चूहों का
सम्मेलन
इस
सच से हम सभी भलीभाँति परिचित हैं कि हिन्दुस्तान
की सभी ट्रेनों मे चाहे वह स्लीपर कोच हो या ए॰ सी॰ का प्रथम, दुवतीय या तृतीय श्रेणी का कोच हो इन ट्रेनों मे मालिकाना हक़ भले ही रेल मंत्रालय का हैं पर हर ट्रेन के डिब्बे मे चूहों की उपस्थिती
ये बताती हैं कि ट्रेन के असली मालिक चूहे हैं जिनके नियंत्रण मे पूरी ट्रेन इंजिन से लेकर पीछे गार्ड के डिब्बे तक होती हैं। हर स्टेशन पर
इन चूहों की उपस्थिती इस बात का प्रमाण हैं कि पूरे रेल तंत्र पर इन चूहों का ही
राज्य हैं। इस कड़वे सच के साथ चूहों के अन छूये पहलू को छूने का प्रयास कर रहे
हैं।
अजि
सुनते हो बेटा बड़ा हो गया
है अब उसके लिए कोई योग्य लड़की की
तलाश करो या यों ही हाथ पर हाथ धरे बैठे रहोगे, समय निकलता जा रहा हैं बेटा अब बड़ा भी होगया है
और अब तो उसने कारोबार मे भी आपका हाथ
बटाना शुरू कर दिया हैं। गाड़ी संख्या 22416 ए॰पी॰ ए॰सी॰ एक्सप्रेस के फ़र्स्ट ए॰सी॰
कोच मे अपने ऑफिस मे बैठ कर वह अपने पति
से कुछ नाराजी मे कह रही थी। "अरी भाग्यवान परेशान क्यों होती हो हम भी बेटे
के व्याह के लिये योग्य लड़की की तलाश चारों ओर
कर रहे हैं", चूहे ने अपनी चिन्तित पत्नी को ढाढ़स बंधाते हुए कहा। जी
हाँ ये एक ऐसे चूहा परिवार की कहानी हैं जो 22416 अप ए॰पी॰ ए॰सी॰ एक्सप्रेस जो विशाखापटनम से हज़रत
निज़ामुद्दीन के बीच चलती हैं, के मालिक हैं और अपने योग्य
सुपुत्र के विवाह के लिये सुंदर सुयोग्य बधू की चाहत के लिये चिन्तित हैं। बैसे इनके परिवार का यह एक खानदानी व्यवसाय है
जो पूरे हिंदुस्तान मे फैला हुआ हैं जिसको इनके परिवार की कई पीढ़ीयां इसी ट्रेन संचालन के कार्य को सफलता पूर्वक करती आ रही हैं। चूहे ने कहा हमने 12615 जी॰टी॰ एक्सप्रेस
बालों की लड़की से बात की थी पर लड़की मे कुछ कमी के कारण माना कर दिया। चूहे की
पत्नी ने पूंछा ऐसी क्या कमी थी, क्या कम पढ़ी लिखी या दुबली
हैं? बैसे भगवान का शुक्र हैं अपने चूहा समाज मे इन आदिमियों
की तरह सुंदरता और दहेज जैसे समस्याओं से
हमारे समाज को रुबारू नहीं होना पढ़ता, तो फिर लड़की मे ऐसी क्या
कमी थी जो तुमने मना कर दिया। चूहा बोला
अरी भाग्यवान जी॰टी॰ एक्सप्रेस जैसी इतनी
बड़ी और प्रसिद्ध गाड़ी को चेन्नई से दिल्ली
तक मैनेज करना अनपढ़ लोगो के बस की बात नहीं, उसकी पढ़ाई लिखाई
मे कहीं कोई शंका नहीं हैं। हम चूहों की तो बस एक ही शान होती हैं, आदमी मे जैसे उसकी मूंछ होती हैं और चूहों मे उसकी पूंछ। उस लड़की
की "पूंछ" कटी थी शायद किसी रेल दुर्घटना मे कट गई थी, इसलिए मना कर दिया। सुनकर चूहे की पत्नी ने अपने पति से सहमति जताई। पर तुरंत ही पति से कहा विशाखापटनम
से निज़ामुद्दीन तक रास्ते मे इतनी पैसेंजर ट्रेन मिलती हैं इन पैसेंजर ट्रेन के
चूहों से बात क्यों नहीं चलाते? अब चूहे का पारा गुस्से से सातवे
आसमान पर था बोला "तुम तो अपने पुत्र मोह मे अंधी हुई जा रही हो। अरे
अपना भी तो कुछ स्टेटस देखो? क्या विशाखापटनम-रायपुर, या गोंदिया-नागपुर, इटारसी-भोपाल, झाँसी-बीना, आगरा-दिल्ली पैसेंजर बाले चूहों की कोई औकात हैं हम लोगो के सामने? हम लोग सुपरफास्ट ए॰सी॰ एक्सप्रेस ट्रेन बाले हैं, अरे
