"#कर्नाटक
संपर्क क्रांति का
फ़ायर अलार्म"
रेल प्रशासन जहां एक ओर आये दिन रेलों मे
नई-नई तकनीकि, खोज और आविष्कार के माध्यम
से यात्रियों की सुविधाओं और सुरक्षा मे
बढ़ोतरी कर रेलों मे विकास के नित नए आयाम छू रही है वहीं दूसरी ओर संपर्क क्रांति,
राजधानी, हमसफर और शताब्दी एक्सप्रेस की श्रंखला को आगे बढ़ाते
हुए नवीन सुविधाओं मे बढ़ोतरी कर रही हैं और सुरक्षित तेज गति से सुसज्जित गतिमान,
तेजस और वंदे भारत जैसी नवीन श्रंखला की शुरुआत कर चुका हैं। शीघ्र ही दिल्ली और
मेरठ के बीच हाई स्पीड ट्रेन की आंशिक शुरुआत हुई हैं,
वहीं बुलेट ट्रेन भी मुंबई और अहमदाबाद के बीच आने वाले समय मे अपने यथार्थ रूप मे
चलने वाली हैं,
जो 320 किमी की गति से अपने गंतव्य पर पहुंचेगी। रेल विभाग के कुछ अधिकारी आधुनिक ज्ञान और तकनीकि के माध्यम से
रेलों का सफल संचालन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर बड़ा खेद और अफसोस हैं कि रेल विभाग
मे कार्यरत कुछ कर्मचारियों की सोच, मानसिकता और यात्रियों के प्रति जबाब देयता मे रत्ती भर भी परिवर्तन नहीं आया। जिसका आभास मुझे
दिनांक 9 अक्टूबर 2023 को ट्रेन क्रमांक 12649,
कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्स्प्रेस मे हैदराबाद और ग्वालियर के बीच देखने को मिला।
उक्त ट्रेन अपने कार्यक्रमानुसार चल रही थी।
नागपुर स्टेशन से छूटने के कुछ ही
समय मे कोच-ए1 मे फायर अलार्म
बजने की आवाज आने लगी। शुरू के एकाध मिनिट को लगा कोई बच्चा ईलक्ट्रोनिक खिलौने से
खेल कर ऐसी आवाज कर रहा होगा, पर निरंतर आ रही
चेतावनी ने मुझे बोगी की गैलरी मे झाँकने को मजबूर किया। मैंने देखा 8-10 यात्री आग
की सूचना देने वाले उपकरण की आवाज को बंद न करा पाने के कारण, कोच स्टाफ को बुरा-भला कह रहे थे। लेकिन आग की
चेतावनी की आवाज से मेरा माथा ठनका!! मन मस्तिष्क मे ट्रेन की बोगी मे लगी आग की
कल्पना मात्र से मैं सिहर उठा!! किसी अनिष्ठ अनहोनी की आशंका से बगैर एक क्षण गवाएँ मैंने अपनी सीट के पास स्थित
"अलार्म चैन" को खींच दिया। ट्रेन ने प्लैटफ़ार्म पूरी तरह से नहीं छोड़ा
था, चैन खींचते ही ट्रेन तुरंत रुक गयी!! कुछ
ही मिनटों मे रेल स्टाफ, टिकिट निरीक्षक
स्टाफ और आरपीएफ़ स्टाफ लगभग एक साथ डिब्बे मे आ कर चैन पुल्लिंग के बारे मे
पूंछ-तांछ करने लगे। मैंने बताया आग की चेतावनी देने वाले यंत्र के कारण मैंने ट्रेन
की चैन खींची हैं ताकि कोई आगजनी के हादसे के पूर्व ट्रेन रुक जाय!! जो यात्री
अलार्म उपकरण की आवाज बंद कराने मे स्टाफ को डांट रहे थे वे भी मुझ पर पिल पड़े और
चैन पुल्लिंग पर सवाल करने लगे। जब मैंने पुलिस और रेल स्टाफ को आग की चेतावनी के
उपकरण के लगातार बजने की ओर इंगित कराया,
पर उनका ज़ोर आग की चेतावनी दे रहे उपकरण की अपेक्षा ट्रेन की चैन खींच कर गाड़ी रोकने पर था। मैंने
उनको आगाह कराते हुए कहा भी ट्रेन की चैन खींच कर गाड़ी खड़ी करना आवश्यक था ताकि
कहीं रास्ते मे बोगी मे आग न लग जाए। अलार्म सिस्टम की चेतावनी के बावजूद ट्रेन को
चलाये रखने से मेरे सहित अन्य यात्रियों के जीवन को खतरा हो सकता था,
अतः कृपया सुनिश्चित कर लें कि आगे ट्रेन मे आग का कोई खतरा न हों। पुलिस वाले
मेरा नाम, मोबाइल नंबर आदि
पुलिसिया अंदाज़ मे दर्ज़ करने लगे, मानो मैंने चैन
खींच कर कोई अपराध कर दिया हो!! इसी बीच एक स्टाफ ने अलार्म चैन को यथा स्थिति मे
कर दी और ट्रेन चलने लगी। मैं अब भी बगैर किसी जांच के इस तरह ट्रेन को चलाने से
असहमत था। मैंने तुरंत ही रेल मंत्री और रेल मदद को ट्वीट कर फायर अलार्म की
चेतावनी के बावजूद ट्रेन को चलाये जाने की सूचना दे कार्यवाही की अपेक्षा की गुहार
लगाई।
ट्वीट पर कुछ कार्यवाही होती उसके पूर्व आये
हुए पुलिस कर्मियों की रिपोर्ट के आधार पर मेरे पास आरपीएफ़ नागपुर से एक महिला का
फोन आया। उस महिला ने मेरे उपर कोच मे सिगरेट पीने और अलार्म चैन खींचने का आरोप
लगा कर सफाई मांगी? मैं उक्त आरोप सुनकर
हतप्रभ था!! एक बार तो मै डर ही गया कि कैसी आफत मोल ले ली!! फिर भी मैंने संयत
होकर वास्तविक घटना से अवगत कराते हुए इतना अवश्य कहा कि मैं ही यदि कोच मे सिगरेट
पीता तो मैं ही चैन खींच कर अपने आपको संकट मे क्यों डालता?
