शनिवार, 19 मार्च 2022

जनादेश

 

"समीक्षा-जनादेश 2022"





10 मार्च 2022 को पाँच राज्यों के जनादेश बहुआयामी संदेश देने वाला है। अलग अलग राज्यों मे वहाँ की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर बड़ी ज्वलंत चर्चायें हुई और अंतोगत्वा अलग अलग सफल राजनैतिक दलों ने सत्ता की अट्टालिकाओं पर अपना परचम लहरा ही  दिया।  इतिहास मे कहानियाँ सिर्फ सफल लोगो की ही लिखी जाती है परास्त  राजनैतिज्ञों द्वारा फिलहाल पूर्व की तरह असफलता का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़ आत्म मंथन और विचार मंथन का घिसा-पिटा डायलॉग बोल इस असफलता रूपी बला से फौरी तौर पर  पीछा तो छुड़ा ही लिया पर मरते दम तक कुर्सी से चिपके रहने का मोह नहीं जाता।

सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण संदेश जो इस जनादेश-2022 मे देखने को मिला, वह यह था कि जब पिछले वर्ष सन् 2021 मे पश्चिमी बंगाल मे तृणमूल काँग्रेस को मिले जनादेश पर दृष्टिपात कर तुलना करें  कि किस तरह बंगाल मे चुनावी परिणाम के बाद विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं, उनके अनुगामी सहचरों के साथ तृणमूल काँग्रेस के कार्यकर्ताओं ने लूटपाट, आगजनी, हत्या, हिंसा एवं बलात्कार  का तांडव किया था, जो जनादेश 2022 मे कहीं दूर दूर तक नहीं दिखाई दिया। निर्विवाद रूप से पश्चिमी  बंगाल की उक्त हिंसा, आगजनी और लूटपाट जैसी घटनायें, भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश को शर्मसार करने वाली थी एवं  जनमत के नाम पर बहुत बड़ा कलंक थी। अविवादित रूप से  इस हिंसा, लूटपाट और आगजनी मे सत्ताधारी दल द्वारा आसामाजिक तत्वों, गुंडों को राज्याश्रय दिया गया था। जिसका स्वतः संज्ञान माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लिया गया था। ऐसा प्रतीत होता है लालफ़ीताशाही, और रगदरबारी के चलते उक्त प्रकरण, फ़ाइलों मे बंद हो गया लेकिन लोकतन्त्र के प्रहरी के नाते हर जागरूक भारतीय नागरिक को इस फाइल को सदा सर्वदा खोले नहीं रखना चाहिये?

जनादेश 2022 मे उत्तर प्रदेश मे जहां समाजवादियों ने बेरोजगारी, महंगाई, विकास न होने और प्रदेश मे पिछड़े पन की दुहाई दी। सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने आदि के आरोप सत्ता पक्ष पर लगा चुनावी माहौल को अपने पक्ष मे करने की भरसक कोशिश की पर सफलता के आंकड़े छूने से काफी पीछे छूट गयी। सापा द्वारा स्वयं ध्रुवीकरण की राजनीति की शुरुआत करते हुए, समाज के आम लोगो के बीच प्रचलित  नैतिक मूल्यों एवं दृष्टांतों  की परवाह किये बगैर, ऐसे प्रत्याशियों को टिकिट दिये जिनकी पृष्टभूमि और इतिहास अपराधिक गतिविधियों से भरा पड़ा था। जिसमे कई उम्मीद्वार पूरी चुनावी  प्रिक्रिया के दौरान जेलों मे बंद थे और जेल मे रहते हुए भी जीत गये।    इसमे कोई शक-ओ-सुबह नहीं थी कि उत्तर प्रदेश के चुनावों मे पश्चिमी बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बैनर्जी  का प्रत्यक्ष या परोक्ष निर्देशन था। लेकिन शायद वे भूल गयी कि उत्तर प्रदेश मे "कानून व्यवस्था" एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण "फैक्टर" या "घटक" था जिसके चलते उत्तर प्रदेश की जनता ने "निर्भय", "निडर" और "साहस" के साथ मतदान किया। जिसके फलस्वरूप चुनाव के बाद कहीं कोई दंगा, आगजनी, लूट की एक घटना नहीं हुई। केंद्रीय राजनीति मे आने को आतुर माननीय ममता बैनर्जी को एक बार पश्चिमी बंगाल मे चुनाव के बाद हुई हिंसा, आगजनी, लूट-पाट, हत्या और बलात्कार पर "अपनी सरकार" और स्वयं "अपनी भूमिका" पर जरूर आत्ममंथन  करना चाहिये?

