रविवार, 4 जनवरी 2026

पंजाब नेशनल बैंक के उच्च प्रबंधन की निर्दयता

 

"निर्दयी - पीएनबी उच्च प्रबंधन"









आज मै अपने सुधि पाठकों का ध्यानकर्षण पंजाब नेशनल बैंक के उच्च प्रबंधन के निर्दयी, निष्ठुर, कठोर और अमानवीय व्यवहार की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ जिसमे मुझ जैसे बरिष्ठ नागरिक और अपने ही बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी के विरुद्ध उक्त रवैया अपनाया जा रहा है। मै पिछले लगभग एक वर्ष से सर्कल कार्यालय, भोपाल  द्वारा मेरे साथ किये जा रहे क्रूर,  बेरहम और नृशंस रवैये की शिकायत ज़ोनल ऑफिस, मुख्य नोडल ऑफिसर, मुख्य सतर्कता अधिकारी और अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक से कर रहा हूँ,  इन सब अधिकारियों को 70-80 ईमेल भेजने के बावजूद आज तक मेरी शिकायत का समाधान नहीं किया गया।

आइये सर्कल ऑफिस के विरुद्ध शिकायत की चर्चा करते हैं। वित्त  वर्ष 2010-11 मे 9वें द्व्यि पक्षीय वेतन समझौते के अंतर्गत  बैंक (e-obc) के सभी कर्मियों को वेतन का एरियर का भुगतान किया गया था। पर मुझ जैसे अनेक दुर्भाग्यशाली बैंक कर्मचारी और अधिकारियों को पेंशन का एक और विकल्प लेने (सेकंड ऑप्शन) के कारण, मिलने वाला लगभग सारा एरियर पेंशन के दूसरे विकल्प की लागत, मूल्य (cost) के रूप मे बैंक ने बापस ले लिया। यही नहीं, दोहरी मार के रूप मे इस धन राशि पर नियमानुसार आयकर भी वसूला गया जो पेंशन के सेकंड विकल्प लेने वालों को मिला ही नहीं। जो मेरे प्रकरण मे लगभग 12000 रुपए था। ये आयकर बैंक के हर उस कर्मचारी अधिकारी से लिया गया जिसने पेंशन का द्व्तिय (सेकंड) विकल्प लिया था। ऐसे कर्मचारी अधिकारियों की संख्या हजारों मे निश्चित ही होगी और आयकर राशि करोड़ के लगभग होगी जिसकी कल्पना सहज ही की जा सकती हैं और शिकायत का मुद्दा ही ये आयकर राशि हैं जो बैंक ने मेरे सहित सैकड़ों लोगो के  वेतन से काट तो ली लेकिन आयकर विभाग को जमा नहीं की। मेरे मामले मे भी यही हुआ। बैंक ने मेरे वेतन से आयकर की राशि रुपए 12000 काट तो ली पर उसे आयकर विभाग को आज तक जमा नहीं किया, जिसका उल्लेख बैंक द्वारा प्रदत्त वित्त वर्ष 2010-11 के फॉर्म 16 मे स्पष्ट रूप से उल्लेख किया हैं। अब आयकर विभाग मुझ से उक्त आयकर की धनराशि बसूली हेतु नोटिस दे रहा है। यही नहीं उक्त आयकर की राशि पर हर दिन ब्याज भी लगा रहा है। यदि पेंशन का सेकंड ऑप्शन लेने वाले स्टाफ की आयकर विवरणी मे वित्त वर्ष 2010-11 मे आयकर की कोई मांग नहीं है तो सौ प्रतिशत मान के चले कि उनसे दुबारा आयकर की बसूली की गयी है क्योंकि बैंक ने पेंशन की सेकंड ऑप्शन लेने वालों का टीडीएस, आयकर विभाग मे अब तक जमा ही नहीं किया। 

उक्त संबंध मे पहला मेल दिनक 18 फरवरी 2025 को मैंने पीएनबी के महाप्रबंधक (पर्सनल) को एवं प्रतिलिपि पेंशन विभाग दिल्ली एवं ज़ोनल ऑफिस भोपाल को लिख कर मेरे वेतन से काटी गयी आयकर की राशि रुपए 12000 आयकर विभाग को जमा करने का अनुरोध किया। पेंशन विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही कर इस प्रकरण को भोपाल के अधिकारियों से शुरू करने का अनुरोध किया जिसकी मै प्रशंसा करता हूँ। 26 फरवरी 2025 को ज़ोनल ऑफिस भोपाल से और 16 अप्रैल 2025 से सर्कल ऑफिस भोपाल से लगातार 25 अप्रैल, 7 मई, 30 मई को पीएनओ सहित सर्कल और ज़ोनल ऑफिस को, 8 जून, 17 जून, 24 जून, 18 जुलाई, 13 अगस्त 2025 को आवेदन, अनुस्मारक, निवेदन दिये पर उत्तर तो दूर इन निष्ठुर अधिकारियों ने पावती तक  प्रेषित नहीं की। 14 अगस्त और 25 नवंबर 2025  को बैंक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा इन्ही  तारीख को ही बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी को बैंक के सर्कल ऑफिस, ज़ोनल ऑफिस और मुख्य प्रिन्सिपल नोडल ऑफिसर के वर्ताव को ध्यानाकर्षित  कर शिकायत के समाधान का निवेदन किया पर ढांक के वही तीन पात, कोई कार्यवाही नहीं की गयी।

