शनिवार, 28 सितंबर 2024

लेबनान पर पेजर बमों की बौछार

 

"लेबनान पर पेजर बमों की बौछार"




मध्य पूर्व के लेबनान और सीरिया देश की  इज़राइल के साथ चली आ रही दुश्मनी से सारा विश्व भली-भांति परिचित है।  17-18 सितंबर 2024 को लेबनान और सीरिया मे संचार माध्यम मे उपयोग होने वाले हजारों  पेजर उपकरणों मे अचानक एक साथ हुए बिस्फोट ने लेबनॉन-सीरिया  सहित पूरी दुनियाँ को सकते मे डाल दिया। दिल देहला देने वाले  इन विस्फोटों मे लगभग 2750 लोग घायल हुए जिनमे 200 से ज्यादा लोगो की हालत बहुत गंभीर है। एक साथ इतने घायलों के अस्पताल मे आ जाने के कारण घायलों के उपचार के लिये जगह नहीं बची। एक विस्तर पर दो तो कहीं फर्श पर ही घायलों का इलाज किया जा रहा था।  इन पेजर विस्फोटों मे अब तक 40 से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ये पेजर जिसके हाथ मे था उसके हाथ और जिसकी जेब मे था उसके पैर या अन्य अंग या जिसने कमर मे बांध रखा था उसके पेट, कमर के चिथड़े उड़ गए, कहने के तात्पर्य है कि पेजर जहां था विस्फोट से शरीर का वो अंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो कर नष्ट हो गया। कुछ लोगो की मैसेज देखने के कारण विस्फोट मे आंखे क्षत-विक्षत हो गयी। ये हमले यहीं नहीं रुके, दो दिन बाद जब  पेजर विस्फोट मे मारे गये एक हिज़्बुल्ला आतंकी के जनाजे कों नियंत्रित करने के लिये इन लड़ाकों और पुलिस  द्वारा उपयोग मे लाये जा रहे वॉकि-टॉकि पर बात करते ही इनमे भी विस्फोट होने लगे जिसमे 450 लोग घायल हो गए और 14 लोग मारे गए। इन पेजर विस्फोटों या यूं कहे कि इन पेजर बम हमलों की कल्पना हिज़्बुल्ला ने संपने मे भी नहीं की होगी। पेजर विस्फोट के  इन घायलों मे अपनी एक आँख गवा बैठे, लेबनान स्थित ईरानी राजदूत मोजताब अमानी भी हैं, ये वही मोजताब अमानी हैं जिन पर अनेकों  ईरानी लड़कियों की  हिजाब न पहनने के कारण,  आंखे फोड़ने का आरोप लगे थे। ईरानी राजदूत के बारे मे  लोगो का  कहना था, जैसी करनी बैसी भरनी!! ये हमले कुछ, उन होलिबुड फिल्मों की तर्ज पर थे  जो काल्पनिक अन्तरिक्ष युद्ध पर आधारित थीं।  इस पेजर हमले का शक इज़राइल पर किया जा रहा हैं पर इज़राइल इन देशो मे पेजरों मे हुए इन विस्फोटों से अनिभिज्ञता प्रकट करते हुए खामोश है।

दरअसल पेजर संचार माध्यमों का एक ऐसा उपकरण है जिसके माध्यम से सिर्फ  संक्षिप्त संदेशों का आदान प्रदान किया जाता हैं। इस उपकरण मे मोबाइल की तरह बात नहीं की जा सकती। आधुनिक उपग्रह संचार प्रणाली से जुड़े होने के कारण मोबाइल के लोकेशन की  पल पल की जानकारी मोबाइल कंपनी के पास रहने के कारण पिछले दिनों इज़राइल ने ईरान, लेबनान, सीरिया, गाजा पट्टी स्थित अपने अनेकों दुश्मनों कों उनकी लोकेशन कों निशाना बना कर, ड्रोन हमले मे मार गिराया था। लेबनान और सीरिया  स्थित आतंकी संगठन हिज़्बुल्ला के मुखिया हसन नसरल्लाह ने हाल ही मे अपने आतंकी लड़ाकों कों चेतावनी दी थी कि वे मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें, क्योंकि उन पर नज़र रखी  जा सकती है। हिज़्बुल्ला लड़कों कों आपसी संवाद के लिए ताइवान की एक कंपनी अपोलो गोल्ड से पेजर्स खरीदे गये थे। हिज्ज्बुल्ला संगठन ने  मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर, इन पेजर का इस्तेमाल इसलिए शुरू किया था ताकि वे अपनी लोकेशन कों छुपा संके। ईरान समर्थित और उसके द्वारा पोषित ये आतंकी संगठन  हिज़्बुल्ला, इज़राइल पर आक्रमण करने के लिये कुख्यात हैं और उसके बाद वो सारे हथियार हैं जो किसी देश की सेनाओं पर होते हैं।