जरा इन पैसेंजर ट्रेन बाले चूहों और इनकी फटीचर रेल गाड़ियों से इन का स्तर तो देखो।
इटारसी-भोपाल पैसेंजर बालों के पास सफाई
कर्मचारी रखने की क्षमता भी नहीं कितनी गंदी गाड़ी रहती हैं। आगरा-झाँसी बालों के
पास टिकिट चेक करने के लिये टी॰सी॰ तक रखने के पैसे नहीं हैं तभी तो इन रेल गाड़ियों मे कितने लोग
बिना टिकिट यात्रा करते हैं। अरे सफाई के लाले पड़े रहते है इनके यहाँ, एक सफाई बाला भी नहीं रख सकते ये अपने घर (ट्रेन) मे। उसने पत्नी को
उल्हाना देते हुए कहा। अपनी 22416 अप
ए॰पी॰ ए॰सी॰ एक्सप्रेस को देखो हम लोगो ने पड़े लिखे आदमियों जैसे टी॰सी॰, रसोईयान के वेटर आदि को नौकरी पर
रखा हैं जो प्रोपर ड्रेस मे रह कर यात्रियों की सेवा करते हैं और तो और ये पैसेंजर
बाले अपनी ट्रेन मे यात्रियों को मूँगफली-और
पोपकोर्न के अलावा कुछ नहीं देते हमारी 22416 अप
ए॰पी॰ ए॰सी॰ एक्सप्रेस मे ऑन लाइन खाने की सप्लाइ होती हैं चाय कॉफी तो
पूरे दिन हम लोग पेंट्री-कार के माध्यम से सर्व करते हैं। ब्रेकफ़ास्ट, खाना और डिनर कितना स्वादिष्ट होता हैं हमारे यहाँ,
पैसेंजर ट्रेन बाले चूहे परिवार हमारे
स्तर के नहीं हैं अतः तुम उनके परिवार की लड़की लाने की सोचना भी नहीं। अरे अनपढ़ और
देहाती यात्रियों के साथ रह कर इन पैसेंजर
ट्रेन के चूहा परिवारों का रहन सहन भी
अनपढ़ और देहातियों की तरह हो गया हैं।
हमारे बच्चे पढे-लिखे एवं टिप-टॉप टाई-सूट मे होते हैं क्योंकि हम लोग की ट्रेन मे
अंग्रेजी पढे लिखे लोग यात्रा करते हैं। तुम नहीं समझोगी, ये
सब संगत का असर हैं। चूहे ने अपनी नाराजी जाहिर करते हुए अपनी चुहिया पत्नी को प्यार
से डांटा।
इसी
बीच खबर लगी कि अखिल भारतीय चूहों का सम्मेलन नई दिल्ली मे होने जा रहा हैं
और 22416 अप ए॰पी॰ ए॰सी॰ एक्सप्रेस बाले चूहे को विशाखापटनम
और दिल्ली के बीच के अन्य स्टेशन जैसे विजयबाड़ा, खम्मम, वारंगल, रामगुंडम चंदरपुर और अन्य स्टेशनों से 100-100 चूहों को लाने का बंदोवस्त करना हैं। सम्मेलन नई
दिल्ली के यार्ड मे होना तय हुआ हैं। उक्त सम्मेलन मे चूहों को ट्रेन परिचालन मे
हो रही कठिनाईयों और अन्य विषयों पर चर्चा की जायेगी। ब्रहद समागम की तैयारियां चारों
तरफ शुरू हो गई। संदेश देश के चारों दिशाओं मे जाने बाली ट्रेनों के माध्यम से
प्रेषित किये जाने लगे। उत्तर मे संदेश जम्मू तवी एक्सप्रेस एवं पंजाब मेल के
माध्यम से भेजे गए, दक्षिण मे ख़बर के लिये जी॰टी॰ एक्सप्रेस, केरला एक्सप्रेस, कर्नाटक और आंध्रा एक्सप्रेस के
चूहों ने ये ज़िम्मेदारी सम्हाली, पूर्व मे गुवाहाटी और हाबड़ा
मेल, उत्कल एक्सप्रेस एवं अन्य गाड़ियों से समाचार भेजे गये, पूर्व मे सूरत, बड़ोदरा,
अहमदाबाद मेल के चूहों ने ये ज़िम्मेदारी उठाई। इन सब तैयारियों मे कब समय निकाल
गया पता ही नहीं चला। सभी चूहों को खाने पीने की व्यवस्था विभिन्न शहरों को नई दिल्ली से चलने बाली भोपाल, जयपुर, लखनऊ, देहारादून, चंडीगढ़ शताब्दी एक्सप्रेस के
