शुक्रवार, 22 जुलाई 2022

गुमशुदा लैपटॉप

 

"गुमशुदा लैपटॉप"

 

मेरी पदस्थपना के दौरान एक कार्यालय की घटना आपके साथ सांझा करूंगा जो बेहद अफसोस जनक और  शर्मसार करने वाली थी। कार्यालय के अंदर राजमहलों के से षड्यंत्र होना बहुत ही खेद और अफसोसजनक था। इस वृतांत मे देश, काल और पात्रों  को जानबूझ कर अबूझा रक्खा गया है।  इस  घटना मे एक  विभाग के  कार्यालय मे पदस्थ  विभाग प्रमुख सहित सारे फील्ड स्टाफ को बैंक कार्य हेतु  लैपटॉप प्रदान किया गया था, जिसकी लिखित रसीद व्यक्तिगत स्तर पर सभी सदस्यों से प्राप्त कर रेकॉर्ड मे रखी गई थी, ताकि लैपटॉप के लेनदेन मे पारदर्शिता रखी जा सके। अब लैपटॉप की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संबन्धित स्टाफ की थी जिसे लैपटॉप प्रदाय किया गया था। अब चाहे स्टाफ प्रदत्त लैपटॉप को कार्यालय मे रखे या अपने साथ घर ले जाये।  बैंक का कार्य समय की गति से चलता रहा। दिन, हफ्तों और महीनों पश्चात एक दिन ऐसा भी आया जब विभाग प्रमुख का स्थंतरण स्वाभिक प्रक्रिया के तहत  वर्तमान पदस्थपना से  अन्यत्र अन्य स्थान के लिये हो गया। नवांगतुक को प्रभार सौपने के पूर्व विभाग प्रमुख ने लैपटॉप तब के कार्यालय समन्वयक (रेसिडेंट अफसर) को देकर पावती प्राप्त करली। ताकि सनद रहे और वक्त पर काम आवे।

अगले ही दिन निवृतमान विभाग प्रमुख हड़बड़ी दिखाते हुए जो लैपटॉप वापस किया था उसी  लैपटॉप की आवश्यकता बताते हुए उक्त लैपटॉप को अपने साथ ले गये एवं  कुछ समय पश्चात वापस कर देने के वादा  उपस्थित स्टाफ के सामने किया,  जिनमे मै भी एक था। वे हम सब के  समक्ष लैपटॉप को  लेकर  कार्यालय से चले गये।

चंद दिनों बाद जब नये विभाग प्रमुख द्वारा कार्यग्रहण कर लिया गया तो एक लैपटॉप को नये विभाग प्रमुख को देने की चर्चा हुई पर अचानक उस दिन लैपटॉप की गिनती का हिसाब किताब लगाया गया तो रेसिडेंट अफसर ने  एक लैपटॉप कम पाया। रेकॉर्ड के मिलान और पिछले दिनों के घटनाक्रम को स्मरण करने पर ज्ञात हुआ कि उक्त लैपटॉप तो निवृतमान प्रमुख आवश्यक कार्य हेतु ले गये थे। जब दूरभाष पर पिछले विभाग प्रमुख से चर्चा की गई जो उस समय तक नई पदस्थपना पर जॉइन कर अन्यत्र स्थान पर जा चुके थे। उन्होने बताया कि वह तो उक्त लैपटॉप कार्यालय मे वापस दे आये थे। काफी छानबीन, लैपटॉप के नंबर आदि मिलान के बाद भी लैपटॉप नहीं मिला। ये खेदजनक घटना बड़ी दुःखद और शर्मसार करने बाली थी। प्रतिष्ठित पद और गरिमापूर्ण सम्मान रखने बाले कार्यालय मे स्टाफ के बीच घटी ये घटना बहुत ही अविश्वसनीय और दुर्भाग्यपूर्ण थी।

अंतिम प्रयास के तहत मैंने भी तत्कालीन विभागाध्यक्ष से  बात करने का निश्चय कर उनसे दूरभाष पर पूंछा कि लैपटॉप की वापसी वे किस स्टाफ को करके गये थे? तो उन्होने  बताया कि उस दिन, जब वे कार्यालय समय के पूर्व लैपटॉप वापस करने कार्यालय पहुंचे तो उस समय कोई स्टाफ नहीं आया था, अतः वह लैपटॉप कैबिन मे ही अपनी टेबल पर छोड़ आये थे। मैंने उनसे निवेदन कर पूंछा जब कोई भी स्टाफ कार्यालय मे नहीं था  तो आपको कार्यालय समय के दौरान कार्यालय समन्वयक या किसी अन्य स्टाफ से फोन पर बात कर लैपटॉप की वापसी सुनिश्चित करना चाहिए थी। अफसोस इस घालमेल मे लैपटॉप नहीं मिला तो नहीं ही मिला। न जाने लैपटॉप को जमीन खा गयी या आसमान निगल गया। मैंने कार्यालय की कार चलाने वाले  ड्राईवर एवं अस्थाई प्यून से भी तत्कालीन विभाग प्रमुख द्वारा लैपटॉप को कार्यालय मे छोड़े जाने की घटना का स्मरण करने को कहा तो उन्होने भी ऐसी किसी भी घटना उनके संज्ञान होने से अनभिज्ञता प्रकट की।   

बातचीत मे एक बहुत ही परोपकारी, हृदयस्पर्शी और समवेदनाओं से परिपूर्ण अजीबो गरीब  संदेश तत्कालीन विभाग प्रमुख द्वारा मुझसे  टेलीफ़ोन पर जरूर कहा, "कि खोये हुए लैपटॉप के बाबत यदि कोई अंशदान (चंदा) आपस मे स्टाफ द्वारा एकत्रित किया जाये  तो वे भी  उसमे अपना योगदान देने को तैयार है!!" लेकिन मैने तुरंत ही उनके इस प्रस्ताव पर प्रतिवाद कर विराम लगते हुए स्पष्ट कहा कि कम से कम मै, ऐसे किसी भी "चंदे" के  प्रस्ताव पर एक भी पैसे का अंशदान नहीं दूँगा। 

रेसिडेंट अफसर से मैंने उक्त प्रकरण की शिकायत प्रधान कार्यालय करने को कहा। कार्यालय समन्वयक वेहद सज्जन, शांत सौम्य और सरल व्यक्तित्व के धनी थे। खोये  लैपटॉप की पूरी कीमत देने को तत्पर थे क्योंकि उनकी सेवानिव्रत्ति निकट ही थी और वे ऐसे समय  किसी भी विवाद या झमेले मे पड़ना नहीं चाहते थे। नये प्रभारी ने इस घटना को अपने बुद्धि  चातुर्य और  विवेक पूर्ण कौशल  से मामले को शांत कैसे  सुलझाया हमे इसकी  कोई जानकारी नहीं। इस घटना को अनेकों वर्ष बीत गये लेकिन ये बात रह रह कर मन मे उठती रही  कि आखिर लैपटॉप गया तो गया कहाँ??    

विजय सहगल  

 

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

सम्भवतः लैपटॉप लौटाया ही न गया हो। जब वह कार्यालय में आया ही नहीं तो बरामद कैसे होगा और गुम कैसे होगा?

बेनामी ने कहा…

जहां तक मुझे लगता है कि तत्कालीन विभागाध्यक्ष ने लैपटॉप वापस नहीं किया और उन्होंने रेसीडेंट अफ़सर की सज्जनता का बेजा लाभ उठाने की कोशिश की ।