"एलेक्जेंडर
रोड्रिग"
1 अगस्त
2023 को कर्नाटक के सरजापुर से तमिलनाडू सीमा के पहले गाँव कागनूर से नल्लुर मार्ग
पर प्रातः पैदल भ्रमण के दौरान दूर से एक दुपहिया वाहन जिसके उपर एक छप्पर नुमा
आकृति को देख मैंने इस प्रत्याशा से अपने
मोबाइल को तुरंत चालू कर विडियो बनाना शुरू कर दिया कि शायद कुछ नया देखने को मिले?
दूर से देखने पर मुझे लग रहा था कि स्थानीय स्टार अनेकों व्यक्तियों द्वारा जुगाड़ कर
नयी नयी खोजे देखने को मिल जाती है शायद ये भी उनमे से होगी?
नजदीक आने पर मेरी आशा के अनुरूप 45-50
वर्षीय एक युवक को पल्सर बाइक पर प्लास्टिक की बरसाती से बाइक के आगे से पीछे तक
लोहे के पतले पाइप के सहारे बनाये गये शेड
को देख उसे रुकने का संकेत दिया। मैंने देखा बजाज पल्सर की इस बाइक को इस तरह
संशोधित किया गया था कि बरसात, तेज धूप और लपट
के दौरान बाइक चालक को मौसम के अनुरूप ढाल कर इसके प्रकोप को कम या बचाया जा सके।
बाइक के रुकते ही मैंने वाहन चला रहे नौजवान
से उसका परिचय पूंछा और बाइक मे किए गये आवश्यक संशोधन के बारे मे विस्तार से अपनी
जिज्ञासा प्रकट की। बाइक चला रहे नौजवान ने अपना नाम एलेक्जेंडर रोड्रिग बताया।
आर्मी से सेवानिवृत्त पिता की संतान एलेक्जेंडर के मन मे कुछ अलग करने की इच्छा
बचपन से थी यध्यपि उनकी शैक्षिक योग्यता की पृष्ठभूमि यांत्रिक इंजीन्यरिंग की नहीं
रही फिर भी उनके मन मे दिव्यांग और ज़ोमेटो कंपनी के खाध्यन्न वितरण करने वाले
कर्मचारियों के लिए एक ऐसी बाइक बनाने की तमन्ना है जो उन्हे सर्दी,
गर्मी, बरसात मे वस्तुओं को लोगो के घर वितरण करने
मे आने वाली कठिनाइयों से छुटकारा दिलाएँ। इस हेतु एलेक्जेंडर ने मोटरसाइकल मे वरसात से बचाव हेतु एक पतले स्टील
रौड से बाइक की सीट के पीछे से बाइक के
हैंडल से लगभग 2 फुट आगे तक एक ऐसे फ्रेम लगाया और उसके उपर प्लास्टिक की
बरसाती को इस तरह बेल्टों से कसा ताकि भारी वारिस के दौरान भी बाइक चालक वरसात से
न भीगे। चालक के पीछे भी सीट पर इतनी जगह छोड़ी ताकि एक व्यक्ति या ज़ोमेटो चालक का
बॉक्स अच्छी तरह फिट किया जा सके।
उन्होने बाइक के हैंडल मे पारदर्शी
प्लास्टिक के टुकड़े को फ्रेम की सहायता से इस तरह लगाया कि बरसात मे पानी की बौछार
और गर्मी मे गरम हवा की लपटों से बचाव किया जा सके। उन्होने स्टील के शेड के उपर
रस्सी की जाली को इस तरह कसा है कि लगभग 20 से 25 किलो बजन का सामान उसमे ठीक ऐसे
बांध सके जैसे कारों मे कैरियर मे सामान को रक्खा जाता है। एलेक्जेंडर ने बाइक के बायीं
तरफ लगभग 10-12 लीटर का एक छोटा जरीकेन भी लगा रक्खा था ताकि दूर-दराज़ के
क्षेत्रों की यात्रा मे पेट्रोल का रिजर्व स्टॉक रक्खा जा सके। ज़ोमेटो कंपनी के डिलीवरी
स्टाफ और दिव्यांग जनों के लिए सहायक बाइक के निर्माण जैसे नेक और पवित्र काम मे
शोध करने और उस पर धन व्यय करने पर
एलेक्जेंडर की प्रशंसा करे बिना न रह सका।
खुले विचारों,
