सोमवार, 2 अक्टूबर 2023

राहुल गांधी का सत्यम् शिवम् सुंदरम् अर्थात अध जल गगरी छलकत जाए






दिनांक 1 अक्टूबर 2023 को  ट्विटर सहित अन्य सामाजिक माध्यमों और समाचार पत्रों मे  श्री राहुल गांधी द्वारा लिखित दो पेज का  लेख "सत्यम् शिवम् सुंदरम्"  प्रचारित और प्रसारित हो रहा हैं जिसमे उन्होने हिन्दू धर्म की व्याख्या अपने शब्दों मे की हैं। पूरे लेख मे उन्होने 16 बार "भय" या "भयावह" का उल्लेख कर हिंदुओं को उपदेश दिये हैं जबकि सनातन धर्म का मूल आधार ही "भय के सर्वथा आभाव" से शुरू होता हैं जैसा कि भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 16, श्लोक संख्या 1 मे, दैवी सम्पदा प्राप्त पुरुष (सनातनी) के लक्षणों के बारे मे लिखा हैं:-            

अभयं सत्त्वसंशुद्धिः ज्ञानयोगव्यवस्थितिः।
दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्।।16.1।।
अर्थात

"भय का सर्वथा अभाव, अन्तःकरण की पूर्ण निर्मलता, ध्यानयोग मे निरंतर दृढ़ स्थिति और दान, इंद्रियों का दमन, यज्ञ, वेद-शास्त्रों का पठन-पाठन, तप और शरीर तथा इंद्रियों के सहित अन्तःकरण की सरलता, पर  राहुल गांधी के आलेख की अधिकतर व्याख्या हिन्दू धर्म की शिक्षाओं, सिद्धांतों और नीतियों  के विपरीत, अप्रासंगिक, असंगत और असंबद्ध हैं। जिस हिन्दू धर्म और हिन्दू की उन्होने व्याख्या की,  वह सनातन धर्म के पवित्र ग्रन्थों  मे उल्लेखित शिक्षाओं से कहीं मेल नहीं खाती। दो  पेज की 41 लाइन के इस आलेख मे लिखे विचारों के समर्थन मे न तो उन्होने कहीं किसी ऋषि, संत या महापुरुषों का संदर्भ दिया और न ही किसी धार्मिक ग्रंथ का उल्लेख ही किया हैं। लेख मे उन्हेने  उत्साह और आनंद के साथ "भय" से जोड़ कर कभी मृत्यु का "भय", कभी दुःखों का "भय", कभी लाभ-हानि का "भय", कभी भीड़ मे खो जाने का "भय" और कभी असफलताओं के "भय" से जोड़ कर भयभीत कराने का प्रयास किया जो कि सनातन हिन्दू धर्म की मूल शिक्षाओं के एकदम विपरीत हैं। ऐसे ही सांसरिक माया मोह के बंधन से "भय मुक्त" करवाने के लिए ही तो भगवान श्री कृष्ण ने शोक और विषाद से भय ग्रस्त अर्जुन का साहस बढ़ाते हुए कुरुक्षेत्र मे निर्भयता, निडरता की शिक्षाएं देकर .......त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप अर्थात हे! अर्जुन!, युद्ध के लिए खड़े हो जाओ ( अध्याय 2, श्लोक .3) एवं ........तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः अर्थात  हे! अर्जुन, युद्ध के लिए निश्चय पूर्वक  खड़े हो जाओ......(ध्याय 2, श्लोक .37) के उपदेश दिये थे और यहाँ एक राहुल गांधी हैं कि सांसरिक काम, क्रोध, लोभ के भय से इस जीवन मरण के चक्र से मुक्ति के मार्ग मे अबरोध उत्पन्न कर "मोक्ष से वंचित कर रहे हैं अर्थात रोड़े अटका रहे हैं। वहीं  हमारे शास्त्र और ग्रंथ इन तीन प्रकार के नरक के द्वार को आत्मा का नाश करने वाले बता कर इन का त्याग करने का आदेश देते हैं। (गीता अध्याय 16 श्लोक 21)    

न जाने राहुल गांधी ने अपने आलेख मे कहाँ से हिन्दू धर्म की व्याख्या को गढा?, जिसमे वे कहते हैं कि इस जीवन रूपी "महासागर मे आज तक न तो कोई बच पाया हैं, न ही बच पाएगा" अर्थात मारे जाने और मृत्यु का भय दिखाया है जबकि श्रीमद्भगवत गीता मे हर कदम पर पुनर्जन्म की व्याख्या करते हुए अध्याय 2 के श्लोक संख्या 20 से 25 मे बासुदेव भगवान श्री कृष्ण, "आत्मा को किसी भी काल मे अजन्मा,  नित्य, सनातन और पुरातन बताते हुए कहते हैं कि शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता (अध्याय 2 श्लोक 20)।

आत्मा को नाश रहित, अव्यय बताते हुए वे कहते हैं कि, "जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्र धरण करता हैं बैसे ही यह आत्मा पुराने शरीर को त्याग कर नए शरीर को प्राप्त होती हैं" (अध्याय 2 श्लोक 22)। न जाने कौन से विक्षिप्त चित्त अध्यन का अनुसरण कर श्री राहुल गांधी ने निरंतर जीवन यात्रा के  महासागर की गहराइयों को मृत्यु और अन्य छद्म सांसरिक सुखों को  भयावह निरूपित कर सामान्य मानवी के मन मे भय पैदा करने की कोशिश की हैं जबकि, "मनुष्य शरीर मे जैसे कि बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है वैसे ही उसको अन्य शरीर की प्राप्ति होती हैं। धीर पुरुष इसमे मोहित नहीं होते!! (अध्याय 2 श्लोक 13)

