शुक्रवार, 15 जुलाई 2022

जमानत की एफ़डी

 

"जमानत की एफ़डी"




मै तो घटना के बारे मे भूल चुका था। पर पिछले दिनों मुझे बैंक के एक सम्मानीय ग्राहक के यहाँ एक सामाजिक कार्यक्रम मे जाना हुआ। सालों बाद उनसे एवं उनके परिवार से मिलने का मौका मिला। अति सम्मानित, उच्च पदस्थ गणमान्य सदस्यों के उक्त परिवार ने मेरा गर्म जोशी से अभिवादन कर मुलाक़ात की।

दरअसल अपनी बैंक सेवा के दौरान भोपाल  शहर मे मेरी पदस्थपना के दौरान, हमारे उक्त सम्मानीय ग्राहक का लगभग शाम पाँच बजे  मेरे पास फोन आया कि किसी अत्यंत आवश्यक कार्य हेतु बैंक की एफ़डीआर बनवाने हेतु  वे बैंक पहुँच रहे है। वे रास्ते मे ही थे। बैंक मे पहुँचते ही सामान्य  शिष्टाचार की औपचारिकता के बाद उन्होने अपने आने के उद्देश्य के बारे मे बताया। उन्होने बताया कि वे अभी कोर्ट से सीधे चले आ रहे है। उनके एक अति निकटस्थ स्वजन को जमानत के लिए पाँच लाख की एफ़डीआर जमानत के रूप मे न्यायालय मे प्रस्तुत करना है। एफ़डीआर जमा न करने के अभाव मे जेल जाने जैसे अप्रिय, अवांछित एवं कष्टकारी वेदना से गुजरने पड़ेगा। शाम के लगभग पाँच बजने को थे। स्थिति गंभीर, चिंताजनक लेकिन अत्यावश्यक थी पर चिंता ये थी कि एक तो मै यहाँ शाखा प्रमुख के पद पर पदस्थ न हो बैंक के एक नियंत्रण विभाग मे पदस्थ था जहां आम लोगो का लेन देन से कोई वास्ता  नहीं होता था। दूसरे मेरे कार्यालय के बगल मे स्थित शाखा मे  उस समय तक नगदी लेन देन का  कार्य  बंद हो चुका था गनीमत ये थी कि शाखा के पूरे दिन के कार्य की समाप्ति कम्प्युटर मे नहीं हुई थी। मैंने शाखा प्रबन्धक जी से एफ़डीआर बनाने के बारे मे चर्चा की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रबन्धक महोदय ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। जब मैंने अपने गणमान्य ग्राहक से एफ़डीआर की धनराशि के बारे मे पूंछा तो उन्होने पाँच लाख रुपए की धनराशि निकाल मेरे सामने रख दी। अब चिंता इस बात की थी कि उन्हे कैसे समझाया जाये कि शाम के पाँच बजे नगदी स्वीकार करना नामुमकिन है? क्योंकि नगदी कार्य का लेन देन हेतु निर्धारित समय 2.30 बजे से काफी देर हो चुकी थी और नगदी लेन देन की बुक्स बंद कर दी गयी थी। समय समाप्त हो चुका था?