उस महिला ने अपने विभागीय स्वभाव के अनुरूप मुझे बताया कि मैं अपनी रिपोर्ट अपने
उच्च अधिकारियों के समक्ष रखूंगी यदि रिपोर्ट स्वीकार हो गई तो इस प्रकरण को बंद
कर दिया जाएगा अन्यथा आपके विरुद्ध प्रकरण पंजीकृत कर न्यायालय मे केस दर्ज़ किया
जाएगा और आपको यहाँ आकर अपनी सफाई देनी पड़ेगी। इस दौरान मुझसे मेरी पहचान,
पीएनआर संख्या, घर का पता आदि ले लिया
गया।
आप समझ सकते हैं कि यदि आग की चेतावनी उपकरण
को नज़रअंदाज़ कर गाड़ी चलती रहती और कोई आग की घटना हो जाती और बेशक हम यात्रियों की
जान पर बन आयी होती? पर तब यही प्रशासन एक
दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप, जांच कमेटी,
जांच आयोग, न्यायिक जांच आयोग के
मक्कड़ जाल मे उलझा कर अपनी "बला",
एक-दूसरे विभाग पर टालता रहता और पूरा
प्रकरण लालफ़ीताशाही के गर्त मे दफन हो जाता।
मैंने अनेकों बार अनेकों अवसरों पर अपनी उम्र और क्षमता के देखते हुए अन्याय के विरुद्ध चुप रहने या अनदेखा करने की
कोशिश की पर ऐसा करने से मै बच न सका। क्योंकि श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 18
श्लोक संख्या 59 मे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि :-
यदहङ्कारमाश्रित्य
न योत्स्य इति मन्यसे।
मिथ्यैष
व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति।।18.59।।
अर्थात अहंकारका आश्रय लेकर तू जो ऐसा मान रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूँगा, तो तेरा यह निश्चय मिथ्या (झूठा) है; क्योंकि तेरा स्वभाव तेरे को युद्ध में
लड़ने को मजबूर कर देगा।
मैं आत्मग्लानि और आत्म अपराध बोध के लिए
कुछ समय तो ग्रसित रहा, पर शीघ्र ही
मैंने किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए अपने आपको सकारात्मक ऊर्जा से भर लिया।
रेल मंत्री और रेल मदद को किए गये ट्वीट ने अब अपना काम शुरू कर दिया था। पुनः
नागपुर, भोपाल और दिल्ली से,
ट्वीट के माध्यम से की गयी शिकायत के समाधान के लिए फोन पर फोन आने लगे। टिकिट निरीक्षक महोदय को भी मुझसे संपर्क कर शिकायत का निदान करने के
निर्देश दिये गये। भोपाल पर भी एक पुलिस अधिकारी शिकायत के समाधान की पर मेरी
संतुष्टि प्राप्त करने लिये मेरे कोच मे आया। नागपुर से भी एक रेल पुलिस अधिकारी
का शिकायत के निराकरण कर शिकायत के बंद करने की सूचना दी गयी एवं कार्यवाही पर
अपना फीड बैक देने का अनुरोध कर, आगे किसी भी
समस्या हेतु अपने नंबर पर संपर्क करने की सलाह दी गयी।
"अलार्म का बजना ही संकट का आमंत्रण
था", ये जानने के बावजूद भी
टिकिट निरीक्षक, रेल स्टाफ के साथ अन्य यात्रियों
के मौन से, मुझे दुःख और संताप तो
अवश्य हुआ पर निराश नहीं हुआ, क्योंकि ये
हमारे देश का दुर्भाग्य है कि हम व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी या फ़ेस बुक पर लंबे चौड़े ब्यान और उपदेश देंगे पर वास्तविक धरातल पर
एक क्षण के लिए भी सच और ईमानदारी के साथ कदाचित ही खड़े नज़र आयेंगे?
फायर अलार्म से हमारे कोच के सह यात्रियों का जीवन भी संकट मे पड़ सकता था पर मेरे चैन
पुल्लिंग पर उन सब का रुख भी पूर्णतः ठंडा ही था।
मै जनता हूँ कि इस घटना क्रम को पढ़ कर यात्रा करनेवाले हमारे सुधि पाठक,
साथी, आम जन निराश होंगे और शायद ही कभी ऐसी विषम
पस्थितियों मे चैन खींचने के विकल्प का उपयोग करेंगे?,
लेकिन मेरा स्पष्ट मानना हैं कि मेरी नियत और नीति सत्य,
सच्चाई और बिना किसी स्वार्थ की राह पर थी। कठिनाई और परेशानी तो जरूर हुई पर यदि फायर
अलार्म से उपजी चेतावनी, किसी अनहोनी या
हादसे की घटना मे परिवर्तित होती तो होने वाली क्षति,
मानसिक कष्ट की क्षति का एकांश भी न
होती।
विजय सहगल



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