शनिवार, 14 सितंबर 2019

प्रदूषण का प्रमाण


प्रदूषण का प्रमाण






















श्रीमान नितिन गडकरी                                       14.09.2019
माननीय सड़क परिवहन मंत्री
भारत सरकार
नई दिल्ली।

महोदय

विषय :- प्रदूषण नियंत्र प्रमाण पत्र ॰  
  
आपके सड़क पर यातायात के नियमों पर कड़े दंडात्मक प्रावधानों का मै  स्वागत करता हूँ, फिर चाहे ये नियम ड्राइविंग लाईसेंस, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र या हेलमेट/सीट बेल्ट या अन्य नियमों से संबन्धित हो। एक कल्याण कारक राज्य मे अंततः आम जन के लिये ही उसके कल्याण हेतु  कार्य किये जाते हैं ताकि आम जन के जानमाल एवं धन-धान्य की रक्षा हो सके। उक्त सिद्धांत के अनुसार आप उक्त लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा  मे पूर्ण सफल हुए है, अतः आप बधाई के पात्र है। इन नियमों मे एक नियम वाहन के प्रदूषण प्रमाण की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया गया हैं ताकि पर्यावरण को प्रदूषित बनाने पर नियंत्रण किया जा सके। इस प्रदूषण प्रमाण पत्र के अभाव मे 10000/- रूपये का दंडात्मक प्रावधान का भी मै  स्वागत करता हूँ। निश्चित तौर पर उक्त दंडात्मक प्रावधान माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पर्यावरण प्रदूषण के  पालन हेतु  लागू किये गये ताकि पर्यावरण के प्रदूषण पर नियंत्रण कर मानव जाति की रक्षा कर पर्यावरण संतुलन बनाया जा सके।  आपका चंद दिन पहले आपकी सरकार द्वारा लिये गये उक्त दंडात्मक प्रावधानों का डट कर लागू कराने का प्रयास और किसी भी प्रावधान मे कोई ढील न देने के संकल्प को भी देख कर प्रसन्नता हुई क्योंकि आपके दिल मे आम जनता के जीवन की रक्षा का संकल्प सर्वोपरि है।   

