शुक्रवार, 21 मई 2021

विनाशाय च दुष्कृताम्

 

"विनाशाय च दुष्कृताम्"







श्रीमद्भगवत गीता मे भगवान श्री कृष्ण एक श्लोक मे कहते है कि :-

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।   (अध्याय 4 श्लोक 8)  

अर्थात साधुरूपी, सदाचारी  पुरुषो की रक्षा के लिये एवं पापकर्म करने वाले दुष्ट  मनुष्यों का विनाश करने के लिये और धर्म की भलीभाँति स्थापना के लिये मै समय समय पर अवतार लेता हूँ।

वर्तमान लोकतान्त्रिक परिद्र्श्य मे "पंच परमेश्वर" रूपी सरकार ही ईश्वर का रूप होती है अतः एक जन कल्याण राज्य से ये अपेक्षा होती है कि सर्वसाधारण की रक्षा और सुख, शांति एवं सुविधाओं  के लिये एवं अपराधी, डॉन, माफिया के सर्वनाश के लिये, राज्य मे कानून की अच्छी तरह संस्थापन हेतु कार्य करने की नैतिक और वैधानिक ज़िम्मेदारी सरकारों की होनी चाहिये। कदाचित इसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु  ही गीता का उक्त श्लोक समसामयिक है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के डॉन माफिया और दुर्दांत अपराधी एवं अपराधी से बाहुवली राजनैतिज्ञ   मुख्तार अंसारी से कौन परिचित नहीं है। ये डॉन माफिया अपराधी राजनीति मे विधायक तक की पदवी यूं ही हांसिल नहीं कर सके जब तक कि राजनैतिक दलों ने अपने स्वार्थ सिद्धि और निजी लाभ के लिये इन्हे पराश्रय नहीं दिया होता। लेकिन समय के फेर ने ऐसे डॉन को कानून का इस कदर खौफ पैदा कर दिया कि अपने काले साम्राज्य के प्रभाव से अपने अर्दली सेवादारों की मदद से  मूल प्रदेश उत्तर प्रदेश से कानूनी दाँव पेंच की बारीकियों का फायदा उठा नजदीक के प्रदेश पंजाब की रोपड़ जेल मे  भागने को मजबूर कर दिया। अपने इस फरेब से लगभग जनवरी 2019 से अप्रैल 2021 तक लगभग दो साल तक कड़े नियम कायदे के अनुरूप साधारण कैदी के रूप मे अपने गृह प्रदेश मे जेल मे मिलने वाली कठिनाइयों, मुसीबतों और संकटों  से बचा रहा एवं इस काल को अपनी सुख सुवधाओं और ऐशों-आराम मे तब्दील करा पाने मे सफल  रहा।    

गुंडे माफिया या बदमाशों का तो समझ आता है वे अपनी काली करतूतों से कमाई काली दौलत के बल पर दुनियाँ की हर वस्तु और सुख-सुविधा  को खरीदने की कोशिश कर सकते है (सिवाय संतोष के) पर एक जन कल्याण कारी सरकार से तो ऐसी अपेक्षा नहीं कर सकते कि ऐसे माफिया के झांसे मे आ उसको अवैधानिक सुख सुविधायें उपलब्ध करा अपने कर्तव्यों की खुले आम अवेहलना कर कुत्सित और अधम  उदाहरण प्रस्तुत करे??  एक षड्यंत्र के तहत  पिछले दिनों इन्ही मुख्तार अंसारी के विरुद्ध कोई झूठा और मनगढ़ंत  केस  लगवा पर पंजाब मे पेशी के लिये जनवरी 2019 मे हाजिर करवाया गया था। एक घोर अनैतिक, अशुभ आश्चर्य के अंतर्गत पेशी के बाद छद्म बीमारी और सेहत के आधार पर वहाँ की  पुलिस ने इस डॉन माफिया को कानूनी दाँव-पेच का इस्तेमाल कर बापिस उत्तर प्रदेश भेजने  से इंकार कर दिया। कैसा घोर आश्चर्य एक सूबे की पुलिस कानून का घोर दुर्पयोग एक दुर्दांत अपराधी को बचाने के लिये कर रही थी जिस अपराधी ने ज़िंदगी मे कभी कानून की परवाह नहीं की। क्या अन्य किसी निरीह, गरीब और आसक्त  कैदी के लिये भी पंजाब पुलिस, ऐसी तत्परता और त्वरित कार्यवाही कर किसी बीमार, रुग्ण और अस्वस्थ कैदी के अभियान को मूर्त रूप देगी??  दुनियाँ की शायद ही कोई ऐसी पुलिस होगी जो एक अपराधी को उसके मूल आपराधिक स्थान  पर जाने से रोकने के लिये माफिया के पक्ष मे खड़ी नज़र आये और  न केवल खड़ी नज़र आये कानूनी की पेचीदगियों का दुर्पयोग एक अपराधी के पक्ष मे करती नज़र आये। ऐसा पतित और अनैतिक कृत पंजाब पुलिस अपने स्तर पर कदापि नहीं कर सकती, अपितु इस सब मे राजनैतिक दबाब स्पष्ट नज़र आता है।  इस पूरे अपवित्र प्रकरण के सम्पादन मे राजनैतिक दलों और उनके क्षत्रपों का कुत्सित और घिनौना चेहरा एक बार पुनः समाज के सामने उजागर कर दिया!!  ये एक निर्लज्ज, शर्मसार करने वाला कटु सत्य था। इस प्रकरण मे पंजाब सरकार बेशक  अपने आपको या शासन प्रशासन को बुद्धिमान मान कर एक अपराधी को बचाने हेतु मानवता की दुहाई दे अपनी पीठ ठोक रही हो रही हो लेकिन देश और दुनियाँ की पूरी जनता, प्रशासन की इस बुद्धि, ज्ञान और कौशल पर तरस खा रही है!!

