रविवार, 6 सितंबर 2020

टीवी चैनल्स का अतिवाद




e-mail - authority@nbanewdelhi.com के माध्यम से।

श्रीमान श्री रजत शर्मा,
अध्यक्ष नेशनल ब्रोडकास्टर  असोशिएशन
नई दिल्ली

महोदय,

विषय- टीवी चैनल्स पर स्व॰ सुशांत सिंह से संबन्धित खबरों का अतिवाद।

हमे नेशनल ब्रोडकास्टर एसोशिएशन  की वेब साइट (http://www.nbanewdelhi.com/) पर ये पढ़ कर अच्छा लगा था जिसमे आपने अपने संगठन के मुख्य उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु उच्च मानदंडों और मानकों को तय कर अपनी रीति नीति और आचार संहिता का गठन किया था।  इस हेतु उत्तर भारत मे मुख्य टीवी चैनल्स के सदस्यों द्वारा पारित उनके नियम, कायदे  और परम्परायेँ भी बनायी थी। अपने उद्देश्यों मे आपने टीवी समाचार के क्षेत्र मे उच्च मूल्यों  और नैतिकताओं के अनुपालन का  निश्चिय  किया था।

मै आपका ध्यान विशेष तौर पर आपके चैनल इंडिया टीवी सहित सभी हिन्दी चैनल सदस्यों  के स्व॰ सुशांत सिंह की मृत्यु से संबन्धित खबरों को टीवी चैनल्स के अतिवादी व्यवहार की तरफ आकर्षित कराना चाहता हूँ। हमे सुशांत सिंह जैसे उभरते अभिनेता के आकस्मिक निधन पर उतना ही दुःख और अफसोस है जो अभिनय जैसे किसी भी अन्य क्षेत्र के नौजवान के  असामयिक निधन से हो सकता है। सुशांत सिंह की अविश्वनीय मृत्यु अत्महत्या है या षड़यंत्रकारियों द्वारा हत्या इस क्रत की बहुतायत लोगो द्वारा जांच की मांग सरकार द्वारा स्वीकरत हो केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जांच शुरू कर दी गई है।  परंतु खेद और दुःख का विषय है आपके चैनल सहित सारे मीडिया सिर्फ सुशांत की मृत्यु के आस पास ही घूम अपना एवं सामान्य टीवी दर्शकों का बहुतायत समय बर्बाद कर रहे है।

स्व॰ सुशांत सिंह के अत्महत्या से उपजे घटनाक्रम को आप और आपके सदस्य टीवी चैनल्स ने जिस तरह से सारी हदें पार कर इस एक मात्र खबर का प्रचारण और प्रसारण किया उसने एक नये "टीवी अतिवाद" को जन्म दिया है  जिसने  समाचारों की दुनियाँ मे एक नया आयाम स्थापित किया। समान्यतः सुशांत के देहांत पश्चात पिछले 14 जून 2020 के बाद से एवं विशेषतः 19 अगस्त 2020 (केस की सीबीआई से जांच) से तो हिन्दी भाषा के सभी न्यूज़ टीवी चैनलों ने सुशांत सिंह हत्या या अत्महत्या के  इस समाचार को दिखलाने मे "टीवी अतिवाद" की सारी सीमाएं लांघ दी।  दिन रात इसी समाचार को दिखलाना चर्चा करना क्या  भारतीय जन मानस के साथ मानसिक हिंसा नहीं है? आपके ये सदस्य चैनल इस कथित अत्महत्या या हत्या के समाचार को दिखला देश की नौजवान पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहते है?? सुशांत या उसकी साथी रिया सहित घरों मे झाड़ू बुहारने, चौका-वर्तन मांझने, कपड़े धोने और खाना पकाने वाले ये आस्तीन के साँप वास्तव मे घरेलू सेवकों, कामगारों मेहनतकशों  के नाम पर कलंक है। एक सच्चा सेवक मेहनतकश मजदूर कभी अपने नियोक्ता के विरुद्ध विश्वासघात नहीं कर सकता।  अतः सुशांत सिंह के घर के ऐसे छद्म सेवक वास्तव मे सेवकों के रूप मे अपराधी है। इन  पीठ मे छुरा घौंपने वाले  अपराधियों  जैसे  दो टके के नौकर, खानसामा, मैनेजर, दोस्त रूपी खलनायकों को 24 घंटे महिमा मंडन कर आप लोगो ने हीरो बना दिया जैसे वे देश के युवाओं के कोई बहुत बड़े आदर्श स्थापित करने वाले युवा है!!  इन छद्म फिल्मी सितारों के जीवन मे ड्रग, अफीम चरस की दुनियाँ को दिखलाना आज के देश के युवाओं को क्या संदेश दे रहा होगा क्या आपके सदस्य टीवी चैनल के लोगो ने इस पर चिंतन मनन किया?? जब एक केंद्रीय जांच एजन्सि इस केस मे जांच कर रही है तो आपके चैनल के संवाददाता द्वारा दौड़ते हाँफते, टुटपुंजिये मादक पदार्थों के सेवन करने वालों के विरुद्ध समानान्तर जांच दिखलाने का क्या औचित्य है? क्या आपके संगठन के तहत सदस्य टीवी चैनल्स के दिखाये जाने वाले "मीडिया ट्रायल" का कोई वैधानिक वैधता भी है?  कृपया इस एकल समाचार के आतंकवाद से जन सामान्य को भगवान के लिये मुक्ति दीजिये। यदि आपके पास समाचारों के दिखलाने का टोटा है तो कृपया 24 घंटे के शो को कुछ घंटे अपने चैनल्स को बंद  रख विराम देंगे तब भी  आप अपने उद्देश्य के उच्चतम मानदंडों का ही पालन कर रहे होंगे और देश की जनमानस पर आप लोगो का एक बड़ा उपकार भी होगा।  

