मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

डॉक्टर वेरहम कसाई


"डॉक्टर वेरहम कसाई"

समाज मे डॉक्टर एक अहम एवं सम्मानीय स्थान रखता हैं। आज के अर्थ प्रधान युग मे भी समाज के लोग डॉक्टर को भगवान की तरह पूजते हैं और ये सच भी हैं डॉक्टर अपने अनुभव और सलाह पर लोगो का इलाज कर भगवान की तरह  उनको कष्ठ और दु:खो से मुक्त करते हैं। क्या डॉक्टर भी बर्बर और निर्दयी होकर कसाई की तरह व्यवहार कर सकते हैं,  भारतीय जनमानस मे इस की  कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन अपवाद स्वरूप भी ऐसे व्यक्तित्व देखने को नहीं मिलते, लेकिन बड़े अफसोस और दु:ख के साथ ऐसा एक अनुभव मैं आप लोगो के साथ बांटना चाहता हूँ। मैं आज तक नहीं समझ पाया कोई डॉक्टर इस तरह का व्यवहार क्यों और कैसे कर सकता हैं? उसका व्यवहार अमानवीय कैसे हो सकता हैं?

मैं उन दिनो सन 1992 मे ग्वालियर मे पदस्थ था मेरा छोटा बेटा हाल ही मे हुआ था। उसको कुछ  प्रोब्लम हो रही थी हम लोगो ने उसे लोहिया बाज़ार ग्वालियर मे एक प्रसिद्ध डॉक्टर को दिखाया उन्होने आवश्यक उपचार के बाद सलाह दी कि जब ये 6-7 महीने का हो जायेगा, इस का एक छोटा सा  ऑपरेशन होगा कोई दिक्कत या चिंता की बात नहीं हैं। इसी बीच मेरा ट्रान्सफर ग्वालियर से शाखा पोरसा मे हो गया जहां कुछ ऐसी परिस्थितियाँ बनी की हम सारा समान पोरसा मे ले जाने के बाबजूद परिवार को वहाँ शिफ्ट न कर सके। इसलिये बच्चों को अपने माता-पिता के पास  झाँसी छोड़ना पड़ा जहाँ बच्चों का स्कूल मे एड्मिशन आदि कराना पड़ा। पोरसा से झाँसी साप्ताहिक कष्टप्रद आवागमन  लगभग साढ़े चार साल करना पड़ा इसलिये  माता-पिता एवं भाइयों के संयुक्त परिवार मे रहने के कारण हम निश्चिंता पूर्वक नौकरी कर सके।  झाँसी मे रहने के कारण 6-7 माह बाद बेटे का जो छोटा ऑपरेशन कराना था उसे झाँसी मे ही कराया जो ठीक तरह न हो पाने  के कारण ग्वालियर के लोहिया  बाजार स्थित पुराने डॉक्टर को दिखाया। उक्त डॉक्टर एवं उनके एक सहायक डॉक्टर ने बेटे को देखा आपस मे एक दूसरे को देख कर मुस्कराये और हम पति पत्नी को बोले आप इस बच्चे को उसी डॉक्टर को दिखलाए जिससे आपने झाँसी मे ऑपरेशन कराया। उक्त जबाब से हम दोनों  चिंतित और विचलित होते हुए उनसे पूंछा आखिर ऐसी क्या बात हैं जो आप इस तरह कह रहे हैं। उनका वही जबाब था आप उसी या  किसी और डॉक्टर को दिखाये! मैंने पुनः निवेदन किया की   हर व्यक्ति जब पूर्व के डॉक्टर के इलाज़ से संतुष्ट नहीं होता तो दूसरे बड़े डॉक्टर को दिखाता हैं और इसीलिये हम आपके पास आये हैं पर उन दोनों डॉक्टर ने अपना बही जबाब जारी रखा  कि आप दिल्ली या अन्य जगह ले जाये। अब हम पति-पत्नी काफी चिन्तित एवं परेशान हो गये और पुनः उस डॉक्टर को निवेदन कर  कहा कुछ तो आप बताये हम उसे दिल्ली या अन्य जगह भी ले जायेंगे पर अपनी कुछ तो राय दे बच्चे के इलाज के लिये,  लेकिन वह अपनी बात से टस से मस नहीं हुआ और अपना बही जबाब अलापता रहा। उस के इस निर्दयी रूप को देख कर मैं काफी सकते मे था। मेरी पत्नी की