प्रगतिशील सोच और सिगरेट के शौकीन
एलेक्जेंडर ने बातचीत मे बताया कि उनकी एक इच्छा हिमालय पर्वत की श्रंखला
से लगे क्षेत्रों की अपनी इस बाइक से यात्रा करने की भी है जिसमे वे अपने पपी को
ले जाना चाहते है जिसे उन्होने लावारिस अवस्था मे तब पाला था जब वह छह दिन की आयु
मे बुरी तरह घायल सड़क के किनारे पड़ा मिला था। हिमालय क्षेत्र की यात्रा भी बिना
पूर्वनियोजित कार्यक्रम या सुविधाओं के साथ बिना होटल आदि मे रुके सिर्फ अपने टेंट
मे अपनी मर्जी के करना चाहते है। एलेक्जेंडर के मन मे मानवोचित भावनाएं कूट कूट कर
भरी है इसलिए उनके मन मे समाज के दबे कुचले वर्ग के प्रति काफी प्यार और सम्मान है
जिसकी बानगी हमने उनसे बातचीत के दौरान हर कदम पर देखी और महसूस की!!
उन्होने बताया कि वे अपने फार्म हाउस मे भी खुद
के बनाये टेंट मे ही रुकते है जिसमे दैनंदिनी कार्यों की सारी आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध
है। उन्हे दुःख और अफसोस है कि जब इस संबंध मे उन्होने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से
आवश्यक अनुमतियों हेतु संपर्क किया तो निराशा हाथ लगी। उनका मानना था दुपहिया वाहनों
के उपर बरसाती लगाने की अनुमति नहीं ली गयी? तब एलेक्जेंडर का ये तर्क था कि क्या सड़क पर पैदल चलने वालों को
भी छतरी लगाने की अनुमति आरटीओ से अनुमति लेनी होगी?
एलेक्जेंडर इस शोध कार्य के साथ एक यू ट्यूब क्राइम चैनल के लिए भी कार्य करते है।
आज कल की चमक धमक से दूर एलेक्जेंडर द्वारा शांति पूर्वक अपने शोध कार्य मे लगे हुए है। मैंने उनके कार्यों और इच्छित मनोरथों को प्राप्त
करने की ईश्वर से प्रार्थना करने और उनको अपने प्रिय पपी के साथ हिमालय पर्वत की श्रंखला के भ्रमण हेतु मंगल कामनायेँ
व्यक्त करते हुए विदा ली।
विजय सहगल



5 टिप्पणियां:
बहुत खूब,हृदयस्पर्शी 👏👏👏🙏🙏🙏🌷🌷🌷
बहुत सुंदर शब्दों और शैली में आपने रोड्रिक जी के अनुसंधान तथा उनकी सोच को विश्लेषित किया । साधुवाद
*आश्चर्य की बात है कि हमारा देश अपर्याप्त शिक्षा,विपन्नता,सुरसा के मुॅह की तरह बढ़ती बेरोजगारी के बावजूद रचनात्मकता,क्रियात्मकता व विकास की नई संभावनाओं को तलाशने में किसी से कम नहीं है।*
*भारतीय तकनीकी का लोहा विकसित देश मान चुके हैं।"इसरो" की तुलना "नासा" से होने लगी है।भारतीय कम लागत में बेहतर परिणाम प्राप्त करने का माद्दा रखते हैं।*
*आपने एलेक्जेंडर रोड्रीग की कल्पनाशीलता को आकार-प्रकार लिये देखा और साझा किया इसके लिए साधुवाद।* *आपके घुमक्कड़ स्वभाव का फायदा हम सभी उठाते हैं जो सचमुच प्रीतिकर है।*
🌹🙏🌹👌👌👌👌
सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, ग्वालियर
धन्यवाद श्रीमान
भगवान तमाम ऐसे लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण करें जो असहाय लोगों के मदद के लिए काम करते हों
D. S. Negi, Delhi
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