चूहों ने उठाई क्योंकि उन्हे इन गाड़ियों मे परोसे जाने वाले नाश्ते और खाने का अच्छा
खासा अनुभव था। इसी बीच वह दिन भी आ गया जब सम्मेलन था। सारे हिंदुस्तान के
विभिन्न प्रान्तों से आये चूहे सुबह सुबह तैयार होकर अपने अपने प्रान्तों के
परिवेश मे नई दिल्ली के यार्ड की तरफ मार्च करते हुए जा रहे थे। अद्भुद द्रश्य था।
निर्धारित समय पर देश की सबसे तेज गति से चलने बाली ट्रेन 12050 गतिमान एक्सप्रेस
के मालिक चूहे की अध्यक्षता मे सम्मेलन की शुरुआत हुई। अध्यक्षीय भाषण मे 12050
गतिमान एक्सप्रेस चूहे ने देश मे परिचालित रेल तंत्र पर चूहों के एक छत्र राज्य पर
खुशी जाहिर की। अपने अस्तित्व को आदमियों दुवारा मिटाने के प्रयासों की निंदा करते
हुए चेतावनी दी गई यदि ऐसे प्रयास जारी रखे तो हम सब जगह सूरत की तरह प्लेग बीमारी
फैला कर मानव जाति के लिये मुसीबत खड़ी कर देंगे। एक अन्य चूहा जो हट्टा कट्टा था
शायद पंजाब से आया था बोला आदमियों को हम चूहों से सीखना चाहिये कैसे हम सब मिल कर
भोजन करते हैं जबकि हमारी ट्रेनों मे आदमी कैसे अलग अलग दिशाओं मे मुह करके अलग
अलग खाना खाते हैं। एक अति उत्साहित चूहा जो बिहार से आया था बोला हमने सुना हैं
मुंबई मे उत्तर भारतीय चूहों पर वहाँ के कुछ लोगो ने मारपीट कर उन्हे मुंबई से
बाहर खदेड़ने की कोशिश की है हम इस कोशिश का मुहतोड़ जबाब देंगे। तभी एक बुजुर्ग
तजुर्बेकर चूहे ने कहा नहीं बच्चे हम चूहे आपस मे लड़ कर कभी भी इतना नीच और घिनोना
कार्य नहीं कर सकते हैं, ये तो उन दोहरे चरित्र के व्यक्तियों
का कार्य है जो एक तरफ धर्म का वास्ता
देकर एकता की बात करते हैं बही भाषा और प्रांत के आधार पर अपने ही भाइयों के साथ
मारपीट करते हैं। ये कार्य तो मुंबई के आदमियों
दुवारा बिहार और उत्तर भारतीय आदमियों के साथ मारपीट कर किया गया हैं जो आपस मे जाति, धरम और प्रांत के आधार पर एक दूसरे से नफरत करते हैं। ऐसा झूठा विडियो आदमियों दुवारा हम चूहों की
एकता को तोड़ने के लिये वाइरल किया गया हैं। हम सभी चूहों से आग्रह करते हैं कि
बगैर सही तथ्यों को जाँचे-परखे कोई भी विडियो आदमियों की तरह सोश्ल मीडिया मे
वाइरल या पोस्ट न करे। क्योंकि इन आदमियों को कोई भी मैसेज,
फोटो, विडियो बगैर सत्यता को जाँचे-परखे फॉरवर्ड करने की आदत
हैं। कुछ आदमियों को तो अपने नाम के छपास
की इतनी भूख होती हैं कि वे नकल (कॉपी-पेस्ट) मार कर जब तक 5-10 पोस्ट
फॉरवर्ड न कर ले उनका खाना नहीं पचता। एक
चूहा जो बड़ी देरी से अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहा था, शायद
हैदराबाद से आया था। बड़ी गरमा-गरम तक़रीर कर रहा था। आदमियों दुवारा ट्रेनों मे से
चूहों को समाप्त किये जाने पर कुपित था। आदमियों को संबोधित करते हुए बोला
"तूँ क्या तेरी बिसात क्या, तेरे जैसे 56 आये और चले गए, मैं क्या मेरी एक लाख नश्ले इन्ही ट्रेनों मे रहेंगी!! क्योंकि ये ट्रेने
हमारे अब्बा की हैं। बड़ी तालियाँ बटोरी
उसने चूहों की जमात मे। एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से सम्मेलन मे पारित किया गया कि
