"मछ्ली की आँख
ही नहीं, अब पूरी मछ्ली ही निशाने पर है?"
एक
समय पांडव वंश के प्रतापी धनुर्धारी वीर अर्जुन पानी की परछाई मे देखते हुए घूमती
मछ्ली की आँख बेध कर ख्याति और कीर्ति अर्जित की थी, वही 9 अप्रैल 2024 को चैत्र नवरात्रि पर आरजेडी के नेता तेजश्वी
यादव ने सोश्ल मीडिआ ट्वीटर पर मछ्ली खाते
हुए विडियो पोस्ट पर कुख्याति और अपकीर्ति
के भाजन बने। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री
और आरजेडी के युवा नेता तेजस्वी यादव द्वारा नवरात्रि के एक दिन पूर्व एक्स पर एक
विडियो पोस्ट किया जिसमे अपनी चुनावी यात्रा के दौरान वे मसाले दार फ्राई मछ्ली
खाते नज़र आये। बिहार मे दशकों तक शासन और सत्ता करने वाले परिवार से ताल्लुक रखने
वाले तेजश्वी बिहार के गरीब और पिछड़ो के
मसीहा है। तेजस्वी यादव का शुद्ध घी और लजीज मसालों मे फ्राई की हुई मछ्ली को हवा
मे उड़ते हुए चार्टर हेलीकाप्टर मे बैठ कर खाने वाला यह वीडियो बिहार राज्य के
करोड़ो गरीब और पिछड़ों लोगो की गरीबी, दरिद्रता, भुखमरी, कंगाली और निर्धनता दूर करने मे सहायक होगा क्योंकि यह परिवार
निरंतर दशकों से बिहार की बदहाली और दारिद्र को दूर करने और बिहार के गरीब एवं
पिछड़ों की आकांक्षाओं और अभिलाषाओं पर खरा उतरने के लिये दिन रात कड़ी मेहनत जो कर
रहा है और जिसकी बानगी उन्होने विडियो के माध्यम से देश और दुनियाँ के सामने
प्रस्तुत की। मै इनकी शैक्षणिक योग्यता से तो बहुत ज्यादा परिचित नहीं पर एक्स पर
उनके बीजेपी वालों के "आई क्यू टेस्ट लेने के" कमेंट से बहुत ज्यादा
प्रभावित हुआ। निश्चित ही उनका आईक्यू लेवल महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से कम
तो नहीं पर समकक्ष अवश्य होगा। बीजेपी को चिढ़ाने के लिये 8 अप्रैल 2024 को मछ्ली
खाने के इस वीडियो को ठीक नवरात्रि के दिन 9 अप्रैल को पोस्ट करने वाले श्रीमान तेजस्वी
यादव शायद भूल गये कि वीडियो किसी भी साल, महीना या तारीख का रहा हो,
वीडियो को एन नवरात्रि के दिन पोस्ट करने का कुत्सित उद्देश्य करोड़ो सनातनी हिंदुओं की आदि शक्ति माँ दुर्गा
के रूपों मे सनातन धर्म मे श्रद्धा, आस्था और विश्वास रखने
वाले श्रद्धालुओं का जानवूझ कर एक सोची
समझी रणनीति के तहत मखौल उड़ाना ही था। श्रीमान तेजस्वी जी आपने बीजेपी को चिढ़ाया होता
तो किसी को कोई आपत्ति नहीं थी पर आपने बगैर आगा पीछा सोचे और बिना आईक्यू का
उपयोग किये देश के करोड़ो सनातनी हिंदुओं की
आस्था के साथ पवित्र चैत्र नवरात्रि मे उनका उपहास उड़ा कर चुनावी फायदे के लिये एक वर्ग विशेष की तुष्टीकरण करने की अधम सोच को
दर्शाया है जो अत्यंत निंदनीय और भर्त्स्ना योग्य है। आप की तंग और नकारात्मक सोच
आपके वक्तव्य से झलकती है जब आप वीडियो मे भाजप को मिर्ची लगने का समर्थन करते
दिखे, ये भाजप को नहीं चैत्र नवरात्रि के पवित्र त्योहार पर