बैंक के उच्च प्रबंधन द्वारा मनमानी तरीके से हमारे सभी अनुरोधों को नज़रअंदाज़ करने, मामले की उपेक्षा करने और सभी अनुरोधों की अवेहलना करने के कारण मैंने भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS) प्लेटफॉर्म पर दिनांक 15 अगस्त 2025 को शिकायत कर्मांक DEABD/E/2025/0067537 के माध्यम से की। भारत सरकार के उक्त मंच के दवाब मे बैंक ने पहली बार 30 अगस्त 2025 को मुझ से पूरी जानकारी होने के बावजूद आयकर रुपए 12000 के बारे मे जानकारी मांगने का नाटक किया ताकि मामले को किसी भी तरह अटकाया, लटकाया और भटकाया जा सके। मैंने 31 अगस्त 2025 को सर्कल ऑफिस, भोपाल द्वारा उनके 30 अगस्त 2025 के मेल का बिंदुबार उत्तर प्रेषित कर दिया एवं उपलब्ध आवश्यक डॉकयुमेंट संलग्न कर दिये। बैंक के प्रिन्सिपल नोडल ऑफिसर, गुरुग्राम डॉ॰ आशुतोष कुमार झा (महाप्रबंधक) ने मिथ्या आधार पर झूठ बोल कर  भारत सरकार के एक अति उत्तम, आम नागरिकों के हितार्थ,  शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म का दुर्पयोग कर दिनांक  01.09.2025 को CPGRAMS की शिकायत को इस मिथ्या आरोप के आधार पर बंद करा दिया गया, कि शिकायतकर्ता को  30 अगस्त 2025 के मेल के माध्यम से पत्र भेज दिया गया। मेरे द्वारा CPGRAMS पर पुनः अपील क्रमांक DEABD/E/A/25/0012260 को इसी मिथ्या आरोप के आधार पर बंद करा दिया,  उन्होने शिकायत का निराकरण किये बगैर और  हमारे उत्तर दिनांक 31 अगस्त 2025 को बगैर देखे, बगैर उल्लेख किये अपने अधिकार का दुर्पयोग किया।          

बाध्य होकर 3 सितम्बर 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बैंकिंग लोकपाल को शिकायत क्रमांक RBI/CMS/N202526004012000/2025-26 के माध्यम से बैंक की शिकायत की गयी लेकिन बैंक द्वारा लोकपाल के समक्ष इस मामले को employer और employee का मामला बता कर शिकयात को बंद करा दिया गया। मैंने बैंकिंग लोकपाल को अपनी अपील क्रमांक RBI/CMS/N202526004012172/2025-26  दिनांक 05.09.2025 के माध्यम से ये बताने का प्रयास किया कि यह मामला employer और employee का न होकर बैंक द्वारा वेतन से काटे गये टीडीएस को आयकर विभाग मे न जमा करने के संबंध मे सेवा मे कमी से संबन्धित है लेकिन खेद है बैंकिंग लोकपाल ने उक्त प्रकरण को समाप्त कर दिया।

बड़ा खेद और  अफसोस है कि मेरे द्वारा 31 अगस्त 2025 को बिंदुबार उत्तर के बावजूद मुझे ही चोर ठहराते हुए सर्कल ऑफिस के मार्केटिंग विभाग अपने reminder 12.09.2025 और 25.11.2025 के माध्यम से बैंक के 30 अगस्त 2025  के मेल का जबाव न देने का आरोप लगा रहे है। खेद और अफसोस इस बात का हैं कि मेरे 31 अगस्त 2025 का मेल सर्कल ऑफिस, ज़ोनल ऑफिस, प्रिन्सिपल नोडल ऑफिसर, एमडी को मिल रहा है तो ये कैसे संभव है कि उनके मार्केटिंग विभाग को न मिले। मैंने पुनः बिंदुबार उत्तर और उपलब्ध डॉक्युमेंट्स मार्केटिंग विभाग सहित सर्कल ऑफिस, ज़ोनल ऑफिस, प्रिन्सिपल नोडल ऑफिस और एमडी महोदय को प्रेषित किए हैं। अफसोस है कि  सिवाय एमडी महोदय के किसी अधिकारी ने पावती प्रेषित नहीं की है।

