नितीश कुमार की, महिलाओं पर अमर्यादित, अश्लील और अनावश्यक टिप्पड़ी।
श्रीमद्भगवद गीता के अध्याय छः के श्लोक छः
मे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं:-
बन्धुरात्माऽऽत्मनस्तस्य
येनात्मैवात्मना जितः।
अनात्मनस्तु
शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत्।।6.6।।
अर्थात जिस जीवात्मा द्वारा मन और इंद्रियों सहित शरीर जीता हुआ है, उस जीवात्मा का तो वह आप ही मित्र है; और जिसके
द्वारा मन तथा इंद्रियों-सहित शरीर नहीं जीता गया हैं, उसके
लिये वह आप ही शत्रु के सदृश शत्रुता में बरतता है।
यह कथन बिहार के मुख्यमंत्री के द्वारा बिहार विधान सभा मे महिलाओं
के उपर दिये ब्यान से परिलक्षित होता हैं। दिनांक 7 नवम्बर 2023 को बिहार के
मुख्यमंत्री नितीश कुमार का बिहार विधान सभा सत्र के दौरान माननीय सदस्यों के बीच, महिलाओं की शिक्षा और जनसंख्या नियंत्रण मे सकारात्मक और नकारात्मक योगदान पर टिप्पड़ी का विडियो देख और सुन कर तो यही प्रतीत होता हैं कि नितीश
कुमार को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं हैं, क्योंकि न जीते
हुए मन और इंद्रियों वाले नितीश कुमार स्वयं ही अपने शत्रु हैं अन्यथा बढती जनसंख्या
जैसे सामाजिक विषय पर जन्तु विज्ञान अध्याय
के यौन विज्ञान विषय का चित्रण कुत्सित और असभ्य भाषा और भाव से न करते। जैसे
हाव-भाव और चटखारे लेकर उन्होने विधान सभा
मे माननीय सदस्यों के बीच, जिसमे अच्छी ख़ासी संख्या मे महिला
सदस्यों की भी थी,
जिस भाषा का इस्तेमाल किया उसे यहाँ लिखना भी संभव नहीं। नितीश कुमार के 30
सेकंड के वक्तव्य ने न केवल विधान सभा के सदस्यों को अपितु महिला सदस्यों
को असहज स्थिति मे डाला अपितु सारे देश की राजनीति मे एक भूचाल ला दिया। इस पर कड़ी प्रितिक्रिया हुई जो स्वाभाविक थी
जिसकी कल्पना शायद नितीश कुमार को भी नहीं रही होगी।
जिस विधान सभा मे प्रदेश की जनता द्वारा चुने गए सदस्य प्रदेश के
विकास पर चर्चा कर नीतियों और कार्यक्रमों का निर्माण करते हैं उस लोकतन्त्र के
मंदिर मे नहिलाओं की शिक्षा के आंकड़े और जनसंख्या नियंत्रण की जिस समस्या का निदान, शालीनता, सरलता और शिष्टाचार से किया जा सकता था
उसको "श्रीमान" नीतीश कुमार ने अपनी
अमर्यादित, अभद्र और
अश्लील भाषा मे किया मानों वे साठ-सत्तर
के दशक की किसी निम्न स्तर की पुस्तक के साहित्य
का अश्लील अंश पढ़ रहे हों। बिहार जैसे प्रदेश जिसने भारत मे सबसे ज्यादा ज्ञानवान और बुद्धिमान बुद्धिजीवि पुरुषों/महिलाओं
को जन्म दिया वहाँ के मुख्यमंत्री से ऐसी निम्नस्तरीय, घटिया
और सड़क छाप भाषा की अपेक्षा कैसे की जा सकती हैं? जब सभ्य समाज
मे किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी अमर्यादित, कुत्सित टिप्पड़ी के लिए
कोई जगह नहीं हो सकती तो मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पदासीन व्यक्ति को कैसे माफ किया
जा सकता हैं? सनातन धर्म और सांस्कृति मे तो यत्र
नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। अर्थात जहां
नारियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं। तब महिलाओं
के प्रति दुराग्रह रखने वाले व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक मंच से ऐसा वक्तव्य, वह भी लोकतन्त्र के सर्वोच्च मंदिर, "विधान सभा"
मे!!, कल्पना से परे हैं? यह नारियों के
विरुद्ध, आसुरी मानसिकता के विक्षिप्त चित्त व्यक्ति का अक्षम्य अपराध हैं! महिलाओं के बारे मे ऐसी कुत्सित
सोच को धिक्कार हैं,
मुख्यमंत्री महोदय! भारतीय नारियाँ तिरिस्कार करती हैं आपकी अधम मानसिकता का!! और भर्त्स्ना करती महिलाओं पर आपकी भारतीय संस्कृति
और सभ्यता विरोधी वक्तव्य का!!!
