"प्रदेश
के मध्य मे मोहन मुख्यमंत्री"
अप्रत्याशित
और आश्चर्य जनक घटना क्रम मे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की दौड़ मे तमाम युद्धाभिलाषी राजनैतिक महारथियों को
परास्त कर मध्य प्रदेश की राजनीति मे एक गुमनाम और अनाम चेहरे 58 बर्षीय डॉ॰ मोहन
यादव ने मुख्य मंत्री पद की दौड़ मे विजयश्री हांसिल की।
अंततः
वे आज दिनांक 13 दिसम्बर 2023 को मध्य प्रदेश के 19वे मुख्यमंत्री पद के रूप
मे अपने दो उप मुख्यमंत्री सहयोगियों सर्वश्री
जगदीश देवड़ा और श्री राजेन्द्र शुक्ला के साथ भोपाल स्थित लाल परेड ग्राउंड मे पद
और गोपनियता की शपथ ले रहे हैं। बेशक मोहन यादव जी का मुख्य मंत्री पद पर चुना
जाना राजनैतिक पंडितों और विद्वानों के लिये
चौंकाने वाला विषय हो सकता हैं पर प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की
कार्यप्रणाली से परिचित कुशल महानुभावों को इस मे कोई आश्चर्य नहीं हुआ होगा क्योंकि
मोदी जी के कार्य करने का ढंग ही कुछ ऐसा हैं जो नये और अज्ञात चेहरों को मौका
देकर उनकी योग्यता, क्षमता और
दक्षता को परखने और निखारने का अवसर प्रदान करते हैं।
डॉ॰
मोहन यादव के लिये मुख्यमंत्री पद का कार्य ग्रहण करना जहां एक ओर प्रसन्नता और
हर्ष का विषय हो सकता है पर वहीं 18 वर्षों से लगातार रहें मुख्यमंत्री शिवराज
सिंह चौहान जैसे परिपक्व, पारंगत और
प्रवीण, मुख्यमंत्री पद के संभावित प्रत्याशी से सत्ता
हांसिल करने मे अनेक चुनौतियाँ और अपरोक्ष कठिनाइयों से पार पाना उतना आसान नहीं
होगा। यहाँ ये कहना असंगत न होगा कि आज उनके सिर पर फूलों का मुकुट न होकर काँटों
भरा ताज हैं? वे कैसे शिवराज सिंह,
नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे
वरिष्ठ, अनुभवि और राजनीति के धुरंधर योद्धाओं के बीच अपनी
पहचान कायम रख संकेंगे और कैसे अपना रास्ता प्रशस्त करेंगे,
एक विचारणीय प्रश्न होगा? बैसे अपने स्वभाव, प्रकृति और चरित्रानुसार शिवराज सिंह जी
ने अपने नवांगातुक श्री मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री पद के रूप मे
प्रस्तावित कर और ये कह कर अपने विशाल हृदयता का परिचय दिया कि, "ज्यों की त्यों रख दीनी चुनरिया........, अन्यथा भाजपा शासित कर्नाटक की राजनीति मे
यदुरप्पा जैसे लोगो ने राज्य की राजनीति मे कभी किसी तीसरे आदमी को राजनीति मे कभी
आगे नहीं बढ्ने दिया जिसके परिणामस्वरूप कर्नाटक राज्य मे भाजपा को पराजय का मुँह
देखना, वर्चस्व खोना और दुष्परिणाम के रूप मे देखना पड़ा।
आज
अवश्यकता इस बात की हैं कि मध्य प्रदेश के नव नियुक्त मुख्य मंत्री डॉ मोहन यादव उन कारणों और उन वजहों पर विचार मंथन करें जिनके
चलते 18 साल से लगातार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह जी को सत्ता से पदच्युत होना
पड़ा? बेशक शिवराज सिंह जी मध्य प्रदेश के एक लोकप्रिय मुख्यमंत्रीयों मे से एक
थे। उनके द्वारा अनेक लोकलुभावन योजनाएँ लागू की गयी। गरीब और वचित वर्ग के लिये
लाड़ली बेटी से लेकर लाड़ली बहिना तक अनेक
योजनायें उनके द्वारा लागू की गयी। गरीबों के लिये राशन, घर, शौचालय जैसी केंद्र के योजनाओं को उनके द्वारा सफलता पूर्वक क्रियान्वयन किया गया पर राज्य के मध्यम वर्गीय, उच्च मध्यमवर्गीय और उच्च वर्ग के लिये कदाचित ही कोई काम किया हो? इस वर्ग को पानी, बिजली, सड़क
साफ सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिये प्रशासनिक अफसरों,
पारिषदों और विधायकों से याचना और निहोरों के बाद भी काम का न होना, निराश करता हैं। आम नागरिकों से जुड़े विभागों जैसे नगर पालिका, जिलाधीश कार्यालय, लोक स्वास्थिकी, चिकित्सा
