शनिवार, 14 सितंबर 2024

सुशील शिंदे-एक डरपोंक पूर्व गृह मंत्री

 

"पूर्व गृहमंत्री, सुशील कुमार शिंदे-"डरपोंक" होने की स्वीकारोक्ति"





10 सितम्बर 2024 को कॉंग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार मे रहे,  पूर्व केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कश्मीर के बारे मे एक बहुत ही शर्मनाक ब्यान बड़े ही निर्लज्ज शब्दों मे दिया जिसको यहाँ लिखना भी अनैतिक हैं, जिसकी चर्चा पूरे  देश मे हो रही है। दिल्ली मे दिये गये उक्त विवादस्पद ब्यान, सुशील कुमार शिंदे ने उनके राजनैतिक संस्मरणों  पर  राशिद किदवई द्वारा लिखित किताब "राजनीति के पाँच दशक" के विमोचन के अवसर पर कही, जिसमे कॉंग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे, दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह और शिक्षाविद विजय धर   भी उपस्थित थे।  पूर्व गृहमंत्री ने अपने ब्यान मे कहा कि जब मै होम मिनिस्टर था उसके पहले मै विजय धर के पास जाता था और एडवाइस भी मांगता था, उन्होने मुझको ऐसा असली एडवाइस दिया, उन्होने कहा सुशील तू इधर-उधर मत भटक, लाल चौक (श्रीनगर) मे घूमना नहीं, भाषण देना, लोगों से मिलना, डलझील मे घूमना। उस एडवाइस से मुझे पब्लिसिटी भी मिली कि एक ऐसा मिनिस्टर है जो बिना डर के रोज आता है,  लेकिन कैसे बताऊँ कि लाल चौक पर मेरी ...... रही थी ( मैं डरा हुआ था?)

एक ऐसे केंद्रीय गृहमंत्री के मुख से ऐसा कायराना, अपमान जनक  और डरपोंक ब्यान, जिसके मातहत देश के लाखों बहादुर और देशभक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों के नेतृत्व की ज़िम्मेदारी थी, ऐसी अपेक्षा कदापि नहीं की होगी। पूर्व गृहमंत्री के इस ब्यान को सुनकर उन केन्द्रीय बलों के जवानों के  दिलों पर क्या गुज़री होगी,  जिन  केंद्रीय सुरक्षा बलों के  जवान अपनी मातृ भूमि की रक्षा के लिये अपने प्राणों की बाजी सहित अपना सर्वस्व न्योछावर करने को सदा  तत्पर हों, उसका नेतृत्व करने वाला  गृहमंत्री इतना बुजदिल, डरपोंक और कायर  होगा, कदाचित ही भारत की 130 करोड़  जनता ने ऐसी कल्पना की होगी कि उसकी गुंडे, बदमशों और असामाजिक तत्वों से, अपनी आंतरिक  सुरक्षा करने वाला गृहमंत्री खुद अपने ही देश के अंदर, अपने आप को, कितना असुरक्षित महसूस करता है!! 

सुशील कुमार शिंदे के उक्त ब्यान से स्पष्ट है कि जब सुरक्षा बलों के कई  स्तरीय सुरक्षा के घेरे मे रहने वाले, ज़ेड श्रेणी की सर्वोच्च सुरक्षा मे  संरक्षित  केंद्र सरकार के पूर्व गृहमंत्री का ये हाल था कि उसे देश के मुकुट, जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के लाल चौक मे जाने से डर लगता था तो देश के जनसामान्य मानवी का क्या हाल रहा होगा। यही कारण था मनमोहन सिंह की कॉंग्रेस नेतृत्व वाली सरकार की  दृढ़ राजनैतिक इच्छा शक्ति के आभाव के कारण ही जम्मू कश्मीर राज्य मे पर्यटन की गतिविधियां शून्य थी। आतंकवादियों का इस राज्य मे एक छत्र राज्य था। आये दिन सेना और सुरक्षा बलों पर स्थानीय पत्थरबाजों द्वारा पत्थर फेंके जाते और जम्मू कश्मीर राज्य के नागरिकों का  सामान्य जन जीवन कठिन, दुष्कर और दुरुह हो गया था। स्कूल और कॉलेजों मे  छात्रों की उपस्थिती न के बराबर थी भविष्य अंधकारमय था। वहाँ के नागरिकों, व्यापारियों, उद्धयोग धंधों के बंद होने से राज्य के आर्थिक हालात भी खराब हो गये थे। आतंकवादियों के विरुद्ध सेना को कारगर कार्यवाही की अनुमति न होने के कारण, सेना और सुरक्षा बलों को सरकार का संरक्षण न मिलने की बजह से  उनके मनोबल भी क्षीण हो रहा था और उनके उपर आये दिन आतंकवादियों और स्थानीय पत्थरवाजों के हमले हो रहे थे।