ऐसा नहीं था कि मात्र नितीश कुमार अपने मन, वाणी और कर्म से महिलाओं पर अनाचार और दुराचार कर रहे थे, बड़ा खेद और अफसोस तो इस बात का हैं कि बगल मे बैठे उपमुख्यमंत्री तेजश्वी यादव, पीछे बैठे कुछ माननीय मंत्रीगण भी तिरछी नज़रों से पेट पर हाथ फेर रहे
नितीश कुमार की कुटिल हंसी मे मुस्करा कर नितीश कुमार के पाप मे साझीदार थे। गोस्वामी तुलसी दास,
रचित रामचरित मानस की चौपाइयों मे महिलाओं पर अपनी मूढ़, अनर्गल और अतार्किक
आरोपों के चलते सुर्खियों मे आए बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्र शेखर भी पीछे बैठे
नितीश कुमार की महिलाओं पर अश्लील और
अमर्यादित उपहास मे सहभागी थे। वे यहीं नहीं रुके अपितु दर्शक दीर्घा मे पत्रकारों
की ओर मुखातिव हो उन्हे भी अपने वक्तव्य के आशय को समझ लेने की नसीहत दी अर्थात "चोरी और सीनाजोरी"!!
ऐसा नहीं है कि महिलाओं पर मैली, मलिन और कलुषित
विषादपूर्ण टिप्पड़ीयां करने वाले नितीश कुमार पहले व्यक्ति हों। इन घृणास्पद विषय पर
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा जुलाई 2013 मे अपने ही दल की
सांसद सुश्री मीनक्षी नटराजन को "टंच
माल" कह उपहास उड़ने से सारा देश परिचित हैं। उ॰प्र॰ के रामपुर से पूर्व सांसद
और सपा सरकार के पूर्व मंत्री मोहम्मद आज़म द्वारा अप्रैल 2020 के चुनाव मे उनकी प्रीतिद्वंदी
जया प्रदा पर "खाकी जाँघिया" वाली अभद्र और कुत्सित टिप्पड़ी से देश का हर
नागरिक परिचित हैं। मोहम्मद आज़म खान ने एक बार जुलाई 2019 मे
संसद सत्र के दौरान पदाशीन अध्यक्ष श्रीमती रमा देवी पर भी शर्मनाक टिप्पड़ी की थी।
लालू प्रसाद द्वारा बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गाल की तरह चिकना बनाने की हास्यास्पद
टिप्पड़ी भी इसी श्रेणी मे हैं। राजनेताओं की महिलाओं पर अभद्र, अश्लील और अनावश्यक टिप्पड़ियाँ उन राजनीतिज्ञों को बचपन मे मिले पारवारिक
माहौल, विद्यार्जन और शिक्षा के दौरान मिली संगत, पॉलिटिकल पार्टियों की सोच और मानसिकता का प्रतिविम्ब हैं जो एक दिन मे विकसित
नहीं होती। सालों साल, अधम और तामसी व्यक्ति की यह एक ऐसी सोच
हैं जो अशास्त्र और अधर्म को भी, "यह धर्म" हैं मान
लेती है।
विजय सहगल

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