31 अगस्त 2020 को माननीय पूर्व राष्ट्रपति स्व॰ श्री प्रणव मुखर्जी के दुःखद निधन  के समाचार और उसके उपरांत 7 दिन के राष्ट्रीय शोक काल मे भी आपके टीवी चैनल सदस्यों  ने गैर जिम्मेदारा व्यवहार किया। आपके संगठन सदस्यों ने न केवल उनका बल्कि "भारत रत्न" के महत्व को कम करने का अक्षम्य अपराध भी किया है। क्या राष्ट्रीय शोक के इस काल मे  श्री मुखर्जी जैसे मूर्धन्य महापुरुष के प्रति ये अनादर भाव प्रदर्शित नहीं किया गया? क्या ये संवेदनहीनता देश, समाज और मानवता के के प्रति घोर अपराध नहीं  है? क्या ही अच्छा होता कि  देश मे व्याप्त 7 दिन के राष्ट्रीय शोक मे आप रोज एकाध घंटे ही सही देश के गौरव स्व॰ प्रणव मुखर्जी से संबन्धित व्रत्त या उनके उच्च मूल्यों और मर्यादाओं को दर्शन कराते या देश के अन्य महापुरुषों के जीवन व्रत्त पर कोई कथा चित्र का  प्रचार, प्रसार कर उन्हे याद करते? भारतीय सांस्कृति, साहित्य, दर्शन और संगीत की चर्चा भी इन दिनों दिखाई जा सकती थी। लेकिन शर्मनाक ढिठाई ओढ़ आपके सभी  टीवी चैनल्स सदस्यों  ने सड़क छाप मादक पदार्थों के सेवन करने और उनका व्यापार व व्यवहार  करने वालों का कुत्सित चेहरा दिखाने की होड़ को ही  अपनी कमायावी और बहुत बड़ी उपलब्धि  समझी।

हमे शिकायत कम लेकिन अफसोस उन संवाददाताओं पर भी है कि क्या उन्होने अपने पाठ्यक्रमों मे वाहनों, कारों के पीछे दौड़ते हुए अपराधियों की फोटो पाने की आपाधापी  या उन असामाजिक तत्वों के  अधम विचारों पर टिप्पड़ी लेना ही पत्रकारिता का पारितोषिक माना?   "द्रश्य संवाददाता" बनने के  गौरव ज्ञान की यही शिक्षा आपने  विश्वविध्यालयों या महाविध्यालयों मे पायी थी?? क्या माननीय टीवी संवाददाताओं ने अपने पाठ्य क्रम मे  फिल्म "पीपली लईव"  मे "टीवी मीडिया" पर हुई जग हँसाई के फलिथार्थ से कोई  सबक नहीं लिये?? क्या टीवी संवाद दाता का यही काम रह गया कि स्वयं भी समाज के के "गू और गोबर" का  अन्वेषण चित्रण और दर्शन करें और  देश की जन मानस को भी ऐसा ही देखने को बाध्य करें? सारी ज़िंदगी हम लोकतन्त्र के तीन मजबूत स्तंभों के बारे मे पढ़ते आए थे पर कलांतर मे हमे ज्ञात हुआ कि "समाचार माध्यम" भी एक और स्तम्भ हो गया है।  अतः हे "लोकतन्त्र के चौथे खंम्बो!! अपराधियों के प्रति कहीं कुछ अनैतिकता के कर्तव्य को दरकिनार रख कुछ "आवश्यक कर्म" देश और दुनियाँ के आम जनों के प्रति भी निभाने का संकल्प आप नहीं ले सकते? जिसने तुम्हें लोकतन्त्र का चौपाया बनाया??

ऐसा कौनसा तीर सुशांत सिंह की तथाकथित अत्महत्या या हत्या ने मार लिया कि जिसके षड्यंत्र मे लिप्त अपराधियों के घर, परिवार, रहन, सहन, कुशिक्षा, कुसंसकारों को आप अपने राष्ट्रीय चैनल्स पर हम लोगो के लिये परस रहे हो?? क्या शिक्षा ग्रहण करेंगे देश के नौनिहाल तुम्हारे  चैनल द्वारा  दिखायी  जा रही इस घटिया मानसिकता को??   हत्या या अत्महत्या, फ़्रौड, मादक तस्करों, ड्रूग माफियायों मे लिप्त इन षड्यंत्रकारियों को आपके टीवी चैनल्स सदस्यों ने महिमा मंडन कर  एक राष्ट्रीय विषय वस्तु बना दिया। क्या देश और दुनियाँ मे कहीं कोई ऐसी घटना नहीं घट रही जो मानवीय या सामाजिक मूल्यों मे इजाफा का दर्शन कराती हो। कृपया अपने गिरेवान मे झांक कर आत्म चिंतन करे और भगवान के लिये टीवी चैनल्स के इस एक मात्र घटना पर कुछ परहेज कर अन्य आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक घटनाओं पर भी द्रष्टिपात करें।

आपके टीवी अतिवाद से पीढ़ित एक साधारण नागरिक॰

विजय सहगल       

1 टिप्पणी:

विजय सहगल ने कहा…

अभी अभी NBA को उपर लिखे मेल adress पर पता, फोन नंबर और मेल id के साथ मेल भी कर दिया देखते है क्या कार्यवाही करते या जबाब देते है??