परन्तू खेद और दुःख का विषय है आपके विभाग ने उच्चतम न्यायालय के अदशों के कार्यान्वयन के जो नियम लागू किये हैं उनका कैसे मखौल और मज़ाक उड़ाया जा रहा है।  जिसको देख कर निहायत अफसोस होता है कि प्रदूषण नियंत्रण केंद्र का एक अदना संचालक किस तरह उच्चतम न्यायालय और आपकी सरकार की आँखों मे धूल झोक कर व्यवस्था को नाकामयाब कर चुनौती दे  रहा हैं, जिसकी एक छोटीसी बानगी मै आपके समक्ष रखना चाहता हूँ।  दिनांक 06.09.2019 प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र लेने हेतु हम पीयूसी (Pollution Under Control) केंद्र गये जो कि भारत पेट्रोलियम पेट्रोल पम्प, सैक्टर 35, नोएडा  मे स्थित केंद्र "Natural Welfare Association" Centre Code 997 द्वारा संचालित किया जा रहा है।  लंबी लाइन मे खड़े लोग पूर्व से ही अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। उम्र के इस आखिरी पड़ाव के बाबजूद भी मैं अन्य लोगो की तरह प्रदूषण प्रमाण पत्र लेने हेतु उक्त पंक्ति मे खड़ा हो गया। यध्यपि तेज धूप थी पर सड़क परिवहन विभाग के आदेशों का भारत के एक जागरूक नागरिक की तरह  पालन हेतु  इतने कष्ट को भुगतना तो जायज़ मानता हूँ। पर उक्त केंद्र की मनमानी और भ्रष्ट आचरण देख कर हार्दिक दुःख हुआ। उंक्त केंद्र पर कुछ लोग लाइन के इतर ज्यादा पैसे देकर प्रमाण पत्र बाद मे लेने के आश्वासन के बाद जा रहे थे और लाइन मे खड़े अन्य लोगो के साथ केंद्र संचालक द्वारा की जा रही क्रूरता को सहन करने को मजबूर थे। उक्त प्रदूषण केंद्र पर जब मै अपनी Swift कार जिसका नंबर MP-07/CA 8150 का PUC प्रमाण पत्र लेने गया तो केंद्र पर  हो रही उक्त घोर अनियमितता का विरोध किया। मै हतप्रभ था कि लोगो से अधिक पैसे लेकर बगैर लाइन लगाए और बगैर वाहन का मशीन से प्रदूषण स्तर जाँचे  लोग प्रमाण पत्र ले रहे थे। मै वरिष्ठ नागरिक हूँ लगभग 1.30 घंटे लाइन मे लगकर धूप मे खड़ा था पर  बगैर लाइन मे लगे लोगो से  अधिक पैसे लेकर और बगैर "प्रदूषण स्तर" को मशीन से जाँचे  प्रमाण पत्र जारी का जब हमने विरोध किया तो मेरे नंबर आने पर उस केंद्र संचालक ने हमारी कार का प्रमाण पत्र ये कह कर देने से इंकार कर दिया कि आपकी गाड़ी मध्य प्रदेश की है इसलिए इसका प्रदूषण  प्रमाण पत्र यहाँ से जारी नहीं होगा। जिस प्रदूषण नियंत्रण केंद्र से सैकड़ो वाहन बगैर कोई प्रदूषण जांच किये प्रदूषण प्रमाण पत्र प्राप्त करे जा रहे हों  उस केंद्र के द्वारा महज इस बिना पर पीयूसी जारी करने से मना कर दिया जाता है कि गाड़ी मध्य प्रदेश की है? जबकि आरसी, डीएल, इन्सुयोरेंस हमारे पास था!  मै शपथ पूर्वक आपसे अनुरोध करता हूँ कि उक्त प्रदूषण  केंद्र मे मेरे द्वारा लगाए आरोप की सख्त निष्पक्ष जांच करें उक्त आरोपों  को आप सही पायेंगे।  
  
माननीय गडकरी जी टीवी, समाचार पत्रों मे  आपने स्वयं माना है कि आपका भी एक बार चालान कट चुका है। महोदय आपने गलती की थी अतः आपका चालान कटना उचित था पर हम जैसों की तो कोई गलती नहीं पर भ्रष्ट आचरण करने बाले व्यवस्था के ये "दीमक"  प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र न देकर  हमसे बलपूर्वक गलती करा कर चालान काटने पर आमदा हैं? आप जैसे आर्थिक और राजनैतिक रूप से प्रभावशाली और बलशाली लोग हम जैसे निरीह और कमजोर वरिष्ठ नागरिक के दिल पर बीत रही उस क्रूरता का अंदाज नहीं लगा सकते जिसको डेढ़ घंटा कड़ी धूप मे खड़े रह कर जब उसका नंबर आये तो प्रदूषण प्रमाण पत्र केवल इस बिना पर जारी करने से मना कर दिया जाये कि आपकी गाड़ी मध्य प्रदेश की है?? ये क्रूरता और अमानवीयता की पराकाष्ठा है।  क्या दूसरे प्रदेश की गाड़ियों को अन्य प्रदेश मे प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता हैं?? और यदि हम 300/- रुपए की रिश्वत केंद्र संचालक को दे दे तो प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता हैं?
हम आपके और माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देश मानने के लिये सहमत ही नहीं बाध्य है पर आपके मातहत कम करने बाला  प्रदूषण नियंत्रण केंद्र आपके आदेश की  अवेहलना कर  अतिवादियों की तरह अपने निजी स्वार्थ, भ्रष्ट और आर्थिक लाभ के लिये आम नागरिकों को  मानसिक और शारीरिक यंत्रणा दे रहा हैं।

