गुरुवार, 12 जून 2025

बेंगलुरु के रॉयल चैलेंज टीम के जश्न मे 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?

 

"बेंगलुरु के रॉयल चैलेंज टीम के  जश्न मे 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?"










बेंगलुरु के चिन्ना स्वामी स्टेडियम मे बुधबार, 4 जून 2025 की शाम मची भगदड़ मे 11 निरीह, मासूम और अबोध  लोगों की मौत ने आईपीएल के रॉयल क्रिकेट टूर्नामेंट  की, रॉयल चैलेंज टीम के, बेंगलुरु मे हुए रॉयल जश्न को, हृदय विदारक, दुःखद और शोकाकुल घटना मे परिवर्तित कर दिया। घटना अत्यंत दुख और वेदना देने वाली थी जिसके कारण  सारे देश मे  मातम छा गया, लेकिन खेद और अफसोस इस बात का रहा कि  प्रारम्भिक तौर पर कर्नाटक सरकार और उसके मुखिया ने इस अफसोस जनक घटना मे मारे गये लोगों की मौत  से अपना पल्ला झाड़ते हुए, लाखों की संख्या मे एकत्रित होने के कारण  आम क्रिकेट प्रेमियों को ही इस विपदा का दोषी ठहरा दिया। वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिव कुमार हैदराबाद पुलिस का पक्ष लेते हुए नज़र आए और उम्मीद से अधिक लगभग तीन लाख से भी अधिक प्रशंसकों के आने को, इस दर्दनाक घटना का मुख्य कारण बतलाते और माफी मांगते दिखे। मुख्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच संवाद हीनता और प्रभाव दिखलाने की होड की चर्चा भी मीडिया और राजनैतिक हल्कों मे सुनाई दी कि पुलिस प्रशासन द्वारा आयोजन की अनुमति से स्पष्ट इंकार किए जाने के बावजूद डीके शिवकुमार  के दबाव   कार्यक्रम का आयोजन किया गया अन्यथा क्या कारण था कि 03 जून की रात को रॉयल चैलेंज टीम के विजयोप्लक्ष मे क्रिकेट प्रेमियों द्वारा सारी रात जश्न मनाने के दौरान, जो बेंगलुरु पुलिस  कानून व्यवस्था को बनाए रखने मे व्यस्त रही, उसके मना करने के बावजूद, उससे पुनः 04 जून के कार्यक्रम मे  लाखों लोगो के सुरक्षा प्रबंध की उम्मीद कैसे की जा सकती थी?  04 जून को बेंगलुरु मे इतने बड़े आयोजन को पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधों की अनदेखी कर लगभग तीन लाख लोगों की  भारी भीड़ को आमंत्रण  देकर, समुचित सुरक्षा देने मे सरकार क्यों असफल रही, जिसके परिणाम स्वरूप 11 निरपराध लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी और उनकी मौत की ज़िम्मेदारी को सरकार द्वारा अस्वीकारना एक बहुत बड़ा प्रश्न खड़ा करता  है?

