पासपोर्ट मे
पुलिस सत्यापन का औचित्य?
(सतर्कता सप्ताह
दिनांक 27 अक्टूबर से 2 नवम्बर 2020
पर विशेष)
अदरणीय
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, 29.10.2020
महोदय,
सतर्कता सप्ताह दिनांक 27 ओक्टूबर से 2
नवम्बर 2020 पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध आपके संघर्ष के आवाहन सुना। कहीं न कहीं
बहुत चाहते हुए आपके विचारों से सहमति के बावजूद दर्द और वेदना के साथ लिख रहा हूँ कि देश के नौजवान जब आपके आवाहन पर आपके विचारों से
प्रभावित हो भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष मे जज्बाती हो शामिल होते है और जब उनके
इन जज़्बात को धरातल पर धराशायी होते देखता
हूँ तो घोर निराशा और वेदना होती है। महोदय आपसे क्षमाप्रार्थी हो लिखने के लिये
बाध्य हूँ कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध मे युवाओं की दुर्गति,
तिरस्कार और अपमान देख बड़ा कष्ट होता है।
दुःख और क्षोभ तब और अधिक होता है जब भ्रष्टाचार की शिकायत पर संबन्धित उच्च
अधिकारियों द्वारा मामले मे लीपा-पोती कर भ्रष्ट अधिकारियों को साफ-सुथरा,
ईमानदार घोषित कर क्लीन-चिट दे दी जाती है तब शिकायतकर्ता और उसके संरक्षकों को
आपका "सतर्कता सप्ताह के अंतर्गत भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष" इन अकर्मण्य अधिकारियों द्वारा एक
"कपोल कल्पित औपचारिकता" मात्र तो नहीं बनाया जा रहा है??
कहीं ऐसा तो नहीं कि व्यवस्था को घुन की तरह चाटने बाले ऐसे शासकीय सेवक कहीं नौजवानों की भावनाओं से खिलवाड़ कर अपने आप
को सार्वभौमिक सर्वशक्तिमान मान जानबूझ कर आपके प्रति क्षोभ और आक्रोश उत्पन्न करा
रहे हों??
आपके नीति और कार्यक्रमों को सरकारी सेवक
किस तरह पलीता लगा व्यवस्था को पटरी से
उतारने का कुत्सित प्रयास करते है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते?
जिसकी एक बानगी मै यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ।
महोदय लगभग दो माह (अगस्त 2020 मे) पूर्व मेरे पुत्र ने नोएडा मे पासपोर्ट को
रिन्यू कराने हेतु आवेदन किया था। समुचित प्रिक्रिया का अनुपालन करते हुए जब
पासपोर्ट आवेदन पुलिस सत्यापन हेतु नोएडा पुलिस के पास आया तो पुलिस महकमे के
संबन्धित अधिकारी द्वारा कागजों के साथ थाने मे बुलाया गया। आवश्यक कागज आदि थाने
मे संबन्धित अधिकारी को देने के बाद उक्त अधिकारी द्वारा रिश्वत के रूप मे एक हजार
रुपए की मांग की गई अन्यथा आवेदन मे एड्वर्स रिमार्क (प्रतिकूल टिप्पड़ी) कर अड़ंगा
डालने की बात बेटे से कही गई। भ्रष्टाचार के विरुद्ध आपके विचारों से प्रभावित
होने के कारण उसने रिश्वत देने से इंकार कर दिया।
अवशयक पेपर के बाबजूद इस तरह की रिश्वत की
मांग अनुचित थी। पासपोर्ट आवेदन के निरस्तीकरण की शंका-कुशंकाओं के कारण बेटे ने इस घटना को उसी दिन पुलिस के
उच्च अधिकारियों के संज्ञान मे लाने का निश्चय कर घटनाक्रम को पुलिस के उच्च
अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से सूचित किया जिसका मुख्य मकसद सूचना के साथ "सनद रहे तथा वक्त पर काम आवे"
का उद्देश्य था। सजग उच्च अधिकारी से
अपेक्षा थी कि शिकायत की गोपनियता बनाये रख शिकायत की जांच कर समुचित कार्यवाही
करते परंतु खेद और अफसोस के साथ लिखना पड़ रहा है कि उच्च अधिकारी द्वारा शिकायत की
गोपनियता बनाये रख जांच तो दूर शिकायती को
ही शिकायत से अवगत करा गोपनियता को भंग किया गया। फलस्वरूप शिकायती द्वारा बेटे को
तुरंत ही फोन कर उसकी शिकायत उच्च
अधिकारियों से करने का प्रतिवाद किया गया एवं बेटे द्वारा एक हजार रुपए की मांग के वर्तालाप की कॉल रिकॉर्डिंग मोबाइल की गयी एवं उक्त रिकॉर्डिंग को भी बाद मे जांच अधिकारी को
डिस्क पर उपलब्ध कराया गया पर व्यर्थ और निरर्थक रहा?
