"शाहीन बाग का सच"
दिनांक 10 दिसम्बर 2019 को जब संसद के दोनों सदनों
से लंबी बहस के बाद जब बिल पास किया गया तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगला देश
से आये अल्पसंख्यक शरणार्थी काफी खुश थे कि उनकी लंबी जद्दो जहद और मांग के बाद नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ। उन्हे खुशी थी कि
दशकों के बाद उनके उपर से शरणार्थी का ठप्पा हट कर भारत की नागरिकता का सपना सच
हुआ है।
पर 13 दिसम्बर से जामिया, अलीगढ़ सहित अनेक
राज्यों मे सीएए के विरोध मे हिंसक प्रदर्शन शुरू हुआ। दुःख इस बात
का है विपक्ष के तमाम नेताओं और एक
पुराने राष्ट्रिय राजनैतिक दल के एक गणमान्य नेता ने लोगो से सीएए के विरोध मे घरों
से बाहर आने के लिए उकसाया। उसके बाद अचानक
15 दिसम्बर को जामिया, न्यू फ्रेंड कॉलोनी, दरिया गंज आदि जगह पर हिंसक प्रदर्शन हुए जिसमे दिल्ली के
एक विधायक पर हिंसा आगजनी फैलाने
का आरोप लगा। इसके बाद दिल्ली मे जामिया
सहित दरिया गंज, सीलमपुर, जाफराबाद शाहीन बाग आदि इलाके मे सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़
और आगजनी, वाहनों को खुले आम असामाजिक तत्वों, बलबाइयों, बबालियों और गुंडा तत्वों
ने आग मे जला कर पूरे दिल्ली को अपहृत
कर हिंसा मे झोंक दिया। बसों और
दुपहिया की आगजनी और पुलिस के विरुद्ध हिंसक आक्रमण भी हुए। घटनाए दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों मे
हिंसा हुई। कई जगह पुलिस ने कड़ी कार्यवाही की। इस घटना क्रम मे इस राजनैतिक दल के
उकसावे पूर्ण कार्यवाही मे कई जगहों पर कुछ निरीह लोग मारे गये जो की बड़ा दुःख
दायी घटना क्रम था। किसी भी शक्स की हिंसा मे मौत बड़ा ही हिर्द्य विदारक घटना होती
है। जिस राजनैतिक नेता के उकसावे के कारण सीधे साधे कुछ नौजवान हिंसा मे मारे
गये। उक्त राजनैतिक दल के अन्य उभरते नेताओं ने मारे गये
नौजवानों की लाशों पर अपनी राजनैतिक
रोटियाँ भी सैकीं जो एक निंदनीय
कृत था। जिसकी जितनी भी निंदा की जाये कम
है। देश मे अहिंसक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हर एक नागरिक और राजनैतिक दल का
अधिकार है। आखिर देश के सबसे पुराने
राजनैतिक दल की इस मनसा और सोच को क्या कहा जाये जो संसद के दोनों सदनों से पास
बिल को कानून मानने से इंकार करता है और देश के सीधे साधे नागरिकों उकसा और भड़का कर हिंसक विरोध करवाता है!! तो क्या उक्त
राजनैतिक दल अब कानून और संसद के अस्तित्व को नहीं मानता? ये एक बड़ा सबाल उठ खड़ा
हुआ है। जिस राजनैतिक दल ने देश पर दशकों तक शासन किया ऐसा प्रतीत होता है वे अब
बगैर सत्ता के तड़प रहे है और येन केन प्रकारेण सत्ता मे आना चाहते है जिसके लिये
आम जन को भड़का कर द्रोह पर अमादा है। तो
अब क्या ये दल देश का कानून बनबाने के
लिये देश के हर गली मुहल्ले मे राय शुमारी
कर कानून बनवायेंगे?? जहां जहां कुछ प्रदेशों
मे इस दल का शासन है वहाँ वहाँ नागरिक
संशोधन बिल के विरोध मे किसी भी तरह का
