"पदम
पुरुस्कारों पर पान मसाले की काली छाया"
आज दिनांक 6 मई को आकाशवाणी समाचार के
माध्यम से पदम पुरुस्कारों के लिये आम जनता से समाज मे उत्कृष्ट और उल्लेखनीय
कार्य करने वालें गणमान्य नागरिकों के नाम मांगे जाने का समाचार सुना। सहसा ही इन
पदम पुरुस्कारों के बारे मे और जानकारी
हांसिल करने की उत्कंठा मन मे जागृत हुई। सरकार की एक वेव साइट पर पदम पुरुस्कारों
के बारे मे जानकारी उपलब्ध थी। भारत सरकार द्वारा 1954 मे शुरू किए इन नागरिक
पुरुस्कारों के अंतर्गत समाज मे साहित्य,
कला, संगीत,
नृत्य, लोक कला,
लोक संगीत, खेल सहित किसी भी क्षेत्र मे उल्लेखनीय कार्य या
सेवा करने वाले नागरिकों को ये पुरुस्कार देने की अनुसंशा की जाती है। "भारत
रत्न", "पदम विभूषण",
"पदम भूषण" एवं "पदम श्री" इस तरह इन चार श्रेणियों मे विभक्त पदम पुरुस्कारों के लिये
भारत का कोई भी नागरिक किसी को भी इन
पुरुस्कारों के लिये नामांकित कर सकता है,
यहाँ तक कि कोई व्यक्ति स्वयं अपने लिये
भी इन पुरुस्कारों मे अपना नाम की अनुसंशा स्वयं कर सकता है। पदम पुरुस्कार
नामांकित व्यक्तियों का सार्वजनिक,
सामाजिक या राष्ट्रीय सेवा मे होना एक सबसे आवश्यक महत्वपूर्ण घटक है। इन तरह नागरिकों से प्राप्त इन अनुशंषाओं को
पुरुस्कारों के लिये प्रधानमंत्री द्वारा गठित वरिष्ठ सचिव स्तर के सदस्यों की एक कमेटी अपने विवेकानुसार निर्णय ले एक सूची
बनाती है जिसकी घोषणा हर गणतन्त्र दिवस पर की जाती है।
स्वतन्त्रता के पश्चात के कुछ वर्षों के बाद
से इन पदम पुरुस्कारों पर आम लोगो सहित समाज के अनेकों प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रत्येक वर्ष घोषित इन पुरुस्कारों पर पक्षपात,
राजनैतिक हस्तक्षेप, दल विशेष के प्रति प्रतिबद्धताओं के भी आरोपों यदा कदा लगाये जाते
रहे है। लेकिन हाल ही के कुछ वर्षों मे इन पुरुस्कारों को प्राप्त करने हेतु देश
के आम नागरिकों से पदम पुरुस्कारों हेतु नामांकन आमंत्रित करने के कारण इन पुरुस्कारों
को सुपात्रों के चयन मे पारदर्शिता से विश्वस्नीयता मे काफी इजाफा हुआ है। अब समाज
के ऐसे सैकड़ों साधारण,
अनाम अवूझे राष्ट्र नायकों के नाम सामने आ
रहे है जिनकी उत्कृष्ट समाज सेवा ने अति महत्वपूर्ण योगदान कर राष्ट्र के लोगो की
महती सेवा की है। स्वतन्त्रता के बाद के
वर्षों मे फिल्मी चकाचौंध से प्रभावित कुछ
अभिनेताओं और अभिनेत्रियों,
धन सम्पन्न लोगो, राजनैतिक
व्यक्तियों को "पदम श्री" और
"पदम भूषण" दिये जाने के कारण
इन पुरुस्कारों को देने मे पक्षपात के भी आरोप लगे है जो समिति के निर्णयों पर
प्रश्न चिन्ह खड़ा करते रहे।
यूं तो भारतीय सिनेमा जगत के अनेक अभिनेताओं
और अभिनेत्रियों को इन पदम पुरुस्कारों से
गौरवान्वित किया है पर यहाँ निम्न चार अभिनेताओं को प्रदत्त पुरुस्कारों पर चर्चा
करूंगा:-
1. श्री
अमिताभ बच्चन उन परम सौभाग्यशाली, गिने चुने लोगो
मे शामिल है जिन्हे सन 1984 मे पदम श्री,
सन 2001 मे पदम विभूषण एवं सन 2015 मे पदम
विभूषण पुरुस्कार से विभूषित किया गया।
2.
श्री शाहरुख खान को सन
2005 मे पदम श्री से पुरुस्कृत किया गया।
3.
श्री अक्षय कुमार को
2009 मे पदम श्री से सम्मानित किया गया।
4.
श्री अजय देवगन को भी सन
2016 पदम श्री पुरुस्कार प्रदान किया गया।
इन चारों माननीय पुरुष श्रेष्ठों को फिल्म
मे अभिनय के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान के लिए उक्त पुरुस्कारों से पुरुस्कृत किये
जाने पर हम कोई सवाल नहीं उठाना चाहते। लेकिन
क्या इन चारों अभिनेताओं ने पान मसाले के विज्ञापन के संदेश को आम जनों के समक्ष
प्रचारित और प्रसारित कर उनको दिये गये पुरुस्कारों की गरिमा और सम्मान को कायम
रक्खा? क्या इन गणमान्य शख़्सियतों ने पान मसाला के विज्ञापन कर भारत के अति महत्वपूर्ण नागरिक पुरुस्कारों हेतु निर्धारित शाख के एक मुख्य घटक "सार्वजनिक
सेवा" संदेश को क्षति नहीं पहुंचाई?
ये एक विचारणीय प्रश्न है?
