"चुनावों का सेमी फ़ाइनल"
3 दिसम्बर
2023 को देश के चार राज्यों मे हुए विधान
सभा के चुनावों को 2024 के संसदिय चुनावों का सेमी फ़ाइनल यूं ही नहीं कहा जा रहा
हैं! मध्य प्रदेश, राजस्थान,
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना राज्य की विधान सभाओं की मतगणना के नतीजे चौंकाने वाले थे।
30 नवंबर को विभिन्न टीवी चैनलों पर दिखाये जा रहे एक्ज़िट पोल के अनुमानों मे
राजनैतिक पंडितों ने जहां छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश मे कॉंग्रेस की सरकार बनाने की
भविष्यवाणी की थी और राजस्थान मे भी कुछ चैनलों ने अशोक गहलोत के नेतृत्व मे
कॉंग्रेस की बापसी का अनुमान लगाया था,
पर 3 दिसम्बर की मत मतगणना ने सारे अनुमानों पर पानी फेर दिया। इंडि गठबंधन सहित कॉंग्रेस के जो महारथी एक्ज़िट पोल के अनुमानों
पर हर दस-पाँच मिनिट मे ट्वीट कर अपनी सफलता की डींगे हांक रहे थे और जो पिछले दो दिन तक एक्ज़िट पोल के नतीजों पर इतराते नज़र आ
रहे थे, 3 दिसंबर की दोपहर बाद
ऐसे गायब हुए कि फिर दिन भर कहीं दिखाई न
दिये। लेकिन काँग्रेस को तेलंगाना राज्य मे विजयी के रूप मे मिले सांत्वना
पुरुस्कार ने जरूर कुछ ढांढस बंधाई।
बैसे एक बात तो तय है कि 2024 के लोकसभा
इलैक्शन के पूर्व, विधान सभा के इन पाँच
राज्यों के परिणाम अप्रत्याशित थे। राजनीति के विचार कुशल पुरुषों द्वारा एकमत से
छत्तीसगढ़ मे भूपेश बघेल की बापसी को सुनिश्चित बताया था,
लेकिन नरेंद्र मोदी के धुआँ धार प्रचार की अंधी की बदौलत वे पिछले चुनाव की 33
सीटों के नुकसान के साथ इस चुनाव मे मात्र
35 सीटे ही बचा पाएँ। वहीं भाजपा ने छत्तीसगढ़ राज्य मे 46.3% वोटों के साथ 54
सीटों पर विजयश्री प्राप्त कर सत्ता हांसिल कर ली। काँग्रेस पार्टी मे भूपेश बघेल
की छवि एक कद्दावर नेता की थी लेकिन मोदी के तूणीर से निकले बाण ने "महादेव
एप्प घोटाले" रूपी लक्ष के बेध कर भूपेश बघेल की सत्ता को छिन्न भिन्न कर
दिया। भूपेश बघेल सरकार पर अनेकों घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते मै
भी आज तक उनके "गोधन न्याय
यौजना" को नहीं समझ पाया जिसके
अंतर्गत बघेल सरकार ने किसानों से 265 करोड़ रुपए की गोबर खरीदी की। कैसे इस योजना का संचालन और कार्यान्वयन
किया होगा? कैसे इसकी लेखांकन
प्रणाली बनाई होगी? और कैसे इसके उत्पाद का
रखरखाब किया होगा? उम्मीद हैं आने वाले
समय मे विज्ञान के विध्यार्थी,
अपने आप मे अनूठी इस गोबर खरीद योजना पर
अन्वेषण और अनुसंधान कर शोध कार्य करेंगे?
