भूटान के शहर पारो मे स्थित पारो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा उन दस खतरनाक हवाई अड्डों मे से एक है जहां हवाई जहाज की लेंडिंग करना एक कठिन और दुरूह कार्य है। भूटान मे हवाई मार्ग से प्रवेश के लिए यह एक मात्र हवाई अड्डा है। पूर्वी हिमालय की ऊंची ऊंची पहाड़ियों के बीच मे स्थित भूटान देश की सीमाएं भारत, नेपाल और तिब्बत से मिलती हैं। लगभग 72% भूमि पर हरे-भरे पेड़ो और सघन वनों से आच्छादित बौद्ध धर्म और संस्कृति वाला भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण दिन व दिन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है इसलिए सड़क परिवहन के साथ हवाई परिवहन भी यहाँ दिन-प्रतिदिन बढता जा रहा है। आपको जानकार हैरानी और आश्चर्य होगा कि पारो हवाई अड्डा दुनियाँ के कठिनम हवाई अड्डों मे से एका है और यहाँ पर विमानों की उड़ान भरने और उतारने मे लगभग पचास पायलट ही पारंगत, प्रवीण और निपुण है जिनके साहसिक हवाई परिवहन के कारण भारत के बागडोगरा, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु सहित दुनियाँ के नेपाल, ढांका, दुबई, होंगकोंग और सिंगापूर से अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध हैं। 2 मई 2025 की एक बरसाती सुबह मे मुझे भी अपने अन्य ग्रुप के साथियों के साथ इस रोमांचक और चुनौती पूर्ण हवाई अड्डे को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दृश्यता कुछ कम थी और हवाई अड्डे का रनवे कहीं कहीं थोड़े बरसाती पानी से भरा था।
समुद्रतल से 2265 मीटर अर्थात 7431 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह हवाई अड्डा यूं तो चारों ओर
से ऊंचे ऊंचे पहाड़ों से घिरा हैं पर पहाड़ों के बीच की घाटी मे तकनीकी कौशल से बनाए
गए एक छोटे 2265 मीटर लंबे रनवे पर कुशल पायलट को मिले कठिन प्रशिक्षण,
निरंतर अभ्यास और अनुभव ने यहाँ आने वाले पायलट को पारो हवाई अड्डे पर हवाई जहाज
को उड़ाने और उतारने की कला मे महारत हांसिल है। हवाई पट्टी की पूर्व दिशा मे
एरोड्रम के बाहर अद्देद को पारो शहर से जोड़ती समांतर सड़क है जिसके साथ ही लगी पारो
नदी हिमालय की कन्दराओं से निकालकर पारो शहर से निकलती हुई बंगाल की खड़ी को
इठलाती-बलखती बहती चली जाती है। आगे का तो पता नहीं,
पर पारो नदी का पानी भूटान मे तो एकदम निर्मल और साफ है। न केवल हवाई अड्डे पर
अपितु दिल्ली या अन्य महानगरों की भागमभाग और भागदौड़ भरी ज़िंदगी के मुक़ाबले पूरे पारो शहर मे जन जीवन एकदम शांत और सुकून
भरा है। पूरे शहर मे बिना किसी लाल-हरी बत्ती के यातायात पूर्णतः अनुशासित,
शांत और स्वतः नियंत्रित है जिसमे वाहनों से कदाचित ही कभी हॉर्न बजता सुनाई दे।
पारो हवाई अड्डे पर विमानों के कुशल चालन और
परिचालन करने वाले शिक्षित और प्रशिक्षित चालक अपनी योग्यता सूझबूझ और चतुरता के कारण पारो हवाई अड्डे को
कठिन और चुनौती पूर्ण बनाने वाले कारणों का निवारण कर अपनी योग्यता सिद्ध करते
हैं। इस हवाई अड्डे को चैलेंजइंग बनाने
वाला मुख्य कारक इस हवाई अड्डे की ऊंचाई है। लगभग साढ़े सात हजार फुट की ऊंचाई के
कारण हवा का घनत्व और पहाड़ो पर चलने वाली तीखी हवा हवाई जहाज की उड़ान को प्रभावित
करता है जिसे एक कुशल पायलट ही नियंत्रित कर सकता है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती चारों
ओर स्थित ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच की घाटी मे हवाई जहाज को एक निश्चित और सीधी
लाइन मे उड़ाना एक सिद्धहस्त पायलट के ही बूते का काम है। कुशल तकनीकि के साथ पायलट
की गिद्ध दृष्टि भी उसकी निपुणता का एक मुख्य कारण है जो उड़ान को सुगम और सुरक्षित
बनाता है। कदाचित पच्चीस-पचास मीटर की भी गलत,
दायें-बाएँ उड़ान जहाज को मुश्किल मे डाल सकता है क्योंकि घाटी के दोनों ओर
बहुमंजिला इमारतों से भी कई गुना ऊंची पहाड़ी एक खतरनाक प्राकृतिक अवरोध है। यही
कारण है कि इस हवाई अड्डे पर या कम दृश्यता पर या
रात्रि मे उड़ान की सुविधा नहीं है।
मैदानों मे स्थित लंबे-लंबे रनवे वाले हवाई अड्डों के मुक़ाबले पारो अंतर्राष्ट्रीय
हवाई अड्डे के रनवे की लंबाई मात्र 2.3 किमी ही है जिसके कारण पायलट को इस शीघ्र
नियंत्रित कर स्थिर करना होता है। पहाड़ों पर ठंड और अत्यधिक ऊंचाई के कारण होने वाली भौगोलिक
घटना के परिणाम स्वरूप एनोबेटिक और कैटाबोटिक हवाओ के उपर नीचे बहने के कारण हवाई
जहाज को भी उपर नीचे होने से उड़ान के
संचालन मे कठिनाई होती है। ऊंची ऊंची पहाड़ियों के बीच विमान का उतरना
या उढ़ान भरने पर ऐसा प्रतीत होता है कि बड़े-बड़े पहाड़ों को बीच कोई छोटा उड़न खटोला,
जहाज खिलौने की तरह उड़ रहा हो।
एक रोचक तथ्य,
जहां एक ओर भारत के नागरिकों को सड़क और वायु मार्ग से आने जाने की सुविधा है पर
भारत मे बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या से सबक ले कर भूटान मे बंगलादेशी
पर्यटकों को सिर्फ वायु मार्ग से ही भूटान मे पर्यटन के लिए आने जाने की अनुमति हैं ताकि अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण रक्खा जा
सके। हमारे ग्रुप के सदस्य श्री टंडन द्वारा
और मैंने पारो हवाई जहाज के उतरने और चढ़ने का विडियो बना कर इस घटना को दिखाने का प्रयास
किया है।
विजय सहगल


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