प्रतिमा भी कुछ वर्ष पूर्व निर्मित की गयी जो शिमला के लगभग हर क्षेत्र से दिखाई देती है और शिमला की एक भव्य पहचान बन गयी है।  इस  मंदिर मे स्थानीय और शिमला घूमने आए पर्यटक और  तीर्थ यात्री मंदिर के दर्शन लाभ हेतु मंदिर मे आते है।  जाखू पर्वत माला पर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के दुर्लभ दर्शन मन को कृत-कृत करने वाले थे। जहां श्री हनुमान हों वहाँ उनकी वानर सेना न हो ऐसा संभव ही नहीं!! पूरे जाखू पर्वत माला पर वानर सेना की उपस्थिती आपको हर जगह दृष्टिगोचर होगी। जगह जगह बंदरों से सावधान रहने के  सूचना पटल भी आपको दिखाई देते नज़र आएंगे विशेषकर चश्मा मोबाइल को सुरक्षित रखने की। लेकिन हमे इस तरह किसी भी कठिनाई से सामना नहीं हुआ।

प्राचीन मंदिर के दर्शन लाभ के पश्चात हम लोगो ने खुले आसमान मे आकाश को  छूती 108 फुट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन किये। इतनी  विशाल और आकर्षक प्रतिमा के दुर्लभ दर्शन मै अपनी ज़िंदगी मे पहली बार कर रहा था। श्री हनुमान की प्रितिमा  के मुखारविंद के दर्शन करते समय रामचरित मानस के  सुंदर कांड मे वर्णित चौपाई स्वतः ही स्मरण हो आयी जिसमे सुरसा नाम की राक्षसी के अभिमान को चूर करते हुए गोस्वामी तुलसी दास जी लिखते है कि:-

"जस जस सुरसा बदन बढ़ावा, तासु दून कपि रूप दिखावा।"

(जैसे जैसे "सुरसा" ने हनुमान जी को निगलने के लिये अपना मुंह बड़ा करती हनुमान जी भी अपने शरीर को दुगने आकार मे बढ़ाते गये) आज उसी की एक झलक जाखू की पहाड़ियों के बीच हनुमान जी की विशाल प्रितिमा को देख हुई। मूर्ति को बारम्बार प्रणाम कर भारतीय देव सांस्कृति के दिव्य संदेश "सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया....... के साथ   देश, समाज सहित विश्व के कल्याण की कामना की।  

भगवान के "चरण पद कमल"  के दर्शन भी अभिभूत करने वाले थे!! हनुमान जी की विशाल गदा संकेत थी आसुरी रावण के विनाश की जिसको  भगवान श्री कृष्ण ने  गीता के इस संदेश मे व्यक्त किया :-

परित्राणाय साधूनां, विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय, संभवामि युगे युगे।।4.8।।
अर्थात साधू पुरुषों की रक्षा के लिए, दुष्टों का विनाश करने के लिए, धर्म की अच्छी तरह स्थापना करने के लिए मै युग-युग मे प्रकट होता हूँ।

हम भारतियों मे फिल्मी सितारों की चका चौंध और  आकर्षण हर काल खंड और हर वर्ग मे रहा है जो दुनियाँ मे शायद ही कहीं देखने मे आता हो।  बड़े-बड़े परिपक्व राजनैतिज्ञ भी इस मोह पाश से अछूते न रहे!!  दुर्भाग्य!! से, इस फिल्मी आसक्ति की  मूढ़ता के दर्शन यहाँ भी हुए!!  यहाँ लगी  शिला पट्टिका के अनुसार  हिमाचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल एवं अभिषेक बच्चन, अभिनेता ने संयुक्त रूप से इस प्रतिमा का अनावरण किया। अभिनय की  कौन सी शूरवीरता दिखा कर और कौन सी कसौटी पर "कस" कर श्री अभिषेक को  प्रतिमा के अनावरण का सहभागी बनाया गया?, मेरे समझ से परे है?  इस विशाल मूर्ति के सामने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने के दौरान लगे शिला लेख से ज्ञात हुआ कि 108 फुट ऊंची प्रतिमा का प्रथम दर्शन 4 नवम्बर 2010, तदनुसार 19 कार्तिक संवत 2067 को हुए। (बैसे मै हिन्दू संवत कैलेंडर से ज्यादा भिज्ञ नहीं हूँ लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि शिला पट्टिका पर विक्रमी संवत को लिखने मे कुछ त्रुटि है, कृपया विद्वान गण इस पर प्रकाश डाले??)

जाखू पर्वत श्रंखला की सबसे ऊंची चोटी के चारों ओर शिमला शहर के दर्शन के प्राकृतिक दृश्यों को अपनी स्मृति मे सँजोये हम लोगो ने बापस रिज मैदान की ओर प्रस्थान किया क्योंकि अब तक सूरज भी धीरे धीरे अस्ताञ्चल की ओर अग्रसर हो प्रकाश की रश्मियों को अपने आगोश मे समेटे हुए बढ़ रहा था और शिमला के सितारों भरे आकाश के परे नीचे घाटी मे भी  चमकती बिजली की रोशनी मे नहाये एक नए आकाश का उदय हो रहा था।

विजय सहगल   

3 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

बहुत सुन्दर

बेनामी ने कहा…

बहुत सुन्दर
अजय अग्रवाल

बेनामी ने कहा…

Bahut sunder jaankari