लेकिन 2014 मे मनमोहन सरकार की कोंग्रेसी सरकार के बाद,  मोदी सरकार द्वारा सत्ता मे आने के बाद सेना और सुरक्षा बलों को आतंकवादियों, पत्थरबाज़ अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही की  मिली खुली  छूट के बाद बदले हुए परिदृश्य मे  देश के नागरिकों को वो घटना तो याद होगी जब 9 अप्रैल 2017 को कश्मीर मे  सेना के एक मेजर लितुल गोगोई ने एक पत्थर बाज युवक  को जीप के बोनट पर बांध कर इलाके मे घुमाया था जिससे अन्य दूसरे पत्थरबाजों ने सेना पर पत्थरों की बौच्छार को रोक दिया ताकि कहीं उनकी पत्थरबाजी से उसके ही पत्थरबाज़ साथी लहूलुहान हो कर घायल न हो जाय। उन दिनों सोशल मीडिया पर भले ही मेजर की उस कार्यवाही का तथाकथित सेकुलर वादियों ने  विरोध किया था लेकिन देश के सामान्य लोगो और सेना की कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी  ने मेजर के उस फैंसले की सराहना की थी। मोदी सरकार के 5 अगस्त 2019 को, जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35ए की समाप्ति के बाद तो आतंकवादियों और उनका पराश्रय देने वाले देश पाकिस्तान और देश के अंदर भी देश  विरोधी तत्वों के विरुद्ध जो  प्रभावी कार्यवाही शुरू हुई जिसके कारण  आज जम्मू कश्मीर की जनता द्वारा 2024 के संसदीय चुनावों और वर्तमान विधान सभा के चुनावों मे बढ़-चढ़ कर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया मे भागीदारी के रूप मे परिलक्षित होती दिखायी  पड़ती हैं।

1947 मे देश विभाजन और कश्मीर के एक बहुत बड़े भूभाग को पाकिस्तान द्वारा अनधिकृत अपने कब्जे मे लेने  के लिये जिम्मेदार कॉंग्रेस और पंडित नेहरू के अदूरदर्शी निर्णय की सजा, कश्मीर सहित पूरा देश आज तक भुगत रहा हैं। भाजपा के घोषणा पत्र मे कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 और 35ए की समाप्ति, कश्मीर समस्या के समाधान मे पहला कदम है।  जो कॉंग्रेस की सरकार अपने पैसठ साल के कार्यकाल  मे न कर सकी मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरू मे ही  मे इस धारा 370 की समाप्ति कर दी जिसके कारण आज देश का  सामान्य नागरिक निडर होकर पर्यटन और भ्रमण के लिये जा रहा हैं। कन्याकुमारी से श्रीनगर की जिस भारत जोड़ो यात्रा मे, जो राहुल गांधी निडरता और निर्भीकता  पूर्वक कश्मीर की वादियों मे अपनी बहिन प्रियंका गांधी के साथ बर्फ के मैदान मे, एक दूसरे पर बर्फ के गोले फेंकते नज़र आये थे वो कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति का ही परिणाम था। यदि आज सुशील कुमार शिंदे जैसे डरे, सहमे गृहमंत्री होते तो क्या जम्मू कश्मीर के लाल चौक से डरो मत-डराओ मत के  माहौल की समाप्ति संभव थी??

विजय सहगल                                   

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

कांग्रेस सरकार कभी भी देश हित में या सेना के समर्थन में काम नहीं किए। कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों का संहार होने दिए मुंबई में आतंकियों द्वारा नर संहार होने दिए। ऐसी बहुत घटनाएं हुई
राजेश्वर राव पेरि, विशाखापट्टनम

बेनामी ने कहा…

भले ही भाषा संसदीय नहीं है … पर … कश्मीर की उस समय की परिस्थितियों के दृष्टिगत बात १००% सही है … ऐसी बात भले ही हास्य के रूप में कही गई है … पर … इसे कहने के लिये हिम्मत चाहिये … इस बात में छुपीहुई गंभीरता एवं भयावहता को समझा जाना चाहिये … 😌
- राजेश कंचन