"सर्जिकल स्ट्राइक-प्रमाण??"
28-29 सितम्बर 2016 को हमारी सेना के बहादुर
कम्माण्डोस ने पाकिस्तानी सीमा मे घुस कर पाकिस्तानी
सीमा के अंदर आतंकवादियों के लौंच पैड पर हमला कर अनेकों आतंकवादियों और पाकिस्तानी
सेना के दो जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। पाकिस्तान के विरुद्ध ये कार्यवाही
18 सितम्बर 2016 को पाकिस्तान द्वारा पोषित जैशे मोहम्मद के आतंकवादियों द्वारा हमारे देश के उरी स्थित सेना के स्टेशन पर किये हमले
मे शहीद हुए 19 जांबाज सेनाको के बदले के फलस्वरूप एक खुली चुनौती के रूप मे की गयी
थी। उरी के इस हमले पर सारा देश स्तब्ध था और बदले की कार्यवाही की आग मे झुलस रहा
था। ऐसे वक्त हमारी सेना द्वारा पाकिस्तान मे घुस कर की गयी सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान
हतप्रभ था कि भारतीय सेना, अपने सेना के वीर
सिपाहियों के बलिदान का बदला लेने के लिये कहीं भी और किसी भी हद तक जा सकती है।
लेकिन बड़ा खेद और अफसोस कल एक बार फिर मध्य प्रदेश
की रियासत के एक पूर्व महाराज दिग्विजय सिंह द्वारा हमारे देश की सेना के शौर्य,
साहस और वीरता पर सवाल खड़े कर सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे!! कोई भी राजनैतिज्ञ
अपने राजनैतिक स्वार्थ और लाभ के लिये अपनी स्थिति से किस हद तक गिर सकता है उसका ये
घिनौना, नीच और कुत्सित उदाहरण है!! राजनीति मे किसी सियासी व्यक्ति या दल
के विरुद्ध मत भिन्नता हो सकती है और होना भी चाहिये लेकिन उस व्यक्ति या राजनैतिक
दल का विरोध करते हुए हम देश विरोध पर उतर अपनी सेना के साहस और शौर्य पर सवाल उठाएँ तो क्या ये देश द्रोह
नहीं है??
उनके इस कथन की तीव्र निंदा, भर्त्स्ना और आलोचना
होना ही चाहिये। कॉंग्रेस द्वार दिग्विजय सिंह के इस ब्यान से अपने को अलग कर,
सेना के सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल को दिग्विजय का निजी विचार बता कर उचित ही किया है।
विदित हो कि माँ जब बच्चे को जन्म देती है तब
घर और कुटुंब के लोग बच्चे को संबोधित कर उसके
पिता को इंगित कर कहते है, बोलो पापा!! या परिवार
के सदस्यों के रिश्तो से परिचय के लिये अबोध बच्चे से कभी बाबा!!,
कभी चाचा, कभी दादी या अन्य रिश्ते
बुलवाने का प्रयास करते है। कालांतर मे जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है तो वह कुटुंबियों द्वारा निर्देशित
पारवारिक रिश्तों की पहचान पिता को पापा,
माँ को मामा, मम्मी और इसी तरह अन्य रिश्तो
बाबा, दादा,
दादी को पहचान कर संबोधित करने लगता है। कदाचित ही वह इन रिश्तो पर प्रश्न खड़े करता
है क्योंकि माँ, पिता और कुटुंबियों पर अटूट
विश्वास, पारवारिक धरोहर की पूंजी
होती है ये ही धर्म, भाषा और प्रांत से परे पारवारिक
संस्कार है जो बच्चे को जन्म से घुट्टी के रूप मे परिवार और कुटुंबियों से प्राप्त होते है। सत्य सनातन भारत भूमि के ये ही
संस्कार ऋषि भारद्वाज ने भगवान राम को संबोधित करते हुए कहे थे:-
मित्राणि धन धान्यानि प्रजानां सम्मतानिव ।
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥
अर्थात मित्रों,
धनवनों, और अनाजों की इस संसार मे
बड़ी प्रतिष्ठा है, लेकिन माँ और मातृ भूमि
स्वर्ग से भी बढ़ कर है!!
भारत माँ का सेना के वीर जवानों से वही रिश्ता
है जो एक माँ का अपने बेटों से होता है और जो अटूट विश्वास और समर्पण की बुनियाद पर
मजबूती पर टिका है। इन रिश्तों मे अविश्वास,
असमंजस और आशंका के लिये लेश मात्र भी गुंजायस नहीं है।
सेना द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक की घटना मे देश,
काल और पात्रों को प्रस्तुत कर, प्रमाण उपलब्ध कराने
के बावजूद भी इस तरह के प्रश्न खड़े करने की
ढिठाई करने पर, बड़े दर्द,
वेदना और कष्ट के साथ मै सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रमाण मांगने वाले राजनैतिक संग्राम
के अभिलाषी, युद्ध विशारद,
महारथियों से बड़े सम्मान के साथ पूछना चाहता हूँ कि:-
क्या कभी उन्होने,
अपने पिता से, पिता होने का प्रमाण मांगा??
विजय सहगल

1 टिप्पणी:
भारत के अधिकांश नेता सरकार की गई कार्रवाई सर्जिकल स्ट्राइक को पचा नहीं पा रहे हैं, वह सर्जिकल Strike पर अनाप-शनाप बोलते रहते हैं देश की जनता सब जानती है, समझती है और समय पर उचित जवाब भी देती है🙏
एक टिप्पणी भेजें