मेरे सहित जनसमान्य की समझ से परे मुख्तार अंसारी को रोपड़ जेल मे बनाये रखने और सुख सुविधायें प्रदान करा कर पंजाब सरकार ने ऐसा कौन से आदर्श  प्रस्तुत किया जो एक जन कल्याण कारी सरकार से अपेक्षा की जाती है? क्या जनकल्याणकारी राज्य ने  आम जनों की सुख सुविधायें प्रदाय के परे  डॉन, माफिया और अपराधियों को जेल मे सुविधायें उपलब्ध करा एक अनैतिक, अन्यायी और सिद्धान्तहीन काला दृष्टांत प्रस्तुत कर अपनी निर्लज्जता और वेशर्मी जग जाहिर  नहीं  की?? शायद पंजाब प्रशासन को  अपने दंभ, अभिमान और घमंड मे इस अनैतिक आचरण मे कुछ भी गलत न दिखाई दे लेकिन उन्हे ये बात हमेशा याद रखना चाहिये कि आम जन सरकार के हर कृत को अपनी सही-गलत की कसौटी पर कस कर देखती है और समय आने पर सटीक जबाब देती है जिसकी गहनता, तीव्रता का अहसास सरकारों को अभी नहीं होगा। ऐसी सरकारों के पैतृक राजनैतिक दलों के मुखिया या जिम्मेदार नेतृत्व को भी इस कृत मे कुछ भी अनैतिक नहीं दिखाई दिया? अगर ऐसा है तो भगवान भी ऐसे व्यक्तियों और दलों को देश दुनियाँ से विलुप्त होने से नहीं रोक सकता!!    

इस माफिया के परिवार के लोग और उनकी पत्नी  ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति से मुख्तार अंसारी की रक्षा की गुहार की है। उन्हे अंदेशा था कि इस डॉन की गाड़ी भी कहीं विकास दुबे (वही "मै विकास दुबे बोल रहा हूँ, कानपुर वाला") की तरह दुर्घटनाग्रस्त हो कर पलट न जाये। देख और सुन कर बड़ा आश्चर्य होता है कि जो डॉन और माफिया या उनके गुर्गे बगैर कानून और न्यायालय की परवाह किये दूसरों  की जानमाल को नुकसान पहुँचाने एवं  जान लेने मे एक पल भी नहीं सोचते, कैसे उसी न्यायालय के समक्ष से अपनी जान की भीख के लिये गिड़गिड़ा रहे है।

उत्तर प्रदेश शासन की अपराधियों और डॉन माफियाओं के विरुद्ध शक्ति और कड़ी कार्यवाही के कारण इन अपराधियों की हालत अब खस्ता होने लगी है। अपनी काली कमाई के दम पर हर सुख सुविधाओं को खरीदने के लिये अब उनकी दाल नहीं गलने  के कारण मुख्तार जैसे माफियाओ ने उत्तर प्रदेश के बाहर ही अपनी सजा काटने मे ही भलाई समझने की नीति के कारण ही पंजाब की रोपड़ जेल मे रहने के लिये ही अपने राजनैतिक रसूख का इस्तेमाल किया।  जिसमे वो सफल भी रहा और कानून की कमियों, बारीकियों और कानून मे मिले अधिकारों के बल पर न्यायिक तंत्र का दुर्पयोग कर स्थानीय न्यायालय से अप्पर न्यायालय, जिला न्यायालय, हाई कोर्ट होकर सुप्रीम कोर्ट मे प्रकरण को दो साल से ज्यादा तक उलझाये रख रोपड़ मे ऐशों आराम, सुख सुविधाओं का सजायाफ्ता जीवन व्यतीत किया। लेकिन कहावत है कि "झूठ कितना भी बलवान हो", "सच परेशान हो सकता है, परास्त नहीं"। अंततः इस तरह 2 साल से चूहे बिल्ली के खेल पर विराम लगा  सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के माध्यम से 6 अप्रैल 2021 मे अपराधी डॉन को अपने मूल गंतव्य बांदा की जेल मे रवाना कर दिया।

कानून की ताकत का अहसास देश, काल और पात्र के अनुसार  कुछ ही घंटे मे देखने को मिला, जब रोपड़ जेल की काल कोठरी से डॉन माफिया को स्थांतरण हेतु निकाला गया तो पुलिस के छः जवान डॉन माफिया को व्हील चेयर पर बैठा कर सेवा और सहायता करते नज़र आये। वही माफिया जब लगभग 900 किमी की 14  घंटे की यात्रा के बाद अपने गंतव्य पर पहुँचने पर  जेल की काल कोठरी तक खुद पैदल चलते हुए नज़र आया। ये होती है समय की बलिहारी, जैसा कि कहावत है कि "अब आया ऊंट पहाड़ की नीचे" और  तभी तो कहा जाता है "समय बड़ा बलवान"!!

विजय सहगल     

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