शनिवार, 7 मार्च 2020

होम करते हाथ जलना


"होम करते हाथ जलना"

नोट-: मेरा पाठकों से अनुरोध है कृपया इस साधारण सी घटना मे अपनी  आत्मप्रशंसा या अपने को गौरवान्वित करने का मेरा उद्देश्य या इरादा कतई नहीं है मैंने तो इस घटना को महज अपना ब्लॉग लिखने हेतु बहुत ही हल्की मंशा और मनःस्थिति के वशीभूत लिखा है।  







आज सवेरे भ्रमण पश्चात जब मै घर पहुंचा तो मेरे दोनों हाथ मे लगे खून और कपड़ो मे लगी धूल, मिट्टी और कीचड़ को देख सारा परिवार सकते मे आ गया। मै कुछ बोल पाता उसके पूर्व ही सवालों की झड़ी लग गई। श्रीमती जी ने प्रश्न का उत्तर सुने बिना ही घोषित कर  दिया कि कहीं फिसल गये? कितनी बार कहा सम्हल कर चलों। जब दोनों हाथ की हथेलियों मे खून देखा तब तो मानों जैसे आफत आ गई!  किसी मोटरसाइकल या कार ने टक्कर मार दी? कहीं गिर गये? किसी ने मार दिया क्या? गहरी चोट तो नहीं?  आदि आदि। मन ही मन खींझते हुए सोचा वेमतलब  चुप चाप सीधे घर आते तो ये डांट तो न खानी पड़ती। मुझे लगता है हिंदुस्तान के शत प्रतिशत लोग शादी के बाद पत्नी के इन्ही सवालों के कारण ही नई-नई वैज्ञानिक  खोजों या आविष्कारों से दूर रहे होंगे!!!! इसी उधेड़ बुन के बीच मैंने मेरे साथ घटित घटनाक्रम को घर मे कह सुनाया।  
      
