शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024

भारत विरोधी पाकिस्तानी आतंकियों का अंत

 

नोट:- मुझे अपने सुधि पाठकों को धन्यवाद ज्ञपित करते खुशी हो रही है कि निम्न ब्लॉग को देश के सात दैनिक हिन्दी समाचार पत्रों ने प्रकाशित किया। हम अपने सममानीय पाठकों के इस स्नेह हेतु आभारी हैं। समाचार पत्रों मे स्थान की अपनी सीमाओं के कारण पूरा ब्लॉग अपने पाठकों हेतु नीचे प्रस्तुत है:- विजय सहगल  


"भारत विरोधी पाकिस्तानी आतंकियों का अंत"









 

कुछ दिन पूर्व जब से ब्रिटेन के समाचार पत्र गार्जियन मे रिपोर्ट छपी है कि पाकिस्तान मे सन् 2020 से अब तक  जिन 20 भारत विरोधी पाकिस्तानी आतंकवादियों की हत्या हुई है वे कोई साधारण हत्यायेँ नहीं थी अपितु पूर्व योजना अनुसार, निर्धारित लक्ष्य साध कर इन हत्याओं को अंजाम दिया गया था, और इस संहार के पीछे भारत की विदेश खुफिया एजन्सि, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का हाथ था, तब से पाकिस्तान सरकार और सेना के आला अफसरों की नींद उड़ गयी! इन न्यायेतर हत्याओं की घटना पाकिस्तान के गले की हड्डी बन गयी अर्थात  न तो इन हत्याओं को स्वीकारते बनता है और न ही झुठलाते? पहले तो अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा इन हत्याओं को पाकिस्तान ने कानून व्यवस्था की स्थिति बतला कर टालने और बचने का प्रयास कर अपने देश की जनता को बरगलाने की कोशिश की, पर गार्जियन अखबार की इस रिपोर्ट ने पाकिस्तानी जनता सहित सारी दुनियाँ मे पोल खोल दी क्योंकि जिन 20 आतंकवादियों को अज्ञात पाकिस्तानी बंदूकधारियों द्वारा निशाना बनाया गया, उनमे से अधिकतर दोषी आतंकवादी और उग्रवादी  थे जिनकी भारत मे हुए घातक उग्रवादी हमलों मे संलिप्तता थी और जिनके तार  पाकिस्तान स्थित इस्लामी आतंकवादी समूहों से जुड़े थे।

गार्जियन समाचार पत्र की रिपोर्ट मे कहा गया कि भारत के रुख मे ये बदलाव 2019 मे भारतीय सेना के उपर पाक आतंकवादियों द्वारा  पुलवामा हमले के बाद आया जिसमे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने 40 अर्ध सैनिक कर्मियों की हत्या कर दी थी। तब से भारत ने पाकिस्तान मे बैठे भारत विरोधी आतंकवादियों को एक एक कर निशाना बनाना शुरू कर दिया। यही नहीं इन बेमौत मारे गये दहशतगर्दों को भारत मे किए गये अपराधों के लिए दोष सिद्ध हो चुका था और सजा भी सुनाई जा चुकी थी। पाकिस्तानी सरकार को समुचित प्रमाणों के साथ इन आतंकवादियों को भारत के सुपुर्द करने की अनेकों आधिकारिक कोशिश के बावजूद पाकिस्तान ने हमेशा ही दुर्दांत अतिवादी दाऊद इब्राहिम सहित इन आतंकवादियों की पाकिस्तान मे उपस्थिती से ही हमेशा इंकार किया था। अब हालात ये हैं कि मारे गये इन आतंकवादियों की पाकिस्तान मे उपस्थिती को स्वीकारने  या नकारने जैसी दोनों ही स्थिति मे, पाकिस्तान की दुनियाँ सहित देश के आम लोगो के समक्ष थू-थू  और जग हँसाई होना लाज़मी हैं। लेकिन अब अनमने ढंग से ही सही पाकिस्तानी अधिकारी अब भारत पर आरोप लगा रहे हैं कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट पाकिस्तान की धरती पर आतंकवादियों को निशाना बना रहे हैं! उसके पास कुछ आतंकवादियों की हत्या के विश्वसनीय सबूत है? उसने ये भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की धरती पर पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या पाकिस्तान की संप्रभुता और संयुक्तराष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है? उसने कहा कि गैर न्यायिक हत्याओं भारतीय नेटवर्क का हाथ एक वैश्विक घटना है जिसके लिये समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की जरूरत है!!

पाकिस्तान की इन दोगली और  दो मुंही प्रतिक्रिया पर घड़ियाली आँसू बहाना उसके दोहरे मानदंडों और दोहरे चरित्र को उजागर करता हैं। 1947 मे देश की स्वतन्त्रता के बाद से ही पाकिस्तानी  सरकार, सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपनी सरपरस्ती मे आतंकवादियों को आश्रय, संरक्षण और सहारा देकर हमेशा भारत पर  आतंकवादी हमले कराएं है।  भारत द्वारा समुचित प्रतिक्रिया के अभाव मे उसकी दुष्टता और  दुस्साहस इतना बढ़ गया था  कि 13/12/2001 को दिल्ली मे  संसद पर आतंकवादी हमला और  मुंबई पर 26/11/08 का आतंकवादी हमले कि चुनौती देश के सामने खड़ी कर दी। भारत सरकार ने इन आतंकवादी हमलों मे पाकिस्तानी आतंकवादियों की संलिप्तता के समुचित और पर्याप्त सबूत के बावजूद, पाकिस्तान ने कभी अपनी गलतियों को नहीं स्वीकारा और न ही कभी आतंकवादियों की पाकिस्तान मे उपस्थिती को माना। तब पाकिस्तान की संप्रभुता कहाँ थी? तब पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन दिखाई नहीं दिया?  तब पाकिस्तान को समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता महसूस नहीं हुई?  लेकिन 2014 मे मोदी सरकार के आते ही परिदृश्य बदल गया। मोदी सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति और "जैसे को तैसा" की कठोर नीति के चलते एक के बाद एक पाकिस्तानी आतंकवादियों की उनकी ही धरती पर उनके ही अज्ञात नागरिकों द्वारा हत्या के चलते अब ये अहसास हो गया कि अब एक तरफा हमले के दिन लद  गये। अब एक नया भारत है, जो घर मे घुस कर मरेगा!!         

