"विनाश
काले विपरीत बुद्धि"
पिछले दिनों नोएडा के एक अहंकारी,
अर्धसाक्षर, मूढ़ बुद्धि युवक कान्त
त्यागी के कुत्सित और अधम आचरण का वीडियो देखा। विडियो देख कर कान्त त्यागी का एक
महिला के साथ अमर्यादित आचरण और व्यवहार पूर्णतः निंदनीय,
आपत्तीजनक और भर्त्स्ना योग्य है। उक्त विडियो देख कर सभ्य समाज के किसी भी शांत और संयमित व्यक्ति को क्रोध आना स्वाभाविक
था। एक महिला के साथ कान्त त्यागी द्वारा किये अक्षम्य अपराध की जितनी भी निंदा और
भर्त्स्ना की जाये कम है।
उक्त विडियो का सोश्ल मीडिया पर प्रचारित और
प्रसारित होने पर समाज के सभी वर्ग मे कड़ी प्रितिक्रिया होना लाज़मी थी। चारों ओर
से शासन और सरकार की तीव्र निंदा और आलोचना ने नोएडा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सक्ते
मे ला दिया और तुरत फुरत ही पुलिस विभाग
को सक्रिय कार्यवाही करने लिये वाध्य होना पड़ा। नोएडा भारत मे ही नहीं विश्व मे
तेजी से विकसित हो रहे शहरों मे एक अलग स्थान रखता है। जहां अनेक देशी और विदेशी कंपनियों कार्यालय और सूचना प्रौधौगिकी सहित अनेकों
फ़ैक्ट्रीयां स्थित हों वहाँ की एक सभ्य,
प्रतिष्ठित रहवासी सोसाइटी मे पूर्वजों
द्वारा अर्जित कृषि योग्य भूमि/संपत्ति से प्राप्त धन के मद मे अंधे हुए कान्त
जैसे स्वच्छंद, निरंकुश युवक का उच्छ्रंखल व्यवहार ने सारे देश
को झकझोर दिया। इस घटना ने योगी आदित्य नाथ सरकार के सामने कुछ ऐसी ही चुनौती प्रस्तुत की जिसमे 2 जुलाई 2020 को कानपुर के बिकरू गाँव कांड मे
विकास दुबे ने गाँव मे दबिश डालने गयी पुलिस की टीम के 8 जवानों की बर्बरता पूर्वक
हत्या कर दी गयी थी। अपने एक मूर्खतापूर्ण कदम के कारण न केवल कान्त त्यागी जैसे
लोगो ने स्वयं अपनी थुक्का फजीती एवं जग हँसाई कराई अपितु अपनी पत्नी,
रिश्तेदार के सम्मान को पुलिसिया कार्यवाही मे अपमानित कराने का पाप भी किया फिर
किराये के गुंडों का गिरफ्तार होना तो लाज़मी था।
बगैर किसी राजनैतिक पूर्वाग्रह के कहना अतिशयोक्ति
न होगी कि 2 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तत्कालीन बिकरू गाँव की घटना
मे "विकास दुबे" की मुठभेड़ और हाल ही मे नोएडा के "कान्त
त्यागी" के विरुद्ध गेंगस्टर एक्ट जैसी सख्त और
कड़ी कार्यवाही से लोगो का भरोसा योगी
सरकार पर बढ़ा है। नोएडा मे भी सरकारी
बुलडोजर ने बगैर किसी भाषा, जाति-धर्म आदि
मे भेदभाव के कान्त त्यागी के अवैध निर्माण को ज़मींदोज़ कर दिया जिसकी प्रशंसा की ही
जानी ही चाहिये।
इस अर्धशिक्षित असंस्कारित युवक ने विना किसी श्रम और कठिन मेहनत के
पूर्वजों द्वारा अर्जित कृषि योग्य भूमि/संपत्ति की तिजारत के बल बूते झूठी शान और
छद्म राजनैतिक वर्चस्व की आभासी दुनियाँ मे
अति महत्वाकांक्षा को यदि अच्छे संस्कार
और शिक्षा से नियंत्रित किया होता तो
कदाचित ही ऐसे अपमान, तिरस्कार और
कलंकित दंड और सजा से न गुजरना पड़ता।
ऐसा नहीं कि कान्त त्यागी का ये उन्मत्त,
उपद्रवी व्यवहार एक दिन मे विकसित हुआ होगा? मित्रों की संगत,
सौवत और नजदीकी परिजनों और स्वजनों ने इसके बुरे और अनियंत्रित व्यवहार के लिये यदि
बचपन मे रोका और टोका होता तो आज शायद अपने,
अपने परिवार और रिश्तेदारों और भाड़े की टट्टुओं के साथ इतनी अपमानजनक स्थिति से न
गुजरना पड़ता।
लेकिन इस घटना और इस पर की गयी कार्यवाही ने
समाज और देश को बहुआयामी संदेश दिये है जिन पर आज हर वुद्धिजीवि को गंभीरता पूर्वक मंथन करने की आवश्यकता है।