और जैसे कि अशांका थी संबन्धित अधिकारी ने "चार वर्ष के नोएडा का सत्यापन तो
कर दिया लेकिन पाँचवे बर्ष के सत्यापन की
आवश्यकता" दर्शाने की प्रतिकूल टिप्पड़ी के कारण पासपोर्ट रिन्यूल कि प्रिक्रिया मे अवरोध डाल
दिया गया।
अफसोस इस बात का नहीं कि रिश्वत की एक हजार
रुपए के राशि न देने के कारण प्रतिकूल टिप्पड़ी की बजह से पासपोर्ट के नवीनीकरण मे अनावश्यक लंबा विलंब
अब तक जारी है बल्कि खेद इस बात का है कि सत्यापन अधिकारी द्वारा रिश्वत को अपना
जन्मसिद्ध अधिकार मानने बाले अधिकारी को व्यवस्था द्वारा ईमानदार घोषित कर बेटे को
शिकायत करने के साहस की सजा पासपोर्ट के
रिन्यूवल मे अड़ंगा डाल कर दी गई। ऐसा प्रतीत होता है मात्र एक हजार रुपए के रिश्वत
रूपी राशि "सद्कार्य कोष" मे देने पर अतिवादी,
आतंकवादी, देश द्रोही भी पावन
पवित्र वन पासपोर्ट पाने की अर्हता,
योग्यता और सुपात्र बन सकते है?? पर रिश्वत न
देने वाले लोग व्यवस्था द्वारा प्रताड़ित किये जाते है।
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रिश्वत को अपना विशेषाधिकार
मानने बाले भ्रष्ट अधिकारी को एक हजार रुपए न देने की चुनौती देना क्या कोई अपराध था जिसकी सजा अबतक पासपोर्ट से वंचित
रख किया जा रहा है?
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उच्च अधिकारियों को
शिकायत करने के बावजूद कार्यवाही न होना "सतर्कता-सप्ताह" के औचित्य पर क्या
एक बड़ा सवालिया निशान नहीं है??
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उच्च अधिकारी द्वारा
शिकायत की गोपनियता भंग कर शिकायती को बताना शिकायतकर्ता की सुरक्षा के साथ खिलबाड़
नहीं है???
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जब पुलिस सत्यापन की
प्रिक्रिया पूर्णतया: रिश्वत रूपी भ्रष्टतन्त्र पर ही टिकी है तो क्या इस पुलिस
सत्यापन प्रणाली के औचित्य और आवश्यकता पर
सरकार को पुनर्विचार नहीं करना चाहिये????
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देश की रक्षा से जुड़े पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को
जारी करने वाले अधिकारी जो चंद रूपये की ख़ातिर अपना ईमान बेचने मे तत्पर हो देश की सुरक्षा
संरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों की निष्ठा और प्रतिवद्धता की कोई अन्य नवीन प्रणाली का विकास और विस्तार की आवश्यकता पर विचार नहीं किया जाना चाहिए????
मेरे बेटे को पासपोर्ट
पाने की यात्रा मे और कितना विलंब होगा कह नहीं सकते?
पर प्रधानमंत्री महोदय हमे इस बात की बेहद खुशी होगी कि मेरा बेटा आपकी सतर्कता
मुहिम के एक सिपाही के रूप मे आपके "भ्रष्टाचार
के विरुद्ध संघर्ष" मे शामिल है।
अभिवादन सहित,
विजय सहगल














