बुधवार, 21 मई 2025

भूटान - गरजते ड्रेगन की भूमि" (शहर-फुएंत्शोलिंग)

 

"भूटान - गरजते ड्रेगन की भूमि" (शहर-फुएंत्शोलिंग)"









भूटान मेरे लिए दो मायनों मे विशेष महत्व रखता है। पहला सन् 1965 मे पहली कक्षा के दौरान  हमारे साथ एक छात्र था जिसके पिता सेना के किसी उपक्रम मे पदस्थ थे उसका नाम तो याद नहीं लेकिन और उस का  उपनाम भूटानी था, तब मेरा  पहली बार भूटान शब्द से परिचय हुआ था। दूसरा  आज, 26 अप्रैल  2025 मे मुझे पहली बार आधिकारिक रूप से विदेश यात्रा के रूप मे  भूटान से रु-ब-रु होने का अवसर मिला। यूं तो अनाधिकारिक रूप से सिक्किम यात्रा के दौरान मित्र राष्ट्र होने के कारण नेपाल के पशुपति नगर मे 1-2 घंटे भ्रमण करने का सौभाग्य, आधार और मोबाइल नंबर की बुनियाद पर  मिला था, पर पासपोर्ट पर अधकारिक रूप से मित्र राष्ट्र भूटान की "आगमन पर वीज़ा" नीति के तहत बकायदा सील ठप्पा लगा कर आधिकारिक अनुमति से मिलने वाली  खुशी और  रोमांच के  अनुभव की  कुछ अलग ही बात थी।

यूं तो मैंने अपने यात्रा प्रवासों के दौरान अमृतसर और तुरतुक मे पाकिस्तान सीमा, नाथुला पास मे चीन सीमा, मेघालय की उमंगोट या दावकी नदी मे बांग्लादेश की सीमा और मिरिक मे नेपाल सीमा को अपने देश की सीमाओं से खड़े होकर, गर्व से  देखने का जो सुख, सौभाग्य और संतुष्टि से उत्पन्न  रोमांच  को देखा उसे  शब्दों मे बयान नहीं किया जा सकता। ऐसा ही कुछ गर्वोन्माद, उल्लास और उत्साह भूटान देश की यात्रा के दौरान मैंने अनुभव किया। ऐसी मंगल भावनाएं यूं ही नहीं थी क्योंकि भूटान हमारा सबसे निकटस्थ और विश्वसनीय, मित्र राष्ट्र जो ठहरा!!

