"मामा की हेल्प लाइन"
यूं तो हम अपने घर के आसपास सार्वजनिक
स्थानों, सड़क,
पार्क आदि की साफ सफाई,
लाईट पानी एवं सड़क निर्माण आदि की समस्या के लिए श्री मेहताब सिंह कंसाना को फोन
कर आवश्यक काम करा लेता हूँ जिनके परिवार का कोई न कोई सदस्य पिछले बीस सालों से
भी ज्यादा हमारे वार्ड का पारिषद जो है। नौकरशाहों के बीच फ़ाइल की खाना पूर्ति मे
भले ही थोड़ी बहुत देर भले ही लग जाये पर आवश्यक काम हो ही जाते है। मै भी नगर निगम
के पारिषद के चुनाव मे रायपुर, भोपाल,
दिल्ली या जहां-कहीं भी मै रहा उनके पक्ष मे मतदान करने अवश्य आया।
पिछले दिनों मध्यप्रदेश मे सीएम हेल्पलाइन के बारे मे बड़ी चर्चा सुन रक्खी थी कि नागरिकों की समस्या के समाधान हेतु फोन नंबर 181 पर कोई भी नागरिक अपनी समस्या के समाधान हेतु शिकायत दर्ज़ करा सकता है। मैंने भी अपने स्वभाव के अनुसार अनुभव लेने या यूं कहें की पंगा लेने की आदत के अनुरूप मध्य प्रदेश मे आम नागरिकों के बीच प्रख्यात "सीएम हेल्पलाइन" पर शिकायत करने का निश्चय किया। नगरनिगम के कर्मचारियों द्वारा घर के सामने स्थित छोटे से पार्क मे पेड़ो की छटाई कटाई की गयी थी। कुछ मोटी मोटी लकड़ी तो वे अपने साथ ले गये पर पेड़ो की टहनियाँ और पत्तियों के ढेर पार्क मे पड़ा रहा। एक दो दिन इंतज़ार के बाद भी जब नगर निगम के संबन्धित अधिकारियों और कर्मचारियो द्वारा इन पत्तियों-टहनियों को हमारे निवेदन के बावजूद सफाई नहीं की तो मैंने प्रचार और प्रसार माध्यमों पर सीएम हेल्पलाइन की प्रसिद्धि की काफी चर्चा और परिचर्चा को देखते हुए एक दिसम्बर 2021 को सीएम हेल्पलाइन के फोन नंबर 181 पर पार्क की सफाई हेतु शिकायत संख्या 15995142 के माध्यम से दर्ज़ कराई। प्रतिक्रिया अच्छी थी, सारे विवरण नोट कर शिकायत संख्या मुझे एसएमएस द्वारा सूचित की गयी। कॉल सेंटर के कर्मचारियों का व्यवहार और कार्य प्रणाली अच्छी थी। बोलने का लहजा तो बहुत ही अच्छा था। घड़ी घड़ी "श्रीमान" और "महोदय" के सम्बोधन से गौरव का अनुभव तो हो ही रहा था और साथ मे ये आश्वासन कि आपकी शिकायत पर शीघ्र कार्यवाही की जाएगी, जो सोने पर सुहागा तो माना ही जाना चाहिये!! हर एक दो दिन बाद फोन पर कार्य की स्थिति पूंछी जाती पर समाधान होता नहीं दिखता। हमे सूचित किया जाता कि नगर निगम के एओ को समाधान हेतु संदेश भेजा गया है। फिर वही ढांक के तीन पात!! पुनः एक दिन यही प्रिक्रिया दोहरा कर संदेश दिया कि बीओ और फिर सीओ को शिकायत मार्क करने का संदेश और फोन आया। फ़ाइल की खाना पूर्ति चलती रही पर शिकायत ज्यों की त्यों थी। मैंने तो शिकायत के समाधान की आशा छोड़ दी थी पर फिर दिनांक 24 दिसम्बर 2021 को हमे सूचित कर अवगत कराया कि आपकी शिकायत "ज़ेड॰ओ॰" को प्रेषित की गयी है, तो मुझे लगा "ए॰बी॰सी॰डी"॰...... से होते हुए अब शिकायत "ज़ेड" तक पहुँच गयी तो समाधान निश्चित ही हो जायेगा? मैंने तो मज़ाक मे ये सोचा था पर तुक्का ठीक बैठा अचानक 27 दिसम्बर 2021 को उद्धयान (गार्डन) विभाग के एक कर्मचारी श्री सुरेन्द्र कुशवाह का फोन आया कि सर, आपने सीएम हेल्पलाइन से शिकायत की थी? मेरी स्वीकृति पर उसने कहा, कि श्रीमान मुझे पार्क की सफाई के लिये अभी आदेशित किया गया है कृपया पार्क की लोकेशन बताए हम ट्रैक्टर लेकर पहुँच रहे है। 