चूहों की आर्थिक विकास दर 20-25% प्राप्त करने के लिये सभी चूहों का आह्वान किया
गया। सन 2021 तक सभी चूहों को पक्की छत्त
के रूप मे नई-नई एक्सप्रेस ट्रेन प्रदान
करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। सम्मेलन मे एक स्वर से सभी चूहों ने
सर्वसम्मति से आदमियों दुवारा चलाये जा रहे स्वछ भारत अभियान की तीव्र निंदा की गई
क्योंकि इस अभियान की बजह से चूहों के अस्तित्व मिटने का खतरा हैं इसलिये ज्यादा
से ज्यादा गंदगी फैलाने का निर्णय लिया गया। गंदगी फैलाने का अभियान चलाया जाये और
इस हेतु आदमियों को ज्यादा से ज्यादा पान, तंबाकू, पान मसाला इस्तेमाल करने एवं खाने बालों को
बड़ावा देने का निर्णय लिया गया। हॉस्पिटल
और औषधालयों को शीघ्र बंद कराया जाये ताकि ज्यादा-से ज्यादा लोग बीमार हों और महामारी
फैले, बिहार और
गुजरात के चूहों ने अपने प्रेदशों मे शराब बंदी समाप्त करने की मांग उठाई, ताकि देश मे चूहों को समान रूप से पीने की सुविधा मिले। निर्वाध रूप से शराब
की सप्लाइ की जाये ताकि चूहे और आदमी टल्ली होकर दोनों गंदगी फैलाओ अभियान को
सफलता पूर्वक लागू कर सके।
एक
चूहे ने बतलाया, एक दिन तो हद हो गई एक नौजवान उस दिन यहाँ
ट्रेन मे बार-बार अपनी आस्तीन को ऊपर चढ़ाते हुए कह रहा था "चौकीदार चोर
हैं"। ट्रेन का मालिक चूहा घबड़ा गया
और उसने पूंछा श्रीमान क्या गलती हो गई मुझ
से मैंने क्या चोरी की हैं। वह बोला ये मैं नहीं जानता पर ये सही है कि "चौकीदार
चोर हैं"। चूहा बोला कृपया बताए हमारे ट्रेन के नौकरों टी॰सी॰, रसोई यान
के कर्मचारी या कोच अटटेंडेंट ने आपसे कुछ रिश्वत मांगी या ज्यादा पैसे लिये। वह बोला हमे नहीं मालूम पर ये निश्चित हैं कि
भैया-"चौकीदार चोर हैं"। चूहा बोला फिर नाम भी तो बताओं चौकीदार का और
क्या चोरी की उसका कोई प्रमाण तो दो, पर वह नौजवान सिर्फ
अपना ही राग अलापता रहा। "चौकीदार चोर हैं" -"चौकीदार चोर
हैं"। चूहे ने पूंछा ट्रेन की
सुरक्षा मे तैनात सुरक्षा गार्ड ने कोई चोरी की हैं। तो नौजवान बोला हम कुछ नहीं
जानते पर ये सच हैं कि "चौकीदार चोर हैं।" इस पर साथी चूहा बोला ऐसा कौन
सा चूहा आगया अपने समाज मे जिसने ऐसी हिमाकत की। तब ट्रेन मालिक चूहे ने
कहा, नहीं वह नौजवान चूहा जाति से नहीं वह तो आदिम जाति से था। इस पर दूसरा चूहा हँसते हुए बोला अच्छा तुम उस साहुल आंधी की बात
कर रहे हो। जो आदमियों मे टप्पू के नाम से
जाना जाता हैं। तभी पहला चूहा बोला नहीं
नहीं उसका नाम साहुल आंधी नहीं उसका नाम ... । अचानक इतनी ज़ोर से फिर वही आवाज आई "चौकी
दार चोर हैं" इस आवाज मे उन चूहों की आवाज न जाने कहाँ दब गई। और इस तरह चूहों का अखिल भारतीय सम्मेलन सफलता
पूर्वक समाप्त हो गया। उक्त सम्मेलन की सफलता इस बजह से भी याद रहेगी कि गाड़ी
संख्या 22416 ए॰पी॰ ए॰सी॰ एक्सप्रेस के चूहे के बेटे का संबंध गाड़ी संख्या 12050
गतिमान एक्सप्रेस की बेटी से पक्का हो
गया। शादी की सूचना आप सबको यथा समय प्रेषित की जाएगी।
विजय सहगल
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