हम 11 परिवारों के 22 सदस्यों की तैयारी हमारे मित्र श्याम टंडन के नेतृत्व मे बैसे तो 2-3 महीने पहले से चल रही थी पर एन वक्त पर यात्रा इन्शुरेंस के आभाव मे यात्रा की उम्मीदों  पर  तुषारपात होने वाला था लेकिन उनकी तत्परता से उक्त संकट से उबर कर हमारे ग्रुप ने  26 अप्रैल 2025 को जलपाई गुड़ी के बागडोगरा से अपनी भूटान यात्रा आरंभ की। दोपहर मे भूटान मे प्रवेश के लिए हमे भारत के पश्चिमी बंगाल के जयगाँव तक की लगभग 140 किमी की यात्रा करनी थी। राष्ट्रीय राजमार्ग तो ठीक था पर जयगाँव शहर मे घुसते ही अहसास हो गया कि हम सचमुच ही किसी गाँव मे हैं। रास्ता गड्ढों, टूटी सड़कों और उड़ती धूल से धूल-धूसरित था। नाम भले ही जयगाँव हो लेकिन भूटान के प्रवेश द्वार और उससे लगती सीमा के कारण इसे बड़ा शहर कहना न्यायोचित होगा। लगभग आधा-पौना घंटे हिचकोले खाते हुए हमे हमारे टूर गाइड ने सूचित किया कि अब हमे बस और उसमे अपना सामान  छोड़ कर,  सौ-दो सौ कदम पैदल चल कर भूटान मे प्रवेश करना पड़ेगा। पहचान के लिए पासपोर्ट साथ मे रखने की भी सलाह गाइड ने दे दी थी। जयगाँव के बाजार की गली कूँचों से हमारा ग्रुप एक साथ ऐसे आगे बढ़ रहा था जैसे बगैर दूल्हे की छोटी सी बारात! एक 7-8 फुट चौड़ी गली मे स्टेशनरी किराने की दुकान के सामने बने एक छोटे से दरवाजे के अंदर प्रवेश करते ही भारतीय सीमा सुरक्षा दल के कर्मी द्वारा हमारे  पासपोर्ट से हमारी पहचान की गई। कहीं कोई ऐसा तामझाम देखने को नहीं मिला जो ये महसूस हो कि भारत-भूटान देशों की सीमा से भूटान मे प्रवेश कर रहें हों।  चंद कदमों के बाद ऐसी ही पहचान की औपचारिकता  भूटान की रॉयल पुलिस द्वारा की गई और अब  हम भूटान मे थे। इतनी सहजता और सरलता से किसी देश की सीमा मे प्रवेश करना, सहसा विश्वास नहीं हुआ। एक लंबे गलियारे से होकर भूटान के एक दूसरे काउंटर पर एक-एक करके पासपोर्ट की प्रविष्टि कर फोटो खींची गयी। अब हम आधिकारिक रूप से भूटान मे प्रवेश के लिए तैयार थे। भूटान मे प्रवेश करते समय पास ही के एक हाल से बड़ी संख्या मे लोगो का आना जाना देख कर जिज्ञासा हुई कि ये कौन लोग हैं जो हमारे साथ आते जाते तो नहीं दिखे? मेरे गाइड टाशी ने हमे बताया कि ये  भारत/भूटान  के  वो नागरिक हैं जो मतदाता पहचान पत्र के आधार पर भूटान मे प्रवेश करते हैं, जो भूटान आना चाहते हैं। ऐसे भारतीय नागरिकों को सिर्फ 24 घंटे के लिए बिना किसी औपचारिकता के भूटान आने और रुकने की अनुमति हैं। इन भारतीय नागरिकों को 24 घंटे से ज्यादा एक मिनिट भी अतिरिक्त रुकने पर भूटान के क़ानूनों के अंतर्गत आवश्यक आव्रजन शुल्क जो लगभग   सौ बारह रुपए प्रतिदिन होता है भूटान सरकार को देना पड़ेगा अन्यथा अनधिकृत प्रवेश के आधार पर कानूनी कार्यवाही किए जाने का प्रावधान है। इसलिए भूटान की सीमा पर मेट्रो स्टेशन की तरह, यहाँ मशीने लगा कर प्रवेश/निकासी का रिकॉर्ड रक्खा जाता हैं। इसके विपरीत भूटान के नागरिकों को भारत मे कभी भी कितने दिन, महीनों और वर्ष तक भारत मे रहने की अनुमति हैं। वे भारत मे शिक्षा, संपत्ति और व्यापार विना किसी पूर्व अनुमति के ग्रहण कर सकते हैं। ऐसा भारत मे भूटान की विशेष स्थिति और अति घनिष्ठ/पसंदीदा  राष्ट्र होने के कारण भूटान को प्राप्त हैं।  यही कारण हैं कि भूटान की विदेश नीति, दोनों राष्ट्रों के आपसी सहयोग और विचार विमर्श कर, तय की जाती हैं। इसलिए ही दोनों देशों के नागरिक मुक्त रूप से बारंबार आवागमन कर सकते हैं।   

