शनिवार, 6 जनवरी 2024

अडानी समूह पर सुप्रीम फैसला

 

"अडानी समूह पर सुप्रीम फैसला"





ये अनैतिकता की पराकाष्ठा ही कही जायेगी कि ये जानते हुए भी, राहुल गांधी और काँग्रेस ने अपनी न समझी और अज्ञानता के वशीभूत अमेरिका की कंपनी हिडनबर्ग की जनवरी 2023 की उस छद्म और झूठी रिपोर्ट पर विश्वास कर अपने ही देश के एक बहुत बड़े औद्योगिक घराने, अडानी समूह पर शेयर मूल्यों मे हेराफेरी का  अनर्गल आरोप लगा कर न केवल अडानी समूह अपितु इस समूह मे निवेशित  साधारण शेयर निवेशकों  को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया। देश के विरुद्ध मौद्रिक षड्यंत्र मे  जिस अमेरिकन कंपनी हिडन बर्ग ने देश के आर्थिक तंत्र को तहस-नहस करने के प्रयास किया, उसकी निजी स्वार्थ और निजी  लाभ हेतु बदनियती, कुत्सित  स्वार्थ और घिनौनी साज़िश को तो समझा जा सकता हैं पर उसमे काँग्रेस और  राहुल गांधी की सहभागिता अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण रही। अमेरिकन कंपनी हिडन बर्ग की विश्वसनीयता सारी दुनियाँ मे संदिग्ध और संदेहास्पद रही हैं। इस कंपनी का मुख्य ध्येय ही दुनियाँ के शेयर मार्केट मे लिस्टिड कंपनीयों की बारे मे छिद्रान्वेषण कर ब्लैकमेलिंग करना हैं। शेयर बाज़ार के बारे मे थोड़ी-बहुत जानकारी रखने वाले जानकार इस बात से अच्छी तरह बकिफ होंगे कि ये हिडन बर्ग कंपनी अनेकों बार दुनियाँ की तमाम कंपनीयों के बारे मे झूठी रिपोर्ट प्रकाशित करने के पूर्व कंपनी के शेयर्स की शॉर्ट सेल्लिंग कर मुनाफा कमाती रही हैं। इस कंपनी ने अडानी समूह की कंपनीयों के साथ भी इसी षड्यंत्र कारी नीतियों का उपयोग कर षड्यंत्र पूर्वक करोड़ो रुपए कमाये। एक बाहरी, विदेशी कंपनी,  हिडन बर्ग के दुर्भावनापूर्ण आरोपों से तो  एक बार निपटा जा सकता था, पर बदनीयत से प्रेरित इस कूट षड्यंत्र मे काँग्रेस पार्टी की सहभागिता से ये संकट गहरा हो गया जिसमे देश के लाखों, छोटे निवेशकों को भरी नुकसान हुआ।  हमारे देश की इस कहावत कि "घर का भेदी लंका ढ़ावे" को काँग्रेस ने सही से चरितार्थ कर दिया!! यूं भी किसी शायर ने क्या खूब लिखा हैं-:

"मुझे अपनों ने मारा, गैरों मे कहाँ दम था।"

"मेरी कश्ती वहाँ डूबी, जहां पानी बहुत कम था॥"

 

जनवरी 2023 से कल तक, काँग्रेस और राहुलगांधी ने अपने राजनैतिक हित लाभ के लिए देश और दुनियाँ के हर मंच और हर चुनावी सभाओं मे ने केवल अडानी समूह पर मन गढ़ंत और झूठे  आरोप लगाये अपितु नरेंद्र मोदी सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से इस समूह की सहायता और संलिप्तता के कुटिल और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाये। लगभग एक साल से देश और दुनियाँ मे अडानी समूह और देश को बदनाम करने वाले कॉंग्रेस के इस कूटप्रबंध पर अंततः 3 जनवरी 2024 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अडानी समूह-हिडन बर्ग केस मे आगे कोई भी एसआईटी, सीबीआई या किसी भी अन्य ऐजन्सि से जांच कराने से साफ इंकार कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। देश का सबसे पुराने राजनैतिक दल के शीर्ष नेतृत्व द्वारा देश के औद्योगिक समूहों के विरुद्ध इस तरह के गैर जिम्मेदारा आचरण ने, न केवल दुनियाँ मे देश की छवि को आहत किया अपितु स्वयं काँग्रेस और राहुल गांधी के बहुत अहित किया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शेयर मार्केट को नियंत्रित करने वाली एजन्सि सेबी के प्रति न केवल विश्वास जताते हुए, हिडन बर्ग के 24 आरोपों मे से 22 आरोपों पर सेबी की रिपोर्ट को सही माना अपितु  शेष दो मामलों की रिपोर्ट को भी तीन माह के अंदर निपटाने का आदेश दे, अडानी समूह को कानून के उल्लंघन से इंकार कार क्लीन चिट देते हुए किसी भी गड़बड़ी या हेराफेरी से इंकार किया।

एक ऐसी कंपनी जिसकी बुनियाद ही दुनियाँ के शेयर मार्केट मे कंपनियों की छद्म रिपोर्ट तैयार कर पैसा कमाना हैं। कैसे, काँग्रेस जैसी राजनैतिक पार्टी के अपरिपक्व नेता, झूठी और संदिग्ध रिपोर्ट के आधार पर  देश के आर्थिक ढांचे को तहसनहस करने के प्रयास मे शामिल हो सकते  हैं?

अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी द्वारा एक साल की  ज़लालत, अपमान  और तिरस्कार के बाद,  अपने ट्वीटर एकाउंट पर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए "सत्य मेव जयते" लिख अपनी यथार्थ भावनाओ को उद्धृत किया जो समीचीन हैं। पर काँग्रेस के एक वरिष्ठ और बुद्धिजीवी नेता जय राम रमेश का प्रत्युत्तर ट्वीट अत्यंत खेद जनक और दुर्भाग्य पूर्ण है। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ही सवाल खड़े करते हुए लिखा है कि "व्यवस्था से छेड़छाड़ करने वाले लोगों को "सत्यमेव जयते" बोलते हुए, सुनते हैं तो, सच हज़ार बार मरता है"। काँग्रेस और राहुल गांधी द्वारा, अडानी समूह को, अपने झूठे और अनर्गल आरोपों से, एक साल तक संकट मे डालने वाले आरोपों पर प्रायश्चित करना तो दूर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रश्न खड़ा करना, क्या सरासर "चोरी और सीना जोरी" नहीं है?

औद्योगिक क्रांति के माध्यम से रोजगार देने का दम भरने वाली कॉंग्रेस के राहुल गांधी ने पिछले एक दशक मे  औद्योगिक घरानों और कंपनीयों से पूर्वाग्रह रखने मे कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। 2014 मे सत्ता गँवाने के बाद से राहुल गांधी ने हर सभा, हर मंच पर देश के दो औद्योगिक समूहों, अडानी और अंबानी पर देश का पैसा लूट कर अपनी जेब मे डालने के अनेकों आरोप लगाये। राहुल गांधी के, लूट के पैसे को अडानी की जेब मे डाले जानी वाली धनराशि,  समय, स्थान और उनकी याददाश्त  के अनुरूप अनेकों बार  बदलती रही।   पश्चिमी बंगाल मे कभी ऐसे ही आरोप लगा, टाटा कंपनी को भी नीचा दिखाने के प्रयास कर, सिंगूर से टाटा नैनो कार के कारखाने को बंद  कर, सिंगूर के स्थानीय लोगो को रोजगार और विकास के अवसरों से वंचित कर ममता सरकार ने क्या हांसिल किया था? सारा देश इस घटना को  जानता हैं। देश मे औद्योगिक जगत मे हताशा और निराशा का वातावरण उत्पन्न कर कैसे देश मे औद्योगिक क्रांति लायी जा सकती हैं? आज अडानी या अंबानी अपने सारे कारखाने, संस्थान या कारोबार को यदि  समाप्त कर दे, तो उनका तो शायद कुछ न बिगड़े लेकिन इन कारखानों, फैक्ट्रियों के बंद होने से देश के करोड़ो युवाओं, नौजवानों और स्थानीय  लोगों को  प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार के कितने अवसरों से वंचित होना पड़ेगा, देश के आर्थिक विकास कितना  नुकसान पहुंचेगा, इसकी भयावह कल्पना ही की जा सकती है?

देश के छोटे, मँझोले और बड़े  उद्धोगपतियों और औद्योगिक समूहों का देश के आर्थिक विकास मे महतवपूर्ण योगदान हैं। आज आवश्यकता इस बात की हैं कि देश के औद्योगिक नीतियों और धंधों को दशकों से शासन की लाल फ़ीताशाही और नौकरशाही के चंगुल से मुक्त करा, देश मे  सरल, सहज और मित्रवत औद्योगिक नीतियाँ बनाने की, ताकि देश मे व्यापारिक और औद्योगिक क्रांति लायी जा सके।  इसके लिए आवश्यक है कि राजनैतिक दल भी देश के उदद्योग धंधों, व्यापारिक संस्थानों और कलकारखानों के मालिकों को भी सम्मान और प्रतिष्ठा की  दृष्टि से देखेँ!! बैसे ही  इन व्यापारिक संस्थानों से  भी अपेक्षा की जाती है के वे देश के क़ानूनों का कड़ाई से पालन, सच्चाई और ईमानदारी से करें। आशा की जानी चाहिये कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला  अडानी-हिंडन  बर्ग के मामले मे सेबी के स्टैंड को सही ठहराते हुए ईमानदारी, कानून सम्मत एवं  नियम पूर्वक व्यापार करने वाले संस्थानों को कानूनी संरक्षण और सुरक्षा प्रदान कर, एक नई दिशा दिखाएगा।          

 

विजय सहगल

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

सहगल साहेब आज कल कांग्रेस अपनी कर्मों से अपनी स्तर आवारा जानवरों से भी नीचे ला दिया। यह लोग जब चाइना से गुप्त समझौता कर सकते हैं इनसे देश या देश में कार्यरत औद्योगिक घरानों के प्रति कोई वफादारी उम्मीद नहीं कर सकते हैं
R R Peri, विशाखापट्टनम

बेनामी ने कहा…

We should respect the law abiding business houses who contributes in all round development and growth of our country resulting into employment to the youth instead of their boycot. We remember that there was time when a needle was also imported what to say of modern defence equipments which are now being made in our own country.
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
I S Kadian, Chandigarh