कर्नाटक सरकार के उपमुख्यमंत्री डीके शिव कुमार रॉयल चैलेंज टीम के आगमन के लिये इतने उतावले और व्याकुल थे कि अपने अति व्यस्त समय के बावजूद टीम की अगवानी के लिये बेंगलुरु हवाई अड्डे पर मौजूद थे। कर्नाटक विधान सभा के प्रांगण मे मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित रॉयल चैलेंज टीम के स्वागत सत्कार हेतु खिलाड़ियों को पगड़ी और हार पहनाकर कर फोटो खिंचवाते नज़र आये। यही नहीं चिन्नास्वामी स्टेडियम मे भी क्रिकेट प्रशंसकों की भगदड़ मे मौतों की सूचना होने के बावजूद खिलाड़ियों के अभिनंदन समारोह मे पलक पांवड़े विछाते नज़र आना, क्या मंत्री महोदय की क्रिकेट प्रेमियों की दुःखद मौतों के प्रति उनकी असंवेदनशीलता, अदयालुता और अमानवीयता  को नहीं दर्शाता? कर्नाटक सरकार के मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित रॉयल चैलेंज टीम के सम्मान का कार्यक्रम का औचित्य भी समझ से परे हैं। एक व्यापारिक घराने की निजी टीम रॉयल चैलेंज बेंगलुरु (आरसीबी) जिसका एक मात्र उद्देश्य पैसा कमाना हो, का सम्मान क्या महज इसलिए ही किया जाय की उसके साथ "बेंगलुरु" जुड़ा है?  यदि रॉयल चैलेंज टीम मे कर्नाटक के युवाओं और खिलाड़ियों को लेकर प्रोत्साहन दिया गया होता तब तो समझ आता है, किन्तु विदेशी और देश के अन्य प्रान्तों  के खिलाड़ियों को बोली लगाकर नीलामी मे खरीद कर रॉयल चैलेंज टीम मे शामिल करने से कर्नाटक के लोगों और कर्नाटक सरकार की अस्मिता मे कौन से आलंकरण लगने वाले थे जिसके बशीभूत रॉयल चैलेंज टीम के सम्मान कार्यक्रम की आवश्यकता पड़ी? इस पर विचार किया जाना चाहिए।

ग्यारह मृतक लोगों के शोक संतृप्त परिवार के लिये तो ये अपूरणीय क्षति है जिसकी पूर्ति कभी नहीं हो सकती लेकिन इस घटनाक्रम मे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच शक्ति के केंद्र के वर्चस्व की लड़ाई स्पष्ट देखने को मिली। जहां मुख्यमंत्री सिद्दा रमैया चिन्ना स्वामी स्टेडियम मे होने वाले कार्यक्रम की अनुमति न होने की बात पर ज़ोर देते रहे वही दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिव कुमार कर्नाटक पुलिस की शिथिलता और असफलता का बचाव करते हुए बारम्बार माफी मांगते नज़र आये। जब बेंगलुरु पुलिस ने अयोजन के लिये स्पष्ट इंकार किया था तो  बेंगलुरु पुलिस के पुलिस आयुक्त सहित  अन्य अनेकों अधिकारियों के निलंबन पर भी सवालिया निशान खड़े होते है, जिसके  जांच की भी समुचित अवश्यता है?

देश के बढ़े बड़े व्यापारिक घरानों द्वारा अपने मालिकाना हक मे बनाई गयी इन दस टीमों के मालिक देश के नामी गिरामी व्यापारी और उद्धयोगपति हैं जिन्होने अपने धनबल से खिलाड़ियों के कौशल को पैसों से खरीदा। अतः इस पूरे आयोजन को पाँच सितारा चका-चौंध और तड़क-भड़क वाला आयोजन कहना अति संयोक्ति न होगी।  मेरी राय मे ऐसे आयोजनों मे खेल की तकनीकि, ज्ञान और कौशल से कोई सरोकार नहीं होता। खेल मे राष्ट्रियता, प्रांतीयता या क्षेत्रीयता की खेल भावना या स्वस्थ्य  प्रतिस्पर्धा  कहीं दूर दूर तक दिखलाई नहीं पड़ती सिर्फ और सिर्फ वैभव,  विलासता का फूहड़ प्रदर्शन  ही कदम कदम पर दिखाई देता हैं। पाठकों को याद होगा कि 1977 मे जब ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड ने वहाँ के एक बड़े व्यापारी केरी पैकर को  क्रिकेट के लिए विशेष प्रसारण अधिकार देने से मना कर देने के कारण, उस ऑस्ट्रेलियाई व्यापारी केरी पैकर ने चैनल नाइन पर क्रिकेट के प्रसारण दिखाए जाने वाले मैचों की एक श्रृंखला के लिए 35 सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को भर्ती किया था जिन्हे पैसों से खरीदा गया था। उस समय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने खिलाड़ियों की इस सौदेबाजी वाली टीम के  इस केरी पैकर सर्कस का विरोध किया था। वही बीसीसीआई, आईपीएल के तहत, आज  ऐसे आयोजनों से लोगों की जज़्बातों से खिलवाड़ कर अपना व्यापार कर रही है। इन्ही स्थिति और परिस्थितियों का लाभ लेकर, क्या  कर्नाटक मे अपने राजनैतिक हितलाभ के लिये अपने वर्चस्व और शक्ति  प्रदर्शन की होड मे लोगो की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते हुए, ग्यारह निरीह, निर्दोष  लोगो के जीवन को असमय, अकारण ही काल का ग्रास नहीं बना दिया?

