संदेशखाली को खाली-संदेश समझने की ममता की भारी भूल!!
जी हाँ,
पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बैनर्जी ने संदेशखाली मे महिलाओं पर यौन
अत्याचार और दुर्व्यवहार को कमतर आँकने की भूल बहुत महंगी साबित हुई। संदेशखाली का
एक सड़क छाप, गंवार,
गुंडा शाहजहाँ शेख अपने आप को मुगल सल्तनत का
"शाहजहाँ" समझ बैठा! एक छोटे से दिहाड़ी मजदूर से करोड़ों रुपए के
घोटाले कर ममता सरकार मे मंत्री पद प्राप्त,
इस भ्रष्ट, दुश्चरित्र और बेईमान
मंत्री ने अपनी अय्याशी और कुत्सित यौनविकारग्रस्तता के
चलते पश्चिमी बंगाल के 24 परगना जिले के बशीरहाट ब्लॉक के एक छोटे से ब्लॉक
संदेशखाली की महिलाओं पर अत्याचार,
अनाचार का घिनौना खेल खेला। खेद और अफसोस इस बात का हैं माँ-मानुष और माटी की
दुहाई देती बंगाल की मुख्यमंत्री के स्वयं
महिला होने के बावजूद कैसे संदेशखाली की इन महिलाओं के दुःख-दर्द,
उन के कानों को नहीं सुनाई दिया?
चोरी और सीनाजोरी की पराकाष्ठा देखिये कि जो
पश्चिमी बंगाल पुलिस शाहजहाँ शेख
को संदेशखाली की महिलाओं पर अत्याचार और अनाचार तथा प्रवर्तन निदेशालय के
अधिकारियों पर सुनियोजित हमले के आरोप मे
गिरफ्तार न कर सकी, लेकिन
उच्चतम/उच्च न्यायालय के दबाव के बाद उसे
55 दिन बाद हिरासत मे ले लिया!! अभियोगी शाहजहाँ शेख को गिरफ्तारी के बाद पुलिस
द्वारा न्यालय मे पेशी के दौरान शाहजहाँ शेख की अकड़ और धमक से ये अनुमान लगाना
कठिन हो रहा था कि अभियुक्त शाहजहाँ शेख को,
पुलिस, कोर्ट मे पेश कर रही थी?
या शाहजहाँ शेख, पुलिस को कोर्ट मे पेश कर रहा था? सारे देश ने टीवी पर शाहजहाँ शेख जैसे आरोपी
अभियुक्त के सामने बंगाल पुलिस का दयनीय,
लाचार, निरीह और
नतमस्तक चेहरा देखा!!
जैसा की कहावत हैं कि जब गीदड़ की मौत आती है,
तो शहर की ओर भागता हैं। हा!! दुर्योग,
इस अहंकारी, घमंडी शाहजहाँ शेख के
साथ भी बैसा ही हुआ। अब तक जो शाहजहाँ शेख
शासन और सत्ता के अपवित्र गँठजोड़ के दम पर
संदेशखाली को अपनी जागीर और वहाँ के लोगो को अपना गुलाम मान कर चलता था,
शाहजहाँ शेख के पाप का घड़ा अब संदेश्खाली की माँ,
बहिनों के ऊपर उत्पीड़न, अत्याचार,
जुल्म और ज्यादती से भर कर फूट गया और अंततः इस आततायी को पश्चिमी बंगाल पुलिस ने
28 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया। ममता सरकार द्वारा शेख शाहजहाँ जैसे दुश्चरित्र,
धूर्त और मक्कार मंत्री के विरुद्ध कार्यवाही तो दूर उसको पराश्रय देकर बचाने की
नाकामयाब कोशिश की, ये तो भला हो देश की
न्याय व्यवस्था का, कलकत्ता उच्च न्यायालय
ने, शाहजहाँ शेख की न्यायिक हिरासत को पश्चिमी
बंगाल पुलिस से हटा कर केंद्रीय अन्वेषन
ब्यूरो की न्यायिक हिरासत मे भेज दिया।
7 मार्च 2024 को कलकत्ता की एक रैली मे ममता
बैनर्जी का ये वक्तव्य हास्यास्पद और
वास्तविकता से कोसों दूर प्रतीत होता है,
जब उन्होने दावा किया कि "पश्चिमी बंगाल,
महिलाओं के लिये देश मे सबसे सुरक्षित राज्य हैं!!" कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा शाहजहाँ शेख को
सीबीआई की न्यायिक हिरासत मे सौपने के आदेश को ममता बैनर्जी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती देना ये दर्शाता है कि
ममता बैनर्जी ने शाहजहाँ शेख की काली करतूतों और अनैतिक आचरणों को नज़रअंदाज़
कर संरक्षण और पराश्रय दिया जाता रहा था,
अन्यथा क्या कारण थे एक अभियुक्त अपराधी को सीबीआई की न्यायिक हिरासत मे जाने से रोकने की ममता सरकार
द्वारा एक अनैतिक, अधम और निकृष्ट कोशिश
की गयी? वे जानती थीं की बंगाल
सीआईडी की हिरासत मे रहते हुए शाहजहाँ शेख को जेल मे रहते हुए अति महत्वपूर्ण कैदी
की तरह हर सुख, सुविधा और सहायता दी जा
सकती थी, जो सीबीआई की हिरासत मे
रहते हुए सम्भव न थी। ममता बैनर्जी जानती थी कि बंगाल सीआईडी की
हिरासत मे रहते, महिलाओं पर अत्याचार और दुराचार के काले
कारनामों पर पर्दा डाला जा सकता था और शाहजहाँ शेख के कुत्सित कर्मों पर सहजता से लीपा
पोती की जा सकती थी। अब सीबीआई की हिरासत मे रहते हुए इस बात की पूरी संभावना हैं
कि शाहजहाँ शेख द्वारा संदेशखाली मे महिलाओं के साथ किये गए नीच और
घिनौने कामों और ईडी अधिकारियों पर हमले की साजिश के पीछे किन-किन अपराधियों,
आसमाजिक तत्वों, राजनैतिक आकाओं का हाथ
है?
