मेघदूतम पार्क, नोएडा
मेरे
घर के पास एक बहुत ही सुंदर पार्क है मेघदूतम। इस पार्क मे हर दिन हजारों बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग लोग सैर और घूमने के लिये आते हैं। इस पार्क मे एक अत्यंत आकर्षक ओपिन थिएटर हैं जिसे
एम्फीथिएटर कहते हैं। इसके बीच मे सबसे नीचे गोल पक्की सीमेंटेड स्टेज हैं, जिसके चारों ओर अर्धचंद्राकार 7 सीढ़ी नुमा दर्शकदीर्घा हैं जिनपर बैठ कर लोग
कार्यक्रम का आनंद लेते हैं या यूहीं मौसम के अनुरूप लुत्फ उठाते हैं अर्थात सर्दियों
मे सुनहरी धूप का लाभ लेते हैं और गर्मियों मे सूर्योदय पूर्व का आनंद बच्चे स्केटिंग, कराटे या अन्य गेम खेलते हैं। इस थिएटर की खूबी हैं ऊंचाई के कारण पेड़ों की
छाया न होने के कारण धूप खुली और भरपूर रहती हैं। यूं तो मैं प्रातः लगभग 6 बजे घूमने
जाता हूँ पर आजकल सर्दियों की बजह से मैं लगभग 9.30-10 बजे भ्रमण के लिये जाता हूँ
आज भी आज साल 2018 के आखिरी दिन सुबह 10 बजे
मेघदूतम पार्क भ्रमण के लिये पहुंचा जहाँ पर आज 250-300 लोगो से मुलाक़ात हुई। इस मुलाक़ात
मे बच्चे ज्यादा पर नौजवान लड़के लड़कियां और
बुजुर्ग पुरुष महिलाएं भी थी। बच्चे टॉफी, चॉकलेट, फ्रूटी, एपी एपल जूस, चूइंगम आदि
खा रहे थे, मैंने उन बच्चों से कुछ से बात की और उनकी प्रिय स्नेक्स
के बारे मे पूंछा अधिकतर बच्चों की पसंद लेयर चिप्स थी पर कुछ अंकल चिप्स के भी शौकीन
थे। कुछ बच्चे लोलिपोप और और रंग बिरंगी जेम्स के लिये ज्यादा लालायित थे। ये सारे
बच्चे कुछ अकेले और कुछ स्कूल ग्रुप के साथ आए थे जो इस पार्क के आसपास या थोड़ी दूर
के रहवासी रहे होंगे। अकेले बच्चे अपने माता पिता या अन्य गार्डियन के साथ थे इन बच्चों
और उनके संरक्षकों से मिलना एक दुष्कर एवं दुरूह कार्य था। अर्ध चंद्राकार दर्शक दीर्घा
मे घूम घूम कर उनसे मिलने और बार-बार झुक कर
बात करने से कमर का बुरा हाल था लेकिन इन लोगो से मिलने की चाह ने हमे चैन से बैठने
नहीं दिया। कुछ भटके नौजवान ताश खेल रहे थे पर उनकी ताश की गड्डी मे दो पत्ते, हुक्म का नहला और हुकुम की तिगगी गायब थी। कुछ बुजुर्ग खैनी, तम्बाकू, और
पान मसाला के बिभिन्न ब्रांडो के शौकीन थे। ऐसे अनेक नौजवान जो शायद कॉलेज स्टूडेंट
थे, चाय या कॉफी के शौकीन थे जो कागज के कपों मे नन्ही प्लास्टिक
स्टिक से चाय या कॉफी को हिला कर उसमे कॉफी मिला कर गर्मागरम चुस्कीयों के साथ चाय/कॉफी का मजा ले
रहे थे। एक छोटा बालक अखरोट का आधा हिस्से लिये कुछ गुमसुम बैठा था जब मैंने उससे उस
की उदासी का कारण पूंछा तो उसने बताया आधा अखरोट उसके भाई ने ले लिया उसको दिलासा देकर
मैं आगे बढ़ा। बीच बीच मे बैठ कर सुस्ता लेता था, बो तो भला हो
मेडम भावना का जो सुंदर सुरीले गीतों से हमारा मन बहलाये हुए थी और गानों के बीच गोवा
की राजधानी पंजिम का सुंदर वर्णन अपने 100.1 एफ़एम गोल्ड पर अपने सुनने बालों से बात
कर हमारा मनोरंजन कर रही थी जिनके बिना पार्क मे इन सभी लोगो से मुलाक़ात संभव नहीं
थी। उनके सुंदर, सुमधुर गाने लगातार हमारे मोबाइल पर बज कर हमारा हौसला बड़ाये हुए थे। इन सब मे एक बात
अच्छी थी एक-दो लोगो को छोड़ कर कोई सिगरेट का शौकीन नहीं था। बीड़ी पीते हुए तो कोई
भी नहीं मिला जो इस बात का प्रतीक था कि नोएडा बासियों का आर्थिक स्तर अन्य शहरों के
मुक़ाबले ऊँचा था। मूँगफली के शौकीन लोगो पर ही मात्र हमारा क्रोध था क्योंकि जहाँ तहाँ
उनके निशान हमे दीख रहे थे अतः उन से मैं परास्त होकर ज्यादा नहीं मिला सका । लगातार
लगभग 3 घंटे की लोगों से मुलाक़ात मे अब मैं
थक कर चूर हो गया था लेकिन खुशी इस बात की थी कि उस थिएटर के सभी दर्शक दीर्घाओं मे बैठे सैंकड़ों लोगो से उनके दुवारा छोड़े गये कचरे
के माध्यम से उनसे मिल सका। अब तक मेरा कचरे का बैग आधे से ज्यादा भर गया था। ये बो लोग थे जो 1 जनवरी 2018 से या उससे पहले से
आज साल के आखिरी दिन अर्थात 31.12.2018 के बीच अपने चहेतों, बच्चो, अपने दोस्तों के साथ या अकेले इस ऐम्फीथिएटर मे घूमने या मौसम का आनंद लेने
आये थे और अपनी यादें कचरे के रूप यहाँ छोड़ गये। आज साल के आखिरी दिन मैंने 20018 की
समाप्ती और 2019 के आगमन की पूर्व संध्या पर मेरा ये संकल्प मेघदूतम
पार्क के
उन छोटे कर्मचारियों के प्रति हमारा सम्मान हैं जो लगातार अपनी सेवा से और उस
की देख भाल, सेवा से
हमारे और अन्य रोज़ाना आने बाले हजारों लोगो
की स्वास्थ की देखभाल करते हैं। क्यों न हम
सभी पार्कों या अन्य सार्वजनिक स्थालों पर
नये बर्ष 2019 के रेसोल्यूशन के रूप मे स्वछ्ता की शपथ लें!!
विजय सहगल







