"मजदूर दिवस"
आज एक बार फिर 1 मई को मजदूर दिवस पर हम 1886 मे शिकागो
के मजदूरों का बो बलिदान याद करें जब उन्होने 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग करते हुए
अपने प्राणों की आहुति दी थी। मई दिवस पर आज
म॰प्र॰ बैंक एम्प्लॉईस असोशिएशन के महा सचिव श्री वी॰के॰ शर्मा का एक सम सामयिक संदेश
प्राप्त हुआ जो प्रसंशनीय है। (http://www.rajkaaj.in/news/labor-leader-vk-sharma-warns-of-problems-on-may-day.php) आज के परिपेक्ष्य मे जब हम मई दिवस पर उन बलिदानी
मजदूरों को अनियमित कार्य के घंटों के विरुद्ध 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग मे हजारों
मजदूरों की बलिदान की बात करते है वहीं वर्तमान मे सरकारों द्वारा श्रम और मजदूर विरोधी नीतियों के
विरुद्ध एक जुट हो संघर्ष का अह्वान आवश्यक है। सरकारों और पूंजीवादी प्रबंधन द्वारा
अघोषित रूप से 10-12 घंटे कार्य को बलपूर्वक और उत्पीढन के द्वारा लागू किया जाना निंदनीय और
भर्त्सना योग क्रत है। पिछले दिनों बैंक प्रबंधन के साथ द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत
दूसरे और चौथे शनिवार को पूर्ण दिवस अवकाश घोषित होने के बावजूद बैंक
मे इस नियम का पालन बैंक प्रबंधन द्वारा ईमानदारी से नहीं किया गया।
हमे याद है एक नियंत्रण कार्यलय मे एक बार प्रादेशिक
प्रबन्धक द्वारा हमे रविवार कुछ घंटे आकार बैठने और बैंक के कार्य को निष्पादित करने
को कहा था। मैंने विनम्रतापूर्वक उनके इस अनुरोध को यह कह कर ठुकराया था कि "श्रीमान
सप्ताह मे एक दिन मिलता है जब अवकाश से उपजी
निश्चिंता और घर के कुछ विचारधीन या अपूर्ण
कार्य को निपटाने का समय मिलता है अतः रविवार को कार्य हेतु आना संभव न होगा"।
लेकिन कार्यालय के ठकुरसुहाती भरे माहौल मे
एक वरिष्ठ प्रवंधक द्वारा प्रादेशिक प्रवंधक
के आदेश की इस तरह अवहेलना अपराध माना गया। कार्यालय मे एक रिवाज था कि 7-8 बजे के
पूर्व तो कोई जाने की सोच भी नहीं सकता था। पर मै हर रोज लगभग एक घंटा अतरिक्त लगा प्रायः 6.30
बजे कार्यालय से प्रस्थान कर जाता था। उच्च
प्रबंधन की सूची मे जी हजूरी करने बाले "दीर्घसूत्री" अधिकारियों के लिये
कानाफूसी के लिये इतना ही पर्याप्त था। इन सबके बीच हमारे अनुज समान एक बहुत ही अच्छे
मित्र भी कार्यालय मे पदस्थ थे। उनकी अपने कार्य के प्रति निष्ठा, लगन, योगिता एवं ज्ञान किसी भी
शंका से परे था। बैंक के दीगर भी उनके ज्ञान की चर्चा लोगो मे थी, उनका व्यवहार, सज्जनता, विनम्रता और शालीनता का कोई
सानी न था। उम्र मे छोटे होने के बावजूद मै उनके ज्ञान का बड़ा कायल था पर उनकी एक आदत
जो मुझे हमेशा खलती जिसका मै प्रखर विरोध भी करता। मेरे कनिष्ठ भ्राता समान उन अधिकारी
को देर तक कभी कभी 8 बजे के बाद तक काम करना, शनिवार, रविवार सहित अवकाश बाले दिन भी उन्हे कार्यालय मे कार्य
करते देखा जा सकता था। उनके कार्य के प्रति
सनक की आढ़ मे प्रबंधन के अधिकारी भी मेरे सहित
सभी लोगो से अपेक्षा रखते कि सभी उन लगनशील अफसर की तरह कार्य करे जिससे मै कतई सहमत
न थे। यध्यपि उक्त अधिकारी विना किसी प्रतिफल के अनासक्त भाव से कार्य करते पर उनको
उद्धरत कर प्रबंधन अन्य लोगो को बलपूर्वक लेट बैठने को बाध्य करता। मेरे सविनय अवाज्ञा
के कारण जिसका डर था वही हुआ। कुछ समय उपरांत मेरा स्थानांतरण प्रधान कार्यालय नियंत्रित
एक अन्य कार्यालय मे कर दिया गया।
आज 1 मई पर मजदूर दिवस के दिन वीरू भाई द्वारा निश्चित कार्यलीन
समय सहित श्रम नीति के अन्य अनेक मुद्दों पर संगठित होकर गहन विचार करने की महती आवश्यकता है। आइये एक जुट होकर
मई दिवस को सफल बनाये।
विजय सहगल


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