श्रीमद्भगवत गीता मे भगवान श्रीकृष्ण कहते
है:-
यद्यदाचरति
श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स
यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥ (अध्याय 3, श्लोक 21) अर्थात
श्रेष्ठ
मनुष्य जो-जो आचरण करता है, दूसरे
मनुष्य वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण कर देता है, दूसरे मनुष्य उसीके
अनुसार आचरण करते हैं।
तब पुरुष मे श्रेष्ठ,
हे! निष्पाप, श्री अमिताभ बच्चन एवं मंडली
के सदस्य आप देश की युवा पीढ़ी और नौनिहालों
को "पान मसाले के सेवन" का संदेश
देकर कौन सा श्रेष्ठ आचरण समाज मे स्थापित करना चाहते है?
कृपया धनार्जन के उपरांत कभी समय मिले तो अवश्य चिंतन करना?
इन पदम पुरुस्कारों की प्राप्ति मे भारतीय
सिनेमा जगत की चकाचौंध, चमक-धमक से प्रभावित हो कर अनेकों अभिनेता या
अभिनेत्रियों को इन शीर्ष पुरुस्कारों से विभूषित किया गया है किन्तु यदि इसका
एकांश भी रगमंच से जुड़े अभिनय कलाकारों या निर्माता निर्देशकों को इन परितोषिकों
से सम्मानित किया गया होता तो अभिनय के क्षेत्र मे दिये इन पुरुस्कारों के महत्व
और गरिमा मे और भी बढ़ोतरी होती। भारतीय सिनेमा जगत मे माफिया,
गुंडों, ड्रग तस्करों की पैठ
एवं हस्तक्षेप एवं कालेधन के रूप मे अर्जित धन मे मदांध तथाकथित अभिनेताओं एवं
उनकी बिगड़ैल पथ भ्रष्ट संतानों के बारे मे
देश का हर एक नागरिक अच्छी तरह से परिचित है। ये जानते हुए भी कि पान मसाला,
तंबाकू, गुटका के विज्ञापन नैतिक
और संवैधानिक रूप से समाज के आम लोगो को पतन के राह पर अग्रेषित करता है,
पदम पुरुष्कार प्राप्त धनलोलुप अभिनेता इस
विज्ञापन के माध्यम से अनैतिक संदेश देने वाले पतित काम को निर्लज्जता पूर्वक कर रहे
है जिसकी निंदा की जानी चाहिये।
श्री अमिताभ बच्चन को छोड़ शेष अन्य तीन अन्य
अभिनेताओं के बारे मे मान भी ले कि ये अधेड़ नौजवान धनार्जन की अंधी दौड़ मे येन केन
प्रकारेण धन उपार्जन करना चाहते है फिर भले ही पान मसाले के विज्ञापन का संदेश दे
कर उन्हे देश के आम नागरिकों को कैंसर जैसी बीमारी के मौत के मुँह मे धकेलने के कुत्सित
कार्य ही क्यों न करना पड़े? पर श्री अमिताभ बच्चन जैसे परिपक्व विद्वान,
विख्यात अभिनेता, योग्य बुद्धिजीवि के
बारे मे क्या कहा जाय जो आजकल चकाचौंध भरी आईपीएल क्रिकेट लीग मे धलड्डे से पान
मसाले जैसे विज्ञापन के माध्यम से पान
मसाले के सेवन करने के संदेश दे कर
उस नौजवान पीढ़ी को कैंसर जैसी जानलेवा
बीमारी के लिये आमंत्रित कर रहे है,
जिनके पिताओं, चाचाओं,
ताऊओं और संरक्षकों ने 26 जुलाई 1982 मे बेंगलोर मे फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान
उनके गंभीर रूप से घायल होने एवं ज़िंदगी
और मौत के बीच संघर्ष मे उनके शीघ्र स्वस्थ और दीर्घ जीवन होने की कामना की थी!!
बड़े दुःख और अफसोस का विषय है कि देश के
बच्चों, किशोरों और युवाओं के
दिलों पर राज करने वाले इन मासूम नवयुवकों को नहीं मालूम कि पान मसाले के सेवन का
संदेश देने वाले विज्ञापन के माध्यम से देश का महानायक और अन्य अभिनेता उनसे झूठ और फरेब कर कर उनको मौत के मुँह मे धकेलने का छल-प्रपंच रच
रहे है और जिसके एवज़ मे लाखों करोड़ो रुपयों का धन बसूल कर रहे है।
क्या इन दौलतमंद अभिनेताओं का पान मसाले के
सेवन का संदेश देने वाला ये विज्ञापन उन्हे दिये गये देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पदम श्री/पदम
विभूषण का अपमान नहीं है? क्या समाज के प्रति अपने नैतिक दायित्वों को तिलांजलि
दे, इन पदम पुरुस्कारों की गरिमा के विपरीत नहीं
है?? क्यों नहीं भारत सरकार को इन तथाकथित चारों अभिनेताओं से इनके तुच्छ,
निकृष्ट, अधम एवं अनैतिक विज्ञापन
मे पान मसाले के सेवन करने के संदेश को दिखाने के लिये इनको दिये गये देश के
सर्वोच्च नागरिक रूपी सम्मान "पदम श्री" और "पदम विभूषण" जैसे
गौरवमयी पुरुस्कार बापस लेने के लिये विचार करना चाहिये?
विजय सहगल





2 टिप्पणियां:
सहगल जी आपने बहुत सही जगह लोगों का ध्यान इंगित किया है। पान मसाले के पैकेट पर साफ़-२ लिखा होता है कि इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि इन्हें पता नहीं है।पैसे की मृगतृष्णा के चलते प्रतीत होता कि इन माननीयों से कितना भी जनविरोधी कार्य करा लो।
Bilkul sahi baat hai.
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