भारतीय राजनीति का ये बड़ा दुर्भाग्य है कि
किसी भी राज्य मे महिलाओं से अपराध और
अत्याचार की घटनाओं के बचाव पर सरकारें अन्य राज्यों की घटनाओं का उल्लेख
कर अपने राज्य की घटना को न्यायोचित और कमतर दिखाने का कुत्सित प्रयास करती हैं,
जो घोर निंदनीय और आपत्तिजनक हैं। ये राजनैतिक दल और उनके बुद्धिहीन,
मूढ़ प्रवक्ताओं को ये समझना चाहिये कि देश के राजनैतिक दल एक दूसरे के प्रति
जवाबदेह नहीं अपितु देश और देश की 140 करोड़ जनता के प्रति जवाबदेह हैं। ऐसा
ही कुछ संदेशखाली की घटनाओं पर देखने को
भी मिला। टीएमसी के प्रवक्ताओं ने भी मणिपुर,
उन्नाव (उत्तरप्रदेश) या अन्य घटनाओं का उल्लेख कर संदेशखाली की घटनाओं को सामान्य
बताकर, घोर पाप किया हैं। मणिपुर या उत्तरप्रदेश
मे घटित घटनाओं पर कानूनी कार्यवाही तो हुई और उनके परिणाम आने अभी बाकी हैं। लेकिन दुर्भाग्य
तो ये हैं कि टीएमसी ने शाहजहाँ शेख जैसे अपराधी को,
सीबीआई की हिरासत से बचाने के लिये
सुप्रीम कोर्ट तक मे याचिका दाखिल कर दी?
ऐसा ही कुछ कुत्सित प्रयास 2022 मे माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को योगी आदित्य नाथ
की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश की जेल मे भेजने से बचाने के लिये तत्कालीन कॉंग्रेस
सरकार ने पंजाब की जेल मे बनाए रखने के लिये एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया था ताकि उस
डॉन माफिया को राजनैतिक संरक्षण देकर पाँच सितारा होटलों की सुविधाएं मुहैया कराई
जा सके!! लेकिन प्रशंसा करनी होगी हमे अपने देश की न्यायिक व्यवस्था की जिन्होने
मुख्तार अंसारी और शाहजहाँ शेख जैसे अपराधियों को उनके सही स्थान जेल के सीखचों के
अंदर भेजा। सीमावर्ती, संवेदनशील राज्य होने के कारण हमेशा बंगला देश से अवैध घुसपैठ
की आशंकाओं और लोगों के अंदेशों के आधार पर यह कहना अतिसन्योक्ति न होगी
कि बंगाल मे शाहजहाँ शेख तो एक मुहरा हैं जो पकड़ मे आया पर बंगाल मे न जाने ऐसे कितने
शाहजहाँ शेख हैं जिनके हाथों मे शासन और सत्ता की बागडोर हैं?
अब
आशा की जानी चाहिये कि देश के करोड़ो लोगो ने सामाजिक माध्यमों,
टीवी और अन्य सोश्ल मीडिया पर संदेशखाली मे महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और दुराचरण
के अपराधी शाहजहाँ शेख की जो ठसक,
अकड़ और डींगे, बंगाल पुलिस की
अभिरक्षा मे देखी, जल्दी ही शाहजहाँ शेख
की एक झलक सीबीआई की अभिरक्षा मे रहते हुए
देखने को मिलेगी, तब देश की जनता को
अंदाज़ा होगा कि क्यों देश के भ्रष्ट,
दुश्चरित्र, बेईमान सत्ताधारी नेता
ईडी और सीबीआई की हिरासत से बचने के लिये जी जान लगा देते हैं?
विजय सहगल


2 टिप्पणियां:
👍👍
उत्तम लेख। देश के विभिन्न राज्यों में पनपे क्षेत्रीय पार्टियों में ज्यादातर पार्टियों की स्तिथि ऐसा ही है। देश एवं विभिन्न राज्यों में अराजकता बड़ने के लिए ऐसी पार्टियां प्रधान दृष्टया जिम्मेदार है। ऐसी पार्टियों को पनपने देने वाले जनता भी दूद का धुले नहीं है। मुफ्तखोरी से ग्रस्त जनता भी गलत हैं
R R Perry
विशाखापट्टनम
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