"मुँह मे चाँदी की चम्मच लिये" जन्मे माननीय अखिलेश यादव जी जिन्होने कर्नाटक के एक बड़े  निजी "जेएसएस विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविध्यालय", मैसूर से "नागरिक पर्यावरण इंजीन्यरिंग" से स्नातक की परीक्षा पास की है। उन्होने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविध्यालय से पर्यावरणीय इंजीन्यरिंग से परास्नातक की डिग्री भी हांसिल की है। तब ये तो माना ही जाना चाहिये कि उन्होने विश्व के अच्छे शिक्षा संस्थानों मे शिक्षा और ज्ञान अर्जित किया है। अनेक चुनावी सभाओं  मे उन्होने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री आदित्य नाथ योगी के कम्प्युटर ज्ञान का मखौल उड़ाया है। उनका कहना था कि योगी आदित्य नाथ ने इसीलिए लेपटोप नहीं बांटे क्योंकि उनको "लेपटोप और स्मार्ट फोन"  चलाना नहीं आता? (https://www.youtube.com/watch?v=tKIc82uqdz4)। योगी जी ने गणित मे स्नातक की डिग्री गढ़वाल विश्वविध्यालय से हांसिल की है एवं गणित मे ही मास्टर की डिग्री के दौरान वे गोरखपुर आश्रम मे आ गये।  विज्ञान का विध्यार्थी होने के नाते मै जानता हूँ कि गणित के स्नातक विध्यार्थी के सामने अन्य विषयों के विध्यार्थियों की क्या औकात है!! फिर जिन विश्व विध्यालयों से माननीय अखिलेश जी ने स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की वो कोई भारत और दुनियाँ के श्रेष्ठतम  "आईआईटी" या "एनआईटी"  तकनीकि  संस्थान के समकक्ष  नहीं थे जिनमे प्रवेश के  लिये कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है और साधारण बुद्धि के छात्रों के प्रवेश के लिये तो यह एक दिवास्वपन की ही तरह होता है!! यूएस, आस्ट्रेलिया मे स्थित ऐसे  शिक्षा संस्थान निश्चित ही अच्छे ज्ञान और विज्ञान के केंद्र है पर इनमे प्रवेश धनबल के आधार पर सहजता से प्राप्त किया जा सकता है इसके लिये किसी अतिरिक्त ज्ञान, बुद्धि या कौशल की आवश्यकता नहीं है।

अपने पूरे राजनैतिक कार्यकाल मे अखिलेश यादव जी सिर्फ इसलिये नोएडा नहीं आये कि यहाँ की धरती पर उनका पदार्पण उन्हे मुख्यमंत्री पद से वंचित कर देगा!! कोई धार्मिक रीति रिवाजों मे आस्था विश्वास करने वाला साधारण शिक्षित व्यक्ति  ऐसा करे तो समझ आता है पर आधुनिक विज्ञान और तकनीकी तथा कम्प्युटर मे सिद्धहस्थ तथा ज्ञान और कौशल का दम भरने वाले, विदेशी विश्व विध्यालय से  इंजीन्यरिंग की इतनी आधुनिक उच्च तकनीकि मे दक्षता  और ज्ञान हांसिल करने के बाद मुख्यमंत्री पद पर रहे श्री अखिलेश यादव जी जैसे  व्यक्ति सन् 2014 से 2022 तक नोएडा शहर  मे न आने के कपोल कल्पित टोटके और अंधविश्वास मे कैसे यकीन कर सकते  है?? यह एक विचारणीय प्रश्न है??  

उक्त  चुनावी सभा मे ही अखिलेश यादव जी द्वारा योगी जी के अङ्ग्रेज़ी ज्ञान का उपहास उड़ाया गया। उनका ये कहना था कि योगी जी विदेश मे इसलिये नहीं जाते क्योंकि वे अङ्ग्रेज़ी मे बात नहीं कर सकते? उत्तर भारत के गाँव, देहात और छोटे शहरों मे रह रहे कुछ मध्यम वर्गीय अल्प बुद्धि परिवारों मे आज भी एक बहुत बड़ी कमी है कि वे अङ्ग्रेज़ी ज्ञान, विशेषतः अङ्ग्रेज़ी बोलने मे प्रवीणता  को एक अतिरिक्त और श्रेष्ठ योग्यता माना करते है। आश्चर्य होता है कि ऐसे लोग आज भी "हीनता की भावना" से ग्रसित है। वे ये भूल जाते है कि रूस, जापान, फ़्रांस, जर्मनी, चीन  और अन्य अनेकों देशो के राष्ट्राध्यक्ष सिर्फ अपनी मातृ भाषा मे बात करते है, वे अङ्ग्रेज़ी भाषा नहीं बोल सकते तो क्या उनकी बुद्धि, ज्ञान और कौशल पर सवाल उठाया जा सकता है? मुझे याद है कि एक बार झाँसी  रोजगार कार्यालय मे अपना नाम दर्ज़ कराने के दौरान कार्यालय के एक कर्मचारी ने मेरे अङ्ग्रेज़ी ज्ञान का उपहास उड़ाने की चेष्टा की थी। मैंने उसे उसी की भाषा मे जबाब देते हुए कहा था,  श्रीमान इंग्लैंड मे झाड़ू लगाने वाला एक सफाई कर्मी भी आपसे अच्छी अङ्ग्रेज़ी बोल और लिख सकता है, लेकिन वह ज्ञान और योग्यता मे आप से श्रेष्ठ नहीं हो सकता? "हाँ मेरा अङ्ग्रेज़ी ज्ञान कम हो सकता है, क्योंकि अङ्ग्रेज़ी मेरी मातृ भाषा नहीं है। इसका ये मतलब नहीं कि दुनियाँ मे अङ्ग्रेज़ी  ही ज्ञान की कसौटी का एक मात्र पैमाना है?

