पुलवामा के शहीदों को नमन
अभी
कुछ महीने पहले की ही तो बात हैं हम अपने देश की मातृभूमि के उस भू भाग से श्री
अमरनाथ तीर्थ यात्रा के लिए गुजरे थे हमे
क्या पता था पुलवामा मे दिनांक 14 फरवरी 2019 को हमारे केन्द्रीय रिजर्व पुलिस के
41 बहादुर जवानो ने अपनी शहादत से श्री अमरनाथ
गुफा तीर्थ के पहले एक नये तीर्थ की स्थापना कर दी। नमन हैं देश के इन बहादुर नौजवानों को जिन्होने
अपना बलिदान देकर हमारा कल, काल के गाल से बचा लिया। पाकिस्तान
द्वारा प्रायोजित आतंकबाद के कायराना हमले मे हमारे सुरक्षा बालों के इन जवानों के
बलिदान ने हमे फिर से उस अमरनाथ यात्रा को
पुनर्जीवित कर दिया। उस यात्रा वृतांत मे हमने महसूस किया था कि इन सुरक्षा बलों
के बिना अमरनाथ यात्रा संभव ही नहीं थी। हम
शुक्रगुजार हैं इन सुरक्षा बालों के उन बहादुर वलदानियों के कि जिनके कारण दुश्मन-देश
की सीमाये हमारे घर से कोशो दूर हैं। आज छद्म मानवाधिकार के पैरोकार स्वतः याद आ गये
जो कल तक सोहरबुद्दीन और तुलसीरम प्रजापति
जैसे आतंकियों की मुठभेड़ मे हुई मौत पर उनके भाई और परिवार के अधिकारों पर स्यापा कर
रहे थे, आज शायद इन पत्थरबाजों और आतंकवादियों के पक्षधर बन कर
खड़े हों। इन लोगो को इन आतंकियों के भाई और बच्चों की तो चिंता थी, आज उन्होने क्यों नहीं सवाल किया उन कायर आतंकवादियों से, उन
देश के गद्दारों से, मानवता के दुश्मनों से, क्यों नहीं रोकी उस बहादुर केन्द्रीय
रिजर्व पुलिस की 76वी बटालियन के चालक जवान स्व॰ जयमल सिंह की निर्शंन्स हत्या, जो देश की रक्षा के लिये बस चला कर अपने छोटे-छोटे बच्चों की ग्रहस्थी चला
रहा था!! इन उन्मादी
धर्मांन्ध आतंकियों ने जिन्होने अपनी ईद मनाने के लिये हमारे जांबाज फौजी स्व॰ नसीर
अहमद के परिवार की ईद स्याह कर दी!! ऐसे ही हमारे अन्य शहीदों के परिवारों की भी कमोवेश यही कड़ुवी और सच्ची कहानी हैं जिन्होने
अपने बेटों को इस जंग मे खोया हैं। हर परिवार का करुण क्रंदन हमारे ह्रदय को झकझोर
रहा है।
मौलाना
मसूद अज़हर, हफीज़ सईद, जैसे क्रूर आततायी
ये समझते हैं कि वे निरीह मासूम और बेकसूर लोगो की हत्या कर इस्लाम की रक्षा कर रहे हैं। ये भूल रहे है कि मुहम्मद साहब
का सारा जीवन सच, साहस, दया, करुणा, भाई-चारे, ईश्वर के प्रति
अटूट भरोसे का प्रतीक रहा था और जिन्होने अपनी ज़िंदगी, इंसानों कि भलाई
और आपसी भाई चारे के लिये जी थी। उन
की तमाम शिक्षाओं मे एक थी कि इस्लाम का मानने
बाला, कभी भी इंसानों के बीच आपस मे वैमनस्य, मनमुटाव, हिंसा, दुश्मनी या विद्वेष
नहीं फैलाता ऐसा करना कुफ्र हैं और करने बाले
की सारी नेकियाँ और अच्छाइयाँ पर पानी फिर जायेगा। इन अल्प बुद्धि मूर्ख आतंकियों को समझ लेना चाहिए कि
इस्लाम उनकी बजह से जिंदा नहीं है बल्कि वे इस्लाम की बजह से तब तक ही जिंदा है जिस दिन उनके जुल्मों-सितम कि इंतहां होगी अल्लाह का रहमो करम उनके उपर से उठ जायेगा और उनका भी बही हश्र होगा जो विन-लादेन और बगदादी जैसे आततायी-आतंकियों
का हुआ था।
आईये
आज संकट की इस घड़ी मे हम सब एक जुट होकर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी घटना की तीव्र
भर्त्स्ना करे। हम अपनी सरकार से मांग करते हैं इस कायराना हमले के विरुद्ध कठोरतम
कार्यवाही करे। सुरक्षा बालों के 41 जवानों की शहादत के लिये हम उन्हे शत-शत नमन करते
हैं, अपनी हार्दिक अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते है। ईश्वर से प्रार्थना
करते हैं कि उनके परिवार जनों को हुई इस असामयिक, अपूर्णिय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
विजय सहगल
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