मैंने जब उनसे पूंछा क्या उनके खाते मे पहले से ही इतनी धन राशि पड़ी है? तो उनका जबाब नकारात्मक था। लेकिन मुझे उनके परिवार के अन्य सदस्यों के बारे मे जानकारी थी जिनके खाते दूसरे शहर की हमारी अन्य शाखाओं मे थे और जिनमे इतनी राशि होना सामान्य बात थी। मैंने तुरंत ही अपने सम्मानित खातेदार से उनके भाई से संपर्क कर सहमति लेने का अनुरोध किया। सहमति मे कोई किसी भी तरह की समस्या नहीं थी पर एक औपचारिकता के नाते मैंने मोबाइल पर उनसे बात कर मौखिक सहमति प्राप्त कर ली।   आगंतुक सम्मानीय ग्राहक से मैंने स्थानीय शाखा प्रबन्धक से परिचय करा  उनको सारे घटनाक्रम से अवगत कराया। मैंने प्रबन्धक महोदय से  अंतरण द्वारा  एफ़डीआर बनाने मे सहयोग करने का निवेदन किया? प्रबन्धक महोदय का रुख सकारात्मक और सहयोगात्मक था अतः इस हेतु उन्होने अपनी सहमति दे दी। अब सबसे बड़ी समस्या थी कि जिस खाते से पाँच लाख की एफ़डीआर बननी थी उसमे ग्राहक के हस्तकक्षरित आदेश की आवश्यकता थी। पाँच लाख जैसी  बड़ी धनराशि किसी के खाते से अंतरित करने के लिए प्रबन्धक महोदय को राजी करना साधारणतया असंभव था।  मैंने उक्त शाखा प्रबन्धक महोदय से पुनः आग्रह कर अपने स्वयं के  अधिकृत हस्ताक्षर के आधार पर धनराशि दूसरी शाखा से निकाल, इस शहर मे एफ़डीआर बनाने के लिए राजी कर लिया। वास्तव मे इस क्लिष्ट बैंकिंग प्रिविष्टि करने हेतु उक्त प्रबन्धक महोदय की महानता थी और उनका मेरे प्रति विश्वास ही था जो किसी ग्राहक के मौखिक आदेश पर पाँच लाख जैसी बड़ी धनराशि के आधार पर एफ़डीआर जारी कर रहा था। इस शाखा के प्रबन्धक हमारे खाताधारक या उनके किसी भी परिवार के सदस्यों से परिचित भी न थे। मुझे प्रसन्नता थी कि सहमति पत्र के मुद्दे पर शाखा प्रमुख ने मेरे अनुरोध का सम्मान रख स्वीकार कर लिया और इस तरह एफ़डीआर दस-पंद्रह मिनिट मे जारी हो गायी।

इस तरह बैंक द्वारा अपने ग्राहक को संकट की घड़ी मे दिये गये इस योगदान ने हमारे बैंक के एक सम्मानीय ग्राहक को अप्रिय स्थिति से जूझने से बचा लिया।  

मुझे तो स्मरण भी नहीं था पर  हमारे बैंक के उक्त सम्मानीय ग्राहक,  बैंक के तत्कालीन  सहयोग को अब तक भूले नहीं थे और आज जब उन्होने अपने परिवार के समक्ष उक्त घटना की चर्चा की तो स्वतः मुझे उस दिन शाखा के प्रबन्धक और स्टाफ की याद आ गयी जिनके सहयोग के बिना शाम पाँच बजे बैंक एफ़डीआर का बनना नामुमकिन था। वास्तव मे अच्छी और त्वरित बैंक सेवा, टीम भावना के बिना नामुमकिन था। बैंक स्टाफ द्वारा ग्राहक को कठिन  समय मे किए गये उक्त सहयोग को आज बारह साल बाद भी सम्मानीय ग्राहक द्वारा पुनः स्मरण कर धन्यवाद ज्ञपित करना बैंक के स्टाफ द्वारा अपने ग्राहक को उत्तम और त्वरित बैंक सेवा का अनूठा उदाहरण था!! ये घटना  मेरे बैंक और स्टाफ के साथियों के लिये गौरव की बात थी।       

विजय सहगल

3 टिप्‍पणियां:

Ganguli ने कहा…

Nice

बेनामी ने कहा…

Bahut shandar

बेनामी ने कहा…

अपने बैंक यानी ओबीसी में आपसी विश्वास और एक-दूसरे के दिये गए लफ़्ज़ों की वकत रखने का चलन था । हम लोग इसका इस्तेमाल अक्सर अपने सम्मानित ग्राहकों के लिए करते थे ।