विरोध प्रदर्शन, धरना, हिंसा, आगजनी, बलबा, बबाल जैसा कुछ भी नहीं हुआ जिससे ये शक और भी पक्का होता है कि
देश मे जगह जगह फसाद कराने मे इसी राजनैतिक दल का हाथ है। ये एक महत्वपूर्ण और
विचारणीय प्रश्न देश के आम जनता के सामने है। जिस पर गहराई से चिंतन मनन करने की
आवश्यकता है विशेष कर देश के वुद्ध्जीवियों को अवश्य ही इस पर विचार करना चाहिये।
देश के अनेकों शहरों से सीएए के समर्थन और विरोध मे
जगह जगह धरने और प्रदर्शन हुए पर शाहीन बाग दिल्ली मे लगातार 28वे दिन धरना प्रदर्शन दिल्ली और देश मे चर्चा का
विषय बना रहा। शाहीन बाग का सीएए के
विरुद्ध विरोध प्रदर्शन टीवी चैनलों पर मुख्य सुर्खियां बटोरता रहा। शाहीन बाग का विरोध प्रदर्शन तो श्रीमान रवीश कुमार जी का अत्यंत प्रिय विषय रहा जिसकी
चर्चा वे नित्य प्राइम टाइम मे करते रहे। अतः हमने भी तय किया कि आज दिनांक 10
जनवरी 2020 को क्यों न हमे भी सुबह शाहीन
बाग चल कर धरना-प्रदर्शन स्थल का का जायजा लेना चाहिये। अपने तय निश्चय के
अनुसार मैं सुबह लगभग 11.30 बजे शाहीन बाग मेट्रो स्टेशन पर उतरा। नोएडा से सरिता विहार को जोड़ने बाली मुख्य रोड पर पैदल चल कर जब
मैंने दोनों ओर नज़र दौड़ाई तो घनश्याम दस बिरला मार्ग पर न के बराबर वाहन नज़र आये।
जिस सड़क पर हर समय सैकड़ो वाहन यहाँ से वहाँ दौड़ते थे वहाँ एक भी वाहन नोएडा या
दिल्ली से न आ और न जा रहा था क्योंकि सड़क के बायें तरफ नाले के पार प्रदर्शन स्थल, सड़क के बीचों बीच बना कर
सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया था। नाले के
ठीक किनारे पहले अवरोध के द्वारा सड़क को बंद किया गया था। पर पैदल चलने
बाले इस अवरोध के किनारे से होकर आ जा रहे थे। मै भी इस अवरोध को औरों की तरह पार
कर गया। नाले के किनारे इस क्षेत्र के विधायक के कार्यालय का एक बड़ा सा बोर्ड सड़क से
साफ नज़र आ रहा था। कुछ 40-50 कदम आगे, प्रदर्शन स्थल से कुछ 20-25 मीटर पहले दूसरा अवरोध
रस्सी आदि से बांध कर बंद किया गया था। जिसके किनारे कुछ रज़ाई गद्दे पड़े थे। ऐसा
प्रतीत होता था मानों प्रदर्शन का प्रबन्ध करने बाले लोग रात को यहाँ रुके होंगे।
जब वहाँ खड़े व्यक्ति से हमने पूंछा कि आगे
जाने के लिए कहाँ से जाना होगा। उस व्यक्ति ने बगल मे लगे लोहे के गेट से जा कर
दूसरी ओर पीले गेट से निकल कॉलोनी के रास्ते से जाने का संकेत दिया। अंदर कई
अपार्टमेंट 4-5 मंज़िला बने थे। दूसरे पीले
गेट से निकलने पर सघन आबादी बाली गली नुमा
उप सड़क के दोनों ओर दुकाने बनी थी। डॉक्टर मलिक, नाक, कान-गला विशेषज्ञ के क्लीनिक से होकर अग्रवाल स्वीट से दायें गली मे एक चाय की दुकान पर पहुंचे। इस दौरान इस रिहाइशि
क्षेत्र मे लोग बहुत कम संख्या मे इधर उधर
दिख रहे थे। वही एक मस्जिद मे दान देने हेतु एक टेप रेकॉर्ड चल रहा था और आसपास
दान पेटियों मे दान देने की अपील की जा रही थी। अब हमने सोचा क्यों न एक चाय पी ली जाये चूंकि
मुख्य धरना स्थल मुख्य सड़क नजदीक ही थी। पूरे बाज़ार मे कुछ दुकाने खुली थी और कुछ दुकाने बंद थी। ज़ेबा स्टोर के सामने आस मोहम्मद
