"मुख्तार
अंसारी - एक दुर्दांत अपराधी का अंत"
कभी दहशत और खौफ का पर्याय रहे पूर्वी उत्तर
प्रदेश के गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद के
रहने वाला दुर्दांत अपराधी रहे मुख्तार अंसारी पर संस्कृत के एक आदर्श
सूत्र "अति सर्वत्र वर्जयेत" सटीक और यथार्थ बैठती हैं अर्थात किसी भी
कार्य की अति से अच्छी नहीं होती। एक अच्छे कुल और परिवार मे जन्म लेने बावजूद
अपराध की दुनियाँ मे कदम बढ़ा कर मुख्तार अंसारी ने अपने समाज,
देश और कुल की मर्यादा को भंग किया और जिसकी परिणति उसकी जेल मे असमय,
कष्टकारी मौत के रूप मे सामने आयी। 1988
मे 25 वर्ष की उम्र मे मंडी परिषद के ठेकेदार सच्चिनन्द की हत्या के केस मे अपराध
की दुनियाँ मे कदम रखने वाले मुख्तार अंसारी ने ठेकेदारी मे अपना एकछत्र वर्चस्व
दिखाने के लिए जरायम की दुनियाँ मे प्रवेश किया। देश की स्वतन्त्रता के लिए
काँग्रेस मे रहते हुए अपने दादा और पिता के योगदान और देश के पूर्व उपराष्ट्रपति
डॉ हामिद अंसारी के खनदान के विपरीत आचरण
करने वाले, पूर्वी उत्तरप्रदेश मे आतंक
के खौफ और डर का पर्याय रहे मुख्तार अंसारी का डॉन,
माफिया के रूप मे कुख्याति अर्जित करना आश्चर्य और चिंतित करने वाला है।
65 से भी ज्यादा हत्या,
लूट, अपहरण,
जबरन बसूली और कब्जे के आरोपों का सामना कर रहे मुख्तार अंसारी ने माफियागिरी के
चलते 1996 मे पहली वार मऊ विधान सभा क्षेत्र से
विधायक के रूप मे निर्वाचन ने भारत मे
राजनीतिज्ञों और अपराधियों के गठजोड़ को नये सिरे से परिभाषित किया। पूर्वी
उत्तरप्रदेश मे अपने राजनैतिक हितों को साधने के लिए उत्तर प्रदेश के सपा,
बसपा, कौमी एकता दल,
सुहेल देव पार्टी, सहित अनेक दलों ने अपने
हितों के लिए उनका इस्तेमाल किया। मुलायम सिंह के शासन काल मे राजनैतिक पराश्रय
प्राप्त मुख्तार के खौफ और आतंक के ये आलम था कि अक्टूबर 2005 मे मऊ मे भड़के
हिंसात्मक दंगे के बीच खुली जीप पर बंदूक लहराते दंगाइयों का हौंसला बढ़ाते और दंगा
भड़काते वीडियो को सारे देश ने देखा। 2003
मे वाराणसी क्षेत्र के तत्कालीन डीएसपी श्री शैलेंद्र सिंह द्वारा मुख्तार अंसारी
से अवैध लाइट मशीन गन की बरामदी के बावजूद मुख्तार का तो कुछ नहीं हुआ अपितु इस
दुस्साहस के लिए तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने श्री शैलेंद्र सिंह को सेवा से
वर्खास्त कर हिरासत मे ले लिया "जो अंधेर नगरी चौपट राजा की" बेहूदा और
बेशर्म मिशाल थी।
2005 के चुनाव मे भाजप के श्री कृष्णनन्द
राय द्वारा मुख्तार के बड़े भाई अफजल अंसारी को
महज चुनाव मे हराने के कारण मुख्तार अंसारी द्वारा अपने गुर्गों के सहयोग
से दिन दहाड़े खुले आम हत्या करा आतंक फैलाने और राजनीतिक पराश्रय से निर्द्वंद
अपने काले साम्राज्य को फैलाना अराजकता,
अव्यवस्ता और अत्याचार की पराकाष्ठा थी जिसने मुख्तार अंसारी की स्वेच्छाचारिता,
अमानवीयता और निर्दयता को लोगो ने देखा और महसूस किया। आज जो काँग्रेस मुख्तार
अंसारी जैसे माफिया डॉन की मौत पर सवालिया निशान लगा यूपी सरकार को कठघरे मे खड़ा
कर रही हैं, पंजाब मे काँग्रेस