फरवरी 2025 से चल रहे इस शिकायत प्रकरण मे मै पीएनबी बैंक के उच्च प्रबंधन से दुःखी और निराश अवश्य हूँ पर परास्त नहीं हुआ। बैंक द्वारा एक स्पष्ट और क्लियर कट शिकायत के निपटान मे देरी और विलंब कर रुकावट डालना के पीछे इस आयकर की धनराशि मे कोई बड़े फ़्रौड, धोखाधड़ी की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता? इस पर भी बैंक द्वारा जांच करने की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए।    

बैंक के ये सारी कार्यवाहियाँ मेरी शिकायत को लटकाने और भटकाने के प्रयास कर मुझ वरिष्ठ सेवानिवृत्त स्टाफ को मानसिक रूप से यंत्रणा देने का कुप्रयास है।

कृपया सुधिजन इस प्रकरण मे अपनी राय देकर मेरा मार्गदर्शन और सहायता करें तो अति कृपा होगी।

विजय सहगल                            

8 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

एक दम सही बात कहीं आपने

बेनामी ने कहा…

भाईसाब, रिटायरीज के साथ बैंक के सेवा रत अधिकारीवर्ग का व्यवहार सौतेला होता है। वो बिना ये सोचे कि वो भी रिटायर होंगे निरंतर हमारे अधिकारों पर कुठाराघात करते रहते हैं। कोई भी बैंक हो, हर जगह यही स्थिति है।

शंकर भट्टाचार्य ने कहा…

सहगल साहब, आप जैसे इतना पेचीदा मामला तो मेरा नहीं हुआ परन्तु मुझे भी आयकर विभाग से नोटिस जारी किया गया था। एक नहीं चार-चार नोटिस! वही बात जो आप और मेरे जैसे बहुत लोगों को साथ हुआ था। एरियर तो पूरा के पूरा बैंक ने ले लिया और एरियर पर जो टैक्स काटा वह अपनी तनख्वाह में से दिया। और वह टैक्स काट के जमा भी नहीं किया सैलरी अकाउंट में जमा कर दिया फिर आयकर विभाग ने उधर टैक्स अमाउंट को दोबारा मैं ब्याज वसूली का नोटिस मेरे पास भेजा।
मैंने अपनी का श्री अनुराग गर्ग के सहयोग से पूरे के पूरे निपटारा किया और पूरी दोष बैंक के ऊपर दिया उसके बाद से आज एक भी डिमांड खड़ा नहीं है।
लेकिन मेरे मन में एक सवाल अभी भी है कि हमारे जैसे बहुत लोगों का TDS amount (जो की Madras High Court के Interim Order के चलते) ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स के Sundry Account में जमा किया गया था और बाद में OBC को PNB में merger & amalgamation के समय वही TDS Amount सीधा पंजाब नेशनल बैंक के Sundry Account में transfer कर दिया गया!! अब सब से बड़ा सवाल - वह पैसा आखिर गया कहां????
इसके मतलब हमारे और आपके (हम जैसे सभी के) टैक्स का पैसा आयकर विभाग में जमा ना हो कर बैंक के "P & L" में जमा हो गया! (??) - इसका हिसाब कौन देगा??
मैं भी आपके साथ लड़ना चाहता हूं।
बहुत से भूतपूर्व कर्मचारी एवं कर्मरत कर्मचारी आपके इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं।

शंकर भट्टाचार्य ने कहा…

सहगल साहब, आप जैसे इतना पेचीदा मामला तो मेरा नहीं हुआ परन्तु मुझे भी आयकर विभाग से नोटिस जारी किया गया था। एक नहीं चार-चार नोटिस! वही बात जो आप और मेरे जैसे बहुत लोगों को साथ हुआ था। एरियर तो पूरा के पूरा बैंक ने ले लिया और एरियर पर जो टैक्स काटा वह अपनी तनख्वाह में से दिया। और वह टैक्स काट के जमा भी नहीं किया सैलरी अकाउंट में जमा कर दिया फिर आयकर विभाग ने उधर टैक्स अमाउंट को दोबारा मैं ब्याज वसूली का नोटिस मेरे पास भेजा।
मैंने अपनी का श्री अनुराग गर्ग के सहयोग से पूरे के पूरे निपटारा किया और पूरी दोष बैंक के ऊपर दिया उसके बाद से आज एक भी डिमांड खड़ा नहीं है।
लेकिन मेरे मन में एक सवाल अभी भी है कि हमारे जैसे बहुत लोगों का TDS amount (जो की Madras High Court के Interim Order के चलते) ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स के Sundry Account में जमा किया गया था और बाद में OBC को PNB में merger & amalgamation के समय वही TDS Amount सीधा पंजाब नेशनल बैंक के Sundry Account में transfer कर दिया गया!! अब सब से बड़ा सवाल - वह पैसा आखिर गया कहां????
इसके मतलब हमारे और आपके (हम जैसे सभी के) टैक्स का पैसा आयकर विभाग में जमा ना हो कर बैंक के "P & L" में जमा हो गया! (??) - इसका हिसाब कौन देगा??
मैं भी आपके साथ लड़ना चाहता हूं।
बहुत से भूतपूर्व कर्मचारी एवं कर्मरत कर्मचारी आपके इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं।

