मंगलवार, 6 जुलाई 2021

धर्मांतरण

 

"धर्मांतरण"

श्रीमद्भगवत गीता दुनियाँ की शायद एक मात्र ऐसी पवित्र पुस्तक होगी जिसमे भगवान श्री कृष्ण ने अपने परम प्रिय सखा अर्जुन के माध्यम से धर्म संप्रदाय से परे मानव मात्र के लोक कल्याण  एवं सार्थक जीवन जीने की कला मे पारंगत करने की शिक्षाएं श्लोकों के माध्यम से दी है। साक्षात भगवान श्री कृष्ण के श्रीमुख से निकली वाणी द्वारा अपने सखा अर्जुन के माध्यम एक साधारण मनुष्य के खानपान, चाल-चलन, सुख-दुःख, कर्म-अकर्म-विकर्म, दान, धर्म, तप, यज्ञ आदि विषयों पर संदेश दिये है। जो पाँच हजार साल पूर्व से आज तक उतने ही सार्थक और प्रासंगिक है जैसे पहले थे। इसी तारतम्य मे श्रीमद्भगवत गीता के एक श्लोक मे भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को संबोधित करते हुए कहते है:-

तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ।
पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥3.41

अर्थात " हे भरतवंशियों में श्रेष्ठ अर्जुन! तू सबसे पहले इन्द्रियोंको वश में करके इस ज्ञान और विज्ञान का नाश करने वाले महान् पापी "काम को" अवश्य ही बलपूर्वक मार डाल। यहाँ "काम" के आवेग को बलपूर्वक मार डालने से तात्पर्य "ब्रह्मचर्य आश्रम" मे विध्यार्थि धर्म के पालनार्थ   सद्विचारों का चिंतन-मनन, सद्साहित्य का पठन-पाठन, सद्पुरुषों की संगति से नकारात्मक सोच को समाप्त कर सकारात्मक सोच रूपी तलवार से महान महान् पापी "काम को" मारना है।        

अभी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश मे कुछ मूक-बधिर बच्चों के धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला समाचार पत्रों और दृश्य एवं श्रव्य मंचों पर छाया रहा। "काम" की इसी नकारात्मक सोच का सहारा ले कर ही   कुछ मूढ़ और अतिवादी विचार धारा के इन धर्मांध मौलवियों ने पिछले दिनों  इन मासूम, मूक और बधिर किशोरों के मन मे अपने धर्म के विरुद्ध बरगला कर अनैतिक और गैरकानूनी तरीके से इस्लाम धर्म कबूल करवाने का कुत्सित कार्य किया। इन मुल्ला मौलवियों ने नाबलिग बच्चों के मन मे नफरत और घृणा के बीज बो कर न केवल अधार्मिक बल्कि अमानवीय आपराधिक कृत किया है। उत्तर प्रदेश सरकार इस नापाक गिरोह का भंडाफोड़ कर इनके मुख्य सरगनाओं को जेल के सीखचों के पीछे भेज इस संबंध मे गहन छानबीन कर रही है। सामान्य रूप से दिव्यांग इन बच्चों का मानसिक शोषण कर इन्हे न केवल अपने धर्म से विलग किया है अपितु इनकी जन्मदात्री माँ-पिता से विभक्त कर मानवता की विरुद्ध अक्षम्य जुर्म और पाप किया है।

वेशक इस्लाम का लिबास और छद्म रूप धारण किये ये घृणित अधम व्यक्ति अपने आपको "अल्लाह" के नेक बंदे कहते हों लेकिन कदाचित "अल्लाह" भी इन नाबालिग मासूम किशोरों के छद्म, झूठ, लालच  और फरेब पर आधारित  धार्मांतरण को स्वीकार करे!! अपरिपक्व बाल मन को धन, नौकरी, शादी की लालच देकर इस घृणित कार्य को शायद ही किसी मत, धर्म, संप्रदाय, मजहब का कोई ईश्वर, आराध्य या देव स्वीकार करे!!

