रविवार, 11 सितंबर 2022

खिलौना रेल-शिमला

"खिलौना रेल-शिमला"








2 जून 2022 को यूं तो हमे शिमला से प्रस्थान कर रामपुर बुशहर के लिये प्रस्थान करना था। हम परिवार सहित आगे बढ़े ही थे कि एक छोटे से दिशा सूचक पटल पर शिमला रेल्वे स्टेशन जाने के मार्ग  को देख मैंने अपने बेटे से कार की दिशा शिमला रेल्वे स्टेशन मोड़ने के लिये कहा। क्योंकि शिमला की टोय ट्रेन एवं शिमला रेल्वे स्टेशन देखने की टीस मेरे मन मे थी। चूंकि अपनी कार से सफर करने के कारण कालका शिमला ट्रेन की यात्रा के  आनंद से वंचित रह जाने के कारण मैंने शिमला रेल्वे स्टेशन पर खड़ी 52456 हिमालयन क्वीन एक्स्प्रेस ट्रेन मे बैठ कुछ फोटोग्राफी कर उस यात्रा की कसर पूरी की। सुबह के लगभग 9.30 बजे थे मैदानी रेल स्टेशन के विपरीत स्टेशन का रास्ता पतला और संकरा था। सड़क के दोनों ओर कार पार्किंग थी जिसके बीच से बमुश्किल एक कार आ-जा सकती थी। गली के एक मुहाने पर जैसे तैसे कार को पार्क कर हम लोगो ने शिमला रेल स्टेशन के प्लैटफ़ॉर्म पर प्रवेश किया। एक छोटे से गलियारे से जब हम नीचे प्लैटफ़ॉर्म की ओर बड़े तो प्लैटफ़ॉर्म की साफ सफाई देखकर चकित रह गये। ऐसा, एक दम साफ सुथरा चमकदार रेल स्टेशन प्लैटफ़ॉर्म कम ही देखने को मिलता है।

छोटा सा मुख्य प्लैटफ़ॉर्म नंबर 1 पर बहुत ज्यादा गहमा गहमी नहीं थी। हम लोगो ने तय किया कि अब नाश्ता शिमला स्टेशन की कैंटीन मे ही ले लेना चाहिये क्योंकि सुबह के 9.30 बजने को थे। जितना स्टेशन और प्लैटफ़ॉर्म साफ सुथरा था रेल कैंटीन भी उतनी ही साफ-सफाई वाली थी। रेल कैंटीन मे आलू पराँठे का ऑर्डर दिया और कुछ ही मिनिट मे गरमा-गरम स्वादिष्ट आलू पराँठे हाजिर थे। कैंटीन ठेकेदार भी वरिष्ठ सज्जन श्री अग्रवाल जी थे जो किसी एक अन्य रेल यात्री से बातों मे मगन थे। स्वल्पाहार के दौरान उनके वार्तालाप से ज्ञात हुआ कि श्री अग्रवाल जी लखनऊ से 50 वर्ष पूर्व शिमला आकार वस गये। मैंने भी उनसे परिचय प्राप्त कर उनके स्वादिष्ट आलू पराँठे और अच्छी ग्राहक सेवा की प्रशंसा की।

चूंकि कालका शिमला की मनोहारी रेल यात्रा तो नहीं कर सके थे अतः नाश्ता-पानी से निर्वृत्त हो अब बारी थी कुछ बनावटी फोटो शूट की ताकि शिमला रेल स्टेशन के भ्रमण से ही कालका शिमला यात्रा का काम चलाया जाये। सुबह 10.40 बजे शिमला से चलने वाली 52456 हिमालयन क्वीन प्लैटफ़ॉर्म पर लग चुकी थी। गाड़ी के जाने मे अभी बहुत समय था अतः हमने सोचा कि ट्रेन की बोगी मे बैठ कर कुछ फोटो यादों के रूप मे सँजोयी जाये। फिर मन मे आया जब मुफ्त मे फोटो सँजोना है तो क्यों न प्रथम श्रेणी के डिब्बे मे यादें ताजा करें? पर खाली पड़े  प्रथम श्रेणी डिब्बे की फोटो निकाल,  ये सोच कर सामान्य श्रेणी के डिब्बे की तरफ बढ़ गये कि कहीं टी॰सी॰ महोदय से भेंट हो गयी तो उलाहना न देने  लगे कि वाह! भाई वाह!! फोकट मे प्रथम श्रेणी का मजा? सामान्य श्रेणी के डिब्बे मे परिवार सहित अभिनय का स्वांग  करते हुए  फोटो शूट किया। बड़ी रेल लाइन की ट्रेन को रोकने हेतु चैन प्रणाली की लाल चैन को खींचने से ट्रेन स्वतः ही रुक जया करती है बैसा यहाँ छोटी रेल लाइन मे कुछ  अलग देखने को मिला। इस खिलौना गाड़ी की आपात कालीन चेन बड़ी रेल लाइन की रेलों से अलग थी। इस ट्रेन को  आपात स्थिति मे रोकने के लिये इलैक्ट्रिक बैल का स्वीच, कुछ कुछ दूरी पर सीटों के बीच बोगी  मे लगाया गया  था। जिसको दबाने पर घंटी ट्रेन ड्राईवर के पास बजने के संकेत पर ड्राईवर ट्रेन को रोकेगा। इस आपात स्थिति कि चैन को देख आश्चर्य होना स्वाभाविक था। ट्रेन की साफ सफाई ने यहाँ भी मन मोह लिया।

तमाम आधुनिकता और तकनीकि विकास के बावजूद शिमला रेल का संचालन 1903 की तरह ही किया जा रहा था, जब शिमला मे पहली बार ट्रेन का संचालन शुरू हुआ था। चाहे इंजिन को रखने का शेड हो या छोटा सा चलता फिरता रेल इंजिन। रेल की पटरी बदल रेल को दूसरी दिशा मे ले जाने के लिये मानविक्रित लीवर का उपयोग पुराने जमाने की रेल की तरह शिमला रेल मे आज भी उपयोग मे लिया जा रहा है। रेल इंजिन की दिशा बदलने के लिये उपयोग मे लाये जा रहे सिस्टम को देखना कौतूहल का विषय था। गोलाकार रेल की पटरी पर बनाए गये घूमते प्लैटफ़ॉर्म पर रेल इंजिन को बीचों-बीच खड़ा कर मानवीय शक्ति के संचालन से अर्धवृत्ताकार दिशा मे 180 डिग्री पर घुमा कर दिशा बदलने बाले सिस्टम को  देखना सुखद आश्चर्य प्रदान करने वाला था। हो सकता है इस उपकरण को आप मे से बहुतों ने न देखा हो? जिसकी फोटो भी इस ब्लॉग मे आपको रोमांचित करेगी।   

सन 2018 मे इस शिमला स्टेशन को संयुक्त राष्ट्र शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा विश्व विरासत का दर्ज़ा दिया जाना शिमला ही नहीं देश के लिये बड़े गौरव की बात है। शिमला के इस स्टेशन का उत्तम प्रकार से रखरखाव कर अतीत के वैभव को बनाये रखने के रेल प्रशासन और उसके कर्मचारी, अधिकारी बधाई के पात्र है इस हेतु उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है।

विजय सहगल               


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