की इसी सरकार ने मुख्तार जैसे दुर्दांत
अपराधी को राज्याश्रय देकर रोपड़ की जेल मे अवैध ढंग से निरूढ़ कर जेल मे असंवैधानिक ढंग से सारी सुख,
सुविधायें उपलब्ध कराई, जो उत्तर प्रदेश मे योगी की सरकार के रहते
असंभव थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तकक्षेप के कारण ही मुख्तार अंसारी का बांदा जेल मे स्थानांतरण संभव हो सका,
ये दर्शाता हैं कि काँग्रेस का हाथ सदा अपराधियों के साथ रहा है।
यध्यपि स्वयं मुख्तार अंसारी ने न्यायधीश
महोदय के समक्ष उनको धीमा जहर देकर मारने की कोशिश की शिकायत की थी। मुख्तार के स्वास्थ
मे अचानक कमी को जेल नियमानुसार चिकिस्तकीय सुविधा उपलब्ध कराई गयी लेकिन हृदयाघात
के कारण उसको बचाया न जा सका। एक
दुर्दांत अपराधी का पुलिस अभिरक्षा मे मौत कानूनी दृष्टि से जांच और छानबीन के दायरे
मे है जिसकी न्यायिक जांच के आदेश शासन द्वारा दे
दिये गए हैं, डॉक्टर्स के पैनल
द्वारा मुख्तार अंसारी के शव का पोस्टमार्टम किया गया हैं,
आने वाले समय मे रिपोर्ट से मौत का कारण और स्पष्ट हो सकेंगे,
तब तक सभी राजनैतिक दलों को अपने राजनैतिक हितों के परे रिपोर्ट का इंतजार करना
चाहिए, लेकिन खेद और अफसोस का विषय हैं कि
काँग्रेस के श्री अधिरंजन जी, सपा के श्री
अखिलेश यादव, श्री शिवपाल सिंह और
श्री राम गोपाल यादव, बीएसपी की मायावती, आरजेडी के तेजश्वी यादव और ओवैसी द्वारा
मुख्तार की मौत पर शक जताते हुए इस साजिश की
जांच सीबीआई, सुप्रीम कोर्ट के जज या अन्य एजेंसियों से कराने की मांग करते हुए
उसके प्रति हमदर्दी जतायी जा रही है। मुख्तार अंसारी के बेटे और भाई द्वारा उसकी
मृत्यु पर इंसानियत की हत्या बताया। काश इन राजनैतिज्ञों द्वारा मुख्तार अंसारी
द्वारा दर्जनों निर्दोष हत्याओं मे पीढ़ित परिवारों जनों के वारे मे भी अपनी
हमदर्दी, सहानभूति और संवेदना
प्रकट की होती तो शायद इन दलों और उनके नेताओं पर तुष्टीकरण,
पक्षपात, भ्रष्टाचार का आरोप न
लगाया गया होता?
सपा,
बसपा, और काँग्रेस के शासन काल मे मिले राजनैतिक
पराश्रय और अनधिकृत रूप से कमाये करोड़ो-अरबों रूपये के बलबूते अपने रसूख,
बाहुबल और धनबल के चलते कानून और शासन को अपने पैरो तले रौंदने वाला मुख्तार
अंसारी ने जो जी मे आया किया, जैसा मन मे आया
किया। जेल मे विलसतापूर्ण जीवन का ये हाल था कि मछ्ली खाने के शौकन मुख्तार ने जेल मे ही मछ्ली पालने के लिए तालाब
खुदवा दिया, बैडमिंटन का शौक जेल मे
ही पूरा करने के लिए जेल मे ही बैडमिंटन का मैदान बनवा लिया। ये कानून के मखौल की
पराकाष्ठा नहीं थी तो क्या था कि उसके साथ बैडमिंटन खेलने के लिये निर्लज्ज जेल का
जेलर और अशिष्ट जिले का कलेक्टर कानून की इस मुखालफत मे मुख्तार अंसारी के सहभागी
और सहयोगी थे? लेकिन
योगी शासन के आते ही मुख्तार अंसारी को अहसास हो गया था कि अब उसकी कोई भी चाल,
चलने वाली नहीं हैं। उसका बाहुबल और धनबल अब कानून के सुरक्षा बलों के सामने
टिकने वाला नहीं है। अब उसकी गुंडई,
आतंक का रसूख समाप्त हो चुका था यही कारण था कि एक के बाद एक अनेक प्रकरणों मे उसे