कहीं ये योजना भी बिहार मे पशुओं की चारा घोटाला की तरह पशुओं के गोबर घोटाला न
सिद्ध हो? छत्तीसगढ़ मे बगैर कोई
मुख्यमंत्री का चेहरा प्रस्तुत किये सत्ता मे बापसी सिर्फ मोदी की नियत,
नीतियों और निर्णयों के बूते पर ही संभव हुई इसमे कोई शक नहीं।
राजस्थान मे भी काँग्रेस ने चुनाव के ठीक छह
माह पूर्व विभिन्न लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा की और चुनाव आते आते सात गारंटियों
की लाइन लगा दी। जिसमे 500 रुपए मे गैस सिलेंडर,
महिला मुखिया को साल मे दस हजार रुपए,
गोबर खरीद, 15 लाख का स्वास्थ बीमा,
अँग्रेजी स्कूल सहित विध्यार्थियों को लेपटोप और मोबाइल प्रदान करने वाली
गारंटियाँ निहित थी। पर लोगो ने कॉंग्रेस और गहलोत जी की गारंटियों के मुक़ाबले
मोदी जी की गारंटियों पर भरोसा जता उनको ही प्राथमिकता दी। राजस्थान मे हर बार की तरह
इस बार भी सत्ता परिवर्तन होने की परंपरा कायम
रही। राजस्थान मे 41.7% वोट प्रतिशत के साथ भाजपा ने 115 सीटों के साथ काँग्रेस से
सत्ता हथियाँ ली। काँग्रेस को 39.5 वोट शेयर के साथ 69 सीटों पर संतोष करना पड़ा। यहाँ भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह किसी भी
चेहरे को मुख्य मंत्री के रूप मे
प्रोजेक्ट नहीं किया गया। मोदी ने राजस्थान मे महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़,
राज्य मे तुष्टीकरण, लाल डायरी,
अतिवादियों द्वारा उदयपुर मे कन्हैयालाल की निर्मम हत्या जैसे आरोपों से गेहलोत सरकार की चूलों को हिला दिया। राजस्थान
मे काँग्रेस के चुनाव की पराजय की रई-सई कसर काँग्रेस के युवा हृदय सम्राट श्री
राहुल गांधी द्वारा 21 नवंबर 2023 को
भारत-आस्ट्रेलिया के विश्वकप क्रिकेट मे भारत की पराजय के लिए प्रधान मंत्री को
पनौती (मनहूस या अपशकुनी) कह अपमानित करने ने पूरी कर दी।
मध्य प्रदेश के चुनावी परिणाम भी
राजिनीतिज्ञों के अनुमानों उम्मीदों से परे अनपेक्षित थे। शिवराज सरकार की मुख्य
मंत्री पद पर लगातार तेरह सालों से चली आ रही एंटि इंकंमबेंसी लहर के बावजूद पुनः
चुन कर आने की अपेक्षा नहीं थी। मध्य प्रदेश मे 48.5% वोट शेयर के साथ 163 सीटें जीतने
वाली भाजपा ने पिछले चुनाव से 54 सीटें अधिक प्राप्त की वहीं कॉंग्रेस 40.4% मतों के
साथ सिर्फ 66 सीटें जीत सकी। मध्य प्रदेश चुनावों मे केंद्रीय मंत्रियों,
सांसदों को भी विधान सभा चुनाव मे प्रत्याशी बनाना मोदी की किसी बड़ी और अबूझ योजना
का हिस्सा रही होगी जिसका एकांश तो इन नेताओं की चुनावों मे विजय के रूप मे हम सभी
देख रहे हैं और शायद दूसरा अंश हमे प्रदेश के नेतृत्व को चुनते समय देखने को मिले।
2018 मे 19 विधायकों के साथ कॉंग्रेस से बगावत
कर भाजपा मे शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के 13 लोगो को इस बार चुनावी टिकिट मिला था जिसमे सिर्फ 6 प्रत्याशी ही विजयी
हुई शेष 7 को पराजय का मुँह देखना पड़ा। शिव राज सरकार मे गृह मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा दतिया से
अपनी सीट गंवा बैठे जो आश्चर्य चकित करने वाली घटना हैं। इस अप्रत्याशित सफलता के बीच शिवराज सिंह द्वारा