जहां एक ओर संयुक्त राष्ट्र संगठन सहित सारा  विश्व,  एक साथ कुछ घंटों के अंतराल मे घटी  इन पेजर विस्फोटो की घटनाओं से सकते मे हैं, वही इज़राइल द्वारा सीधे आक्रमण के बिना अपने दुश्मनों का सूचना प्रौधौगिकि के माध्यम से चुन चुन कर मारने और घायल करने के बौद्धिक कौशल और तकनीकि विकास  क्षमता पर सारी दुनियाँ   हतप्रभ हैं और दबी जुबान से इज़राइल की प्रशंसा करें बगैर नहीं रही। इज़राइल ने  एक बार पुनः सिद्ध कर दिया कि, इज़राइली ने जो किया दुनियाँ मे और कोई नहीं कर सकता।  इज़राइली खुफिया संस्था मोसाद अपने दुश्मनों कों चुन-चुन कर मारती  है, चाहे वे दुनियाँ के किसी भी कोने  मे छुपे हों।  अमरीका की कुछ खुफिया जांच एजेंसियों का मानना है कि इज़राइल की खुफिया संस्था मोसाद ने गुपचुप तरीके से  इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु तभी  काम करना शुरू कर दिया था जब उसने हिज़्बुल्ला संगठन के मुखिया हसन नसरलला द्वारा  अपने लड़ाकाओं कों मोबाइल के प्रयोग से बचने की चेतावनी देते हुए पेजर का उपयोग करने की सलाह दी थी ताकि हिज़्बुल्ला के लड़ाकों कों इज़राइली सेना की सूचना प्रौधौगिकि रूपी निगाहों  से बचाया जा सके। तभी से इज़राइली खुफिया संस्था के दिमाक मे पेजर बम का आइडिया आया और उसने  इस लक्ष्य की प्राप्ति पर   कार्य शुरू कर, आज उसे अपने अंजाम तक पहुंचा कर अपने दुश्मनों को उसके ही घर के अंदर मार गिराया। विस्फोटों   1990 के दशक मे अनेक देशों द्वारा इस पेजर उपकरण का उपयोग हुआ करता था, पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल के प्रचलन मे आने के कारण इसका दौर जल्दी ही समाप्त हो गाया। जानकारों का मानना है कि पेजर के निर्माण के समय ही इनमे विस्फोटक पदार्थ रख दिये गये थे इसलिए ताइवान की पेजर निर्माता कंपनी अपोलो गोल्ड से इस संबंध मे पूंछ-तांछ की गयी। उक्त कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसने पेजर का निर्माण नहीं किया अपितु अपनी कंपनी के नाम का ब्रांड उपयोग करते हुए हंगरी की एक, बीएसी कंसल्टेंसी कंपनी को तकनीकि सहयोग समझौते के अंतर्गत पेजर का निर्माण कराया था, बाद मे इन्ही पेजरों  की आपूर्ति लेंबनान कों की गयी। ऐसा प्रतीत होता हैं इस्ज्रइली खुफिया एजेंसी ने छद्म नाम से पेजर का निर्माण करते समय या लेबनान के हिज़्बुल्ला संगठन  कों पेजर के कनसाइनमेंट  की आपूर्ति के पूर्व इसमे विस्फोटक पदार्थ कों पेजर मे डाल कर उन तक पहुंचाया  ताकि सिर्फ हिज़्बुल्ला के आतंकियों के लिए मंगाए गए इन पेजरों के उपयोग करते समय उनमे विस्फोट कराया जा सके जिससे सिर्फ हिज्बुल्ला आतंकवादी या उनके मददगार  ही प्रभावित हो संके!! लोगों का ये मानना हैं कि जहां एक ओर लेबनान  समर्थक देश उसे   चिकित्सकीय सहायता पहुंचा रहे थे, वही इजराइल समर्थक देश इज़राइल  की इस दूरस्थ सोच का लोहा मान रहे थे। लेबनान मे अब इस बात का अंदेशा है कि अब न जाने कौन सा इलेक्ट्रोनिक उपकरण मे विस्फोट कर इसराइल हिज़्बुल्ला पर आक्रमण कर दे?      

लेकिन पेजर और वॉकि-टॉकि  की ये घटना इस बात भयावहता की पूर्व चेतावनी हैं कि सूचना तकनीकि को हैक कर, इसके  दुर्पयोग से, ऐसी घटना यदि मोबाइल फोन मे घटित हो,  तो लाखों-करोड़ो लोग मौत के मुंह मे जा सकते हैं? इस तरह के साइबर हमले सारी दुनियाँ के लिये खतरे का एक संकेत हैं, अगर ऐसे हमलों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो ये दुनियाँ के विनाश के लिये परमाणु बम से भी ज्यादा घातक सिद्ध हो सकते हैं।

विजय सहगल                   

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

सहगल जी आपकी विषयों को समझने और समझाने की शक्ति बहुत अद्भुत है । आपने हिज़बुल्ला संगठन पर हुए हमले की बहुत सुंदर और सरल शब्दों में समीक्षा की है । साधुवाद