करोड़ो सनातनी हिंदुओं को चिढ़ाने, उनका मज़ाक उड़ाने और अनादर
करने का घृणास्पद शैतानी सोच है। आपके खाने, पीने और पहनने
से किसी को कोई सरोकार नहीं लेकिन नौदेवी पर्व पर अपने निजी खान पान का सोश्ल
मीडिया पर घिनौना प्रदर्शन आपकी हद दर्जे
की बचकानी हरकत को इंगित करता है। ये भौड़ा प्रदर्शन कुछ बैसा ही है जैसे पाँच-सात
साल के बच्चे अपने साथियों के साथ मसखरी करने और चिढ़ाने मे करते हैं। दूसरों का आईक्यू टेस्ट
लेने की अपेक्षा स्वयं अपने आपका आईक्यू परीक्षण करते तो आपका आत्मोद्धार हो जाता
और देश के सामने ऐसी लानत-मलामत, तिरस्कार और फटकार
न झेलनी पड़ती? बैसे भी लोग सोश्ल मीडिया मे आपकी
शैक्षिक योग्यता नौवी फेल का उल्लेख करते है, ये कहाँ तक सच
है मै नहीं जानता? पर अच्छा होता आप इन चिढ़ने-चिढ़ाने या मिर्ची लगने जैसी बचपनी हरकतों से उपर उठ कर बिहार और देश की जानता के लिये
अपनी नीतियों और कार्यक्रमों का उल्लेख करते या अपने परिवार के दशकों के शासन काल की उपलब्धियों की
चर्चा करते हुए वीडियो पोस्ट करते?
यूं
भी इंडि गठबंधन के सदस्यों मे इन दिनों सनातन धर्म पर असमय और अनावश्यक टिप्पड़ी
करने की होड़ लगी है। पिछले दिनों 20 मार्च
2024 को कॉंग्रेस के युवा नायक राहुल
गांधी ने मुंबई की एक रैली मे स्पष्ट रूप से हिन्दुओ की एक शक्ति के विरुद्ध
संघर्ष से लड़ने के अपने संकल्प को दोहराया। कौन नहीं जानता कि सनातन हिन्दुओ मे शक्ति
से तात्पर्य शक्ति स्वरूपा मातृ शक्ति अर्थात नव रात्रि मे माँ दुर्गा के नौ रूपों
की पूजा करने मे किया जाता है। जब देश का बच्चा बच्चा हिंदुओं की शक्ति अर्थात माँ
दुर्गा के स्वरूपों से वाकिफ है तो राहुल गांधी या उनके सलाहकार कैसे इन शब्दों से
अनिभिज्ञ है? तब कहीं जानबूझ कर वे सनातन धर्म के धर्मावलंबियों के विश्वास और ईश्वर
आस्था को ठेस तो नहीं पहुंचा रहे है? पहले भी अन्य अनेकों
अवसरों पर वे राम मंदिर और जय "श्रीराम" जैसे विषयों पर अपना मतांतर
प्रदर्शित कर चुके है। ये जानते हुए भी कि सनातन या हिन्दू धर्म का बीजेपी सहित किसी भी राजनैतिक दल से कोई आग्रह
या दुराग्रह नहीं है फिर भी न जाने इंडि गठबंधन के सदस्य दल बीजेपी की आलोचना और
निंदा की सीमा को लांघ, सनातन धर्म की आलोचना पर उतर आते है
जो अनुचित है, असभ्य है, अन्यायपूर्ण
है और निंदिनीय भी!! कदाचित ऐसी धृष्टता और बेअदबी वे किसी और धर्म के बारे मे करते तो उनका वोट
बैंक ढह जाता और तमाम मुश्किलों का उन्हे सामना भी करना पड़ता।
सनातन
धर्म के पवित्र धार्मिक ग्रंथ वेद, पुराण और उपनिषद की रचना
सृष्टिकर्ता श्री ब्रह्मा द्वारा बताया जाता है जो श्रुति परंपरा के माध्यम से
हांसिल किया गया। अर्थात वेदों का पठन-पाठन सुनकर और सुनाकर कर एक पीढ़ी से दूसरी
पीढ़ी तक होते हुए हजारों साल बाद आज ये
ज्ञान इस रूप मे यहाँ हम तक पहुंचा। वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित वेदों