का चाय की गुमटी एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की सीढ़ियों के किनारे बनी थी। जब मैंने
उससे फीकी चाय के बारे मे पूंछा तो उसने हाँ मे सिर हिलाया। मै उसकी गुमटी के
किनारे खड़ा हो चाय का इंतज़ार करने लगा। तभी आस मोहम्मद ने फीकी चाय पीने के कारणों
पर जिज्ञासा वस पूंछा। कहा अंकल मालूम है
शुगर क्यों होती है। मैं कुछ बोल पता तभी बोला "शुगर दरअसल बीबी द्वारा खाने
मे कुछ जादुई चीजे मिलाने से होती है जिसके बारे मे उसके उस्ताद ने उसे बताया था।
जब हमने उससे असहमति व्यक्त कर कहा मै विज्ञान पढ़ा हूँ तुम कहाँ तक पढे हो। मै
तुम्हें शुगर का कारण बताता हूँ। मेरे कुछ बोलने के पूर्व ही वो वोला, मै कुछ पढ़ा नहीं हूँ पर "कुरान"
थोड़ी बहुत मदरसे मे पढ़ी है। मैंने यूं ही उसकी तारीफ की "कहा तुम्हारी उम्र
कम है पर तजुर्बा खूब है तुम्हें"। उसने आगे बताया कि बीबी की इसी खुराफात के
कारण आज बो और मै अलग अलग है। बातचीत कुछ
दिलचस्प मोड़ ले चुकी थी। शुगर के बारे मे उसकी व्याख्या जारी थी। कितनी आसानी से उसने अपनी बीबी से पल्ला झाड़
उसको अपने से अलग कर दिया था!! मैंने देखा
कि वही पास मे दीवार पर एक जगह हाई टेंशन रोड, शाहीन बाग लिखा था तो हँसते हुए उससे कहा कि तुम्हारी दुकान हाई
टेंशन रोड पर होने के कारण भी तुम्हें शुगर हुई लगती है। उसने भी हंस कर कहा इस
सड़क के उपर हाई टेंशन बिजली के तार गुजरने के कारण इसे हाई टेंशन रोड कहते है। अब
तक हम चाय पी चुके थे आस मोहम्मद को 12/- रूपये देकर आगे बढ़े। मै मन ही मन मुस्करा
कर खुश था कि चलो आज शुगर के एक नये "कारण" की जानकरी ने
हमारे ज्ञानकोश को समृद्ध किया।
अब तक चाय पी कर हम अब मुख्य धरना-प्रदर्शन पर आ
चुके थे। स्थल पर बनी मंच पर 5-6 लोग यूं ही अपने काम मे मशगूल थे। मंच के नीचे भी
10-12 लोग यूं ही यहाँ वहाँ टहल रहे थे। मै भी मंच के पास से होकर पीछे तक गया, कही कोई संकेत नहीं थे जो
ये दर्शाते हों कि कल तक यहाँ 28 दिन से चला आ रहा धरना प्रदर्शन हो रहा है। हमे
उम्मीद थी सारे हिंदुस्तान मे टीवी के माध्यम से जिस धरने प्रदर्शन की चर्चा इन
दिनों जोरों पर है वहाँ इस तरह का सन्नाटा मिलेगा। न कोई स्लोगन, न नारे, न कोई इंकलावी घोष आसपास
सुनाई दे रहा था। सुबह सुबह जो उत्साह उमंग धरने मे दिखाई देने चाहिये दूर दूर तक
कहीं नहीं थी। न तो नज़मे गायी जा रही थी न
शेर ओ शायरी के पोस्टर या पम्फलेट कहीं दिखे और न कहीं गहमा-गहमी का शोरगुल? अब तक लगभग एक बजने को
था। टीवी पर सुना था हरदम चाय नाश्ता, समोसे कचोड़ी और अन्य अनेक
खाने की चीजे लोगो के बीच बांटी जा रही है जिनहे कौन ला रहा है, नहीं पता पर ये सब यहाँ
दूर दूर तक नहीं दीख रहा था। धरना स्थल के बगल से लगी दुकानों पर कुछ लोग धूप सेकते
हुए अखबार पढ़ते या चाय पीते नज़र आ रहे
थे। घनश्याम दस बिरला मार्ग जिस पर ये धरना प्रदर्शन हो रहा था इस स्थल के 250-300
