रविवार, 12 जनवरी 2020

कक्षा पर वज्राघात


"कक्षा पर  वज्राघात"



11 जनवरी 2020 को जब मै अपने क्लास के बच्चों को पढ़ाने पहुंचा तो देख कर हैरान था कि हमारे कक्षा पूरी तरह टूट कर तहस नहस हो चुकी  थी। ये हमारे लिये किसी वज्राघात से कम नहीं था। इस सबाल से मै परेशान था कि अब हम कक्षा को कैसे आगे चलाएँगे? जो कि एक टीन शेड के नीचे पिछला 10-11 महीने से छोटी मोटी बाधाओं के वावजूद भी ठीक ठाक तरीके से चल रही थी। आस पास जानकारी लेने पर पता चला प्रशासन का कोई "विकास" निर्माण कार्य होना है जिसके कारण इस कक्षा रूपी निर्माण को तोड़ दिया गया है "वो भी बिना किसी पूर्व सूचना के"। मन ही मन अपने आप पर हँसा और अपनी ओछी "सूचना" की सोच पर ठहाका  लगाया और मन मे बुदबुदाया "श्रीमान सहगल आप कोई बहुत बड़ी तोप नहीं और न ही आपकी  क्लास के बच्चे किसी नामी गिरामी पब्लिक स्कूल की क्लास के बच्चे है जिनको कोई वैधानिक पूर्व सूचना दी जाये"।  इन  बच्चों के साथ अध्यापन का अनुभव करके एक बात मै अच्छी तरह  सीख चुका हूँ इस व्यवस्था मे विकास का मार्ग हमेशा-हमेशा गरीब, निचले, दबे कुचले वर्ग के घरोंदों को रौंद कर ही बनाया जाता है। अब बच्चों के साथ मिल कर आयी विपत्ति से डट कर मुक़ाबले करने के सिवा कोई चारा नहीं था? ऐसा हम सब ने मिल कर किया भी।  सबसे पहले पूर्व कक्षा मे विछी रबर के फर्श को ईंट पत्थर से मलबे से मुक्त कराना था। बच्चों की संख्या कम थी पर हौसले ज्यादा बुलंद थे। सबसे पहले हम सबने मिलकर एक टूटी प्लास्टिक चटाई पर खड़े होकर ईश्वर  की प्रार्थना कर सर्वशक्तिमान से अपने मन के विश्वास को मजबूत करने की गुहार की "इतनी शक्ति हमे देना दाता.............................. । फिर सभी बच्चों ने दृढ निश्चय कर सफाई शुरू की बड़े बड़े ईटों पत्थरों को एक किनारे फेंक पुराने रबर के फर्श को मुक्त किया तत्पश्चात 2-3 छात्रों ने फर्श पर झाड़ू लगाकर सफाई की।   यध्यपि वर्ण माला एवं ब्लैक बोर्ड को टाँगने की दीवार छात्रों से दूर हो गई थी पर कामयाबी फिर हम सबके कदमों मे थी। फिर से एक बार सभी बच्चे "बीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो" के जयघोष के साथ आयी विपदा  से मुक़ाबला करते हुए विजयी मुद्रा मे "सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो"। "तुम कभी रुको नहीं तुम कभी झुको नहीं" की भावना के साथ पढ़ाई के  कार्यक्रम को पुनः आगे बढ़ाया।
हमे नाज़ है इन बच्चों पर, हमे फख्र है इनके हौंसलों पर। हम सलाम करते है इन बच्चों की ताकत पर जिसके सहारे ये सक्षम है बड़ी से बड़ी आपदाओं और विपदाओं से लड़ने मे।
नमस्कार।

विजय सहगल       

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

You are great Sir

Govt must pay heed to such selfless activity for the underprivileged.

Their activities must be for the development of the people of India, not cast and Creed.