की रचना काल 3000-3500 ईसा पूर्व माना जाता है। ऐसी
सननतन परंपरा पर सितंबर 2023 मे कर्नाटक की कॉंग्रेस सरकार के गृह मंत्री जी
परमेश्वर द्वारा सनातन धर्म की उत्पत्ति पर प्रश्न खड़े किये गये थे? जिस व्यक्ति को अपने दादा, परदादा या उनके भी
दादा परदादा के नाम आदि का विवरण न मालूम
हो, तो क्या उनकी उत्पत्ति और अस्तित्व से इंकार किया जा
सकता है? बेशक अज्ञान और अल्पज्ञान के कारण मंत्री महोदय को
अपने पूर्वजों की उत्पत्ति का भान न हो पर उनके पूर्वजों की उत्पत्ति और अस्तित्व
से इंकार नहीं किया जा सकता। तब ऋषियों, मुनियों द्वारा अपने
गुरुकुलों, आश्रमों मे
श्रुति परंपरा से चली आ रही हजारों साल पुरानी वेद,
पुराणों और उपनिषदों की सनातनी उत्पत्ति पर कैसे सवाल किये जा सकते है? मंत्री महोदय की सनातन धर्म के विषय मे अज्ञानता,
जड़ता और मूढ़ता रूपी असत्य संभाषण को कैसे
सत्य माना जा सकता है? इंडि गठबंधन के एक अन्य दल डीएमके के
मंत्री और तमिलनाडू के मुख्यमंत्री के उद्दंड, अशिष्ट और
विकृत मानसिकता के विक्षिप्त चित्त पुत्र
उदय निधि स्टालिन द्वारा भी सितम्बर 2023
मे सनातन को डेंगू,
मलेरिया कह कर उसके विनाश की कामना की थी। धर्म की तुलना एक बीमारी से करना अपने
आप मे एक विकृत सोच और विक्षिप्तचित्त बीमारी ही है। उदय निधि को ये तो मानना ही होगा कि जब वे अपनी
संकीर्ण सोच से अपने क्षणभंगुर अस्तित्व को नहीं समझ पा रहे तो वे सनातन को क्या समझेंगे? उदय निधि ने सनातन पर अपनी ओच्छी टिप्पड़ी के पूर्व श्रीमदभगवत गीता के एक श्लोक का भी चिंतन मनन
किया होता तो कदाचित ही वे ऐसे नकारात्मक सोच और विचार सनातन के बारे मे रखते? अध्याय 2 के श्लोक 28 मे भगवान श्री कृष्ण कहते
हैं:-
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि
भारत।
अव्यक्तनिधनान्येव
तत्र का परिदेवना।।2.28।। अर्थात
हे भारत ! सभी
प्राणी जन्मसे पहले अप्रकट थे और मरनेके बाद अप्रकट हो जायँगे, केवल बीचमें ही
प्रकट दीखते हैं। अतः इसमें शोक करनेकी बात ही क्या है?
ठीक
उसी तरह हे! उदय निधि तेरी-मेरी या समस्त जीवित संसार की भी वो ही गति होने वाली है अर्थात तेरे जन्म के
पूर्व भी सनातन था! तेरे जीते जी भी सनातन है और तेरे-मेरे बाद भी ये सनातन रहने वाला है क्योंकि सनातन का
अर्थ है नित्य, निरंतर, चिरकालिक, अनंत, जीवंत अर्थात जिसका कभी अंत ना हो!!
आशा
है इंडि गठबंधन के दल और राजनैतिक नेता गण
बेशक बीजेपी या उसके गठबंधन के दलों, लोगो की आलोचना, तीव्र निंदा, तिरस्कार और बहिष्कार करें पर इंडि
गठबंधन के लोगों को अपनी मन, वाणी और कर्म मे सावधानी वरतते
हुए सनातन धर्म, हिन्दू धर्मावलम्बियों उनके ईश्वर और ईष्ट
देवों पर अनर्गल टीका-टिप्पड़ी से बाज़ आना
चाहिये!!
विजय
सहगल


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