नोएडा मे प्रवास पर मेरी हर रोज कोशिश रहती है कि मेरे आवास के पास मेघदूतम पार्क  नोएडा मे प्रातः भ्रमण के लिये अवश्य जाऊँ। आज भी भ्रमण से बापसी पर मैंने देखा कि पार्क से सैक्टर 50 मेट्रो स्टेशन, लिंक रोड को जोड़ने बाली सड़क पर एक पेड़ कल हुई लगातार वारिस के कारण उखड़ कर सड़क पर आ गिरा था। पेड़ गिरने के स्थल के 10-15 मीटर पहले आने जाने बाली सड़क को जोड़ता हुआ एक कट बना हुआ था।   उस रोड पर तीव्र मोड़ के कारण प्रायः हर कार, स्कूल बस और अन्य वाहन  उस ओर 10-15 मीटर  बढ़ते और गिरे पेड़ के कारण वाहनों को पीछे कर सड़क के कट पर आकार दूसरी दिशा बाली सड़क से जाते।  अधिकतर वाहनों का उस दिशा मे जाना और गिरे पेड़ के कारण पुनः वाहनों को बापस लाकर दूसरी दिशा बाली सड़क से वाहन गुजारने पर कुछ अव्यवस्था और अफरा तफरी और थोड़ी थोड़ी यातायात अवरुद्ध की स्थिति बन रही थी। उक्त दशा को देख मैंने सोचा क्यों न दूसरी दिशा को जोड़ने बाली सड़क के पहले  कुछ अवरोध लगा दिया जाये ताकि उस 10-15 मीटर आगे गिरे पेड़ तक वाहन जाये ही न। चारों तरफ नज़र दौड़ाई, जैसा मै चाहता था मुझे कोई रस्सी, सुतली, प्ल्रस्टिक रस्सी या धागा दिखाई न दिया जिसे सड़क के दोनों ओर बांध कर आवागमन को रोका जा सके। सड़क के दूसरी ओर सड़क किनारे एक बरगद का पेड़ मुझे दिखा मैंने सोचा यहाँ अवश्य ही  कोई धागा आदि हमे मिलेगा क्योंकि भारतीय सांस्कृति मे महिलाएं वट अमावस्य पर वरगद के पेड़ के चारों ओर धागा लपेट अपने पति की  दीर्घायू की कामना करती है। पेड़ के नीचे ही मुझे कलावा (रक्षा सूत्र) की पूरी पिंडी मिल गई। मुझे लगा अब इस कलावा धागे से सड़क के आर पर एक दो फेरे बंध जायेंगे। वमुश्किल एक फेरा ही पूरा कर पाया था अचानक आती एक कार ने उस धागे की लाइन को तोड़ दिया। पर आगे गिरा पेड़ देख कर कार मे बैठे दंपति ने मेरे सकारात्मक प्रयास को समझ, कार को पीछे कर खड़ा किया और मुझे मेरे प्रयास मे सहयोग करने कार से नीचे उतर आये। मैंने उन्हे बंधे धागे पर पास मे लगे वृक्षों की पत्तियों को धागे के उपर लगाने का निवेदन किया ताकि वाहन चालक दूर से ही इन पत्तियों को  क्रमवद्ध कतार देख कर आगे न बढ़े।  जिसे उन्होने सहर्ष स्वीकार कर वैसा ही किया। मैंने देखा धागे से बंधी पत्तियाँ इतनी छोटी थी कि वाहन चालक  कुछ समझ पाते तब तक वह कलावा फिर टूट जाता। मैंने पुनः प्रयास करते हुए आसपास पड़ी कुछ सूखी टहनी को सड़क पर विछाया और गिरे हुए पेड़ की कुछ हरी टहनियाँ तोड़ सड़क पर विछायी  जिनके कारण घटना स्थल तक  जाये बिना वाहन  दूसरी तरफ मुड़ जाये। मुझे अच्छा लगा मेरे प्रयास सार्थक हो रहे थे और लोग गिरे पेड़ बाले रास्ते पर न जाकर दूसरी ओर की सड़क पर मुड़ कर जा रहे थे। पर अचानक 5-6 गाय-बैल का झुंड आ गया। उन्होने मुझे हरी हरी टहनियाँ तोड़ते और सड़क पर विछाते देख अपने लिये भोजन की प्रत्याशा से विछि  हुई टहनियों को खाना शुरू कर दिया। मुझे लगा शायद हमारे  प्रयास इन पशुओं की वजह से पुनः निरर्थक न हो ऐसा सोच मैंने उन्हे एक लकड़ी से पेड़ की ओर हांक दिया ताकि भोजन के बड़े भंडार रूपी वृक्ष को   देख कर ये पशु इन टहनियों को न खाये। और इसका प्रभाव सार्थक भी हुआ। इन पशुओं का झुंड पेड़ो की पत्तियों को खाने मे मशगूल हो गया। मैंने देखा 40-50 कदम की  दूरी पर रास्ते मे 6-7 फुट लंबा  एक पुराना सूखा पेड़ नाली मे पड़ा है। उस पुराने सूखे पेड़ जिसमे बरसात के कारण काफी कीचड़ और धूल मिट्टी लगी हुई थी। मुझे लगा ये सड़क के अवरोध को और मजबूत करेगा। ऐसा सोच मैंने उसे घसीटते हुए अन्य अवरोध के साथ मिला दिया। अब अबरोध पूरी तरह तैयार हो आने जाने वाहन चालकों को स्पष्ट नज़र आ रहा था। लोग अब अपने वाहन दुर्घटना स्थल तक  न जाकर सड़क की दूसरी ओर मोड़ कर निकाल रहे थे।

हरे पेड़ की पत्तियों को तोड़ते वक्त मेरी एक उंगली मे छोटा सा कट लग गया जिससे खून बहने लगा। खून रोकने के प्रयास मे दोनों हाथों, हथेलियों मे धूल मिट्टी के साथ  खून लग गया। हमारे कपड़ों मे भी काफी कीचड़ मिट्टी लग चुकी थी पर तसल्ली थी कि मेरा एक छोटा सा प्रयास कामयाब हो गया था। पर घर पर लगी डांट फटकार चेहरे की हंसी को न दबा सकी।   मुझे  लगा कि ऐसी घटनाओं के कारण ही विद्वजनों ने इस मुहाबरे को गढ़ा होगा कि "होम करते हाथ जलना"  

विजय सहगल                    

3 टिप्‍पणियां:

हमारी खुशी ने कहा…

साथी हाथ बढ़ाना। अति सुन्दर व सराहनीय प्रयास

विजय सहगल ने कहा…

प्रशंसनीय सकारात्मक प्रयास। समाज सेवा के लिए बड़े अवसर की प्रतीक्षा करते रहने की अपेक्षा सामने आये छोटे -छोटे अवसरों को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए ।आपने यही किया है।🏆🏆🏆
Karuna Bhatia whatsap group Tilak J Sampark

विजय सहगल ने कहा…

Likha bhi bahut sunder hai
Preranadayak
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M-+91 80764 61645