अध्याय 2, श्लोक 27 मे भगवान  श्री कृष्ण कहते हैं कि हे! अर्जुन, जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है, तब इस बिना उपाय वाले विषय मे क्या शोक करना। इस तरह सनातन धर्म मे मृत्यु के विषय को अभय और निर्भय निरूपित कर शोक और भयमुक्त मार्ग प्रशस्त किया हैं, इसके विपरीत राहुल गांधी तमाम भयों के उल्लेख के साथ मृत्यु का भय हिंदुओं को दिखाने की चेष्टा करते है।   

सनातन धर्म मे ऋषियों की वाणी मे ही "भय से मुक्ति" की शिक्षाएं निहित हैं। श्री आदि शंकराचार्य ने भी "गीता महात्म्य" की व्याख्या करते हुए लिखा हैं कि, "गीता शास्त्र का नित्य पाठ करने वाला, भगवान विष्णु के आश्रय से "भय, शोक आदि चिंताओं से मुक्त हो जाता है। (भय शोकादि वर्जित:....) और एक राहुल गांधी हैं जो कदम कदम पर हिंदुओं को भय दिखा कर झूठी व्याख्या गढ़ रहे हैं।     

हिन्दू होने की एक नयी परिभाषा राहुल गांधी ने गढ़ी कि "जिसमे, अपने "भय" की तह मे जाकर इस महासागर को सत्य निष्ठा से देखने का साहस है-हिन्दू वहीं हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि अपने निजी जीवन के डर, भय और अनिश्चितता के चलते उन्होने हिंदुओं को एक नई तरह की विवेचना को अमलीजामा पहनाने की कोशिश की हैं अन्यथा श्रीमद्भगवत (गीता के अध्याय 12 के श्लोक 15) मे भगवान श्री कृष्ण ने हर्ष, अमर्ष (दूसरे की उन्नति को देख संताप/शोक करने वाला), "भय मुक्त",  भक्त को अपना प्रिय बताया हैं जो श्रीमान राहुल के विचारों के एक दम विपरीत हैं। सनातन की ऐसी कुव्याख्या कोई सामान्य और साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता? ऐसी मनगढ़ंत परिभाषाएँ तो कोई "असामान्य" और "असाधारण महापुरुष" ही कर सकता हैं!!     

राहुल गांधी के इस "अध्यात्म विध्या" मे उल्लेखित विचार आपस मे ही विरोधाभाषी हैं जिसकी बानगी उनके आलेख मे देखने को मिली। पेज 2 पर वे "भय को गहनता से देखने और स्वीकार करने" को हिन्दू का साहस निरूपित करने का प्रयास करते हैं। भला भय को स्वीकारने मे साहस कैसा? भय या डर को निडरता पूर्वक दमन  ही साहस हैं, भय को स्वीकार करने की शिक्षा हमे कायर बनाएगी इसलिए हम दृढ़ता पूर्वक राहुल गांधी की व्याख्या से असहमति रखते है। आगे वे हिन्दू को" भय के वश मे आकर कमजोर न होने" की नसीहत देते हैं। हे! आर्यपुत्र राहुल गांधी मै आपसे आग्रह पूर्वक कहना चाहते है कि "भय" अपने आप मे ही  एक कमजोरी हैं, कायरता है और इसी भय से निर्भय और अभय के मार्ग को प्रशस्त करने की शिक्षाएं तो हमारे पवित्र ग्रंथ देते हैं। आप सनातन धर्म के ग्रन्थों और पवित्र पुस्तकों की शिक्षा किसी श्रेष्ठ गुरु के अधीन, ग्रहण कर चिंतन मनन और अध्यन करें तो न केवल आपका अपितु  देश का कल्याण होगा अन्यथा हमारे यहाँ एक कहावत हैं कि :-

"अधजल गगरी, छलकत जाए"

विजय सहगल         

    


4 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

आदरणीय सहगल जी,
इस धूर्त और मंदबुद्धि के बारे में जितना लिखकर इसकी आलोचना की जाय, कम ही होगी ।
शुभ रात्रि

बेनामी ने कहा…

बहुत ही विवेकपूर्ण व्याख्या, आपके द्वारा👌👌
S k bansal noida

बेनामी ने कहा…

Sehgal ji aap ne sahi kaha. Ye isi kahavat ko charitarth karta hae. A little knowledge is a dangerous thing.
🙏🏻🙏🏻🌹🌹
Kadian

बेनामी ने कहा…

भाईसाब, जिसको किसी धर्म के बारे में नहीं पता, जिसके धर्म के विषय में किसीको नहीं पता वह सनातन धर्म पर प्रवचन देकर स्वयं को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी की श्रेणी में प्रदर्शित करने का दुस्साहस कर रहा। ईश्वर ऐसे प्रवचन कर्ता को सद्बुद्धि भी नहीं देंगे।