मार्च 2023 मे चुनाव के एन वक्त पूर्व,
मुख्यमंत्री लाड़ली बहिना योजना (जिसके
अंतर्गत महिलाओं को 1250 रुपए प्रति माह प्रदान किये जा रहे हैं) की शुरुआत विधान
सभा मे जीत का एक बड़ा कारक रही।
तेलंगाना राज्य मे यूं तो भाजपा का कभी वर्चस्व
नहीं रहा। 2014 मे तेलंगाना राज्य के गठन
के पूर्व यह आंध्रा प्रदेश का हिस्सा था तब भी क्षेत्रीय दल तेल्गुदेशम पार्टी की सत्ता यहाँ रही। वर्तमान
मे के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व मे पिछले दस वर्षों से बीआरएस की सरकार थी। कुछ एंटी
इंकमवैंसी और कुछ भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते इस बार कॉंग्रेस के रेवत रेड्डी के
नेतृत्व मे काँग्रेस ने पहली बार तेलंगाना राज्य मे सत्ता प्राप्त की। 119 सदस्यों
की विधान सभा मे काँग्रेस ने 64 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया,
भारत राष्ट्र समिति को 39 सीटे प्राप्त हुई,
भाजपा ने भी पिछली बार तीन सीटों के मुक़ाबले राज्य मे इस बार 8 सीटें जीत कर एक रिकॉर्ड
बनाया हैं। भाजपा ने कामारेड्डी सीट पर बड़ा जलवा दिखाया। इस सीट पर बीआरएस प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर
राव का मुक़ाबला तेलंगाना राज्य कॉंग्रेस प्रमुख रेवंत रेड्डी और भाजपा के अनाम और अंजान
चेहरे वेंकट रमना रेड्डी से था। त्रिकोणीय मुक़ाबले मे भाजपा के साधारण कार्यकर्ता वेंकट
रमना रेड्डी इन दोनों धुरंधर पुरोधाओं को हरा कर विजयी प्राप्त की जो एक बहुत बड़ी घटना
थी।
इस चुनाव मे राहुल गांधी द्वारा पिछड़े वर्ग की
जातिय जन गणना का कार्ड भी कोई बहुत बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ पाया। कदम कदम पर मोदी के
लिए अनर्गल और अशिष्ट भाषा का उपयोग भी उन्हे
भारी पड़ा पर कदाचित ही वे इस से कुछ सीख लेंगे। भाई भतीजा वाद,
परिवार वाद, भ्रष्टाचार से परे नरेंद्र
मोदी की ईमानदारी छवि उनकी सबसे अनमोल पूंजी हैं,
जिसमे वर्तमान राजनैतिक दलों का कोई नेता दूर
दूर तक उनके समकक्ष नहीं हैं। ऐसे मे राहुल गांधी सहित काँग्रेस और इंडि गठबंधन द्वारा
बार-बार अदानी का नाम लेकर आरोप लगाना,
इंडि गठबंधन के सदस्यों द्वारा सनातन धर्म पर कटाक्ष और धर्म विशेष का तुष्टिकरण भी इनकी
पराजय का एक मुख्य कारण हैं।
2023 के इस सेमी फ़ाइनल मुक़ाबले मे भाजपा ने एक
बार मुक़ाबला 3-1 से जीत लिया और पुनः एक बार हैट्रिक की प्रत्याशा से 2024 के संसदीय
चुनाव की तैयारी शुरू कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीनों प्रदेशों मे धुआँ-धार प्रचार, उनका नाम,
नियत और नीतियों मे आम जनों की आस्था और विश्वास,
आम लोगो के बीच उनकी लोकप्रियता और सबसे बड़
कर एक ईमानदार राजनेता की छवि भी इन
तीनों राज्यों मे भाजपा की विजय का एक बहुत बड़ा कारक रही जिसके बल पर इन तीनों राज्यों मे भाजपा की बापसी
संभव हो पायी। ये कहना अतिशयोक्ति न होगी कि 2023 के इन चुनाव परिणामों का प्रभाव 2024
के आम संसदीय चुनाव पर पड़े बिना नहीं रहेगा।
विजय सहगल

1 टिप्पणी:
बहुत ही सुंदर और सही चुनाव परिणामों का विश्लेषण ।
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