शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

"शिमला -2"


"शिमला -2"











इस चौराहे पर एक ओर जहां, एलआईसी, एसबीआई, आईसीआईसीआई और एचडीएफ़सी बैंक की इमरते है पर भारतीय डाक घर की लकड़ी से बनी सफ़ेद रंग की पृष्ठभूमि और लाल रंग के बार्डर  से बनी तीन मंज़िला इमारत अपने पुराने वैभव और शानदार वास्तु की कहानी कह रही थी जो भारतीय कारीगरों के खूबसूरत वास्तु का शानदार नमूना पेश कर रही थी।  इस क्षेत्र को स्कंडेल पॉइंट कहा जाता है ऐसा बताते है कि इस स्थान से  हिमाचल के  किसी एक राजा के साथ अंग्रेज़ वाइसराय की बेटी को यहाँ से भगा ले जाने का स्कंडेल हुआ था। स्थान और उसका नाम रोमांचक था!! खाने पीने के लिये अनेकों रेस्टुरेंट और कॉफी हाउस के साथ स्थानीय और ब्रांडेड कंपनी के सभी शो रूम यहाँ उपलब्ध है जहाँ से खरीददारी की जा सकती है। सड़क किनारे लगी सुंदर बेंच पर बैठ कर आप मॉल रोड के नज़ारे बड़े इतमीनान और चैन से बैठ कर  देख सकते है। जहाँ एक ओर आप मैदान के किनारे  बड़े राष्ट्रीय ध्वज को दूर से देख सकते है जो ऊंचे आसमान मे लहराते हुए देश के जन-गण-मन उद्वेलित कर रहा था वही घने पेड़ों के बीच जाखू पहाड़ पर स्थित 108 फुट ऊंची हनुमान जी की अति विशाल प्रतिमा के दर्शन  भी आपको  यहाँ  से हो जाएंगे। टाउन हाल, बाचनालय (लाइब्रेरी), पर्यटक स्वल्पाहार केंद्र की सुंदर इमारतों के साथ ही  रिज मैदान मे स्थित पूर्व प्रधानमंत्रियों  स्व॰ श्री अटल बिहारी बाजपेयी एवं स्व॰ श्रीमती इंद्रा गांधी की सुंदर सजीव प्रतिमाओं को  अपने बड़े राजनैतिक अंतर्विरोधों के बावजूद पास-पास देखना एक सुखद आश्चर्य था।  यहाँ पर पड़ी बेंच पर बैठ कर शिमला के शानदार नज़ारे दूर दूर तक देखे जा सकते है।

झाँसी का निवासी होने के नाते रानी झाँसी पार्क मे स्थित रानी लक्ष्मी बाई की प्रतिमा को देख कर रोमांचित होना स्वाभाविक था। प्रातः स्मरणीय वीरांगना रानी झाँसी की घोड़े पर सवार प्रतिमा को स्मरण कर नमन करना मेरे लिये सौभाग्य की बात थी। पार्क रोड के अंतिम छोर पर शिमला के प्रतीक पीले गिरजाघर को देखना भी उत्साह जनक था। शिमला के प्रतीक जिस पीले गिरजा घर को प्रायः टीवी और समाचार पत्रों मे देखता था उसको सजीव रु-ब-रु देखना  उत्साह और उमंग से उत्तेजित कर देने वाला था। कहना अनुचित न होगा कि शिमला मे अनेक एतिहासिक इमारतों के बीच ये पीला चर्च शिमला की  पहचान बनाने मे कामयाब रहा।     

इस स्थान से शिमला के 360 डिग्री का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है, शिमला के चारों ओर हरे भरे देवदार के ऊंचे ऊंचे वृक्षों के बीच सड़कों, भवनों और घाटियों के सुरम्य दर्शन होते है।  शिमला का ये स्थान शिमला का हृदय स्थल है इस रिज मैदान को यदि शिमला का स्वर्ग कहें तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। मुझे कहते हुए कोई झिझक नहीं कि वाहनों और उसके प्रदूषण से मुक्त  इस स्थान के रहवासियों को इस जीवन मे ही स्वर्गिक आनंद का लाभ मिल रहा है जो उनके सौभाग्य का प्रतीक है। पास ही पर्यटन विभाग की शानदार इमारत को देख मैंने हिमाचल प्रदेश के पर्यटक नक्शा लेने की कोशिश की पर जीर्ण शीर्ण हालत का एक नक्शा मिला जिसकी कोई अन्य नयी  प्रति न थी मजबूरन उसी पुरानी प्रति को 30/- रुपए भुगतान कर प्राप्त किया। इस पुराने पर्यटक नक्शे ने यात्रा का मार्ग तय करने मे बड़ी मदद की। उम्मीद है पर्यटन विभाग ने अब तक पर्यटन नक्शे की नयी प्रतियाँ छपवा ली होंगी।

मॉल रोड से एक तल नीचे यूं तो रिज रोड पर स्थित बाज़ार काफी भीड़ भाड़ वाला है पर इस रोड के एक सिरे पर अँग्रेजी औपनिवेशिक राज का पुलिस स्टेशन देखते ही बनता है। 1887 मे निर्मित इस बिल्डिंग को पुराने रूप रंग मे सहेज कर इस का पुनरुद्घाटन हिमाचल के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर द्वारा 5 सितम्बर 2021 को किया गया। इतनी सुंदर वास्तु से निर्मित इस भवन मे एक पुलिस सहायता कक्ष भी स्थापित किया गया है। शायद ही कोई पर्यटक उस कक्ष की ओर जाता दिखाई दिया क्योंकि आखिर है तो पुलिस स्टेशन!!