यध्यपि गार्जियन समाचार पत्र की रिपोर्ट के दौरान ही एक चुनावी सभा मे रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने अपरोक्ष रूप से गार्जियन न्यूज़ पेपर की इस रिपोर्ट की पुष्टि की, कि यदि कोई भी आतंकवादी भारत मे किसी भी आतंकवादी गतिविधियों या  घटना मे शामिल होगा तो उसे बख्शा नहीं जायेगा, यदि वह सीमा पार जाकर पाकिस्तान मे छुपने की कुत्सित चेष्टा भी करेगा तो हम वहाँ भी उसे छोड़ने वाले नहीं है। गार्जियन अखबार ने अपनी रिपोर्ट मे उल्लेख किया कि श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी आतंकवादियों के संबंध मे नीति सही थी और उनके पास ऐसा करने की क्षमता भी है।  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तो अनेक अवसरों पर "घर मे घुस कर मारेंगे" की अपनी भारतीय नीति को स्पष्ट कर चुके हैं। उनका ये मानना है और दृढ़ इच्छा शक्ति भी कि आतंकवादी चाहें सातवें पाताल मे ही क्यों न छुप जाये, उन्हे चुन चुन कर मारेंगे!! क्योंकि अब एक नया भारत है!! ये बात अब पाकिस्तान भी समझने लगा है।

बोये पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए? वाली कहावत का, पाकिस्तान को, समाज शास्त्र के इस पहलू को भी याद रखना चाहिये कि जिस पाकिस्तान ने अपने देश के अतिवादियों और आतंकवादियों को भारत के विरुद्ध भड़काने और हिंसा के माध्यम से हिंदुस्तान मे अशांति और उपद्रव फैलाने के लिये आर्थिक मदद और संसाधन के रूप मे गोला, बारूद और अन्य हथियारों को उपलब्ध कराया। लेकिन मोदी सरकार की पाकिस्तान स्थित इन आतंकवादियों के विरुद्ध उनके ही घर मे घुस कर हत्या करने जैसी कठोर कार्यवाही के फलस्वरूप जो आतंकवादी पाकिस्तान मे  खुले आम घूमते थे अब पाकिस्तानी सरकार और सेना के संरक्षण मे चूहे के बिलों मे दुबके हुए है। दरअसल पाकिस्तान ने अपने अस्तित्व के बाद से ही जैसा बोया बैसा ही अब काट रहा है!! यही कारण है कि भारत के विरुद्ध हमेशा छल, प्रपंच और षड्यंत्र कर  बड़ा हुआ पाकिस्तान आज खाने के लिये दाने-दाने को तंगहाल और मोहताज है।    

कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन टूड़ो ने भी कनाडा मे भारत विरोधी और खालिस्तानी समर्थक  कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की बैंकूवर मे हत्या मे भी भारतीय एजेंट के शामिल होने का शक जताया था। गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार भारत की खुफिया एजेंसी ने विदेशों मे अपने दुश्मनों की हत्या की प्रेरणा इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद एवं साउदी अरब के पत्रकार और असंतुष्ट जमाल खाशोगी की तुर्की के इस्तांबुल शहर  मे हत्या से मिली। मेरा मानना है कि बेशक ऐसी न्यायेतर हत्यायेँ गैर कानूनी ही सही पर देश की ताकत और क्षमता को तो दर्शाती है और देश विरोधी उग्रवादियों, आतंकवादी ताकतों मे खौफ, भय और चिंता भी पैदा करती है।   

विदेश मंत्री श्री एस जय शंकर प्रसाद ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भारत के औपचारिक संदेश के माध्यम से गार्जियन अखबार मे छपी  इस रिपोर्ट को  सिरे से नकार दिया जिसमे पाकिस्तान मे 20 आतंकवादियों की हत्या मे भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के शामिल होने के आरोपों लगाया गया था। उन्होने अपने वक्तव्य मे गार्जियन पेपर की रिपोर्ट का खंडन करते हुए आरोपों को झूठा, दुर्भावना पूर्ण और भारत विरोधी प्रचार बताया। उन्होने साफ साफ कहा कि अन्य देशों मे टार्गेट किलिंग कराना भारत की नीति नहीं रही है।

नोट :- ब्लॉग लेखन के दौरान अभी हाल ही मे एक  भारतीय को अवैध रूप से पाकिस्तानी जेल मे कैद रहे सर्वजीत जीत सिंह की जेल मे  हत्या करने वाले आतंकी आमिर सर्फ़राज उर्फ तंबा की भी 18 अप्रैल 2024 को पाकिस्तान मे अज्ञात हत्यारों ने हत्या कर दी।  

विजय सहगल    

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