दुःख इस बात का तो है ही की एक छोटा मामूली प्रदूषण नियंत्रण केंद्र संचालक अपने मनमाने व्यवहार से लोगो को आहात करता है लेकिन उससे ज्यादा दुःख और कष्ट इस बात का है जब प्रदूषण  नियंत्रण केंद्र सैक्टर 35 के इस मनमानीपूर्ण व्यवहार की शिकायत आपको ट्वीटर पर की जाती है पर खेद है कोई कार्यवाही नहीं होती। दुःख इस बात का भी  है उक्त केंद्र की शिकायत जब भारत पेट्रोलियम कंपनी को की जाती है तो बगैर कोई कार्यवाही के शिकायत बंद कर दी जाती हैं और शिकायत बंद करने का एसएमएस भी हमे किया जाता हैं!! आपकी व्यवस्था की ये कारगुजारी आम जनता को मुंह चिढ़ाती हैं। दुःख इस बात का भी  है कि माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, नोएडा यातायात पुलिस, नोएडा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला कलेक्टर नोएडा, पर्यावरण बोर्ड लखनऊ, प्रधान मंत्री  नमो एप्प, राष्ट्रीय हरित अभिकरण को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती। उत्तर प्रदेश पुलिस के फोन नंबर 100 पर शिकायत दर्ज़ तो की पर दिनक 07.09.2019 को  माननीय श्री उमेश, उप निरीक्षक, चौकी मोरना नोएडा के कहने के बाबजूद भी हमारी तरह उनको भी चलता कर कोई कार्यवाही नही की।   उक्त प्रदूषण केंद्र हमारी मोटर साइकल क्रमांक एमपी-04/एक्सएम 4675 को भी मध्यप्रदेश का होने के कारण भी  प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी कर देने से मना कर देता हैं। (केंद्र के कम्प्युटर का स्क्रीन शॉट संलग्न)। हमे तो बचपन मे सुनी वह कहावत याद आती है "मारे और रोने भी न दे"। आज यदि यातायात विभाग हमारे वाहन को रोक कर "प्रदूषण प्रमाण पत्र"  न प्रस्तुत करने पर 10000/- रुपये जुर्माना माँगेगा तो इसके लिये कौन जिम्मेदार होगा?

मुझे मालूम है आपकी ज़िम्मेदारी यातायात के कानूनी प्रावधानों को सिर्फ आम जनता पर लागू कराने की  है, इन प्रावधानों को लागू  करने मे आ रही आम जनता की समस्याओं का योग क्षेम करना आपके कर्तव्यों मे नहीं होगा? श्रीमान तब आपको ये अवश्य ही याद रखना होगा कि ये अशुभ लक्षण एक कल्याण कारक राज्य के राजा के न  होकर एक "अंधेर नगरी चौपट राजा" के राज्य का होगा? और इस तरह आप जैसे माननीय पुरुष  अपकीर्ति को प्राप्त होंगे? और  अपकीर्ति के बारे मे भगवत गीता मे भगवान श्री कृष्ण कहते है:-

अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।
संभावितस्य        चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते।।   (अध्याय 2 श्लोक 34)    
             अर्थात
(सब प्राणी भी तेरी सदा रहनेवाली अपकीर्ति का कथन करेंगे। वह अपकीर्ति माननीय पुरुष के लिये मृत्युसे भी बढ़कर दुःखदायी होती है।)
आज की इस घटना पर स्वर्गीय श्री लाल शुक्ल जी द्वारा रचित कालजयी कृति "राग दरबारी" रह रह कर याद आ रही है। सारी व्यवस्था एवं न्यायालय "राग दरबारी" के लँगड़े के रूप मे निरीह कमजोर कड़ी, हम जैसे नागरिकों के विरुद्ध  10000/- की दंडात्मक पेनल्टी लगा कर यातायात पुलिस  यही सबाल करेगी कि "प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र" न लेने के कारण एवं सरकार द्वारा लागू  वाहन अधिनियम के आदेश की अवेहलना के आरोप मे विजय सहगल  पर 10000/- रुपए का जुर्माना लगाया जाता हैं!!

भवदीय

विजय सहगल



1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

bilkul sahi kaha hai. Sabhi centers ka yahi haal hai aur hamara bhi puc nahi ban paya