15-20 मिनिट मे एक ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ जिसमे ड्राईवर के अलावा तीन कर्मचारी भी बैठे थे, "ढें-ढें" करता हमारे घर के सामने स्थित पार्क पर रुका।
मेरी उम्मीद के
विपरीत ये लोग पार्क की सफाई के लिये आये थे!! मै आश्चर्य चकित था जैसे कोई "दिवा-स्वपन"
देख रहा हूँ!! उन तीनों कर्मचारी श्री भरत,
निमिष, और संतोष झाड़ू,
क्लीपर के साथ पार्क की सफाई मे जुट गये। उन कर्मियों ने बघनख
की सहायता से जगह जगह छोटे-छोटे कचरे,
टहनियों के ढेर बना उन्हे प्लास्टिक की बड़ी सी चादर मे एकत्रित कर ट्रॉली मे डालना
शुरू किया। फिर बचे कचरे को झाड़ू की सहायता से एकत्रित कर ट्रॉली मे डाला। लगभग
डेढ़-दो घंटे की मेहनत के बाद उक्त तीनों ने पार्क को एक दम साफ सुथरा कर दिया। मै
पार्क की सफाई देख खुश था। मैंने उक्त सफाई कर्मचारियों के कार्य की प्रशंसा जो वास्तव
मे इस प्रशस्ति और आदर के हक़दार थे,
उनके अधिकारी श्री मुकेश बंसल से की। श्री बंसल जी को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था
कि मै उनके विभाग के कर्मियों की तारीफ कर रहा हूँ। उन्होने एक बार पुनः सुनिश्चित
करते हुए शंका प्रकट की कहीं आप मज़ाक या खिंचाई
तो नहीं कर रहे? आश्वस्त होते हुए उन्होने
कहा सर, हमारी तो लोग शिकायत ही
करते है आप पहले व्यक्ति है जो प्रशंसा कर रहे है। बाद मे उन्होने बताया कि सफाई कर्मी
सुरेन्द्र अपने कार्य की प्रशंसा किये जाने पर इतना खुश था कि आज पहली बार किसी ने
उसके कार्य की प्रशंसा राज्य के मुख्य मंत्री
महोदय से की!!
उक्त कार्य प्रणाली को देख मै तो सोच रहा था
कि शिकायत पर लीपापोती कर बंद कर दिया गया होगा?
मुझे उम्मीद नहीं थी कि समस्या के समाधान किये बिना,
पृष्ठभूमि मे शिकायत पर कार्यवाही चल रही
थी। बस सीएम महोदय श्री शिवराज सिंह जी जो नागरिकों के बीच मामाजी के रूप मे प्रसिद्ध है,
से अनुरोध है कि यदि शिकायत के समाधान प्रतिक्रियात्मक टाइम यदि कम हो तो सोने पर
सुहागा हो जाये पर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत का घटनाक्रम "देर आयद-दुरुस्त आयद" या "अंत
भला सो सब भला" के रूप मे कम खुशी देने वाला नहीं था। सीएम सहित उद्धयान
विभाग के अधिकारी और कर्मचारी को हमारा साधुवाद।
विजय
सहगल,
1 टिप्पणी:
आपके सदप्रयास के लिए साधुवाद!
आपकी लेखनी उल्लेखनीय रूप से सहज व सुन्दर है!
पुनः बधाई!
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