भारतीय राजनीति का ये दुर्भाग्य हैं कि राज्य सरकारें किसी आपदा या विपदा मे हुई आम जनों की मौत की ज़िम्मेदारी को स्वीकारने और नकारने मे उस चतुर व्यापारी की तरह व्यवहार करती  हैं जो हर वस्तु के विनिमय मे अपना लाभ और हानि को देखते  हैं।  पाठकों को याद होगा कि 4 दिसंबर 2024 को हैदराबाद के संध्या थियेटर मे "पुष्पा-2" फिल्म के प्रीमियर के दौरान मची भगदड़ मे एक महिला की मौत की ज़िम्मेदारी के रूप मे फिल्म के मुख्य अभिनेता अल्लू अर्जुन को गिरफ्तार किया था। लेकिन बेंगुलुरु मे घटी भगदड़ मे मची घटना मे  उन ग्यारह अभागे लोगों की मौतों ऐसा हुआ।  बेंगलुरु की भगदड़ की घटना मे भी आनन फानन मे रॉयल चैलेंज टीम के प्रबंधन और इवैंट कंपनी डीएनए एंटरटेनमेंट  और कर्नाटक क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के विरुद्ध पुलिस मे मामला दर्ज़ किया गया है। रॉयल चैलेंज टीम और इवैंट कंपनी के कुछ लोगो को गिरफ्तार भी किया गया है जो कार्यवाही कम लीपा पोती ज्यादा नज़र आती है। सच शायद ही सामने आये? लेकिन एक पूर्व न्यायाधीश की अगुआई मे गठित समिति शायद सच को सामने लाने मे कामयाब होगी ऐसी आशा करनी चाहिये। इसी बीच भाजपा की कर्नाटक राज्य इकाई के मुखिया ने इस घटना मे मारे गये अबोध व्यक्तियों की मौत के लिए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है।   

 भारतीय राजनीति का ये दुर्भाग्य है राजनैतिज्ञ, किसी भी विपदा मे आम जनों की आकस्मिक मौतों पर  विपक्षियों के राज्यों मे घटी दुर्घटनाओं के उदाहरण देकर बड़ी निर्लज्जता से बचने या अपने राज्य मे घटी घटना को कमतर बताने के कुप्रयास करते है। यहाँ भी यही हुआ मुख्यमंत्री सिद्दा रमैया द्वारा इस भगदड़ की घटना की तुलना प्रयागराज के महाकुंभ मे घटी भगदड़ से कर  अपने यहाँ घटी घटना को कमतर बताने का कुप्रयास किया। क्या ये, बेंगलुरु मे भगदड़ मे कर्नाटक सरकार की घोर लापरवाही के कारण, अकारण ही उन ग्यारह मृतकों का अपमान नहीं है? क्या वे बेंगलुरु मे हुई घटना को कमतर आँकते हुए उसे न्यायोचित ठहराने का कुप्रयास नहीं कर रहे? पक्ष और विपक्ष द्वारा, एक दूसरे पर घात प्रतिघात का ये खेल कब तक खेला जाता रहेगा? देश के ये कर्णाधार कभी अपनी असफलताओं, अक्षमताओं और अज्ञानताओं के लिये, देश की जनता के प्रति अपनी जवाबदेही भी कभी  सुनिश्चित करेंगे?     

विजय सहगल

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

बहुत सुंदर विश्लेषण ।

बेनामी ने कहा…

Shri Sehgal ji
Apki lekhni ko pranam,apne ek jis Bindu ko ujagar Kiya ki RCB m international,other states k khilari ko lekar ,apne business k udesh se team banate hain,kharide hue player koi jaruri nahi karnataka k ho,vaise nam Bengaluru laga h isliye👏👏👏