इस औपचारिकता के बाद अब हम भूटान के फुएंत्शोलिंग शहर मे थे। सामने दिखे बाज़ार, होटल और अन्य व्यापारिक संस्थानों, ट्रेफिक के अनुशासन, भूटान की नागरिकों के पहनावे  और भीड़-भाड़ मे एक दम कमी दिखना का, स्पष्ट बदलाव महसूस किया जा सकता था। पास मे ही पैदल हम लोग  अप्रवासन कार्यालय मे  भूटान आगमन से  3 मई 2025 तक के प्रवास  की अनुमति की औपचारिकता शीघ्र अतिशीघ्र सम्पन्न कर बाज़ार मे चहल कदमी करने लगे। हमारा सामान भी बस सहित भूटान मे वाहनों के आवागमन के लिए बने एक बड़े प्रवेश द्वार से पहुँच चुका था। सामने ही भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंप पर वाहनों की लंबी कतार को देख पूंछना लाज़मी था। भूटानी गाइड टाशी द्वारा बताया गया कि भूटान मे पेट्रोल, डीज़ल का रेट लगभग 59 रुपए/लीटर हैं।  अतः भारत से आने वाले प्रायः सारे दोपहिया और चार पहिया वाहन, भूटान से पूरा ईधन भरा कर बापस जाते हैं, जहां ईधन 107 रुपए लगभग हैं। इस शहर से आगे भारतीय वाहनों को भूटान मे प्रवेश की अनुमति साधारत: नहीं हैं अन्यथा लगभग ढाई हजार रुपए प्रतिदिन का शुल्क देय है। अब तक रात के 7 बज (भूटान मे 7.30, भूटान का समय भारतीय समय से आधा घंटे आगे हैं) चुके थे। फुएंत्शोलिंग मे ही हमारे रात्री रुकने की व्यवस्था थी, अतः फुएंत्शोलिंग मे ही रात्री भोजन कर हम लोग अपने अपने कमरों मे प्रस्थान कर गये।

उन दिनों, जब भूटान और भारत की सीमा स्पष्ट नहीं थी तब भूटान के रॉयल परिवार की राजमाता आशी फुंटशो   ने 1967 मे भूटान की सांस्कृति, सभ्यता और संस्कार को प्रदर्शित करने के लिए भारत भूटान सीमा पर खरबंदी गोम्पा बौद्ध मठ को बनवाया था। बौद्ध मठ से लगे हुए परिसर मे ही भूटान के शाही परिवार का महल भी बना हुआ है जिसका वास्तु भूटान शैली मे ही बनाया गया हैं। यहाँ बने एक व्यू पॉइंट से भारत और भूटान की सीमाओं, तीस्ता नदी और उसके पीछे भूटान के हरे भरे पर्वतों को स्पष्ट देखा जा सकता हैं। पूरे भूटान मे सभी घरों, बहुमंज़िली इमारतों व्यापारिक संस्थानों के ऊपरी मंजिल की बनावट एक तरह से हैं। टीन की रंगबिरंगी इमारतों की छत्तों को एक रूप से ढांक कर बनाया गया हैं जो भूटान की एक विशेष पहचान हैं। यही पहचान यहाँ फुएंत्शोलिंग मे भारत-भूटान सीमा पर बने  घरों, आवासों, बहू मंजिली इमारतों को भी इस व्यू पॉइंट से स्पष्ट रूप से विभाजित किया जा सकता हैं।

                                                                  ...........cont

विजय सहगल   

                         

7 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

GBVT Sarma

बेनामी ने कहा…

बहुत सुंदर चित्रण के साथ आपने भूटान भ्रमण की प्रकिया, संस्कृति तथा भूटान-भारत के संबंधों का सुंदर विवरण प्रस्तुत किया ।

विजय सहगल ने कहा…

Bhaut badhiya sir 🫡 dil khush ho gya mein ye post dekhkar atit mein chala gaya meri bhi bike rides zehan mein aa gyi jinme maine hindustan ke border se lagte desh ka bharman kia thaa 😊😍
Vikram Pratap Singh

विजय सहगल ने कहा…

Chalo fir aaj ek aaj task rakhte hai sir Vijay sahgal ji ki post se inspire hokar jinn jinn ghumakad ne border ki ghummkddi ki hai unka colage ya photo share ki jaaye group mein
Vikram Pratap Singh
TGI Group

बेनामी ने कहा…

जी बहुत बढ़िया

संजय कौशिक ने कहा…

बढ़िया व्रतांत 👍

विजय सहगल ने कहा…

ये यादें तो जीवन भर के लिए हो गई, आपने बहुत अच्छे शब्दों में पिरोकर संजो लिया, धन्यवाद🙏
साधना मेहरोत्रा, लखनऊ