आँखों मे आँसू आ गाये, मैं भी काफी परेशान और चिन्तित था कि न जाने कौन सी विपदा आ पड़ी? आखिर मे मैंने उस डॉक्टर को कहा कि जब आपको इसे देखना नहीं था तो पिछले डॉक्टर के पर्चे आदि के साथ वेटे को क्यों चेक किया और चेक करने के बाद आप दोनों एक दूसरे को देख कर क्यों मुस्कराये? लेकिन उस कठोर, निर्दयी, कसाई डॉक्टर ने अपना एक ही जबाब जारी रखा। उस डॉक्टर का सहायक जो हमारा परिचित था हमने निवेदन किया कि आप वेशक इलाज़ न करे पर सलाह तो दे हम निश्चित ही उसे कहीं और दिखा लेंगे। उसने कुतर्क दिया दूसरे बैंक के चैक को आप अपने बैंक मे कैसे भुगतान करेंगे वैसे ही दूसरे डॉक्टर के मरीज को हम कैसे देख सकते हैं। मुझे उसके कुतर्क पर काफी दुख और क्षोभ हो रहा था मैंने कहा आपको बैंक के बारे मे कुछ जानकारी नहीं हैं मेरा सिर्फ ये कहना था कि जब आप दूसरे डॉक्टर के मरीज को नहीं देख सकते तो आपने शुरू मे ही मना करना चाहिये था। लेकिन सब निवेदन, प्रार्थनायें निरर्थक रही और आखिर कर हमे इस डॉक्टर के रूप मे कसाई के  दु:खद अनुभव  के साथ उसके हॉस्पिटल से बापस आना पड़ा। अब सबसे बड़ी चिंता हमे किसी दूसरे डॉक्टर से तुरंत सलाह-मशविरा करना था। हम लोग  बही पास मे स्थित  श्री ओम प्रकाश आर्य जो हमारे पितातुल्य थे  और नया बाजार, ग्वालियर  के पुराने रहवासी   एवं गणमान्य व्यक्ति थे  के घर   पर गये और अपने साथ हुई इस घटना के बारे मे बताया। वह उस डॉक्टर को जानते थे उन्होने नाराजी जाहिर कर कहा वह डॉक्टर ऐसा कैसे कर सकता हैं  मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ।  पर हम लोगो ने किसी और डॉक्टर के बारे मे जानकारी चाही। उन्होने डॉक्टर छाबड़ा जो कि जे॰ए॰ हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टर थे, को फोन कर हमे उनके पास भेजा और किसी भी तरह की चिंता न करने के लिये हिम्मत बंधाई। हम लोग विना एक पल गवाये डॉक्टर छाबड़ा के पास गये उनको हमने सारी केस हिस्ट्री बताई। उन्होने तसल्ली पूर्वक हम लोगो को सुना और वेटे को देखा और हमे बताया कोई चिंता की बात नहीं हैं आपने जो ऑपरेशन झाँसी मे कराया है वह कुछ ठीक नहीं हुआ हैं। पर आप जब चाहोगे इसका ऑपरेशन हो सकता हैं मैं भी इसका ऑपरेशन कर सकता हूँ,  पर इस तरह के ऑपरेशन के एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर अशोपा आगरा मे हैं आप उनसे भी ऑपरेशन करा सकते हैं। कोई घबड़ाने या चिंता करने की जरूरत नहीं हैं। उस दर्दनाक किस्से के बाद भगवान के रूप मे हमे सलाह देने बाले डॉक्टर छाबड़ा मिले। हम लोगो ने अगले दिन ही आगरा पहुँच कर वेटे को  डॉक्टर अशोपा के हॉस्पिटल मे दिखया। मेरे बड़े भाई और बहिन भी उन दिनो  आगरा मे थे एक हफ्ते के अंदर ही डॉक्टर अशोपा ने वेटे का सफल ऑपरेशन कर पुनः इस सत्य को स्थापित कर दिया कि भगवान के रूप मे डॉक्टर उपस्थित हैं। शायद एक निर्दयी, कठोर, कसाई के रूप मे लोहिया बाज़ार, ग्वालियर का वह डॉक्टर  अपवाद स्वरूप एक हादसा था।

विजय सहगल     

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