इन असाधारण मूक और बधिर बच्चों को अपनी सांकेतिक भाषा की शिक्षा, ज्ञान, कौशल सिखाने की आड़ मे इन के पथभ्रष्ट गुरुओं और शिक्षकों ने षड्यंत्रपूर्वक इन किशोर वय बच्चों के मन मे घृणा, वैमनस्य के बीजांकुर कर धर्मांतरण जैसा अधम एव नीच पाप किया है उसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है। इन घृणास्पद, घिनौने दुष्ट और कपट पूर्ण कार्य के लिए इन्हे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए।

यूं भी असामान्य होने एवं सामान्य बच्चों की तरह कुछ अंगों की अक्रियाशीलता के कारण ये मूक बधिर बच्चे परिवार मे अपने भाई-बहिनों और कभी कभी माता-पिता से सामान्य संवाद करने मे सहज नहीं हो पाते और सनय-सनय अलग-थलग से रहने लगते है। ऐसे समय इन बच्चों के परिवार और समाज के हर वर्ग  के लोगो का कर्तव्य बन जाता है कि इनके साथ ज्यादा से ज्यादा घुले-मिले और इन दिव्यांग बच्चों को ईश्वर-प्रकृति द्वारा प्रदत्त अंगों से वंचित रहने की हीन  भावना से ग्रसित न होने दें। उन्हे निरंतर परिवार के केंद्रीय धुरी का हिस्सा मान परिवार की मुख्य धारा का हिस्सा बनाये रक्खे।  इस संवाद हीनता का ही फायदा उठाकर इन  धर्मांध मुल्ले मौलवियों ने छल-कपट के द्वारा  इन बच्चों की  सुनोयोजित,  षड्यंत्रकारी और बदनीयति से सहानुभूति अर्जित कर इन को सांकेतिक भाषा-शिक्षा संस्कार की आड़ मे धन, नौकरी, शादी आदि का लालच देकर कोमल हृदय मे अपने धर्म के खिलाफ और अपने परिवार के विरुद्ध विष  वमन करा इस संवाद हीनता की खाई को चौड़ा किया होगा।  इन कट्टरपंथियों ने इन बच्चों को विदेशो से प्राप्त धन का इस्तेमाल इन अवयस्क बच्चों के अपरिपक्व बालमन मे पांचों इंद्रियों अर्थात रस, रूप, घ्राण, श्रोत्र  और स्पर्श  के माध्यम से कामवासना को भी जाग्रत करने मे कहीं कोई कोर कसर नहीं छोड़ी होगी। मेरा दृढ़ मत है कि पकड़े गये इन  धूर्त और पाखंडी मौलानाओं ने इन अविकसित बच्चों के मन मे बहत्तर  हूरों के सब्जबाग अवश्य दिखाएँ होंगे और उनमे किसी एक का स्पर्श अनुभव भी इन घृणित लोगो ने इन कोमल मन हृदय बच्चों को कराया होगा अन्यथा जो बच्चे  कुछ समय पूर्व तक अपने माँ-बाप भाई बहिनों के लिए जान छिड़कते  हों, अचानक उनकी शक्ल देखना, बात करना और उनको सुनने   तक से परहेज करे। ऐसा सिर्फ और सिर्फ विपरीत लिंग के यौनाकर्षण का लालच, धमकी या  भयादोहन के बिना संभव नहीं। भयादोहन के इस कुचक्र के दृष्टिकोण से भी पुलिस एवं अन्य जांच एजेन्सियों को इस संबंध मे जांच करना चाहिये और इनके विरुद्ध कानून की अन्य धाराओं के साथ "पोकसो" एक्ट अर्थात  यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम-2012 (Protection of children from Sexual Offence Act-2012) के तहत भी अवयस्क बच्चों के शारीरिक और मानसिक शोषण के अपराध के विरुद्ध  सख्त कानूनी और आपराधिक कार्यवाही करनी चाहिये।

आज के समय अपने किशोर वय बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हमे शालीन लेकिन स्पष्ट तरीके से किशोर वय के बच्चों के शरीर मे उम्र के साथ होने वाले बदलाव पर चर्चा करनी चाहिये विशेष कर दृष्टिहीन, मूक, बधिर जैसे बच्चे जो दिव्यांगता  की दृष्टि से असामान्य हों!! इन दिव्यांग बच्चों की इसी कमी का लाभ लेकर ही इन रूढ़िवादी मौलानाओं ने विदेशी षड्यंत्रकारियों के साथ मिल कर देश, धर्म और समाज  के विरुद्ध बहुत बड़ी साजिश रची है। जिसका शीघ्र ही पटकक्षेप सुरक्षा एजन्सियों किया जाना संभावित है।  

विजय सहगल           





2 टिप्‍पणियां:

N K Dhawan ने कहा…

बहुत सुंदर और सटीक लेख। योगी जी के धर्मांतरण पर उठाये गये कदमों की हम सबको सराहना करनी चाहिए । अगर हिन्दू धर्मावलंबी अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए योगी जी का साथ देंगे तो आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि धर्मांतरण में लगे मुल्ला मौलवी अपने इन दुष्कर्मो के लिए अपने को कोसेंगे ।

Ganguli ने कहा…

प्रशंसनीय लेख