14 जनवरी 2022 को लखनऊ मे एक प्रेस वार्ता के दौरान श्री स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने दल मे शामिल करने के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अखिलेश यादव ने एक बार पुनः योगी आदित्य नाथ का उनके क्रिकेट खेलने पर मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि "बाबा मुख्यमंत्री  क्रिकेट खेलना नहीं जानते। स्वामी प्रसाद और अन्य लोगो के दल बदल पर कहा कि बीजेपी के  लगातार विकेट गिर रहे है, उनके द्वारा कैच छूटने के उदाहरण दे अपने क्रिकेट ज्ञान का परिचय दिया  ( https://www.youtube.com/watch?v=YFiYJ8838tk )। मैंने काफी कोशिश कर गूगल सर्च पर इंडिया टीम, प्रदेश या रणजी ट्रॉफी की टीम या आईपीएल की टीम मे किसी राजनैतिज्ञ जो क्रिकेट का पारंगत, प्रवीण पंडित हों का  नाम खोजने की कोशिश की, जिसमे श्री तेजस्वी यादव के  अलावा कोई और नाम नहीं मिला!!  और फिर क्या मुख्यमंत्री को राज्य का शासन चलाने के लिये क्रिकेट खेल के ज्ञान और कौशल की अनिवार्यता है?

उत्तर प्रदेश के परिपक्व और समझदार वोटर्स द्वारा अपने जनादेश 2022 के  माध्यम से जो बड़े संदेश दिये है वो सभी राजनैतिक दलों को आत्म चिंतन और मंथन के लिये अवश्य मजबूर करेंगे ऐसा मेरा मानना है।

विजय सहगल    

2 टिप्‍पणियां:

विजय सहगल ने कहा…

सहगल जी मैने आपका उप्र चुनाव के संदर्भ मे ब्लॉग देखा मित्रो क़ो भी प्रेसित किया बहुत ही सटीक बेबाकी से चित्रण किया है आपके लेखन शैली क़ो कोटिशः नमन ईश्वर करे दिनों दिन आपकी लेखनी क़ो नई सोपान मिले लगता है जनता अब काफ़ी समझदार हो गई है आपको मैने अमित जोगी के द्वारा छत्तीसगड़ से किस तरह जनता के पैसो का भरपूर तथाकथित ATM जैसे शब्दों के रूप मे धनबल का उपयोग किया गंभीर आरोप जनता ने सही जावब दिया 350से अधिक की जमानत जप्त हो गई औऱ इकाई का न्यूनतम आंकड़ा मिला इसमें क़ोई शक नहीँ करपात्री जी का श्राप फलिभुत होकर रहेगा औऱ ये इतिहास बन जायेंगे,कश्मीर फाइल्स फ़िल्म मे बड़ा मार्मिक सही चित्रण किया है हर तरह से पिछले कई सालों से प्रताड़ित कर रहे हर क्षेत्र मे अब ये पतन की अंतिम यात्रा पर है ईश्वर के यहाँ देर है अंधेर नहीँ सहगल जी पुनः आपको धन्यवाद औऱ ढेरो सुभकामनाये बहू औऱ बच्चों क़ो आशीष ज्वलंत समस्या जनसंख्या नियंत्रण भरस्टाचार के विकराल रूप पर भी आलेख लिखे धन्यवाद
BY SH. VIJAY JHA RAIPUR ON WHATSAPP DT. 20.03.2022

विजय सहगल ने कहा…

सम सामयिक चर्चा का सटीक विषय चुना आपने।लेकिन प्रारम्भ में आपने चुनावी बहस के सामाजिक,आर्थिक,भौगोलिक मुद्दे बताए,उससे मैं सहमत नहीं हूँ।सत्य तो यह कि ये चुनाव एक दूसरे को नीचा दिखाने,टांग खीचने में ही केंद्रित रहे,विकास,आर्थिक मुद्दे सब नेपथ्य में चले गए।
कुल मिलाकर आपने चुनावी चकल्लस का सटीक चित्रण किया है ।साधुवाद

श्री राजीव कपूर द्वारा व्हाट्सप के माध्यम से दिनांक 19 मार्च 2022 को प्रेषित।