सुविधाओं, एमपी हाउसिंग बोर्ड, पंजीकरण, आरटीओ ऑफिस, पुलिस और यतायात पुलिस, तहसील कार्यालयों से जुड़े विषयों
पर कहीं कोई सुनवाई नहीं होती, भ्रष्टाचार के बिना इन
कार्यालयों मे कदाचित ही कोई काम होता हो। सामान्य मानवी को जब कभी भी इन विभागों
से पाला पड़ा सदा ही निराशा और हताशा हाथ लगी। भ्रष्टाचार के ये हाल हैं कि स्ट्रीट
लाइट को नियंत्रित करने वाले टाइमर अभी ग्वालियर मे स्थापित किए गए पर इन यत्रों की
आपूर्ति करने वाली कंपनी का ये हाल हैं कि कहीं कहीं लगातार 24 घंटे लाइट पिछले दो
माह से जल रही है तो कहीं रस्तों पर रात्रि मे घुप्प अंधेरा कानून व्यवस्था की स्थिति को आमंत्रण दे रहा हैं। अफसरों को फोन ट्वीट और मेल
के बावजूद कोई समाधान शायद ही निकलता हो।भाजपा शासित इन कार्यालयों की कार्य सांस्कृति और कॉंग्रेस के शासन की कार्य प्रणाली मे शायद ही
कोई बदलाव हुआ हो? कहने का तात्पर्य ये हैं कि शिवराज सिंह सरकार
का कार्यालयों के अधिकारियों, नौकरशाहों, दफ़तरशाहों और ब्यूरोक्रेसी पर कभी कोई
नियंत्रण नहीं रहा। कार्यालयों के इन नौकरशाहों की कभी कोई जबाब देही निश्चित नहीं
की गयी। सालों से एक स्थान पर बैठे नकारा बाबू, अफसर निर्भय
हो काम मे कोताही, भ्रष्टाचार और बेईमानी मे लिप्त, शिवराज सरकार के कार्यों पर पलीता लागाते रहे।
रेल विभाग ने यात्रा के दौरान या रेल विभाग से से जुड़ी किसी
भी समस्या की शिकायत के लिए फोन नंबर 139 शुरू
किया हैं। आप शिकायत ट्वीटर #रेल
मदद, #रेल सेवा या रेल मंत्री के
ट्वीटर हैंडल पर भी दर्ज़ करा सकते हैं। प्रशंसा
करनी होगी कि शिकायत का समाधान दिनों हफ्तों मे नहीं मिनटों मे हो जाता हैं और समाधान
की प्रतिपुष्टी पर आपकी प्रतिक्रिया भी जानी जाती हैं। इसी तर्ज़ पर शिवराज सिंह सरकार
ने एक बहुत अच्छी शिकायत समाधान योजना "सीएम हेल्प लाइन" शुरू की थी जिस
पर कोई भी नागरिक राज्य सरकार के विभागों मे अपनी समस्याओं की शिकायत फोन नंबर 181 पर दर्ज़ करा
सकता था। ये योजना भी अपने कुप्रबंधन और विभागों के दीर्घ सूत्री अफसर और बाबुओं के
कारण नाकारा साबित हुई। यदि सड़क की सफाई, पानी की आपूर्ति, या
स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं की शिकायत का समाधान भी एक माह मे न हो तो ऐसी सेवा
का क्या औचित्य? यदि शिकायत सड़क मरम्मत या सड़क
निर्माण से जुड़ी हो तो समाधान दो-चार साल मे
भी हो जाय शक हैं!! और
जहां तक ट्वीटर हैंडल की बात रही, मेरा
दावा हैं आप शिवराज सिंह का ट्वीटर हैंडल हो या मुख्यमंत्री का ट्वीटर हैंडल, आप एक सैकड़ा ट्वीट कर के देख लीजिये शायद ही किसी पर कोई कार्यवाही हो? या प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ हो?
प्रदेश
के 90% साधारण मानवी को अपने सुखमय और शांत जीवन हेतु पानी, बिजली, सड़क और स्वास्थ जैसी मूलभूत योजनाओं से पाला पड़ता हैं और यदि इनके लिए भी
जददों-जहद और संघर्ष करना पड़े तो ऐसी सरकार पर सवालिया निशान लगना लाज़मी हैं? आज आवश्यकता इस बात की हैं कि मध्य प्रदेश के नव
नियुक्त मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को साधारण नागरिकों से जुड़ी इन समस्याओं और सवालों
पर सरकार के नौकरशाहों अधिकारियों और बाबुओं की टालामटोली, ढुलमुल और भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर नकेल कसें? जिसके चलते शिवराज सिंह जी जैसे अच्छी छवि और उनकी अनेक लोकलुभावन
नीतियों के बावजूद उन्हे सत्ता से हटना पड़ा।
विजय
सहगल




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