बेनामी ने कहा…

Dear Sehgal sahib, lots of appreciations for your sincere efforts and courageous steps for bringing into light the glaring point of TDS. Non deposit of TDS amount to GOI's account within stipulated time lines is heinous crime. Keep it up, make a reference to Income tax department.

विजय सहगल ने कहा…

*सहगल साहब, आप जैसे इतना पेचीदा मामला तो मेरा नहीं हुआ परन्तु मुझे भी आयकर विभाग से नोटिस जारी किया गया था। एक नहीं चार-चार नोटिस! वही बात जो आप और मेरे जैसे बहुत लोगों को साथ हुआ था। एरियर तो पूरा के पूरा बैंक ने ले लिया और एरियर पर जो टैक्स काटा वह अपनी तनख्वाह में से दिया। और वह टैक्स काट कर आयकर विभाग में जमा भी नहीं किया!! Sundry अकाउंट में जमा कर दिया! फिर आयकर विभाग ने उस टैक्स अमाउंट को दोबारा मय ब्याज वसूली का नोटिस मेरे पास भेजा।*

*मैंने अपनी CA के सहयोग से पूरे के पूरे निपटारा किया और पूरी दायित्व बैंक के ऊपर निर्धारित कर दिया। उसके बाद से आज एक भी डिमांड खड़ा नहीं है।*

*मेरे मन में एक सवाल अभी भी खड़ा है कि हमारे जैसे बहुत लोगों का TDS amount (जो की Madras High Court के Interim Order के चलते) ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स के Sundry Account में जमा किया गया था और बाद में OBC को PNB में merger & amalgamation के समय वही TDS Amount सीधा पंजाब नेशनल बैंक के Sundry Account में transfer कर दिया गया!! अब सब से बड़ा सवाल - वह पैसा आखिर गया कहां????*
शंकर भट्टाचार्य ग्वालियर

*इसके मतलब हमारे और आपके (हम जैसे सभी के) टैक्स का पैसा आयकर विभाग में जमा ना हो कर क्या बैंक "P & L" में "अंतरण" हो गया! (??) - यह मेरा एक सवाल है मात्र, क्यूंकि मैं तो अज्ञानी व्यक्ति हूं!! इसका हिसाब कौन देगा??*

*मैं भी आपके साथ लड़ना चाहता हूं।*
*बहुत से भूतपूर्व कर्मचारी एवं कर्मरत कर्मचारी आपके इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं।*
*आप अकेले नहीं हैं, सहगल साहब!*

*आप जो मुद्दा बैंक के साथ उठाए हैं, निश्चित रूप से ज्वलंत मुद्दा है। और मैं इसका सराहना करता हूं। मैं आपका साथ हूं।* 💪💪💪
शंकर भट्टाचार्य,

विजय सहगल ने कहा…

*I am very surprised that in FY 2010-2011, OBC realized TDS of Rs 12,000 and kept it in the Sundry account instead of remitting it to the exchequer. You sincerely tried to resolve the issue by writing letters and emails from pillar to post to PNB, but nobody was serious about disposing of such a trifling issue. Furthermore, you didn't mention any correspondence with OBC in this matter. It seems that even the auditors of OBC probably didn't raise any objections to such an anomaly...!*
*Now Income Tax department has been demanding Rs12000/- alongwith interest.I am unable to understand why PNB is still holding Rs12000/-.You can't be held responsible for such a blunder.I think you have used your all arrows but to no avail & left last resort to proceed before court of law to get justice.All legal expenses should be reimbursed to you by the bank...!*
Surendra Singh Kushwah Gwalior

विजय सहगल ने कहा…

आज बैंक के महा प्रबन्धक श्री आशुतोष झा साहब का फोन आया था, उन्होने शीघ्र समाधान का assurance दिया है। देखते हैं कि क्या होता है?
विजय सहगल