पुलिस बूथ से लगी सीढ़ियों से होकर आप अप्पर मॉल रोड पर पहुँच सकते है। सीढ़ियों से लगा हुआ ही टाउन हाल है जिसमे शिमला नगर निगम का कार्यालय स्थित है। मुख्य गोलाकार दरबाजे के प्रवेश द्वार के दोनों ओर एकसमान आकार के कार्यालय और उनमे लगी गोल्डन रंग से रंगी दरबाजों की सुंदर चौखटे इस दोमंजिला भवन की सुंदरता मे चार चाँद लगा रही थी। शाम के सुनहरे रंग की विद्धुत रोशनी मे इमारत परियों के देश के राजमहल का सा आभास करा रही थी। मुझे विभिन्न प्रदेशों के अनेकों नगर निगमों के कार्यालय मे जाने का मौका मिला शायद ही कोई भवन इतना सुंदर और साफ दिखाई दिया अन्यथा राज्य सरकारों के कार्यालयों मे बैठे बाबुओं के भद्दे चेहरे और मुंह मे रक्तरंजित पान-तंबाकू की हिलोरें लेते समुद्र की लहरों से गंदी होती ऑफिस  की दीवारों पर पान और पान मसाले की पीक और थूंक से रंगी दीवारें के  कुरूप और मलिन दर्शन ही होते है।

इसके ठीक बगल मे ही कला वीथिका के शानदार भवन को देखा जा सकता है, जिसमे होने वाली कलाओं की प्रदर्शनी को देखना सोने पर सुहागा की कहावत को चरितार्थ करता प्रतीत होता है। सफ़ेद रंग की चौखटों से बने खिड़की दरबाजों से बनी पाश्चात्य वास्तु पर बनी ये इमारत वास्तव मे निहायत ही खूबसूरत प्रतीत हो रही थी। अंदर जाने के सौभाग्य से वंचित होने का दुःख तो था पर समय की कमी के चलते ऐसा होना स्वाभाविक था।   किसी भी तरह के वाहन से पूरी तरह मुक्त  मॉल रोड और रिज़ रोड पर बिंदास  होकर टहलना एक सुंदर और सुखद  अनुभव था जिसको हमने नैनीताल और मसूरी के मॉल रोड पर नहीं महसूस किया। 

अब बापसी मे पोस्ट ऑफिस के स्कंडेल पॉइंट से होते हुए अपर मॉल रोड की ओर हम बड़े ही थे कि सामने एक निर्माणाधीन सुंदर लाल रंग की पृष्ठभूमि की इमारत को देख कर इमारत मे प्रवेश करने के उद्देश्य से आगे बढ़े। यध्यपि निर्माण के चलते प्रवेश बंद था फिर भी भवन की सुंदरता से आकर्षित हो चौकीदार से भवन देखने की अनुमति प्राप्त कर कुछ तस्बीरे लेने का आग्रह किया जिसे उसने सहर्ष स्वीकार कर बताया कि यहाँ शिमला का संग्रहालय का निर्माण प्रस्तावित है। आने वाले समय मे  शिमला शहर की इस शानदार इमारत मे एक शानदार संग्रहलाय पर्यटकों को देखने को मिलेगा इस बात की पूरी पूरी संभावना है।     

कालीबाड़ी के विशाल गेस्ट हाउस से आगे बढ़ने पर काली मंदिर के दर्शन हुए। मंदिर मे प्रवेश करते ही मंदिर प्रांगण से फूलों और धूप बत्तियों की भीनि-भीनि खुशबू ने मनमोह लिया। एकदम साफ सुथरे मंदिर ने बंगाल के देवालयों की सी सुंदर वास्तु से निर्मित मंदिर की सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण मे पवित्र मंदिर की  धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत हो खुशियों से मन को भर दिया। माँ काली  के चरणों मे शाष्टांग नमन कर मंदिर प्रांगण मे ही स्थित सफ़ेद रंग के उपग्रह लॉंच  करने जैसी सुंदर  रॉकेट की सी आकृति मे  जल रही पवित्र अग्नि की भस्म को मस्तक पर धारण कर मंदिर की परिक्रमा की। मंदिर की ऊंचाई से शिमला घाटी का विहंगम दृश्य बहुत ही खूबसूरत नज़र आ रहा था। मंदिर से मिले पवित्र चरणामृत और प्रसाद को ग्रहण कर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया।

जैसे ही मॉल रोड से नीचे विक्टरी टनल की ओर बड़े फिर वही कारों की रेलम पेल, यातायात की अव्यवस्था और ट्रेफ़्फ़िक जाम की स्थिति से सामना हुआ और ऐसे लगा मानों मॉल रोड के स्वपन महल से निकल कर एक बार फिर से कारों और कंक्रीट के जंगल मे बापस आ गायें हों।

विजय सहगल 

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