मुजरिम घोषित कर सजा दी गयी जिसमे उम्र कैद तक की सजा भी शामिल थी। इसलिये उसने भरसक कोशिश की कि उसे उत्तर प्रदेश
के बाहर किसी जेल मे रक्खा जाय, पर उसके पूर्व आचरण
के चलते और कानून के शासन के सामने उसकी एक न चली और करोड़ो-अरबों की संपत्ति
के बावजूद जेल मे उसे जमीन पर सोने और घड़े
का पानी पीने और जेल की थाली मे सीमित दाल
रोटी खाने को मजबूर होना पड़ा। मुख्तार
अंसारी द्वारा ठेकेदार मन्ना सिंह,
सच्चिदानंद राय, कोयला व्यापारी रुंगटा
का अपहरण की फिरौती बसूली के बावजूद हत्या कर अंगों को गंगा मे फेंक देना,
भाजपा विधायक कृष्णनन्द राय की जघन्य हत्या जैसे अनेकों घटनाओं मे पीढ़ित परिवारों ने आज,
जैसी करनी वैसी भरनी वाली कहावत पर अपना विश्वास व्यक्त करते हुए मुख्तार की मौत पर
इस कहावत को चरतार्थ करते हुए ईश्वरीय
न्याय पर अपनी आस्था और विश्वास ज्ञपित कर अपनी खुशी का प्रदर्शन किया। उन पीढ़ित
परिवारों का मानना था कि, "भगवान के
घर देर हैं अंधेर नहीं है"।
मुख्तार अंसारी जैसे दुर्दांत,
माफिया डॉन के अंत के साथ ही उत्तर प्रदेश
मे बड़े संगठित अपराधी गिरोहों का अंत हो
गया है और कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह लागू और नियंत्रण मे हैं जिसका श्रेय
निश्चित ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को दिया जायेगा।
विजय सहगल




2 टिप्पणियां:
लेख तो अच्छी है। एक बात लिखना रह गया लगता है। कृष्ण नंद राय के हत्या के बाद उनकी चोटी जाते लाने के मुख्तार की आदेश को उनका पांडे नमक गुर्गे ने पालन किया। दूसरी बात जैसे करनी वैसे भरनी वाली बात कुछ हद तक सही नहीं है लगता है। उनके द्वारा पीड़ित लोग प्रताड़ना एवं हत्या का शिकार हुए लेकिन इन साहेब को भगवान ने दिल का दौरा द्वारा बिना कष्ट के आसान मृत्यु प्रदान कर दिए.
R R Peri, विशाखापट्टनम
*मुख्तार अंसारी के इंतकाल का जश्न गाजीपुर के लोगों ने आतिशबाजी के साथ मनाया। मुख्तार अंसारी ने अपने आतंक व दबदबे से मुस्लिम भाइयों को भी नहीं बख्शा।हत्या,लूटमार, फिरौती,अवैध कारोबार, संपत्ति हड़पने जैसे कार्यों के अनेक प्रकरण में मुख्तार अंसारी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से लिप्त था।देश का दुर्भाग्य है कि राजनीतिक पार्टियां ऐसे कुख्यात अपराधियों का महिमा मंडन करती हैं और देश की जनता बार-बार चुनाव में जिताती है।*
*मुख्तार अंसारी का I S I से भी कनेक्शन बताया जाता है।मुख्तार अंसारी के पास इतने हथियार थे जितने एक थाने में नहीं होते।*
*महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान अंसारी, मुख्तार अंसारी के नाना थे।नाना ने अभूतपूर्व वीरता का परिचय देते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया और शहीद कहलाए जबकि मुख्तार अंसारी ने अपने कुकृत्यों के कारण आजीवन कारावास का रास्ता चुना और अंततः बीमारी वश मृत्यु को प्राप्त हुआ।*
*बकौल तुलसीदास जी-*
*कर्म प्रधान विश्व रचि राखा....*
*जो जस करहि तसहिं फल चाखा..!*
सुरेन्द्र सिंह कुशवाहा
ग्वालियर
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