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सर्वप्रथम तो उस बहादुर
महिला को शत शत नमन है जिसने कान्त त्यागी जैसे बदमाश के घर के अवैध निर्माण का चुनौतीपूर्ण
विरोध किया जबकि 6-8 कथित बॉडी गार्ड अर्थात भाड़े के गुंडे उसके विरोध मे खड़े थे।
इन असामाजिक तत्वों के सामने खड़े होकर उनका विरोध करना एक बहुत ही हिम्मत,
साहस और दिलेरी का काम था,
जिसे उस संभ्रांत सोसाइटी के मर्द भी न कर सके। इस हेतु वो महिला बधाई और सम्मान की पात्र है।
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सूचना क्रांति और सोश्ल
मीडिया की सकारात्मक ताकत का लोहा एक बार पुनः सिद्ध हो गया कि इस सूचना क्रांति
के मध्यम से किसी भी तानाशाह और बहुवली का विरोध परिमाण की दृष्टि से भारी से भारी तोप और बंदूकों पर भारी पड़ सकता
है जैसे के आज कल दिग्भ्रमित आमिर खान द्वारा फिल्म लाल सिंह चड्ढा के मामले मे
देखने को मिल रहा है।
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घटना के बाद सोसाइटी के
रहवासियों ने जिस एकता और संघठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन किया जो "काबले
तारीफ" है। संदेश स्पष्ट है कि एकजुट होकर हम किसी भी अतिवादी,
गुंडे या असामाजिक तत्व का विरोध करें तो परिणाम निश्चित तौर पर आपके पक्ष मे
होंगे।
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सोसाइटी के अलावा आज
आवश्यकता है गली मुहल्ले के 8-10 घर आपस मे संधि करें कि संकट के समय हम एकत्रित
होकर किसी भी आपराधिक या असामाजिक तत्वों के विरुद्ध संघठित होकर और कानून का
सहारा लेकर होकर लड़ेंगे। इसके लिये किसी बहुत बड़े भागीरथी प्रयास की जरूरत नहीं
है! आपके घर के 2-4 घर बाएँ, 2-4 दायें और
कुछ घर आपके सामने और पीछे होंगे उन के साथ मिल बैठ कर ऐसे संघठन तैयार करने की
आवश्यकता है बस अपने "अहम" को एक तरफ रखने की जरूरत है?
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उस सोसाइटी के रहवासी
समिति के सदस्यों को भी आत्मचिंतन और आत्मावलोकन करने की महती आवश्यकता है जो
सोसाइटी के हर कार्यक्रमों मे अपनी फोटो निकलवाने और मैगजीन मे छपवाने को आतुर
रहते है, पर सोसाइटी के ऐसे
विकृत मानसिकता के रहवासी के विरुद्ध समय रहते यदि वे कानूनी रूप से उसके अवैध
निर्माण करने के विरुद्ध संयुक्त कार्यवाही करते तो ऐसे हालत ही निर्मित न
होते।
एक अन्य विडियो मे एक रहवासी महिला ने एक
सोसाइटी के रहवासियों की सुरक्षा का भी एक ज्वलंत प्रश्न भी उठाया जो समयोचित है।
उसने सोसाइटी मे स्थायी रूप से पुलिस फोर्स की तैनाती की मांग की जो उचित है। यध्यपि
कान्त त्यागी जैसे हठी को नोएडा पुलिस ने उसके समुचित स्थान जेल मे भेज दिया है
लेकिन अपने आदतन अपराधी स्वभाव के चलते भविष्य मे ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अति
आवश्यकता है।
आप शायद हैरान होंगे कि मैंने अपने ब्लॉग मे
श्री कान्त त्यागी को हर जगह "कान्त त्यागी" कह क्यों संबोधित किया?
मेरा मानना है कि भारतीय सांस्कृति और परंपरा मे मे "श्री" शब्द का
उपयोग "श्रेष्ठ" और मर्यादित आचरण करने वाले श्रीमान पुरुषों के नाम के पूर्व
ही लगाये जाने की परंपरा है जो मुझे इस
विकृत मानसिकता के व्यक्ति मे नज़र नहीं आयी।
विजय सहगल


1 टिप्पणी:
You have rightly dropped श्री from his name. Even his surname त्यागी appears to be a misfit.
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