मीटर के अलावा कोई वाहन या लोग नज़र नहीं आये क्योंकि ये सड़क इन प्रदर्शनकारियों ने
एक तरफ मंच बना कर तथा दूसरी तरफ इंडिया गेट की एक 6-7 फुट का मोडल एवं दो सीमेंट
के खंबों को रख कर फुट ओवर ब्रिज के नजदीक रख रोड को बंद कर रखा था। टाइम पास करने
के लिये मैंने भी एक मूफली के ठेले से 10/- रूपये की मूफली लेकर जेब मे डाली और टहलता
रहा। न कोई महिलाओं की भीड़, न कोई जामिया, डीयू या जेएनयू के
छात्रों का जमावड़ा क्रांतकारी सिंघनाद करता दिखाई दिया। तो क्या ये धरना प्रदर्शन
अपनी सुविधा अनुसार स्थानीय निवासियों द्वारा फिल्म के "मैटनी शो" की
तरह हो रहा है जो सिर्फ और सिर्फ आम जनता को परेशान करने की द्रष्टि से लगाया जा
रहा है ताकि वे लोग इस सड़क से न गुजरे और दूसरे अन्य मार्ग का इस्तेमाल कर अपने
पैसे और समय को जाया करे। इस मार्ग के बंद होने से फ़रीदाबाद, दिल्ली के लोग नोएडा और
ग्रेटर नोएडा के लिये प्रयोग करने बाले लोग परेशान नज़र आये पर स्थानीय निवासी
शाहीन बाग के अंदर के बने उप मार्गों का उपयोग कर अपने आवश्यक कार्यों को पूरा
करते नज़र आये, जिसके कारण शाहीन बाग थाने बाली सड़क और पुलिया पर काफी चहल पहल देखी। फ़रीदाबाद, दिल्ली से नोएडा जाने
बाले लोग जिनको अब लगभग डेढ़ घंटा और पैसा ज्यादा खर्च कर अपने गंतव्य तक जाना पढ़
रहा है?? ये सरासर आम जनों के
साथ अन्याय है और प्रदर्शनकरियों द्वारा कानून का दुर्पयोग है जिसे दिल्ली पुलिस
द्वारा तुरंत समाप्त कर इन प्रदर्शन करने बालों को किसी अन्य जगह शिफ्ट करवाना चाहिये जिससे आम
जनता को कोई समस्या न हो। आम जनता को हो रही परेशानी और वेरुखी प्रदर्शन करने
बालों की अमानवीयता को भी दर्शाती है। सीएए या अन्य राजनैतिक मुद्दों पर इन विरोध
जताने बाले लोग अपनी सहूलियत और सुविधा
अनुसार प्रदर्शन को अपने टाइम पास का जरिया न बनाये ऐसा प्रशासन को सुनिश्चित करना
चाहिये।
विजय सहगल




9 टिप्पणियां:
खोजी पत्रकार की भूमिका में सहगल जी की हिम्मत को दाद देनी होगी।
राजेंद्र सिंह ग्वालियर
Dear friend appreciate him for his efforts in such age group.
एस एन पांडे ग्वालियर
With due Respect to our Sahgal Sir...
From the blog I find that Sir was in quest of something... Can anyone point out
एम के तिवारी भोपाल
पत्रकारों पर जासूसी।😉
डी के मेहरोत्रा लखनऊ।
Sahgal ji likha to bahut aacha hai. Appreciable your efforts. Keep writing. All the best।
संजीव टाडन नोएडा
Your very correct observation
जे पी नागपाल चंडीगढ़
Excellent
केशव प्रसाद सिन्हा नोएडा
सहगल साहब बहुत सुंदर । आपने बहुत सुंदर शब्दों में वाक़ई शाहीनबाग के आन्दोलन के सच पर प्रकाश डाला । सच को सामने लाने के लिए आपका प्रयास भी सराहनीय हैं ।
एन के धवन लखनऊ
Manjula V Saxena Vijay Sahgal अभी आपका लेख पढ़ा। आपकी हिम्मत को दाद। आज भी खोजी पत्रकारिता क़ायम है
on FB wall ऑफ chrag Khattar
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